रविवार, 1 जनवरी 2012

धन प्राप्ति या ज्ञान के प्रचार प्रसार का .. 2012 का क्‍या है आपका सपना ??

सार्थक चिंतन और प्रयास से भी हर वर्ष वो नहीं मिल पाता , जिसकी इच्‍छा या आकांक्षा के लिए हमारा चिंतन और प्रयास होता है। भले ही 12 वर्षों बाद अपने घर में व्‍यतीत किए गए समय के कारण पारिवारिक एवं स्‍थायित्‍व के मामलों के कारण इस वर्ष की गिनती जीवन के बहुत ही सुखमय समय के रूप में की जा सकती है , पर 2011 का वर्ष हाल फिलहाल के कुछ वर्षों की तुलना में की लक्ष्‍य की ओर बढने की दृष्टि से कुछ कमजोर माना जा सकता है। हालांकि इसका अनुमान मुझे पहले से ही था , किसी दिन पारिवारिक कार्यक्रम , कभी पारिवारिक दायित्‍व , स्‍वास्‍थ्‍य की समस्‍या , कंप्‍यूटर या नेट की समस्‍या कुल मिलाकर परिस्थितियों के उबड खाबड धरातल ने काम करने का ही मौका नहीं दिया , परिणाम की उम्‍मीद भी कैसे की जा सकती थी ??

25 दिसंबर को सैंटा के बहाने बच्‍चों के विश को जानना और दिसंबर के अंतिम सप्‍ताह में अपने लिए नए वर्ष के रिजोल्‍युशन लिए जाने की परंपरा में एक बात तो दिखाई देती ही है कि हमारे नीति निर्धारण में बच्‍चों तक का महत्‍व होना चाहिए। नए वर्ष में अपने कार्यक्रमों को अंजाम देने में हमेशा ही मैने आसपास में मौजूद लोगों की इच्‍छा का ध्‍यान रखा है , माता पिता और छोटे भाई बहनों के बाद ससुराल वालों की , अपने पति और बच्‍चों की इच्‍छा, उसके बाद अपने सारे क्‍लाएंट्स की इच्‍छा का भी। ब्‍लॉग जगत की टिप्‍पणियों से भी कुछ निष्‍कर्ष निकाला जाए , तो अभी तक सामान्‍य पारिवारिक जिम्‍मेदारियों से बचे समय का उपयोग करने के लिए ज्‍योतिष के क्षेत्र में शोध करने की ही सलाह मिली है। इस कारण पिछले कुछ वर्षों से अर्थ , पद और आराम की लालसा से दूर इसी दिशा में मेरे कदम आगे बढते जा रहे हैं ।

हर वर्ष की तरह पिछले कुछ दिनों से अगले वर्ष के लिए भी योजना बनाने में माथापच्‍ची चलती रही। इस वर्ष पारिवारिक दायित्‍वों के कुछ कम हो जाने से गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के प्रचार प्रसार को तेज करने के कार्यक्रम बनाना अधिक जरूरी लग रहा है, ताकि जनसामान्‍य इसका कुछ अच्‍छे ढंग से लाभ उठा सके। इसलिए पापाजी के लिखे सारे लेखों के साथ साथ अपने सभी लेखों को संग्रहित , संपादित और प्रकाशित करने के कार्यक्रमों पर कुछ दिनों से काम शुरू कर दिया था। नए वर्ष में जल्‍द से जल्‍द इसके प्रकाशित करने की दिशा में प्रयास कर दूंगी। यदि इसमें कुछ देर की संभावना लगी तो इसकी पीडीएफ फाइल बनाकर इंटरनेट पर अवश्‍य डाल दी जाएगी , ताकि जनसामान्‍य हमारे ज्‍योति‍षीय विचारों और सोंच को जान सके। इसके बाद ही सबके बीच गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के सिद्धांत की पुस्‍तक लायी जा सकेगी।

काफी दिनों बाद इस वर्ष पुराने वर्ष को विदा करने और नए वर्ष के स्‍वागत करने के वक्‍त हमारे पास मेरा भाई विशेष कुमार हैं , इसलिए 2012 के लिए बनाए गए कार्यक्रम को हम दोनो ने साथ साथ शेयर किया। इंडियन नेवी से सत्रह वर्ष की नौकरी से रिटायर करने के बाद इसने चार प्रतियोगिताएं पास की , बैंक, दिल्‍ली मेट्रो और डी टी सी की नौकरी को छोडकर दिल्‍ली सरकार में शिक्षक की नौकरी ज्‍वाइन की। पेंशन और तनख्‍वाह के चालीस हजार से अधिक रूपयों से इन्‍हें संतोष नहीं,  बचे समय का उपयोग एक पार्ट टाइम बिजनेस में करते हैं , क्‍यूंकि इन्‍हें ईमानदारी से ही सही, पर अधिक से अधिक पैसे कमाने की ख्‍वाहिश है। अपने साथ ही साथ अन्‍य लोगों को भी बेहतर जीवन जीने की राह‍ दिखाते हैं । इस वर्ष भी इनका रिजोल्‍युशन ऐसी जीवन शैली जीने का है  जिसमें वर्ष के अंत तक इनकी कमाई कई गुणी हो जाए।


भाई बहन होते हुए भी दोनो के सिद्धांत एक दूसरे से बिलकुल अलग, इस कारण पिछले 24 घंटों से हम दोनो के मध्‍य अच्‍छी खासी बहस चली। मेरा कार्यक्रम ज्ञान के प्रचार प्रसार का है, तो इनका धनार्जन का, पर हम दोनों में से कोई गलत नहीं। चूंकि किसी कार्यक्रम में मुझे धन की आवश्‍यकता नहीं होती , इसलिए मैं इसे महत्‍व नहीं देती , पर उन्‍हें तो कदम कदम पर पैसों की आवश्‍यकता है। उनका मानना है, वह दौर और था जब हम घर का खाना खाकर मस्‍त रहते थे। आज शिक्षा और इलाज तक के लिए कोई सरकारी सुविधा नहीं , बाजार में इतने तरह के साधन उपलब्‍ध हैं , अब पैसों की कमी के कारण हर बात से समझौता करना पडता है , यहां तक कि पैसे हों तो माता पिता खुश, पैसे हों तो बीबी बच्‍चे खुश , आज के आर्थिक युग में बिना पैसे के अपनी जबाबदेहियों को किस प्रकार पूरा किया जा सकता है ??

24 घंटों के दौरान मिले उसके तर्क ने तो मुझे पहली बार धन को लेकर भी कुछ सोंचने को मजबूर किया , आनेवाले वर्षों में आपका लक्ष्‍य भी अधिक से अधिक धन कमाने का हो और पूंजी की कमी से कोई रास्‍ता न दिखाई दे रहा हो , तो आप विशेष कुमार जी से संपर्क कर सकते हैं। हालांकि ज्‍योतिष से भी धन कमाने की संभावना की कमी नहीं , पर इसने उसका सहारा नहीं लिया है। वैसे इतनी जल्‍दी तो मेरी धारणा नहीं बदल सकती , मैं ज्ञान के प्रचार प्रसार के अपने संकल्‍प पर कायम हूं। ज्ञान के प्रचार प्रसार में सहयोग रखनेवाले हमारे साथ चल सकते हैं। इस पूरे वर्ष के दौरान धन की कमी से ज्ञान के प्रचार प्रसार में कोई दिक्‍कत आयी तो अगले वर्ष मैं भी धन के प्राप्ति के ही कार्यक्रम बनाऊंगी !!

11 टिप्‍पणियां:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

इस पर तो बार बार सोचना पड़ेगा.

वन्दना ने कहा…

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाओ के साथ आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
अवगत कराइयेगा ।

http://tetalaa.blogspot.com/

डॉ टी एस दराल ने कहा…

एक स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए , नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें जी ।

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद ने कहा…

ज्ञान का रास्ता भी उदर से होकर ही गुज़रता है। यह ठीक है कि लालच बुरी बला है पर कुछ धन तो आवश्यक है जीने के लिए॥

Sanju ने कहा…

नए साल की 'Mubarakbad'

डॉ.मीनाक्षी स्वामी ने कहा…

आपको व आपके परिवार को नव वर्ष की मंगल कामनाएं। आपके तय किये सारे लक्ष्य पूरे हों।

Ashok Bajaj ने कहा…

आपको नव-वर्ष 2012 की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !

विष्णु बैरागी ने कहा…

सबकी अपनी-अपनी सोच और अपनी-अपनी प्राथमिकताऍं।

वाणी गीत ने कहा…

ज्ञान के प्रसार के साथ धनार्जन के बारे में सोचना ही पड़ता है ...जैसे हो सकता है कि कुछ बच्चों को मुफ्त में पढ़ा दे मगर अपने बच्चों की महँगी कोचिंग फीस तो देनी ही पड़ेगी :)
नव वर्ष की बहुत शुभकामनायें !

संध्या शर्मा ने कहा…

आपके सभी संकल्प पूरे हों... धन सब कुछ नहीं है ये सही है पर कुछ तो है न बिना पैसे के जिम्मेदारियां पूरी नहीं की जा सकती...

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

ji han ye bhi jaruri hai..........