शुक्रवार, 4 नवंबर 2011

इस वर्ष जल्‍द ही पडने लगेगी ठंड .....

कभी अतिवृष्टि तो कभी अनावृष्टि को झेलना भारतवर्ष की मजबूरी रही है। इसी वर्ष जुलाई से सितंबर तक होनेवाले लगातार बारिश से देश के विभिन्‍न भागों में लोग परेशान रहें। जहां गांव के कृषकों को खेत की अधिकांश फसलों का नुकसान झेलना पडा , वहीं शहरों के लोगों का भी जनजीवन बारिश के कारण अस्‍त व्‍यस्‍त रहा। एक महीने से बारिश थमी है , जिससे लगभग हर क्षेत्र में साफ सफाई हो चुकी है और लोग सुहावने मौसम का तथा सारे त्‍यौहारों का आनंद एक साथ ले पा रहे हैं। बारिश से बच गए फसल खलिहान में आ चुके हैं और उन्‍हें देखकर ही किसानों को संतुष्टि बनी हुई है। हाल के वर्षों में ठंड देर से यानि मध्‍य दिसंबर में ही पड रही है और इस कारण त्‍यौहारों की समाप्ति के बाद लोग निश्चिंत हैं।

पर 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' की मानें तो इस वर्ष ठंड बहुत जल्‍द शुरू हो सकती है। 9 नवंबर से ही ग्रहीय स्थिति कुछ इस तरह की बनेगी कि मौसम में बडा परिवर्तन देखने को मिलेगा। ठंड बढाने वाले हर कारकों के इस दिन क्रियाशील होने से मौसम में बडा परिवर्तन देखने को मिलेगा। पहाडी क्षेत्रों में बर्फ पड सकती है , मैदानी भागों में बारिश , ओले तथा तटीय प्रदेशों में तूफान .. इसके कारण भारतवर्ष के अधिकांश भागों का मौसम बिगड जाएगा और ठंड बढ जाएगी। ठंड की शुरूआत यहीं से हो जाने के बावजूद दो चार दिनों के बाद मौसम कुछ सामान्‍य दिखता है , पर पुन: एकबार 25 नवंबर से वातावरण का तापमान कम होना आरंभ होगा और दिसंबर का पहला सप्‍ताह इस वर्ष के सर्वाधिक ठंडे दिनों में से एक होगा। यही नहीं , इस समय चिडचिडाने वाली बारिश की भी संभावना है। इसी समय किसानों की खरीफ की फसल खलिहानों में रहती है , हल्की सी बरसात उसकी गुणवत्ता बिगाड सकती है, अधिक होने से तो अनाज के सडने का ही भय है। मौसम के इस रवैये से उन्‍हें अच्‍छा नुकसान झेलने को बाध्‍य होना पड सकता है।

8 दिसंबर तक की कडकडाती ठंड को झेलने के बाद आमजन को ठंड से थोडी राहत मिलनी आरंभ होगी। पर समस्‍या के समाप्‍त होने की उम्‍मीद नहीं दिखती। 27 दिसंबर के आसपास पुन: मौसम को खराब बनाने के सभी कारक काम करना आरंभ करेंगे , जैसे तेज हवाओं का चलना , बादलों का बनना , आंधी और बारिश का होना , बर्फ गिरना आदि , जिससे लगभग पूरे देश का तापमान कम होगा और लोगों को दो चार दिन ठंड झेलने को मजबूर होना पडेगा। पर जैसे ठंड की शुरूआत जल्‍द होगी , वैसे ही इसका अंत भी जल्‍द आएगा और जनवरी से ही मौसम काफी अच्‍छा हो जाएगा। 10 जनवरी के आसपास से ही पुन: मौसम के सुहावने हो जाने से लोगों को राहत मिलनी आरंभ हो जाएगी। उसके बाद का मौसम सामान्‍य तौर का होगा। यानि कि इस वर्ष पिकनिक मनाने के भरपूर अवसर मिलेंगे।


25 टिप्‍पणियां:

वाणी गीत ने कहा…

पढ़ कर ही दांत किटकिटा रहे हैं!

हरीश प्रकाश गुप्त ने कहा…

आसार तो अगस्त से ही दिखने लगे थे। नवम्बर की शुरुआत से विश्वास भी हो चला हैष

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

आपकी बात से तो ऐसा ही लगता है क्योंकि यहाँ लखनऊ मे अभी से ही सुबह धुंध के दर्शन हो रहे हैं।

सादर

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

चलिए खेती-किसानी वालों को आगाह कर दिया आपनें,आभार.

वन्दना ने कहा…

ये तो पूरी सर्दी का लेखा जोखा दे दिया आपने…………आभार्।

विष्णु बैरागी ने कहा…

अजी! पडने लगेगी नहीं, पडने लगी है।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

ओह तो गर्म कपड़े निकाल ही लेने चाहियें .. पिछले साल तो जनवरी में ठण्ड पड़ी थी .

डॉ टी एस दराल ने कहा…

हमें तो ठण्ड बड़ी अच्छी लगती है जी । जल्दी ख़त्म क्यों करा रही हैं । :)

मनोज कुमार ने कहा…

गांव से आ रहा हूं। रजाई ३० अक्तूबर से ही ओढ़ना पर रहा था।
समय से काफ़ी पहले ठंड पड़ने लगा है।

चन्दन भारत ने कहा…

ठंड तो महसूस भी हो रही है पर एक बात अच्छी है की जल्दी जायेगी भी

सदा ने कहा…

आपकी यह पोस्‍ट ...अहसास दिला रही है ठंड का ...बेहतरीन प्रस्‍तुति के लिये आभार ।

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

Umdaa tathaa rochak jaanakaaree.

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

हमारे यहाँ तो मौसम की पहली बर्फ़ भी पड़ चुकी और तूफ़ान भी आ चुका सो ठंड की जल्दी से कोई आश्चर्य नहीं हुआ।

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद ने कहा…

अभी तो पंखे के नीचे बैठे हैं :(

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

बहुत दिनों बाद आपका रुचिप्रद लेख मेरे सामने है!...मौसम के मिजाज का क्या कहना!...बस! इंतज़ार है!

अशोक बजाज ने कहा…

आपकी भविष्य वाणी सही है , इस वर्ष कड़ाके की ठण्ड का सामना करना पड़ेगा .

शंकर फुलारा ने कहा…

भविष्य वाणी सही है, इस वर्ष कड़ाके की ठण्ड का सामना करना पड़ेगा |
नवम्बर की शुरुआत से ही विश्वास भी हो चला है |

बी एस पाबला BS Pabla ने कहा…

मुझे तो ठंड बड़ी प्यारी लगती है
देखते हैं इस बार कितना प्यार उमड़ता है :-)

दिलबाग विर्क ने कहा…

देखते हैं क्या होता है

vinay ने कहा…

प्रथम तो आप को मेरे जी मेल एकाउन्ट में लिन्क

देने के लिये,धन्यवाद देना चाहुंगा,समय अभाव

के कारण ना,कुछ लिख पा रहा हूं,आप की गत्यात्म्क

ज्योतिष पर सदा ही सटीक होती हैं,आपका एक

लेख दखा था,जो कि पड़ नहीं पाया "बिना बच्चों
के कैसी दिवाली,में समझ सकता हूं,माँ की ममता
को,परन्तु दूर हैं,लेकिन जीवन को पड़ लिख कर
सार्थक भी तो बना रहें हैं,उनके उज्जवल भविष्य
की कामना करता हूं ।

राज भाटिय़ा ने कहा…

चलिये इस बार भारत की दिस्मबर माह की सर्दी देखेगे,कैसी पडती हे

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

इन्तजार है अभी तो ठण्ड का .........

कंचन सिंह चौहान ने कहा…

बाप रे...ये ठंड जब नही आती तभी से मैं सोचने लगती हूँ कि ये आयेगी तो मेरा क्या होगा ? और जब आ ही जाती है, तो इसके जाने के दिन गिनने लगती हूँ।

सर्दी जल्दी आयेगी, ये बात डराने वाली है, मगर सर्दी जल्द ही चली भी जायेगी, ये थोड़ी तसल्ली देने वाली बात है...

शुक्रिया

सुनिल शेखर ने कहा…

दिदी नमस्कार, आपने मौसम की भविश्यवाणी की और मौसम भि आपको साथ दे रहा है। आपसे अनुरोध है की यह परिस्थिती कौन सी ग्रह योग के कारण आता है, सो उल्लेख करेगीं तो हमे भी सिखने का अवसर मिलता।

Sanjay Gulati Musafir ने कहा…

घटित घटनाक्रम स्वयं साक्षी है कि आपकी भविष्य़वाणी कैसी रही। जब आपने यह लेख प्रकाशित किया मैं तब भी जानता था कि सब गलत सिद्ध होगा, पर मैं सही समय आने तक चुप रहा।
यह आलोचना कोई आरोप या आक्षेप नहीं है - केवल मैं सालों से जो आपसे कहता रहा हूँ उसकी पुनरावृत्ति है कि "आपको अभी मुण्डेन और वृष्टि पर और पैनापन लाने की आवश्यकता है" अन्यथा आप और ज्योतिष आलोचना का पात्र बनेंगे और ह्रास होगा केवल ज्योतिष का।
आशा है आप भाव को समझेंगी और रचनात्मक रूप में लेंगी। आप जब चाहें हम विस्तृत सहयोगात्मक, सृजनात्मक चर्चा कर सकते हैं।
सप्रेम
संजय गुलाटी मुसाफिर