बुधवार, 28 दिसंबर 2011

ज्योतिषियों से विनम्र निवेदन .... … अतिथि पोस्‍ट … (मेरे पिताजी श्री विद्या सागर महथा की)

कल मुहूर्त्‍त को लकर लोगों के भ्रम के बारे में एक लेख लिखा गया था , कुछ कट्टर ज्‍योतिषियों को इस पोस्‍ट से तकलीफ पहुंची है , अपने रिसर्च की पुस्‍तक को लिखने से पहले ही मेरे पिताजी ने ज्‍योतिषियों से एक विनम्र अनुरोध किया था, एक नजर डालिए इसपर भी ....



केवल शब्दजाल या अंधविश्वास नहीं

सभी व्यक्तियों को भविष्य की जानकारी की इच्छा होती है, अतः फलित ज्योतिष के प्रति जिज्ञासा और अभिरुचि अधिसंख्य के लिए बिल्कुल स्वाभाविक है। फलित ज्योतिष एकमात्र विद्या है , जिससे समययुक्त भावी घटनाओं की जानकारी प्राप्त की जा सकती है, इसी विश्वास के साथ जहा एक ओर आधी आबादी राशिफल पढ़कर संतुष्ट होती है, वहीं दूसरी ओर बुद्धिजीवी वर्ग फलित ज्योतिष में इसके वैज्ञानिक स्वरुप को नहीं पाकर इसकी उपयोगिता पर संशय प्रकट करते हैं। फलित ज्योतिष परंपरागत ढंग से जिन रहस्यों का उद्घाटन करता है , उनका कुछ अंश सत्य को कुछ भ्रमित करनेवाला पहेली जैसा होता है। इस कारण लोग एक लम्बे अर्से से फलित ज्योतिष में अंतर्निहित सत्य और झूठ दोनो को ढोते चले आ रहे हैं।

यह भी ध्यातब्य है कि जो विद्या वैदिककाल से आज तक लोगों को आकर्षित करती चली आ रही है , वह केवल शब्दजाल या अंध-विश्वास नहीं हो सकती। निष्कर्षतः अभी भी फलित-ज्योतिष विकासशील विद्या है , इसका पूर्ण विकसित स्वरुप उभरकर सामने तो आ रहा है परंतु अभी भी विकास की काफी संभावनाएं विद्यमान हैं। विकास के मार्ग में कदम-कदम पर भ्रांतियां हैं। बुद्धिजीवी वर्ग ग्रहों के प्रभाव का स्पष्ट प्रमाण चाहता है , ज्योतिषी इसकी वैज्ञानिकता को सिद्ध नहीं कर पाते हैं। ग्रह-स्थिति से संबंधित कुछ नियमों का हवाला देते हुए अपने अनुभवों की अभिव्यक्ति करते हैं। एक ही प्रकार के ग्रह-स्थिति का फलाफल विभिन्न ज्योतिषी विभिन्न प्रकार से करते हैं , जो संदेह के घेरे में होता है। आम लोग फलित ज्योतिष से कब, कैसे, कौन, कितना का उत्तर स्पष्ट रुप से चाहते हैं , किन्तु ज्योतिष से प्राप्त उत्तर अस्पष्ट, छायावादी और प्रतीकात्मक होता है। पारभाषक जानकारी आज के प्रतियोगितावादी युग में नीति.निर्देशक नहीं हो सकती ।

संभवतः यही कारण है कि आजतक विश्व के विश्व-विद्यालयों में फलित-ज्योतिष को समुचित स्थान नहीं मिल सका है। फलित ज्योतिष का सम्यक् विकास कई कारणों से नहीं हो सका। ज्योतिषयों को भ्रांति है कि यह वैदिककालीन सर्वाधिक पुरानी विद्या या ब्रह्म विद्या है , इसमें वर्णित समग्र नियम पुराने ऋषि-मुनियों की देन है , इसलिए फलित ज्योतिष पूर्ण विज्ञान है तथा इन नियमों में किसी प्रकार के संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं है। अतः ये फलित ज्योतिष की कमजोरियों को ढूढ़ नहीं पाते हैं। यदि कोई व्यक्ति इसकी कमजोरियों की ओर इशारा करता है तो ज्योतिषी इसे स्वीकार नहीं कर पाते हैं। ज्योतिष की कमजोरियों की अनुभूति होने पर उसकी क्षति-पूर्ति ज्योतिषी सिद्ध पुरूष बनकर करते हैं, मौलिक चिंतन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का वे सहारा नहीं ले पाते। फलतः विकसित गणित या विज्ञान की दूसरी शाखाओं के सहयोग से वे वंचित रह जाते हैं।

दूसरी ओर भविष्य के प्रति जिज्ञासु एक ज्योतिष-प्रेमी इस विद्या को पूर्ण विकसित समझते हुए ऐसी अपेक्षा रखता है कि ज्योतिषी के पास जाकर भविष्य की भावी घटनाओं की न वह केवल जानकारी प्राप्त कर सकता है ,वरन् अनपेक्षित अनिष्टकर घटनाओं पर नियंत्रण प्राप्त करके अपने बुरे समय से छुटकारा भी प्राप्त कर सकता है। किन्तु ऐसा न हो पाने से लोगों को निराशा होती है , ज्योतिष के प्रति आस्था में कमी होती है, फलित ज्योतिष वैदिककालीन स्वदेशी विद्या है, भारतीय संस्कृति , दर्शन और आध्यात्म की जननी है, इसके विकास के लिए सरकारी कोई व्यवस्था नहीं है । प्रशासक और बुद्धिजीवी वर्ग ज्योतिष की अस्पष्टता को अंधविश्वास समझते हैं । जिन मेधावी , कुशाग्र बुद्धि व्यक्तियों को ज्योतिष के विकास में अतिशय रुचि होती है , अर्थाभाव होने से “शोध-कार्य में पूर्ण समर्पित नहीं हो पाते। इस कारण मौलिक लेखन का अभाव है , इसलिए ज्योतिष बहुत दिनों से यथास्थितिवाद में पड़ा हुआ है।

मै इसके वर्तमान स्वरूप का अंधभक्त नहीं 

मुझे फलित ज्योतिष में गहरी अभिरुचि है ,परंतु मै इसके वर्तमान स्वरुप का अंधभक्त नहीं हूं । इसकी यथास्थितिवादिता वैज्ञानिक स्वरुप प्राप्त करने में सबसे बड़ी बाधा बन गयी है। मै ज्ञानपूर्वक इसमें अंतर्निहित सत्य और असत्य को स्वीकार करने का पक्षधर हूं । मै इस विषय में सत्य के साक्षात्कार से इंकार नहीं करता, इसे उभारने की आवश्यकता है , किन्तु इससे संश्लिष्ट भ्रांतियों का उल्लेख कर मैं इनका उन्मूलन भी चाहता हूं, ताकि यह निःसंकोच बुद्धिजीवी वर्ग को ग्राह्य हो, इसे जनसमुदाय का विश्वास प्राप्त हो सके। कुछ भ्रांतियों की वजह से फलित ज्योतिष की लोकप्रियता घट रही है , यह उपहास का विषय बना हुआ है।

ज्योतिषियों से विनम्र निवेदन
ब्लाग को पढ़ाने से पूर्व ही प्रबुद्ध ज्योतिषियों से विनम्र निवेदन करना चाहूंगा कि एक ज्योतिषी होकर भी मैने फलित ज्योतिष की कमजोरियों को केवल स्वीकार ही नहीं किया , वरन् आम जनता के समक्ष फलित ज्योतिष की वास्तविकता को यथावत रखने की चेष्टा की है। मेरा विश्वास है कि कमजोरियों को स्वीकार करने पर जटिलताएं बढ़ती नहीं , वरन् उनका अंत होता है। फलित ज्योतिष की कमजोरियों को उजागर कर ज्योतिष के इस अंग को मै कमजोर नहीं कर रहा हं , वरन् इसके द्रुत विकास और वैज्ञानिक विकास के मार्ग को प्रशस्त करने की कोिशश कर रहा हूं। बहुत सारे ज्योतिषी बंधुओं को कष्ट इस बात से पहुंच सकता है कि परंपरागत बहुत सारे ज्योतिषीय नियमों को अवैज्ञानिक सिद्ध कर देने से ज्योतिष-शास्त्र में अकस्मात् शून्य की स्थिति पैदा हो जाएगी।

केवल ज्योतिष कर्मकाण्ड में लिप्त रहनेवाले विद्वानों को घोर असुविधाओं का सामना करना पड़ेगा , कुछ आर्थिक क्षति भी हो सकती है , किन्तु यदि हम सचमुच ही फलित ज्योतिष का विकास चाहते हैं , तो इस प्रकार के नुकसान का कोई अर्थ नहीं है। आम ज्योतिषियों के लिए यह काफी अपमान का विषय है कि जिस विषय पर हमारी आस्था और श्रद्धा है , जिस विषय पर हमारी रुचि है , उसे समाज का बुिद्धजीवी वर्ग अंधविश्वास कहता है। दो-चार की संख्या में पदाधिकारीगण ज्योतिष पर विश्वास भी कर लें, इसपर अपनी रुचि प्रदिशZत कर ले , इससे भी बात बननेवाली नहीं है , क्योकि वे सार्वजनिक रुप से इस विद्या की वकालत करने में कहीं-न-कहीं से भयभीत होते हैं। अत: आज विश्व के विश्वविद्यालयो में इसे उचित स्थान नहीं प्राप्त है। इसकी वैज्ञानिकता पर लोगों को विश्वास नहीं है। प्रबुद्ध ज्योतिषी भी इसकी वैज्ञानिकता को सिद्ध नहीं कर पाते हैं। ऐसी स्थिति में इस विद्या के प्रति संदेह अनावश्यक नहीं है।

आज आवश्यक है , हम ज्योतिष की कमजोरियों को सहज स्वीकार करते हुए इसके वैज्ञानिक पहलू का तेज गति से विकास करें। बहुत ही निष्ठुर होकर मैं फलित ज्योतिष की कमजोरियों को जनता के समक्ष रख रहा हूं । परंपरागत ज्योतिषी इसका भिन्न अर्थ न लें। ऐसा करने का उद्देश्य केवल यही है कि मै फलित ज्योतिष में किसी प्रकार की कमजोरी नहीं देखना चाहता हंं। विश्वविद्यालय इसकी वैज्ञानिकता को कबूल करे , इसे अपनाकर इसके प्रति सम्मान प्रदिशZत करें । जबतक इसे वैज्ञानिक आधार नहीं प्राप्त हो जाता, तबतक इसके अध्ययेता और प्रेमी आदर के पात्र हो ही नहीं सकते। अत: अवसर आ गया है कि सभी ज्योतिषी इसके वैज्ञानिक और अवैज्ञानिक अध्याय पर ठंडे दिमाग से सूझ-बूझ के साथ विचार करें तथा इसे विज्ञान सिद्ध करने में कोई कसर न रहने दें। अपनी कमजोरियों को वही स्वीकार कर सकता है , जो बलवान बनना चाहता है। अकड़ के साथ कमजोरियों से चिपके रहने वाले व्यक्ति को अज्ञात भय सताता है। वे ऊंचाई की ओर कदापि प्रवृत्त नहीं हो सकते।

यह ब्लाग ज्योतिष-प्रेमियों को फलित ज्योतिष की कमजोरियों की ओर झॉकने की प्रवृत्ति का विकास करेगी तथा साथ ही साथ उनके उत्साह को बढ़ाने के लिए फलित ज्योतिष के कई नए वैज्ञानिक तथ्यों की जानकारी भी प्रदान करेगी । इस पुस्तक के माध्यम से मै विश्व के समस्त ज्योतिष प्रेमियों को यह संदेश देना चाहता हंू कि वे फलित ज्योतिष की त्रुटियों से छुटकारा पाने में अपने अंत:करण की आवाज को सुनें। ज्योतिषीय सिद्धांतों और नियमों को ऋषि-मुनियों या पूर्वजों की देन समझकर उसे ढोने की प्रवृत्ति का त्याग करें। जो सिद्धांत विज्ञान पर आधारित न हो , उसका त्याग करें तथा जो नियम विज्ञान पर आधारित हों, उनको विकसित करने में तल्लीन हो जाएँ

विश्वविद्यालयों द्वारा स्वीकृति पाना आवश्यक

भौतिक विज्ञान , रसायन विज्ञान , गणित या अन्य विज्ञानों के विभाग में लाखों विद्यार्थी नियमपूर्वक पढ़ाई कर रहें हैं और इसे सीखने में गर्व महसूस कर रहें हैं। ऐसा इसलिए हो पा रहा है कि इन विषयों को विश्वविद्यालय में मान्यता मिली हुई है। फलित ज्योतिष विश्वविद्यालयों द्वारा स्वीकृत नहीं है इसलिए इसे कोई पढ़ना नहीं चाहता । इसे पढ़कर इस भौतिकवादी युग में किस उद्देश्य की पूर्ति हो पाएगी ? केवल अंत:करण के सुख के लिए इसे पढ़ने का कार्यक्रम कबतक चल सकता है ? कबतक ज्योतिषियों कों फलित ज्योतिष की वैज्ञानिकता को प्रमाणित करने के लिए तर्क-वितकोZ के दौर से गुजरना होगा ? आज भी संसार में ऐसे लोगों की कमी नहीं , जो नि:स्वार्थ भाव से फलित ज्योतिष के विकास और इसे उचित स्थान दिलाने की दिशा में कार्यरत हैं ,किन्तु जाने-अनजाने उनकी सारी शक्ति ` विंशोत्तरी दशा पद्धति ´ में उलझकर रह गयी है। ग्रह-शक्ति के सही सूत्र को भी प्राप्त कर पाने में वे सफल नहीं हो सके हैं। मेरा विश्वास है कि यदि आप यह ब्लाग गंभीरतापूर्वक पढ़ेंगे तो नििश्चत रुप से समझ पाएंगे कि फलित ज्योतिष का विकास अभी तक क्यों नहीं हो सका ?

झाड़झंखाड़ों को काटकर बनाया गया है एक सुंदर पथ 

इस दिशा में शौकिया काम करनेवालों को यह जानकर अत्यधिक प्रसन्नता होगी जब उन्हें मालूम होगा कि फलित ज्योतिष के सिद्धांत , नियम और उपनियमों के घने बीहड़ जंगलों में जहॉ वे भटकाव की स्थिति में थे , अब झाड़-झंखाड़ों को काटकर एक सुंदर पथ का सृजन किया जा चुका है , लेकिन मै भयभीत हूं , यह सोंचकर कि कहीं अतिपरंपरावादी ज्योतिषी जो भटकावपसंद थे , कहीं मुझपर आरोप न लगा बैठे कि मैने उनके सुंदर जंगलों को नष्ट कर दिया है क्योकि मेरे एक लेख को पढ़कर एक विद्वान ज्योतिषी ने मेरे ऊपर इस प्रकार का आरोप लगाया था।- 

वह नहीं नूतन , जो पुरातन की जड़ हिला दे।
नूतन उसे कहूंगा , जो पुरातन को नया कर दे। 

ज्योतिषी बंधुओं , पुरातन को हिलाना मेरा उद्देश्य नहीं है , लेकिन कुछ नियमों और सिद्धांतों को ढोते-ढोते आप स्वयं हिलने की स्थिति में आ गए हैं , आप थककर चूर हैं , आप हजारो बार इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि इन नियमों में कहीं न कहीं त्रुटियॉ हैं , फलित ज्योतिष के विकास में ठहराव आ गया है। इससे बचने के लिए पुराने का पुनमूर्ल्यांकण और नए नियमों का सृजन करना ही होगा ,अन्यथा हम सभी उपेक्षित रह जाएंगे। प्रस्तुत पुस्तक इस दिशा में काफी सहयोगी सिद्ध होगी। अंत में मै पुन: सभी ज्योतिषियों से क्षमा मॉगता हूं । सही समीक्षा के द्वारा फलित ज्योतिष का ऑपरेशन किया गया है , इससे कई लोगों की भावनाओं को चोट भी पहुंच सकती है , किन्तु मेरी कलम से लोग आहत हों ,यह उद्देश्य कदापि मेरा नहीं है। मुझे आप सबों के सहयोग की आवश्यकता है। 

7 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

अंधविश्वास पर नहीं वरन तर्क की कसौटी को भी बताती अच्छी प्रस्तुति

मनोज कुमार ने कहा…

यह सब विचारनीय मुद्दे हैं। सबको इसे सकारात्मक लेना चाहिए।

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद ने कहा…

अज्ञानी अपने आप को ज्योतिष बताकर इस विद्या को पाखण्ड का दर्जा दिला दिया है॥

Sanju ने कहा…

बहुत अच्छा.....

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

आप इस विषय पर एक अच्छी पुस्तक लिख सकती हैं, जिसका मैं इंतजार करूँगा.

विष्णु बैरागी ने कहा…

पहली नजर में यह सब गले उतर रहा है।

महेश चन्द्र पन्त ने कहा…

आपने बहुत सही जानकारी दी है, यह बहुत ही तर्क संगत भी है,
अभिवादन
nakshatralok.com