रविवार, 30 जनवरी 2011

मेष लग्‍नवालों के विभिन्‍न संदर्भों का आपस मे संबंध ....

कल के लेख से यह स्‍पष्‍ट हुआ कि आसमान के 0 डिग्री से 30 डिग्री तक के भाग का नामकरण मेष राशि के रूप में किया गया है। जिस बच्‍चे के जन्‍म के समय यह भाग आसमान के पूर्वी क्षितिज में उदित होता दिखाई देता है , उस बच्‍चे का लग्‍न मेष माना जाता है। मेष लग्‍न की कुंडली के अनुसार मन का स्‍वामी चंद्र चतुर्थ भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के मातृ पक्ष , हर प्रकार की संपत्ति और स्‍थायित्‍व का प्रतिनिधित्‍व करता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के मजबूत रहने पर माता पक्ष , हर प्रकार की संपत्ति की मजबूत स्थिति से मेष लग्‍न के जातक का मन खुश और जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के कमजोर रहने पर इन पक्षों की कमजोर स्थिति से इनका मन आहत होता है।

मेष लग्‍न की कुंडली के अनुसार समस्‍त जगत में चमक बिखेरने वाला सूर्य पंचम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के बुद्धि , ज्ञान और संतान का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए अपने नाम यश को फैलाने के लिए मेष लग्‍न के जातक अपने बुद्धि ज्ञान या संतान पक्ष का सहयोग प्राप्‍त करना चाहते हैं। नाम यश फैलाने के लिए इनका सर्वाधिक ध्‍यान अपनी बुद्धि , ज्ञान और संतान की स्थिति को मजबूती देने में बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के मजबूत रहने पर बुद्धि , ज्ञान और संतान की मजबूती से इनकी कीर्ति फैलती और जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के कमजोर रहने पर इनकी कमजोरी से इनकी कीर्ति घटती है।

मेष लग्‍न की कुंडली के अनुसार मंगल प्रथम और अष्‍टम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के शरीर और जीवन का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के शरीर , व्‍यक्तित्‍व को मजबूती देने में जीवनशैली की महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के मजबूत रहने पर स्‍वास्‍थ्‍य अच्‍छा होता है , जीवनशैली सुखद दिखाई पडती है , विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के कमजोर रहने पर जीवनशैली कष्‍टकर बनी होती है, स्‍वास्‍थ्‍य की कमजोरी नजर आती है।

मेष लग्‍न की कुंडली के अनुसार शुक्र द्वितीय और सप्‍तम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के धन कोष तथा घर गृहस्‍थी का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए धन कोष का मेष लग्‍न के जातक के घर गृहस्‍थी से गहरा संबंध होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के कमजोर रहने पर धन कोष की स्थिति कमजोर होकर मेष लग्‍नवालों के घर गृहस्‍थी का वातावरण गडबड बनाते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के मजबूत रहने पर धन कोष की स्थिति मजूबत होकर घर गृहस्‍थी का वातावरण बढिया बनाते है।

मेष लग्‍न की कुंडली के अनुसार बुध तृतीय और षष्‍ठ भाव का स्‍वामी है और यह जातक के भाई बंधु , झंझट तथा प्रभाव से संबंधित मामलों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों का इनमें आपस में सहसंबंध होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के मजबूत रहने पर इनके झंझटों को सुलझाने और प्रभाव की बढत में भाई , बंधु बांधव की भमिका अहम होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के मजबूत रहने पर प्रभाव की मजबूती से बंधु बांधव सहयोगियों की कमी नहीं होती , जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के कमजोर रहने पर प्रभाव की कमजोरी होने पर भाई बहन बंधु बांधव किनारा कर लेते हैं।

मेष लग्‍न की कुंडली के अनुसार बृहस्‍पति नवम और द्वादश भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के भाग्‍य , धर्म , खर्च और बाहरी संदर्भ का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मेष लग्‍न के जातकों के भाग्‍य से खर्च और खर्च से भाग्‍य प्रभावित होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के मजबूत रहने पर भाग्‍य की प्रचुरता से खर्च शक्ति और बाह्य संदर्भों में मजबूती आती है , देश विदेश घूमने फिरने में दिलचस्‍पी बनती है तथा खर्च शक्ति और बाह्य संदर्भों की मजबूती से भाग्‍य मजबूत होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के कमजोर रहने पर भाग्‍य की कमी खर्च शक्ति और बाहरी संदर्भों को कमजोर तथा खर्चशक्ति की की कमजोरी भाग्‍य को कमजोर बनाती है।

मेष लग्‍न की कुंडली के अनुसार शनि दशम और एकादश भाव का स्‍वामी होता है यानि यह जातक के पिता पक्ष , प्रतिष्‍ठा पक्ष और हर प्रकार के लाभ का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍नवाले जातकों के पिता पक्ष , सामाजिक , राजनीतिक स्थिति का लाभ से संबंध बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के मजबूत रहने पर मेष लग्‍नवाले लाभ की मजबूती से पद प्रतिष्‍ठा की मजबूती महसूस करते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के कमजोर रहने पर ये लाभ की कमजोरी से सामाजिक राजनीतिक मामलों की कमजोरी महसूस होती रहती है। इसी प्रकार पिता और सामाजिकता के मजबूत होने से लाभ की मजबूती तथा उनके कमजोर होने से लाभ की कमजोरी झेलनी पडती है ।

3 टिप्‍पणियां:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

इसे सहेज कर रखते हैं..

राज भाटिय़ा ने कहा…

वाह जी एक बहुत सुंदर जानकारी धन्यवाद

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

बहुत सुंदर जानकारी.