शनिवार, 6 अगस्त 2011

कैसा रहेगा आनेवाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार ??

ग्रहों और नक्षत्रों के शेयर बाजार पर पडते प्रभाव की चर्चा करते हुए मैं पिछले कई वर्षों से मोल तोल डॉट इन पर आनेवसले सप्‍ताह के शेयर बाजार की भविष्‍यवाणी करते हुए कॉलम लिखती आ रही हूं। अत्‍यधिक व्‍यस्‍तता के कारण पिछले कई माह से अपने ब्‍लॉग के साथ ही साथ मैं वहां नियमित नहीं रह पायी , पर जो भी पाठक मेरे नियमित संपर्क में बने हुए हैं , उन्‍हें अवश्‍य मालूम होगा कि अगस्‍त माह में शेयर बाजार में एक तेज गिरावट की संभावना गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के द्वारा व्‍यक्‍त की गयी थी।

शेयर बाजार में दस बारह दिनों से हो रहे लगातार गिरावट ने बाजार के अनुभवी कारोबारियों को भी विचलित कर रखा है। 5 अगस्‍त को पौने एक बजे दोपहर बीएसई सेंसेक्स लगभग 600 अंक तक गिर चुका था। बाज़ार पर बिकवाली का जबर्दस्त दबाव रहा। उस समय सेंसेक्स 591 अंक गिरकर 17,101 पर जा पहुंचा था जबकि निफ्टी 180 अंक गिरकर 5,151 पर पहुंच गया। आंकड़ों के मुताबिक एफआईआई ने 1,788 करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री की। हालांकि दिन के अंतिम कुछ घंटों के कारोबार के दौरान शेयर कीमतों में रिकवरी देखी गई, क्योंकि घरेलू निवेशकों ने बाजार में 1,372 करोड़ रुपये लगाए। इसलिए कारोबार की समाप्ति पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 387 अंक गिरकर 17305 पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 120 अंक गंवाकर 5211 के स्तर पर बंद हुआ।

एक ओर अंतर्राष्‍ट्रीय माहौल के कारण यानि अमरीकी बाजार , यूरोपीय बाजार और एशियाई बाजारों के कमजोर होने के कारण 5 अगस्‍त को जब भारतीय शेयर बाजारों में बिकवाली का दबाब बन रहा था , वहीं दूसरी ओर सरकार भी संसद में बैकफुट पर थी। सरकार का संसद में साफ कह देना कि वो आने वाले दो सालों के लिए विकास दर का ऐलान नहीं कर सकती , ने बाजार को और कमजोर करने में मदद की। भारतीय अर्थव्यवस्था मॉनसून पर भी निर्भर करती रही है , लेकिन पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और नॉर्थ ईस्ट के कई इलाकों में बारिश के नदारद रहने से सब्जियों और फल के साथ साथ दाल और तेल की कीमतों में भी उछाल आने की आशंका है। 

ब्रोकरों का मानना है कि जब तक कोई सकारात्मक रुझान सामने नहीं आता है, तब तक निवेशक और कारोबारियों को कुछ सप्ताह तक बाजारों से दूर रहना ही उत्‍तम होगा। हालांकि बाजार विश्लेषकों का मानना है कि शेयर कीमतें निचले स्तर पर हैं, क्योंकि घरेलू बाजार पिछले कुछ महीनों में अमेरिका जैसे विकसित बाजारों की तुलना में अधिक गिरे हैं। और यह समय बाजार में नए निवेशकों के प्रवेश करने का माना जा सकता है। क्‍यूंकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट सकारात्मक है और अगर महंगाई में कमी आती है तो निवेशकों का धन फिर से बाजार में आएगा।

जहां तक ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ का अध्‍ययन है , बाजार में अभी अनिश्चितता के बने रहने की पूरी संभावना है। किसी एक दो दिन दिन बाजार रिकवरी के मूड में रह सकता है , पर बाजार में स्‍थायी तौर पर मजबूती नहीं दिखाई दे रही। खासकर 18 अगस्‍त तक बाजार का माहौल भयावह ही बना रहेगा , पर 19 अगस्‍त से कुछ सुधार का क्रम बन सकता है। 1 सितंबर तक बाजार में तेजी के बाद पुन: कुछ कमजोरियों से बाजार को जूझना होगा और सितंबर के अंत में ही सेंसेक्‍स और निफ्टी में रिकवरी होती दिखाई दे सकेगी।


9 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

उपयोगी पोस्ट!

वन्दना ने कहा…

ये तो हमारे काम की जानकारी दी …………आभार्।

वीना ने कहा…

उपयोगी जानकारी और सही भी....

manoj ने कहा…

aapki jankari kam ki hai .....dhanyawad

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

यानि की अबकी बार दिपावली फ़ीकी ही रहेगी?

रामराम.

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

अच्छा बताया आपनें,देखिये आने वाला अर्थजगत किस करवट बैठने वाला .दुनिया के शेयर मार्केट का हाल तो आप देख ही रही हैं,अच्छी जानकारी,आभार.

Dilbag Virk ने कहा…

ACHCHHI JANKARI

अशोक बजाज ने कहा…

उपयोगी जानकारी ,आभार.

कुमार राधारमण ने कहा…

सितम्बर तक हम झेल लेंगे। पर क्या उसके बाद सेंसेक्स ऊपर की ओर चढ़ना शुरू होगा या यह झंझावात का क्रम आगे भी जारी रहेगा?