शनिवार, 12 फ़रवरी 2011

वृश्चिक लग्‍नवालों के विभिन्‍न संदर्भों का आपस में संबंध ...


आसमान के 210 डिग्री से 240 डिग्री तक के भाग का नामकरण ...वृश्चिक राशि  के रूप में किया गया है। जिस बच्‍चे के जन्‍म के समय यह भाग आसमान के पूर्वी क्षितिज में उदित होता दिखाई देता है , उस बच्‍चे का लग्‍न वृश्चिक माना जाता है। वृश्चिक लग्‍न की कुंडली के अनुसार मन का स्‍वामी चंद्र नवम् भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के भाग्‍य , धर्म आदि मामलों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए वृश्चिक लग्‍न के जातकों के मन को पूर्ण तौर पर संतुष्‍ट करने वाले संदर्भ ये ही होते हैं। जन्‍मकुंडली या गोचर में चंद्र के मजबूत रहने पर ऐसे जातक बहुत भाग्‍यशाली होते हैं , संयोग से इनका काम होता रहता है।भाग्‍य का भरपूर सुख मिलने से  तुला लग्‍न के जातक का मन खुश और जन्‍मकुंडली या गोचर में चंद्र के कमजोर रहने पर इनकी कमजोर स्थिति से इनका मन आहत होता है।

वृश्चिक लग्‍न की कुंडली के अनुसार समस्‍त जगत में चमक बिखेरने वाला सूर्य दशम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के पिता , पद प्रतिष्‍ठा और सामाजिक राजनीतिक स्थिति का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए अपने नाम यश को फैलाने के लिए वृश्चिक लग्‍न के जातक अपने पद प्रतिष्‍ठा को मजबूत बनाने पर जोर देते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के मजबूत रहने से इनका जन्‍म प्रतिष्ठित परिवार में होता है , इन्‍हें पिता का सुख प्राप्‍त होता है ,  पद प्रतिष्‍ठा की मजबूती से इनकी कीर्ति फैलती और जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के कमजोर रहने इन सबकी कमी से इनकी कीर्ति घटती है। 

वृश्चिक लग्‍न की कुंडली के अनुसार मंगल प्रथम और षष्‍ठ भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के शरीर , व्‍यक्तित्‍व , आत्‍मविश्‍वास और रोग , ऋण , शत्रु जैसे झंझटों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के  स्‍वास्‍थ्‍य में झंझट बने होने की संभावना रहती है ।  जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के मजबूत रहने पर इनका स्‍वास्‍थ्‍य अच्‍छा होता है , जीवन में अधिक झंझट नहीं आते , झंझओं से लडने की शक्ति मौजूद होती है , जिससे प्रभावशाली माने जाते हैं। विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के कमजोर रहने पर स्‍वास्‍थ्‍य की कमजोरी आत्‍मविश्‍वास को कमजोर बनाती है, झंझटों से लडने की शक्ति कम होती है तथा प्रभाव की कमी महसूस करते हैं।

वृश्चिक लग्‍न की कुंडली के अनुसार शुक्र सप्‍तम और दशम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के घर गृहस्‍थी , खर्च और बाह्य संदर्भों आदि का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इनके घर गृहस्‍थी के वातावरण में खर्च का बहुत महत्‍व होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के मजबूत रहने पर वृश्चिक लग्‍नवालों को खर्चशक्ति की प्रचुरता प्राप्‍त होती है , इस कारण इनकी घर गृहस्‍थी बहुत आरामदायक होती है। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के कमजोर रहने पर खर्चशक्ति की कमी के कारण वृश्चिक लग्‍नवालों के घरेलू जीवन में समस्‍याएं देखने को मिलती हैं।

वृश्चिक लग्‍न की कुंडली के अनुसार बुध अष्‍टम और दशम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के जीवनशैली और लाभ का  प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के जीवनशैली को मजबूती देने में लाभ की तथा लाभ को मजबूत बनाने में जीवनशैली  की महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों का लाभ मजबूत होता है , जिससे जीवनशैली सुखद बनी होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के कमजोर रहने पर वृश्चिक लग्‍नवाले लाभ की कमी के कारण अपनी जीवनशैली को बहुत कमजोर पाते हैं। 

वृश्चिक लग्‍न की कुंडली के अनुसार बृहस्‍पति द्वितीय और पंचम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के धन , कोष , परिवार , बुद्धि , ज्ञान और संतान का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए वृश्चिक लग्‍न के जातकों के अपनी या संतान की पढाई लिखाई में धन की महत्‍वपूर्ण भूमिका होती  है।  जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के मजबूत होने पर तुला लग्‍न के जातकों की धन की स्थिति  मजबूत होती है , जिससे अपना या संतान पक्ष का बौद्धिक विकास सुखद ढंग से हो पाता है। इसके विपरीत , जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के कमजोर होने पर वृश्चिक लग्‍नवाले जातकों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है , जिसका बुरा प्रभाव उनकी खुद या संतान पक्ष के बौद्धिक विकास पर पउता है। 

वृश्चिक लग्‍न की कुंडली के अनुसार शनि तृतीय और चतुर्थ भाव का स्‍वामी होता है यानि यह जातक के भ्रातृ पक्ष , मातृ पक्ष , हर प्रकार की संपत्ति , स्‍थायित्‍व मामलों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍नवाले जातकों के भाई , बंधुओं के कारण स्‍थायित्‍व के मजबूत या कमजोर होने की संभावना बनती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों को भाई बंधु बांधव से सुख प्राप्‍त होता है, हर प्रकार की संपत्ति की स्थिति मजबूत होती है। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के कमजोर रहने पर वृश्चिक लग्‍नवालों के भाई बंधु में संपत्ति को लेकर विवाद बनने की संभावना बनती है। मातृ पक्ष के सुख में भी कमी देखने को मिलती है।

3 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

जानकारी का आभार.

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

अच्छी जानकारी,आभार.

Sudhakar ने कहा…

मुझे आपके ज्योतिष के वैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुतीकरण ने काफ़ी प्रभावित किया है । मैं एक हिन्दी लेखक हूँ और एक प्रशासक भी । दोनों क्षेत्रों मे आगामी 05 वर्षों मे मेरी उपलबधियां कैसी संभावित हैं ? सुधाकर अदीब ।