गुरुवार, 5 जनवरी 2012

बोर्ड की परीक्षाओं में प्रश्‍नपत्र कठिन आएंगे ... पर परिणाम संतोषजनक !!!!

कल समाचार पत्र में पढने को मिला कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बोर्ड परीक्षाओ के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। 10वीं कक्षा की परीक्षाएं एक मार्च से 26 मार्च तक तथा 12वीं की परीक्षाएं भी एक मार्च से शुरू होंगी और 13 अप्रैल तक चलेंगी। लाखों परीक्षार्थी इस परीक्षा में बेहतर कर पाने की तैयारी में जोर शोर से लगे होंगे। आज के दौर में वस्‍तुनिष्‍ठ सवालों के परीक्षा के परिणामों में जहां एक ओर विद्यार्थियों के परिश्रम की भूमिका होती है , वहीं दूसरी ओर इनमें प्रश्‍न पत्र का सहज या कठिन होना भी मायने रखता है। इसलिए परीक्षा होने तक विद्यार्थियों की धडकनें बढी रहती हैं।


ज्‍योतिष के हिसाब से विद्या और बुद्धि का ग्रह बुध विद्यार्थियों को बहुत अधिक प्रभावित करता है। जन्‍मकालीन बुध के मजबूत होने से ही विद्यार्थी जीवन में तर्कशील मस्तिष्‍क और अध्‍ययन का सुखद या वातावरण प्राप्‍त करते हैं , विपरीत स्थिति में किसी ज्ञान को अर्जित करने में उनकी समझ कम होती है और उनका वातावरण कष्‍टकर होता है। खासकर 12 वर्ष की उम्र से 24  वर्ष की उम्र तक हर व्‍यक्ति बुध के प्रभाव में होता है तथा 18 वर्ष की उम्र में यह प्रभाव सर्वाधिक देखा जा सकता है। 

इसी प्रकार गोचर में बुध की स्थिति जब मजबूत होती है तो उस वक्‍त विद्यार्थियों के सम्‍मुख सुखद वातावरण बनता है , पढाई लिखाई और अन्‍य मामलों में वो संतुष्‍ट महसूस करते हैं , जबकि बुध ग्रह की स्थिति कमजोर हो , तो अस्‍थायी तौर पर विद्यार्थियों के सम्‍मुख कुछ न कुछ दबाब की स्थिति बननी शुरू हो जाती है और वे परेशानी महससू करते हैं , हालांकि इसका स्‍थायी प्रभाव अधिक नहीं देखा जाता । जैसे ही गोचर में बुध ग्रह की अच्‍छी स्थिति आरंभ होती है , विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति सामान्‍य हो जाती है।


इस वर्ष गोचर में बुध ग्रह की स्थिति 5 मार्च के आसपास से ही कमजोर होनी शुरू हो जाएगी , 23 मार्च तक यह बहुत ही कमजोर बना रहेगा , उसके बाद कुछ सुधरता हुआ 20 अप्रैल के आसपास ही सामान्‍य हो पाएगा। बुध के कमजोर होने के दौरान दोनो परीक्षाओं के होने का अर्थ यह है कि विद्यार्थियों को कुछ अतिरिक्‍त दबाब झेलने को बाध्‍य होना होगा। पिछली परीक्षाओं के दौरान भी हमने गौर किया है कि यदि ऐसे समय में परीक्षाएं होती हैं तो प्रश्‍नपत्र कठिन होते हैं , जिससे बच्‍चों को उम्‍मीद की तुलना में कुछ कम नंबर आने का भय सताता है , इसलिए वे चिंतित रहते हैं। इस दृष्टि से पूरे परीक्षा के दौरान इनका भय बना रहेगा , पर 7 , 8 , 22 , 23 मार्च और 2 , 3 अप्रैल खासे तनाव देने वाले होंगे।


लेकिन यदि परीक्षा परिणाम के समयांतराल , मई के अंतिम सप्‍ताह और जून के प्रथम सप्‍ताह पर ध्‍यान दिया जाए , तो उस वक्‍त बुध ग्रह की स्थिति बहुत अच्‍छी है , इसलि ए परिणाम के वक्‍त प्रश्‍नपत्र में हुई किसी गडबडी के खामियाजे के रूप में विद्यार्थियों को मार्क्‍स दिए जा सकते हैं या फिर सामान्‍य तौर पर परीक्षा परिणाम में हुई गडबडी के कारण विभिन्‍न कॉलेजों का कट ऑफ मार्क्‍स कम हो सकता है , जिससे विद्यार्थियों को राहत मिलेगी। इसलिए विद्यार्थियों को चिंता करने की कोई आवश्‍यकता नहीं , बस मन लगाकर अपने पाठ पूरे करें। मेरी शुभकामनाएं लाखों विद्यार्थियों के साथ है।

6 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

जानकारी देने के लिए शुक्रिया!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

हम तो बचे हैं.

मनोज कुमार ने कहा…

ज्ञानप्रद विवेचन।

Neeraj Rohilla ने कहा…

वाकई????
ग्रहों के प्रभाव से प्रश्नपत्र कठिन हो जाते हैं?

मुझे लगता है ग्रहों के प्रभाव के ज्यादा ये बाते माने रखेंगी।

१) अगर प्रश्नपत्र बनाने वाले/वाली ने समय से नाश्ता किया है तो प्रश्नपत्र आसान होगा।
२) अगर घर से स्कूल आते समय टैफ़िक जाम कम मिला तो प्रश्नपत्र आसान होगा।
३) यदि प्रश्नपत्र बनाने वाले/वाली के पति/पत्नी/(कुंवारे होने पर प्रेमी) ने उससे झगडा नहीं किया है तो प्रश्नपत्र आसान होगा।

वाकई, पहले क्रिकेट, शेयर बाजार और परीक्षाओं के प्रश्नपतत्रों पर भी ग्रहों की गतियों का क्या प्रभाव पडेगा आप डंके की चोट पर बता रही हैं। और साथ ही पूरे विश्वास के साथ कि आपकी विधि फ़लित ज्योतिष से श्रेष्ठ है।

संगीता जी, आपकी प्रविष्टियों पर मैने हमेशा वही लिखा है जो महसूस किया है क्योंकि पता है कि आप इसे केवल पोस्ट के सन्दर्भ में ही लेंगी। लेकिन एक बार पुर्नविचार करके देखें कि आप किस दिशा में बढ रही हैं।

आभार,

संगीता पुरी ने कहा…

नीरज रोहिल्‍ला जी,
पहले क्रिकेट, शेयर बाजार और परीक्षाओं के प्रश्नपतत्रों .. ऐसा नहीं है, मैं आरंभ से ही हर विषय पर लिखती आ रही हूं .. हो सकता है, आपका ध्‍यान अब गया हो!!

जरूरी नहीं कि हम तनाव में होते हैं .. तभी सारी परिस्थितियां गडबड मिलती है .. कभी भी अचानक हमारे सामने अनुकूल और प्रतिकूल वातावरण दिखाई पड सकता है .. कभी 12,कभी 6, तो कभी ढाई वर्ष के लिए .. तो कभी दो चार महीने और कभी दो घंटों के लिए ग्रहों के प्रभाव से ऐसा हो सकता है .. और मैं इसी बात की चर्चा अपने ब्‍लॉग पर करती हूं!!

किसी भी विषय पर बातचीत तभी संभव होती है या बढ पाती है .. जब दोनो पक्षों को उस विषय की जानकारी हो .. मैं ज्‍योतिष के अज्ञानियों के साथ कितना भी तर्क कर लूं .. उन्‍हे संतुष्‍ट नहीं कर सकती .. क्‍यूंकि ज्‍योतिष पर न विश्‍वास करने वाले ज्‍योतिष पर विश्‍वास करने वालों से अधिक अंधविश्‍वासी हैं .. इसलिए उनसे बात करना बेकार है!!

जहां तक मेरी संतुष्टि का सवाल है .. मैं दिन प्रतिदिन अपने लक्ष्‍य की ओर बढ रही हूं .. और निकट ही वो दिन दिखाई दे रहा है .. जब ज्‍योतिष को एक विज्ञान के रूप में साबित कर पाऊंगी !!

विष्णु बैरागी ने कहा…

संकट और संकट में ही निदान की सूचना - दोनों एक साथ।