मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011

कन्‍या लग्‍नवालों के सभी संदर्भों का सहसंबंध ...


आसमान के 150 डिग्री से 180 डिग्री तक के भाग का नामकरण कन्‍या राशि  के रूप में किया गया है। जिस बच्‍चे के जन्‍म के समय यह भाग आसमान के पूर्वी क्षितिज में उदित होता दिखाई देता है , उस बच्‍चे का लग्‍न कन्‍या माना जाता है। कन्‍या लग्‍न की कुंडली के अनुसार मन का स्‍वामी चंद्र एकादश भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के लाभ , लक्ष्‍य और मंजिल आदि का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए कन्‍या लग्‍न के जातकों के मन को पूर्ण तौर पर संतुष्‍ट करने वाले संदर्भ ये ही होते हैं। जन्‍मकुंडली या गोचर में चंद्र के मजबूत रहने पर लाभ प्राप्ति की मजबूत स्थिति से कन्‍या लग्‍न के जातक का मन खुश और जन्‍मकुंडली या गोचर में चंद्र के कमजोर रहने पर इनकी कमजोर स्थिति से इनका मन आहत होता है।

कन्‍या लग्‍न की कुंडली के अनुसार समस्‍त जगत में चमक बिखेरने वाला सूर्य द्वादश भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के खर्च और बाहरी संदर्भों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए अपने नाम यश को फैलाने के लिए कन्‍या लग्‍न के जातक अपनी खर्च शक्ति को मजबूत बनाने पर जोर देते हैं। नाम यश फैलाने के लिए ये बाह्य संदर्भों को मजबूत बनाने में दिलचस्‍पी लेते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के मजबूत रहने से खर्चशक्ति और बाह्य संदर्भों की मजबूती से इनकी कीर्ति फैलती और जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के कमजोर रहने इनकी कमी से इनकी कीर्ति घटती है। 

कन्‍या लग्‍न की कुंडली के अनुसार मंगल चतुर्थ और एकादश भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के भाई बहन , बंधु बांधव और जीवनशैली का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के भाई बहन , बंधु बांधवों का इनकी जीवनशैली से सहसंबंध होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के मजबूत रहने पर इन्‍हें भाई बंधुओं का सहयोग मिलता है , जिससे जीवनशैली मजबूत बनी होती है। विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के कमजोर रहने पर भाई , बहन , बंधु बांधवों के सहयोग न मिलने या उनसे संबंधित तनाव के कारण जीवनशैली बहुत कमजोर दिखती है। 

कन्‍या लग्‍न की कुंडली के अनुसार शुक्र द्वितीय और नवम् भाव का स्‍वामी है और यह जातक के भाग्‍य , धन आदि से संबंधित मामलों का  प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए किसी प्रकार के संयोग या दुर्योग का इनके धन से सहसंबंध होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के मजबूत रहने पर कन्‍या लग्‍नवालों के धनविषयक मामलों में भाग्‍य मददगार सिद्ध होते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के कमजोर रहने पर भाग्‍य की गडबडी के कारण जीवन में आर्थिक मामलों में बडी गडबडी देखने को मिलती है।

कन्‍या लग्‍न की कुंडली के अनुसार बुध प्रथम और दशम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के स्‍वास्‍थ्‍य , व्‍यक्तित्‍व , आत्‍मविश्‍वास , पिता , पद प्रतिष्‍ठा , सामाजिक राजनीतिक मामलों का  प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के आत्‍मविश्‍वास बढाने या घटाने में पिता और कैरियर की महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के मजबूत रहने पर ऐसे जातक अपने पिता की मजबूत स्थिति के बलबूते मजबूत आत्‍मविश्‍वास तथा इस मजबूत आत्‍‍मविश्‍वास के बल पर कैरियर को मजबूती देने में समर्थ होते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के कमजोर रहने पर कन्‍या लग्‍नवाले पिता की कमजोरी के कारण आत्‍विश्‍वास को कमजोर पाते हैं , स्‍वास्‍थ्‍य की गडबडी और कार्यस्‍थल पर मनोनुकूल वातावरण का अभाव भी इन्‍हें प्राप्‍त होता है।

कन्‍या लग्‍न की कुंडली के अनुसार बृहस्‍पति चतुर्थ और सप्‍तम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के माता , हर प्रकार की संपत्ति , घर गृहस्‍थी का वातावरण का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए कन्‍या लग्‍न के जातकों के मातृ पक्ष या हर प्रकार की संपत्ति का उनके घरगृहस्‍थी से संबंध बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के मजबूत होने पर कन्‍या लग्‍न के जातकों को मातृ पक्ष तथा हर प्रकार की संपत्ति का सुख प्राप्‍त होता है , जिससे घर गृहस्‍थी का वातावरण मजबूत बना होता है। इसके विपरीत , जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के कमजोर होने पर कन्‍या लग्‍नवाले जातकों को मातृ पक्ष , हर प्रकार की संपत्ति और स्‍थायित्‍व की कमजोरी देखने को मिलती है , जिससे घर गृहस्‍थी की स्थिति कमजोर महसूस होती है।

कन्‍या लग्‍न की कुंडली के अनुसार शनि पंचम और षष्‍ठ भाव का स्‍वामी होता है यानि यह जातक के बुद्धि , ज्ञान , संतान पक्ष और रोग , द्वण , शत्रु जैसे झंझट का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍नवाले जातकों के अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई और अन्‍य मामलों में झंझट आने की बहुत संभावना बन जाती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों की खुद की सूझ बूझ अच्‍छी होती है , संतान पक्ष बहुत मजबूत स्थिति में होता है , जो प्रभाव को बढाने में सहायक सिद्ध होता है। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के कमजोर रहने पर कन्‍या लग्‍नवाले अपनी या बच्‍चों की पढाई लिखाई को लेकर बडा झंझट प्राप्‍त करते हैं।

4 टिप्‍पणियां:

vinay ने कहा…

आपका यह प्रयास अच्छा लगा,आप सराहानिय काम कर रहीं है ।

ZEAL ने कहा…

संगीता जी , बहुत उम्दा जानकारी दी आपने ।
आभार ।

निर्मला कपिला ने कहा…

ध्न्यवाद सुनीता जी। बहुत अच्छी जानकारी है।

Devanshu Kashyap ने कहा…

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