गुरुवार, 6 जनवरी 2011

आप पाठक आज फैसला कर ही दें कि कौन सही है और कौन गलत ??

व्‍यस्‍तता की वजह से पिछले दो महीने से मैं ब्‍लॉग जगत में काफी सक्रिय नहीं रह पा रही हूं , फिर भी न चाहते हुए भी साइंस ब्‍लॉगर एसोशिएशन के एक लेख में योगेश नाम के किसी पाठक ने अपने सवाल जबाब में उलझा दिया है। चूंकि मेरे पास समय की कमी है और आगे सवाल जबाब नहीं कर सकती , मेरी संतुष्टि के लिए आप पाठक आज फैसला कर ही दें कि कौन सही है और कौन गलत। उस पोस्‍ट में मेरी आज की टिप्‍पणी ये है ...........

योगेश जी, जैसा कि पहली टिप्‍पणी में मैने 20 दिसंबर से बाजार के सुधरने और 28 दिसंबर से 2 जनवरी के मध्‍य सेंसेक्‍स के महत्‍वपूर्ण जगह में होने के बारे में कहा था और बाजार में वैसा ही माहौल देखने को मिला , 28 दिसंबर से 2 जनवरी क्‍या , 3 जनवरी तक किसी भी दिन और किसी भी समय बाजार पिछले दिन के स्‍तर से नीचे नहीं गया , सेंसेक्‍स 673 प्‍वाइंट सुधरा। शेयर बाजार पर ग्रहों का प्रभाव स्‍वयं सिद्ध हो जाता है। पूरे महीने में कहीं भी लगातार 12 दिन तक इतने प्‍वाइंट्स का सुधार आप नहीं दिखा सकते। ताज्‍जुब है कि इसके बाद भी आप मुझसे जबाब मांग रहे हैं। मेरी पहली टिप्‍पणी ये थी ......


हां , 3 से 5 के मध्‍य भी कुछ ग्रहों की ठीक ठाक स्थिति को देखते हुए मैने बाद की टिप्‍पणी में 5 दिसंबर तक सेंसेक्‍स के मजबूत बने होने की बात करते हुए पिछली टिप्‍पणी को मिटा भी दिया था। वह योग उतना काम न कर सका , जिसका मुझे खेद भी है। पर जिस तरह विज्ञान को मानने वाले जीएसएलवी-एफ06 राकेट में एक तकनीकी खराबी आ जाने के कारण प्रक्षेपण के तत्काल बाद इस अभियान के विफल होने पर उसकी पा्रमाणिकता पर प्रश्‍न चिन्‍ह नहीं लगाएंगे , वैसे ही यदि मस्तिष्‍क पूर्वाग्रह से ग्रस्‍त न हो तो ज्‍योतिष की इस छोटी सी भूल को महत्‍व नहीं दिया जा सकता । यहां तक कि मोल तोल के इस आलेख में मैने 29 दिसंबर को मेटल सेक्‍टर और 31 दिसंबर को बैंकिंग सेक्‍टर में बढत का दावा किया था और ताज्‍जुब की बात है कि वैसा ही देखने को मिला।

रही बात 20 दिसंबर के पहले के बाजार की , जो आपकी नजर में सकारात्‍मक इसलिए लगी , क्‍यूंकि आपने 9 दिसंबर के अंत के बाजार से इसकी तुलना की , जबकि ग्रहों के हिसाब से बाजार में गिरावट 7 दिसंबर से ही शुरू हो चुकी थी । 6 दिसंबर के बाजार से 20 दिसंबर के बाजार की तुलना करें , तो बाजार कमजोर दिखेगा। दूसरी बात यह कि आप जो भी आंकडे लेकर हमारे सामने आए , वो बाजार बंद होने के समय के आंकडे थे। 7 दिसंबर से 20 दिसंबर तक शेयर बाजार दिनभर ऋणात्‍मक हुआ करता था , अधिकांश दिन अंत भी ऋणात्‍मक हुआ करता था , पर किसी किसी दिन शेयर के सस्‍ते होने के कारण अंत में कुछ खरीदारी हो जाने से बाजार का स्‍तर बढ जाया करता था , पर 20 दिसंबर तक वैसी ही अनिश्चितता बरकरार थी , जैसा इधर दो तीन दिनों से दिखाई दे रही है। आप शेयर बाजार से अच्‍छी तरह जुडे किसी भी सज्‍जन से बात करके देख लें।

अंत में एक खास बात यह कहना चाहूंगी कि किसी व्‍यक्ति के स्‍वास्‍थ्‍य में आयी गडबडी को देखने के लिए एक डॉक्‍टर शरीर का तापमान , हृदय की धडकन , रक्‍त चाप या अन्‍य तरह के आंकडों को देखता है , पर एक अच्‍छे मनोचिकित्‍सक का इन आंकडों से अधिक संबंध नहीं होता , वह किसी मरीज के दिल से जुडकर ही उसका इलाज कर सकता है। ज्‍योतिषी का कार्यक्षेत्र भी एक मनोचिकित्‍सक की हर क्षेत्र के लोगों के मनोभाव को समझना और उसका समाधान निकालना है । करोडों का बैलेंस रखनेवाला व्‍यक्ति भी धन की कमी महसूस कर सकता है और सामान्‍य खाते पीते घर का व्‍यक्ति भी धन के मामले में सुखी हो सकता है। किसी परीक्षा को थर्ड डिवीजन पास करनेवाला बच्‍चा भी दोस्‍तों को पार्टी दे सकता है और फर्स्‍ट डिवीजन पास करनेवाला व्‍यक्ति भी प्रतिशत कम आने को सोंचकर मातम मना सकता है। इसलिए ज्‍योतिष को इस प्रकार के बेमतलब सवालों में मत उलझाइए।

11 टिप्‍पणियां:

dhiru singh {धीरू सिंह} ने कहा…

तर्क वितर्क तो सम्झ आता है लेकिन कुतर्क पर ध्यान ना दे यही ठीक रहेगा

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

आपके लेख ही आपके न्यायाधीश हैं..

शिवम् मिश्रा ने कहा…

धीरू भाई से सहमत हूँ ... आप अपना काम करती रहिये ! शुभकामनाएं !

शिवम् मिश्रा ने कहा…


बेहतरीन पोस्ट लेखन के लिए बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है - पधारें - बूझो तो जाने - ठंड बढ़ी या ग़रीबी - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा

ललित शर्मा ने कहा…

ज्योतिष गणना पर आधारित विज्ञान है। अगर सही समय और सही गणना हो जाए तो फ़लित सही बैठता है।
कभी कभी मानवीय त्रुटि से या समय सही न होने से चूक भी हो जाती है।

आपके काम को कम करके नहीं आंका जा सकता। बहुत मेहनत और समय देना पड़ता है जब कहीं जाकर किसी परिणाम पर पहुंचा जाता है।

cmpershad ने कहा…

सीधी सी बात है.... जिसे मानना है मानें और जिसे न मानना है न मानें.... इसमें बहस कैसी? आप अपना काम कीजिए, जिसे बोलना है बोलता रहे :)

Mithilesh dubey ने कहा…

तर्क वितर्क तो सम्झ आता है लेकिन कुतर्क पर ध्यान ना दे यही ठीक रहेगा

एस.एम.मासूम ने कहा…

ज्‍योतिषी का कार्यक्षेत्र भी एक मनोचिकित्‍सक की हर क्षेत्र के लोगों के मनोभाव को समझना और उसका समाधान निकालना है ।

सही बात है. विचारों के अंतर पे अधिक ध्यान नहीं देता चाइये..

निर्मला कपिला ने कहा…

संगीता जी धीरू भाई जी ने सही कहा है} आप ऐसे लोगों के पीछे अपनी ऊर्जा क्योख खराब करती हैं हम मानते हैं ज्योतिश एक विद्द्या है जिसे हमारे रिशी मुनियों ने दैव्य दृ्षती से बनाया है आज भी वो गनना और वो गणित उतना ही महत्वपूर्ण और सही है जितना तब था। ये सही है कि इस विद्द्या को कुछ स्वार्थी तत्वों न्र जादू -टोने आदि से जोड कर बदनाम कर दिया है लेकिन इसका ये कतई अर्थ नही कि ये वैग्यानिक विधा ही है। आज भी ग्रहों की चाल उतनी ही है जितनी हमारे रिशी मुनिओं ने बताई थी। आप अपने काम मे लगी रहिये बस। सुनो सब की करो मन की। शुभकामनायें।

P.N. Subramanian ने कहा…

फ़ालतू बहश में पड़ कर अपनी ऊर्जा को नष्ट न होने दें.

ललित शर्मा ने कहा…

संगीता जी ऐसे लोगों की बातों पर ध्यान मत दीजिए।

"यस्य नास्ति स्वयं प्रज्ञा शास्त्रं तस्य करोति किम्।
लोचनाभ्याम विहीनस्य दर्पणा: किम करिष्यति॥