बुधवार, 16 फ़रवरी 2011

मकर लग्‍नवालों के सभी संदर्भों का आपस में सहसंबंध ....

आसमान के 270 डिग्री से 300 डिग्री तक के भाग का नामकरण मकर राशि  के रूप में किया गया है। जिस बच्‍चे के जन्‍म के समय यह भाग आसमान के पूर्वी क्षितिज में उदित होता दिखाई देता है , उस बच्‍चे का लग्‍न मकर माना जाता है। मकर लग्‍न की कुंडली के अनुसार मन का स्‍वामी चंद्र सप्‍तम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के घर गृहस्थी का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मकर लग्‍न के जातकों के मन को पूर्ण तौर पर संतुष्‍ट करने वाले संदर्भ घर गृहस्‍थी ही होते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों की घर गृहस्‍थी का माहौल सुखद होता है।जबकि विपरीत स्थिति हो तो घर गृहस्‍थी का माहौल कष्‍टकर बना होता है।

मकर लग्‍न की कुंडली के अनुसार समस्‍त जगत में चमक बिखेरने वाला सूर्य अष्‍टम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के रूटीन और जीवनशैली का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए अपने नाम यश को फैलाने के लिए मकर लग्‍न के जातक जीवनशैली को मजबूत बनाए रखने में रूचि लेते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के मजबूत रहने से इनकी जीवनशैली बहुत ही उत्‍तम कोटि की और अनुकरणीय होती है , जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के कमजोर रहने इन्‍हें अपनी जीवनशैली से कष्‍टकर समझौता करने को बाध्‍य होना पडता है।

मकर लग्‍न की कुंडली के अनुसार मंगल चतुर्थ और एकादश भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के मातृ पक्ष , हर प्रकार की संपत्ति , स्‍थायित्‍व और लाभ का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के लाभ में मातृ पक्ष , किसी प्रकार की संपत्ति या स्‍थायित्‍व का सहसंबंध बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के मजबूत रहने पर माता से इनके संबंध अच्‍छे बने होते हैं , ये हर प्रकार की संपत्ति और स्‍थायित्‍व का सुख प्राप्‍त करते हैं। विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के कमजोर रहने पर मातृ पक्ष से संबंधित समस्‍याएं बनी होती हैं , हर प्रकार की संपत्ति कष्‍ट का कारण बनती हैं और स्‍थायित्‍व कमजोर बने होने से लाभ में बाधाएं आती हैं।

मकर लग्‍न की कुंडली के अनुसार शुक्र पंचम और दशम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के बुद्धि , ज्ञान , संतान , पिता और सामाजिक राजनीतिक स्थिति आदि का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मकर लग्‍नवालों के प्रतिष्‍ठा पक्ष को मजबूती देने में अपने बुद्धि , ज्ञान या संतान की बडी भूमिका होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के मजबूत रहने पर मकर लग्‍नवाले अपने बुद्धि ज्ञान से कैरियर को मजबूती देते हैं । इनके सामाजिक राजनीतिक महत्‍व को बढाने में संतान भी सहयोगी सिद्ध होते हैं , पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र कमजोर हो तो बुद्धि ज्ञान की कमी से अपना कैरियर तो बाधित होता ही है , संतान पक्ष के काम भी मनोनुकूल ढंग से नहीं हो पाते।

मकर लग्‍न की कुंडली के अनुसार बुध षष्‍ठ और नवम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के भाग्‍य और झंझट का  प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के झंझट को दूर करने में भाग्‍य की बडी भूमिका होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों के झंझटों को हल करने में भाग्‍य बहुत बडी भूमिका निभाता है , किसी संयोग से उनके काम बन जाते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के कमजोर रहने पर दुर्भाग्‍य की भूमिका होने से मकर लग्‍नवालों के झंझट में बडी बडी समस्‍याएं आती हैं।

मकर लग्‍न की कुंडली के अनुसार बृहस्‍पति तृतीय और द्वादश भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के भाई , बहन , बंधु , बांधव , खर्च और बाहरी संदर्भों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मकर लग्‍न के जातकों के खर्च के साथ भाई बहन , बंधु बांधवों का संबंध बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के मजबूत होने पर मकर लग्‍न के जातकों की खर्च शक्ति मजबूत होती है , जिसका फायदा इनके भाई , बहन , बंधु बांधव उठाते हैं। इन्‍हें देशाटन का भी बडा शौक होता है। इसके विपरीत , जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के कमजोर होने पर मकर लग्‍नवाले जातकों की खर्च शक्ति कमजोर होती है , जिसके कारण उन्‍हें भाई , बहन , बंधु बांधवों का सहयोग लेने की आवश्‍यकता होती है। इनका बाहरी संदर्भ भी बहुत कमजोर होता है।

मकर लग्‍न की कुंडली के अनुसार शनि प्रथम और द्वितीय भाव का स्‍वामी होता है यानि यह जातक के शरीर , व्‍यक्तित्‍व , धन , कोष आदि मामलों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍नवाले जातकों के आत्‍मविश्‍वास को बढाने या घटाने में धन की बडी भूमिका होती है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों का स्‍वास्‍थ्‍य अच्‍छा रहता है , धन का अनायास आगम होता रहता है , जिससे आत्‍मविश्‍वास में बढोत्‍तरी होती है। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के कमजोर रहने पर मकर लग्‍नवालों के स्‍वास्‍थ्‍य में कमजोरी बनी रहती है , धन की कमी होती है , जिससे आत्‍मविश्‍वास कमजोर होता है।

4 टिप्‍पणियां:

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

मैं भी मकरी हूं।
उम्दा जानकारी।

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

अच्छी जानकारी,आपको धन्यवाद.

राज भाटिय़ा ने कहा…

अच्छी जानकारी,धन्यवाद.

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत अच्छी जानकारी । धन्यवाद।