सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

कुंभ लग्‍न की कुंडली भारतीयों के जीवनशैली का प्रतिनिधित्‍व करती है !!

आजादी मिलने के वक्‍त की गंहस्थिति पर ध्‍यान दिया जाए तो भारतवर्ष की जन्‍मकुंडली भले ही वृषभ लग्न और कर्क राशि की बनें और उसके अनुसार सभी ज्‍योतिषी भारतवर्ष के बारे में भविष्‍यवाणी करने को बाध्‍य हों ,पर गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' की मान्‍यता है कि भारत के अलग होने के आधार पर यानि देश के विस्‍तार के कम या अधिक हो जाने से उसकी नई जन्‍मकुंडली नहीं बनायी जानी चाहिए। मैने पिछले दिनों सभी लग्‍नवालों की विशेषताओं की चर्चा करते हुए 12 लेख लिखे ,पहले ही लेख में तर्क दिए गए थे कि मनुष्‍य की जीवनशैली मेष लग्‍न की जन्‍मकुंडली की जीवनशैली से मेल खाती है। इन्‍हीं लेखों के आधार पर कहा जा सकता है कि भारतवासियों की जीवनशैली पूर्ण तौर पर कुंभ लग्‍न की जन्‍मकुंडली का प्रतिनिधित्‍व करती है और इस आधार पर भारतवर्ष का जन्‍म लग्‍न कुंभ होना चाहिए। इसलिए कुंभ लग्‍न के हिसाब से विभिन्‍न भावों में गोचर के ग्रहों की स्थिति के आधार पर भारतवर्ष के बारे में भविष्‍यवाणी की जानी चाहिए। इस मान्‍यता के पक्ष में ये तर्क दिए जा सकते हैं ....


कुंभ लग्‍न की कुंडली के अनुसार एक जातक के स्‍वभाव के बारे में आपने पढा। कुंभ लग्‍नवालों के मन का स्‍वामी चंद्र षष्‍ठ भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के प्रभाव और रोग , ऋण , शत्रु जैसे हर प्रकार के झंझट का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए कुंभ लग्‍न के जातकों के मन को पूर्ण तौर पर प्रभावित करने वाले संदर्भ किसी प्रकार के झंझट ही होते हैं। रोग , ऋण या शत्रु जैसे झंझट न होने पर मन को खुशी मिलती है , जबकि झंझट उपस्थित होकर इनके मन को दुखी करते हैं। भारतवासियों को भी किसी प्रकार के झंझट लेने की इच्‍छा नहीं होती , ये रोग के इलाज के लिए नहीं , रोग से बचने के लिए परहेज पर विश्‍वास रखते हैं , ऋण लेने को बडी मुसीबत मानते हैं , शत्रुता जैसे झंझट से दूर रहना पसंद करते हैं , हजारों साल का इतिहास गवाह है कि इन्‍होने आजतक कहीं भी आक्रमण नहीं किया।

कुंभ लग्‍न की कुंडली के अनुसार समस्‍त जगत में चमक बिखेरने वाला सूर्य सप्‍तम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के घर गृहस्‍थी का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए अपने नाम यश को फैलाने के लिए कुंभ लग्‍न के जातक अपने घर गृहस्‍थी को महत्‍व देते हैं। घर गृहस्‍थी का वातावरण और दाम्‍पत्‍य जीवन बहुत ही उत्‍तम कोटि का और अनुकरणीय होता है , भले ही सूर्य कमजोर रहने पर इन्‍हें अपनी दाम्‍पत्‍य जीवन से कष्‍टकर समझौता करने को बाध्‍य होना पडे। भारतवासी भी अपनी घर गृहस्‍थी को इतना महत्‍व देते हैं कि यहां कष्‍टकर समझौता भी इन्‍हें मंजूर होता है , जो अनुकरणीय है।

कुंभ लग्‍न की कुंडली के अनुसार मंगल तृतीय और दशम भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के भाई बहन , बंधु बांधव , पिता , समाज और पद प्रतिष्‍ठा का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातकों के परिवेश में भाई , बहन , बंधु बांधव ,  पिता , समाज सभी शामिल होते है , चाहे मंगल के मजबूत होने से भाई बंहन बंधु बांधवों से लेकर पिता समाज के सारे बुजुर्गों से इनके संबंध अच्‍छे बने हों और इसके कारण प्रतिष्‍ठा के पात्र हों , या फिर मंगल के कमजोर होने पर भाई , बंधु , पिता , समाज या अन्‍य लोगों का कष्‍ट झेलने को इन्‍हे बाध्‍य होना पडता है , इनकी प्रतिष्‍ठा पर भी आंच आए। पर भाई बहन बंधु बांधव और सामाजिकता के बिना एक भारतीय नहीं रह सकता।

कुंभ लग्‍न की कुंडली के अनुसार शुक्र चतुर्थ और नवम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के मातृ पक्ष और हर प्रकार की छोटी बडी संपत्ति , स्‍थायित्‍व के साथ साथ भाग्‍य आदि का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए कुंभ लग्‍नवालों के हर प्रकार के संपत्ति का उनकी माता या भाग्‍य से संबंध बना होता है। कुंभ लग्‍नवाले माता या भाग्‍य के सहयोग से हर प्रकार की संपत्ति का सुख प्राप्‍त कर लेते हैं और स्‍थायित्‍व की मजबूती पाते हैं। यदि भाग्‍य के साथ न देने से हर प्रकार के संपत्ति के सुख में बाधा हो और स्‍थायित्‍व कमजोर दिखाई पडे । एक भारतवासी के संदर्भ में भी देखें तो इन्‍हें भाग्‍य से ही इन्‍हें प्राकृतिक संपदा प्राप्‍त है , जो जिस क्षेत्र में हैं , उसी क्षेत्र में किसी न किसी प्रकार का प्रचुर भंडार उपलब्‍ध हैं। कभी प्राकृतिक विपत्ति का सामना करना भी पडे तो इतने बडे साधन संपन्‍न भारतवर्ष में उन्‍हें गुजारे की दिक्‍कत नहीं होती।

कुंभ लग्‍न की कुंडली के अनुसार बुध पंचम और नवम भाव का स्‍वामी है और यह जातक के बुद्धि , ज्ञान संतान और जीवनशैली का  प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍न के जातक अपनी बुद्धि का उपयोग हमेशा जीवनशैली को सुधारने के लिए करते हैं। यही कारण है कि हमारे देश में अधिकांश चिंतकों और विचारकों ने कुंभ लग्‍न में ही जन्‍म लिया था और उन्‍होने अपने ज्ञान का उपयोग भौतिक या अन्‍य सुख के लिए नहीं , सिर्फ और सिर्फ जीवनशैली को सुधारने के लिए किया। कुंभ लग्‍नवालों की तरह ही भारतीय ऐसी जीवनशैली पर विश्‍वास रखते हैं , जो आनेवाली पीढी को अधिक सक्षम बना सके। हजारो वर्षों से भारतवासियों ने भी अपने दिमाग का पूरा उपयोग जीवनशैली को मजबूत बनाने में किया है , ताकि आनेवाली पीढी शारीरिक मानसिक और आर्थिक तौर पर अधिक मजबूत हो सके।

कुंभ लग्‍न की कुंडली के अनुसार बृहस्‍पति द्वितीय और एकादश भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के धन , कोष , लाभ के मामलों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए कुंभ लग्‍न के जातकों के धन कोष का लाभ से और लाभ का धन कोष से संबंध बना होता है। कुंभ लग्‍न के जातक संसाधन वाले परिवार में जन्‍म लेते हैं , जिससे इन्‍हें लाभ को लेकर कोई चिंता नहीं होती , सतत लाभ से इनका कोष मजबूत बना होता है। संसाधन हीनता से इनका लाभ प्रभावित होता है तो इनके कोष पर बुरा प्रभाव पडता है। भारतवासियों को भी लाभ संसाधन के बल पर ही मिलता आ रहा है , कभी किसी प्रकार की आपत्ति में एक क्षेत्र के लोगों का लाभ भले ही प्रभावित हो जाए , पर उन्‍हे दूसरे क्षेत्र से संरक्षण मिल ही जाता है।

कुंभ लग्‍न की कुंडली के अनुसार शनि प्रथम और द्वादश भाव का स्‍वामी होता है यानि यह जातक के शरीर , व्‍यक्तित्‍व , खर्च और बाहरी संदर्भों आदि मामलों का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए इस लग्‍नवाले जातकों की अपने स्‍वास्‍थ्‍य या व्‍यक्तित्‍व को मजबूती देने में अधिक से अधिक खर्च करने की प्रवृत्ति होती है। जातकों का स्‍वास्‍थ्‍य अच्‍छा रहता है , खर्च शक्ति के बने होने से और खाने पीने के सुख से आत्‍मविश्‍वास में बढोत्‍तरी होती है। कभी कभार कुंभ लग्‍नवालों के स्‍वास्‍थ्‍य में कमजोरी बनी रहती है , खर्चशक्ति की कमी से आत्‍मविश्‍वास कमजोर होता है। भारतवासियों के संदर्भ में देखा जाए , तो आजतक इनका खर्च भोजन में ही होता आया है। इनमें स्‍वास्‍थ्‍य के मामलों को गंभीरता से देखने की प्रवृत्ति मौजूद है , स्‍वास्‍थ्‍य के अलावे दूसरी जगह पर इनका खर्च बहुत कम होता है।

देश की तरह ही अपने अपने परिवार या समाज के हिसाब से , धर्म के हिसाब से माता और पिता के विचारों के हिसाब से भी अलग अलग लग्‍नानुसार हर व्‍यक्ति जीता है। मानव जाति के हिसाब से हममें से हर किसी की शैली मेष लग्‍न के अनुरूप होती है , पुन: भारतवासी होने के हिसाब से कुंभ लग्‍न के अनुरूप और अपने अपने धर्म , समाज या परिवार के हिंसाब से माता , पिता को प्रतिनिधित्‍व करनेवाले लग्‍न का भी छाप हमपर पडता है। पर मूल तौर पर अपने जन्‍मकालीन लग्‍न के हिसाब से जीने की सभी मनुष्‍यों की अपनी प्रवृत्ति होती है , क्‍यूंकि इन सबके बावजूद हर कोई अलग अलग बीज होता है और उसका निर्धारण लग्‍नकुंडली से ही किया जा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे विशेष तौर पर विकसित किए गए  लंगडे आम के पेड में कुछ गुण पेड के हिसाब से , कुछ आम के हिसाब से और कुछ अपनी जाति के हिसाब से होते हैं , पर उनमें मुख्‍य खूबी वह होती है , जिस गुण के कारण उसका अस्तित्‍व होता है।

16 टिप्‍पणियां:

ZEAL ने कहा…

बहुत उपयोगी जानकारी संगीता जी ।
आभार ।

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर लेख ओर एक अच्छी जानकारी धन्यवाद

परमजीत सिँह बाली ने कहा…

उपयोगी जानकारी|

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

संगीता पुरी जी!
आप राशियों के बारे में ब्योरेवार बढ़िया और उपयोगी जानकारी दे रहीं हैं!

कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा ने कहा…

bahut badhiya..ji

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

उपयोगी जानकारी ,आभार.

honesty project democracy ने कहा…

वाह बहुत ही बढ़िया प्रस्तुती....

निर्मला कपिला ने कहा…

मुझे अपनी बेटी के बारे मे जानकारी मिल गयी। धन्यवाद पिछले कुछ आलेख अभी पढने हैं।

Dr Varsha Singh ने कहा…

Nice ....Interesting.

Dinesh pareek ने कहा…

शुभागमन...!
हिन्दी ब्लाग जगत में आपका स्वागत है, कामना है कि आप इस क्षेत्र में सर्वोच्च बुलन्दियों तक पहुंचें । आप हिन्दी के दूसरे ब्लाग्स भी देखें और अच्छा लगने पर उन्हें फालो भी करें । आप जितने अधिक ब्लाग्स को फालो करेंगे आपके अपने ब्लाग्स पर भी फालोअर्स की संख्या बढती जा सकेगी । प्राथमिक तौर पर मैं आपको मेरे ब्लाग की लिंक नीचे दे रहा हूँ आप इसके दि. 01.03.2011 को प्रकाशित आलेख "नये ब्लाग लेखकों के लिये उपयोगी सुझाव" का अवलोकन करें और इसे फालो भी करें । आपको निश्चित रुप से अच्छे परिणाम मिलेंगे । शुभकामनाओं सहित...
http://vangaydinesh.blogspot.com/

गरिमा ने कहा…

जी, मेरी और मेरे भाई की कुन्डली कुम्भ लग्न की है, और हम दोनो की बहुत सारी चीजे एक दुसरे से मेल खाती हैं, और आपके विश्लेषण से भी। अभी मै आपके ब्लॉग से ज्योतिष के पाठ भी पढ़ रही हूँ।

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

ऱोचक जानकारी । कुंभ लग्न वालों को सदा ही कष्ट क्यूं उठाने पडते हैं ?

AryaSurenderVerma ने कहा…

sangeeta ji very very thanx for your nice and kind welcome. as i show your profile i found you are very much or deeply knowledge or astrology. i alsohave some interest in it. so thnx again or plz guide me time to time.

AryaSurenderVerma ने कहा…

संगीता जी आपने बहुत ही अच्छा और महत्व पूरण जानकारी लिखी है

devanshukashyap ने कहा…

मेरे गूगल ब्लॉग पर आपकी टिप्पणियों का अभिनंदन है | कृपया वहाँ पधारकर अनुगृहीत करें |
धन्यवाद |

यशवन्त माथुर ने कहा…

आप को सपरिवार होली की हार्दिक शुभ कामनाएं.

सादर