सोमवार, 29 अगस्त 2011

जनसामान्‍य के लिए कैसा रहेगा कल शाम साढे तीन से साढे पांच के मध्‍य का समय ??


गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष इस बात को नहीं मानता कि ग्रहों के हिसाब से किसी खास समयांतराल में शुरूआत की जानेवाले कार्यक्रम के हमेशा सुखद या दुखद बने रहने की गारंटी दी जा सके, इस तरह यह मुहूर्त्‍त या शकुन पर विश्‍वास नहीं करता। 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के प्रणेता मेरे पिताजी श्री विद्या सागर महथा ने अपने इस लेख में  कहा था कि अभी तक ज्‍योतिषियों के लिए यह चुनौती ही है कि शुभ मुहूर्त और यात्रा निकालने के बाद भी किए गए बहुत सारे कार्य अधूरे पड़े रहते हैं या कार्यों की समाप्ति के बाद परिणाम नुकसानप्रद सिद्ध होते हैं । एक अच्छे मुहूर्त में लाखों विद्यार्थी परीक्षा में सम्मिलित होते हैं , किन्तु सभी अपनी योग्यता के अनुसार ही फल प्राप्त करते हैं , फिर मुहूर्त या यात्रा का क्या औचित्य है ?

पर इसके बावजूद हम यह मानते हैं कि आसमान में ग्रहों की शुभ और अशुभ स्थिति होती है और उसका फल विश्‍व के किसी खास भाग की जनता पर अच्‍छे या बुरे रूप में पडता है। जहां एक दुर्घटना से पूरे देश या विश्‍व की जनता आहत होती है , वहीं किसी प्रकार की सुखद खबर से जनता के मध्‍य उत्‍साह की लहर भी फैलती है। कभी कभी प्रभावित क्षेत्र की अधिकांश जनता किसी एक बडी घटना से नहीं , पर अलग अलग छोटी छोटी घटनाओं से छोटे या बडे रूप में प्रभावित होती है। ग्रहों के हिसाब से अच्‍छे समय में परीक्षा हो तो पेपर सहज मिलते हैं , जबकि बुरे समय में पेपर कठिन। ग्रहों के हिसाब से अच्‍छे समय में यात्रा हो तो वह सुखद यादगार होती है , जबकि बुरे समय की यात्रा कष्‍टकर यादगार बन जाती है।

लग्‍न राशिफल लिखते वक्‍त ग्रहों की इसी अच्‍छी या बुरी स्थिति को ध्‍यान में रखा जाता है , ताकि पाठकों को खास अच्‍छे या बुरे दिन तथा खास अच्‍छे या बुरे समय की जानकारी हो सके। ऐसी ही जानकारी अपने राशिफल वाले ब्‍लॉग पर देती आ रही हूं।  दो वर्षों से यह राशिफल चल रहा है , पर 26 , 27 और 28 अगस्‍त के लग्‍न राशिफल में मैने पहली बार सभी राशियों के लिए एक पक्तियां लगायी थी। लिखा था कि इस कार्यक्रम में 2 बजे से 4 बजे तक थोडी बाधा उपस्थित होगी , जबकि सूर्यास्‍त के बाद झंझट के हल होने या सफलता मिलने की उम्‍मीद अधिक दिखती है।

इसका अर्थ यही है कि यह दिन खास महत्‍व का था , जिसमें भारतवर्ष के सभी लग्‍नवाले लोग किसी न किसी कार्यक्रम से जुडनेवाले थे। 26 अगस्‍त को सारे भारतवासियों का ध्‍यान लोकसभा में होनेवाली बहस की ओर लगा था , ठीक 2 बजे के बाद सांसदों के हंगामें के बाद लोकसभा भंग हो गयी और लोगों को निराशा का सामना करना पडा , क्‍यूंकि आनेवाले दो दिन सोमवार और रविवार थे और अनशन दो दिनों तक टल सकता था। अन्‍ना की तबियत बिगड सकती थी। पर सूर्यास्‍त के बाद यानि शाम तक समस्‍या का हल निकला , जब सरकार ने अन्‍ना टीम को बताया कि कल संसद में प्रस्‍ताव पर वोटिंग करायी जाएगी।

दूसरे दिन यानि 27 अगस्‍त को ग्रहों के हिसाब से पुन: 2 बजे से 4 बजे तक कार्यक्रम में बाधा उपस्थित होनी थी , तो इस दौरान बना बनाया काम बिगड गया और सरकार अपनी ही बातों से मुकर गयी और संसद में प्रस्‍ताव पर वोटिंग करवाने से इंकार किया। पूरे देश में निराशा का वातावरण बन गया , पर शाम सूर्यास्‍त होने के बाद वातावरण पुन: सामान्‍य हुआ और सरकार द्वारा हल निकाला गया और रात तक अन्‍ना के अनशन टूटने को पूरी उम्‍मीद बनी। इसके बाद पूरे देश में खुशी की लहर दौड पडी।

इस लेख को लिखने का उद्देश्‍य खुद की प्रशंसा करना नहीं है , क्‍यूंकि यह मेरी बहुत बडी उपलब्धि नहीं। पर ज्‍योतिष के प्रति जनसामान्‍य की भ्रांतियों को दूर करना और ग्रहों के प्रभाव के वैज्ञानिक पक्ष की जानकारी देना मेरा लक्ष्‍य है और इस बात को समझाने के लिए इस प्रकार का उदाहरण देना आवश्‍यक है। आनेवाला 29 और 30 अगस्‍त तो 26 , 27 और 28 अगस्‍त की तरह महत्‍वपूर्ण नहीं , पर इन दोनो दिनों में भी ग्रहों का खास प्रभाव जनसामान्‍य पर मैं देख रही हूं। ग्रहों के प्रभाव से शाम साढे तीन से साढे पांच के मध्‍य हर प्रकार के कार्यक्रम में बाधा आएगी , साढे पांच के बाद थोडी राहत होनी शुरू होगी तथा 7 बजे के बाद अधिकांश कार्यक्रम सफल होता दिखेगा। हां , कुछ लोगों का परिणाम साढे तीन से साढे पांच के मध्‍य ही आ जाएगा , जो असंतुष्टि दायक हो सकता है और उसे नहीं बदला जा सकता है।

6 टिप्‍पणियां:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

भ्रान्ति भ्रान्ति भ्रान्ति
हटाओ हटाओ हटाओ
लाओ लाओ लाओ एक
नवीन भ्रान्ति लाओ

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है! यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

Dilbag Virk ने कहा…

jyotish kora jhooth to kdapi nhin hai

Amit Chandra ने कहा…

सब मानने की बाते है मनो तो देव नहीं तो पत्थर.

सुनिल शेखर ने कहा…

संगिता दिदी नमस्कार,ज्ञानवर्दक प्रविष्टी के लिए धन्यवाद। आप से अनुरोध हे की किन-किन ग्रहो का युति से ये शुभ या अशुभ फल प्राप्त हो रहा है। सो उल्लेख करे तो अच्छा रहेगा।
किसी भी बात पर पुर्वाग्रही होना ठिक नही है। पहले उस चिज को मनन् करे,प्रयोग कर के जाँच करे। सही है तो स्विकार करे नही तो त्याग करे। लेकिन पुर्वाग्रही हो कर दुसरे को ठेस पहुँचाना बुरी बात है।

कुमार राधारमण ने कहा…

Achchha hai.Meri bhi kuchh cheezen pipeline men hain.Delhen,kya hota hai.