शनिवार, 19 फ़रवरी 2011

मीन लग्‍नवालों के विभिन्‍न संदर्भों का आपस में सहसंबंध ...


आसमान के 3...30 डिग्री से 360 डिग्री तक के भाग का नामकरण मीन राशि  के रूप में किया गया है। जिस बच्‍चे के जन्‍म के समय यह भाग आसमान के पूर्वी क्षितिज में उदित होता दिखाई देता है , उस बच्‍चे का लग्‍न मीन माना जाता है। मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार मन का स्‍वामी चंद्र पंचम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के बुद्धि , ज्ञान , संतान पक्ष का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मीन लग्‍न के जातकों के मन को पूर्ण तौर पर प्रभावित करने वाले संदर्भ यही होते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों की बुद्धि तीक्ष्‍ण होती है  , इन्‍हें संतान पक्ष का भरपूर सुख प्राप्‍त होता है , जो मन को खुश रखता है। जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में चंद्र के कमजोर रहने पर बुद्धि और सूझ बूझ की कमी और संतान पक्ष के सुख में कमी इनके मन को दुखी करते हैं।

मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार समस्‍त जगत में चमक बिखेरने वाला सूर्य षष्‍ठ भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के रोग , ऋण , शत्रु या अन्‍य प्रकार के झंझट का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए अपने नाम यश को फैलाने के लिए मीन लग्‍न के जातक किसी प्रकार के झंझट को हल कर प्रभाव बढाने में विशेष दिलचस्‍पी रखते हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के मजबूत रहने से इनके झंझट को हल करने का तरीका उत्‍तम कोटि का और अनुकरणीय होता है , जबकि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में सूर्य के कमजोर रहने इन्‍हें हर प्रकार के झंझट से कष्‍टकर समझौता करने को बाध्‍य होना पडता है।

मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार मंगल द्वितीय और नवम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के धन , कोष और भाग्‍य का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के धन की स्थिति को मजबूत बनाने में भाग्‍य की बडी भूमिका होती है , किसी प्रकार के संयोग से संसाधन प्राप्‍त करते तथा किसी दुर्योग से संसाधनहीन होते है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के मजबूत रहने पर भाग्‍य के साथ देने से इनका धन कोष मजबूत बना रहता हैं। विपरीत स्थिति में यानि जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में मंगल के कमजोर रहने पर भाग्‍य की कमजोरी धन कोष को कमजोर बनाती है।

मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार शुक्र तृतीय और अष्‍टम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के भाई , बहन , बंधु , बांधव और जीवनशैली का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मीन लग्‍नवालों की जीवनशैली का भाई बहन बंधु बांधव का संबंध बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र के मजबूत रहने पर मीन लग्‍नवाले भाई , बहन , बंधु और बांधव का सुख प्राप्‍त करते हैं , उनकी जीवनशैली को सुखमय बनाने में भाई बंधु की भमिका होती है। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शुक्र कमजोर हो तो भाई बहन बंधु बांधव से संबंधित जबाबदेहियों के कारण उनकी जीवनशैली कमजोर दिखाई पडती है,  इनसे सहयोग की कमी से तनावग्रस्‍त रहते हैं।

मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार बुध चतुर्थ और सप्‍तम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के मातृ पक्ष , हर प्रकार की संपत्ति और घर गृहस्‍थी का  प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातक के घर गृहस्‍थी का उनकी माता या हर प्रकार की संपत्ति से संबंध बना होता हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों को मातृ पक्ष का भरपूर सहयोग मिलता है , हर प्रकार की संपत्ति इनके घर गृहस्‍थी के वातावरण को सुखमय बनाती हैं। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बुध के कमजोर रहने पर जातक का मातृ पक्ष के विचारों से तालमेल नहीं होता , हर प्रकार की छोटी बडी संपत्ति कष्‍ट का कारण बनकर घर गृहस्‍थी के माहौल को बिगाडती है।

मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार बृहस्‍पति प्रथम और दशम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के स्‍वास्‍थ्‍य , व्‍यक्तित्‍व , पिता पक्ष , पद प्रतिष्‍ठा और सामाजिक राजनीतिक वातावरण का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए मीन लग्‍न के जातकों के आत्‍मविश्‍वास को बढाने घटाने में पिता की भूमिका बनती है , उनके व्‍यक्तित्‍व का समाज में एक पहचान बना होता है। जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के मजबूत होने पर मीन लग्‍न के जातक को पिता का भरपूर सुख प्राप्‍त होता है , प्रकृति की ओर से स्‍वस्‍थ शरीर प्राप्‍त करते हैं , अपने आत्‍मविश्‍वास से समाज में अच्‍छी पहचान बनती है। इसके विपरीत , जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में बृहस्‍पति के कमजोर होने पर मीन लग्‍नवाले जातक को पिता का सहयोग नहीं मिलता , स्‍वास्‍‍थ्‍य की गडबडी भी आत्‍मविश्‍वास को कमजोर बनाती है और उनकी पहचान में बाधा उपस्थित करती है।

मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार शनि एकादश और द्वादश भाव का स्‍वामी होता है यानि यह जातक के लाभ , खर्च और बाहरी संदर्भों आदि मामलों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍नवाले जातकों के लाभ और खर्च में बडा संबंध होता है । जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के मजबूत रहने पर ऐसे जातकों को नियमित लाभ होता रहता है , जिससे खर्च की दिक्‍कत नहीं आती , हर प्रकार के संबंधों का निर्वाह भी ये आसानी से कर लेते हैं। पर जन्‍मकुंडली , दशाकाल या गोचर में शनि के कमजोर रहने पर मीन लग्‍नवालों के लाभ में कमी खर्चशक्ति को कमजोर बनाती है , बाह्य संदर्भों को कमजोर करने में सहायक होती है।

11 टिप्‍पणियां:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

मुझे आपकी मेहनत से ईर्ष्या होने लगती है.. हर बार जब मैं इतना बढ़िया लेख पढ़ता हूं...

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी जानकारी मिली।

वीना ने कहा…

कन्या लग्न वाली पोस्ट (8 फरवरी की) आज पढ़ी
बहुत दिनों बाद यहां आई...आप भी काफी समय से हमारे ब्लॉग पर नहीं आई।
अब ज्यादा देर नहीं होगी। ब्लॉग फॉलो कर लिया है..आपकी पोस्ट मिल जाएगी...
आप भी जरूर आइए...

राज भाटिय़ा ने कहा…

वाह जी कितनी मेहनत करनी पडती हे आप को, ओर बहुत आभ्यास भी, बहुत सुंदर जानकारी, धन्यवाद

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपके सारे लेख संग्रहणीय हैं ...बहुत विस्तृत व्याख्या कर समझाने का प्रयत्न निश्चय ही सराहनीय है ..

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

अच्छी जानकारी,आभार.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

उपयोगी जानकारी!

आशा ने कहा…

मुझे आपकी जानकारी अच्छी लगती है |कभी मेरे ब्लॉग पर आकार अनुग्रहीत करें |
आशा

amit-nivedita ने कहा…

very detailed analysis.....good one...

manish ने कहा…

आपकी टिपण्णी अच्छी लगी. आपसे आग्रह करूँगा कि आपने लेखों में अस्ट्रोनोमी से सम्बंधित नयी जानकारियों को भी शामिल करें. ऐसा करना वैज्न्यानिक तथ्यों से परदा हटाने के बराबर है. लोगों को प्रक्र्र्तिक घटनाओं के बारे में अच्छी समझ आएगी.

डॉ. दलसिंगार यादव ने कहा…

आपकी टिप्पणी सट्टेबाज़ पढ़कर तो अवश्य ही लाभान्वित होंगे।