शनिवार, 20 अगस्त 2011

... ताकि पाठकों को उनकी समस्‍याओं का समाधान मेरे लेखों में ही मिल जाए ... संगीता पुरी

22 जून को ही अपने एक पोसट में मैने लिखा कि मै अपने ब्‍लॉग पर पोस्‍ट के माध्‍यम से ही लोगों को जबाब देने का सिलसिला शुरू कर रही हूं। इससे पिछली पोस्‍ट में मैने एक कुंडली में मौजूद समस्‍या के बारे में चर्चा करते हुए रांची के उक्‍त सज्‍जन को ज्‍योतिषीय सलाह दी थी।  उसके बाद इस पोस्‍ट पर एक  सज्‍जन की जन्‍मकुंडली के बारे में चर्चा करने के बाद  मैं पुन: व्‍यस्‍त हो गयी। इधर दो चार दिनों से मैने समस्‍या से जूझ रहे कुछ लोगों के ईमेल को निकालकर, जिन्‍हें मैं स्‍टार डालकर छोड दिया करती हूं , के जन्‍म विवरण पर ध्‍यान दिया। कुछ की सारी गणनाएं हो गयी हैं , कुछ ने फोन पर तो कुछ ने ईमेल पर सलाह ले ली हैं। बाकी की चर्चा आनेवाले दिनों में की जाएगी।

मेरे पास आयी बहुत सी जन्‍मकुंडलियों , जिनका अध्‍ययन मैने हाल में किया , उनमें से अधिकांश मुझे उन युवकों के मिले , जिनका जन्‍मकालीन मंगल कमजोर है और इस कारण वे शिक्षा , कैरियर या वैवाहिक जीवन में थोडी अनिश्वितता का अनुभव कर रहे हैं। पिछले वर्ष लिखे अपने इस लेख में मैने बताया था कि जब मंगल कमजोर हो तो उस वक्‍त जन्‍म लेनेवाले बच्‍चों की जन्‍मकुंडलियों में मंगल की स्थिति कमजोर बन जाती है और इसके कारण उनका युवावस्‍था का वातावरण अच्‍छा नहीं बन पाता है। हल्‍के फुल्‍के ढंग से समस्‍याएं 18 वर्ष की उम्र से ही शुरू हो जाती हैं , 24 वर्ष की उम्र से किसी न किसी पक्ष से संबंधित उनकी समस्‍याएं गंभीर होती हुई 30 वर्ष की उम्र तक बढती ही चली जाती हैं। वैसे 30 वर्ष की उम्र के बाद थोडी राहत तो मिलती है पर पूरा सुधार 36 वर्ष की उम्र के बाद ही हो पाता है , जब युवावस्‍था समाप्‍त होने को रहता है। इसके बाद मैने पूरी सदी में इन जन्‍मतिथियों के मध्‍य जन्‍मलेनेवालों की लिस्‍ट तैयार कर बताया था कि इन्‍होने भी अपने जवानी के दिनों में कई प्रकार के तनाव झेले होंगे। भले ही इस दौरान जन्‍म लेनेवाले लोगों पर ग्रहों के प्रभाव की तीव्रता में कमी बेशी अन्‍य ग्रहों के कारण रही होगी।

 इस दौरान जन्‍म लेनेवालों में से 7 मार्च से 27 अप्रैल 1982 , 22 अप्रैल से 6 जून 1984 और 25 जून से 29 जुलाई 1986 के मध्‍य जन्‍म लेनेवाले जातकों की जन्‍मकुंडलियां मुझे बहुत मिली हैं , क्‍यूंकि ये मंगल के सर्वाधिक प्रभाव वाले उम्र में यानि 24 वर्ष से 30 वर्ष की उम्र का जीवन व्‍यतीत कर रहे हैं। 18 वर्ष की उम्र के बाद से ही इनके जीवन में कुछ कठिनाइयां आनी शुरू हो गयी है और 24 वर्ष के बाद अपने जीवन जीने के ढंग को परिवर्तित करने के बाद भी इन्‍हें अपने कदम सफलता की ओर बढते नहीं दिखाई दे रहे हैं।  इसलिए ये परेशान है और मुझसे सलाह लेने को बाध्‍य भी। इनकी समस्‍याओं की वजह मंगल है और इस कारण स्‍थायी तौर पर इनकी समस्‍याएं 30 वर्ष के बाद हल्‍के और 36 वर्ष की उम्र के बाद स्‍थायी तौर पर समाप्‍त हो सकेंगी।

इसी प्रकार बहुत सारे लोगों की समस्‍याओं के समाधान मेरे पुराने लेखों  में ही छुपे होंगे , इसलिए पाठकों से अनुरोध है कि वे मेरे पास इंतजार करने के बजाए मेरे पुराने लेखों को पढें। सबके पत्रों पर मैं ध्‍यान नहीं दे पाती , इसलिए मैं आनेवाले दिनों में और भी ऐसे लेख लिखने की कोशिश करूंगी , ताकि पाठकों को उनकी समस्‍याओं का समाधान मेरे पुराने लेखों में ही मिल जाए।

10 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज शनिवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो
चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

: केवल राम : ने कहा…

आपकी सलाह सही है .....!

मनोज कुमार ने कहा…

ब्लॉग के माध्यम से आप जो सोशल सर्विस कर रहीं हैं वह अनुकरणीय और प्रेरक है। आपको सादर नमन!

vidhya ने कहा…

आपकी सलाह सही है .....!

prerna argal ने कहा…

मैं तो पहली बार आपके ब्लॉग में आई हूँ /आकर बहुत अच्छा लगा की आप ब्लॉग के माध्यम से लोगों की शंका का निवारण करके समाज सेवा कर रही हैं /बहुत ही उत्तम कार्य के लिए बधाई स्वीकारें /



please visit my blog.
http://prernaargal.blogspot.com/.thanks.

वन्दना ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
अवगत कराइयेगा ।

http://tetalaa.blogspot.com/

Rakesh Kumar ने कहा…

वाह! संगीता जी आप एक सार्थक प्रयास कर रहीं हैं.
मुझे तो आपका अपने ब्लॉग पर बहुत समय से इंतजार है.कभी कृपा कीजियेगा.

विष्णु बैरागी ने कहा…

निस्‍सन्‍देह, स्‍तुत्‍य प्रयास है।

Minakshi Pant ने कहा…

आपका प्रयास सराहनीय है |

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

यह बहुत ही प्रशंसनीय प्रयास है,आभार.