शुक्रवार, 23 मार्च 2012

'ज्‍योतिष दिवस' आते जाते रहेंगे .. न ज्‍योतिष और न ही ज्‍योतिषी को सम्‍मान मिलेगा !!

कल के अखबार में पढने को मिला कि इस वर्ष से नव संवत्सर को 'विश्व ज्योतिष दिवस' के रूप में मनाया जाएगा। इसमें कुछ गलत नहीं , जीवन के हर कमजोर संदर्भ को मजबूती देने के लिए उन्‍हें वर्ष के एक एक दिन निश्चित किए गए हैं तो ज्‍योतिष के लिए तो होने ही चाहिए। भविष्‍य को जानने की उत्‍सुकता तो सबमें होती ही है , खासकर बडे स्‍तर पर पहुंचे लोगों को। जीवन आपके हाथ में कभी नहीं होता , भले ही कुछ समय तक लोगों को ऐसा भ्रम होता रहता है।


जिस दिन यह भ्रम टूटता है , उसी दिन से किसी अज्ञात शक्ति के प्रति लोगों का झुकाव बनने लगता है और लोग अंधविश्‍वास में फंसने लगते हैं। जिनका भविष्‍य अनिश्चित दिशा में जा रहा होता है , उनके लिए भविष्‍य की जानकारी फायदेमंद भी होती है। और चूंकि भविष्‍य को जानने की एकमात्र विधा ज्‍योतिष है , इसलिए जीवन में इसके महत्‍व को इंकार नहीं किया जा सकता। ज्‍योतिष ही सही जानकारी ही समाज से हर प्रकार के भ्रम का उन्‍मूलन कर अंधविश्‍वास को बढने से रोक सकती है। इसलिए इसके विकास की ओर ध्‍यान तो दिया ही जाना चाहिए।


मुझे तो ज्‍योतिष के विकास के मार्ग में सबसे बडी बाधा दिखती है , लोगों का पूर्वाग्रह ग्रस्‍त होना , चाहे वे ज्‍योतिषी हों या वैज्ञानिक , परंपरावादी हों या अधुनिक विचारधारा के लोग , सबने ज्‍योतिष को लेकर कोई न कोई भ्रम पाल रखा है। जबतक आज के वैज्ञानिक युग के अनुरूप ज्‍योतिष की व्‍याख्‍या नहीं की जाएगी , ज्‍योतिष को उपयोगी या लोकप्रिय नहीं बनाया जा सकता। जमशेदपुर, झारखंड में हुए ज्‍योतिष सम्‍मेलन में ही मेरे पिताजी श्री विद्या सागर महथा जी ने ज्‍योतिषियों से यही कहा था।

भौतिक विज्ञान में विभिन्‍न प्रकार की शक्तियों का उल्‍लेख है , हर शक्ति का शक्तिमापक ईकाई है , उसकी माप के लिए वैज्ञानिक सूत्र हैं , उपकरण हैं , अत: ये निकश्‍चत सूचना प्रदान करने में कामयाब हैं , पर फलित ज्‍योतिष के वैज्ञानिकों से पूछा जाए कि ग्रहशक्ति की तीव्रता को मापने के लिए उनके पास कौन सा वैज्ञानिक सूत्र या उपकरण हैं , तो इस प्रश्‍न का उत्‍तर ज्‍योतिषि नहीं दे सकते । और जबतक ज्‍योतिषियों के पास ग्रहों की शक्ति और उसके प्रतिफलन काल का एक प्रामाणिक सूत्र नहीं होगा , लोग इसे अनुमान मानते रहेंगे , अंधविश्‍वास मानते रहेंगे।

उन्‍होने कहा था कि इक्‍कीसवीं सदी कंप्‍यूटर की होगी , इसकी बहुआयामी विशेषताएं तो जगजाहिर हैं , पर इसकी एक विशेषता यह भी होगी कि नकली और अव्‍यवस्थित नियमों की पोल बहुत आसानी से उद्घाटित कर सकता है। ग्रहों की शक्ति के दस बीस नियमों ,कई दशा पद्धतियों के साथ ही साथ गोचर के आधार पर भविष्‍यवाणी करने में कंप्‍यूटर भी समर्थ नहीं हो सकते। क्‍योंकि आम ज्‍योतिषी तो अनुमान का सहारा ले सकता है , पर एक कंप्‍यूटर नहीं लेगा ,हमें उसे सशक्‍त आधार देना ही होगा।

ज्‍योतिष को उसकी कमजोरियों से छुटकारा दिलाने के लिए पूरे जीवन किए गए प्रयास के बाद समझ में आ ही गया कि ग्रहों की सारी शक्ति उसकी गति में है। हमें बंदूक की एक छोटी सी गोली में शक्ति दिखाई पउती है , एक पत्‍थर का टुकडा लेकर हम अपने को बलवान समझते हैं , क्‍योंकि इन्‍हें गति देकर इनसे शक्ति उत्‍सर्जित करवाया जा सकता है। पर जब ग्रहों की शक्ति ढूंढने की बारी आती है तो ज्‍योतिषी उनकी गति पर ध्‍यान न देकर स्थिति पर होता है। इसके बाद इन्‍होने ग्रहों की शक्ति के लिए सूत्र का प्रतिपादन कर पूरे देश के ज्‍योतिषियों को ज्‍योतिष के वास्‍तविक स्‍वरूप को समझाना चाहा , पर इसे स्‍वीकार करने को कोई ज्‍योतिषी तैयार नहीं थे।

शरीर ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्‍व करता है और इसमें मौजूद ग्रंथियां ग्रहों के हिसाब से चलती हैं। इसलिए व्‍यक्ति के जीवन को निर्धारित करने में ग्रहों का हाथ है ,और इसे ज्‍योतिष के माध्‍यम से ही समझा जा सकता है।  ज्‍योतिष को विकसित बनाने के लिए जहां एक ओर ज्‍योतिषियों को इसकी समस्‍त कमजोरियों को समझकर इसे सुलझाने की जरूरत है ,वहीं दूसरी ओर वैज्ञानिकों को भी इसमें निहित सत्‍य को समझने की आवश्‍यकता है। तभी ज्‍योतिष का विकास हो सकता है , अन्‍यथा कितने 'ज्‍योतिष दिवस' आते जाते रहेंगे ,न ज्‍योतिष और न ही ज्‍योतिषी को सम्‍मान मिलेगा। समाज उन्‍हें अंधविश्‍वासी न समझे , इसलिए भीड में लोग ज्‍योतिषी से बात करने से भी कतराते रहेंगे। 

10 टिप्‍पणियां:

परमजीत सिँह बाली ने कहा…

वास्तव मे ज्योतिष को अधिकतर समझे बिना नकार दिया जाता है। जिस कारण इसके आगे बढने के रास्ते भी बन्द हो जाते हैं। इसके लिये ज्योतिषों का सामूहिक प्रयास ही कोई दिशा दे सकता है।

आप ने सही कहा मात्र ज्योतिष दिवस मनाने से कुछ नही होने वाला।

संध्या शर्मा ने कहा…

जी हाँ आपने सही कहा है,ज्‍योतिष विद्या को विकसित बनाने के लिए ज्‍योतिषियों और वैज्ञानिकों को मिलकर प्रयास करने होंगे.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

कोई भी विद्या/विधा तभी विकसित और समृद्ध हो सकती है जब उसके बारे में पूर्वाग्रह छोड़कर निष्पक्ष भाव से अध्ययन किया जाये.
वह समय भी अवश्य आयेगा जब ज्योतिष को सम्मान मिलेगा.

Vijai Mathur ने कहा…

आपने सार्थक विचार प्रस्तुत किए हैं । अर्थ शास्त्र का ग्रेशम सिद्धान्त यहाँ भी लागू है कि,'अच्छी मुद्रा को खराब मुद्रा चलन से बाहर कर देती है'।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सार्थक विचार ... आज सब वैज्ञानिक कसौटी पर ही तोलते हैं ...

नव संवत्सर की हार्दिक शुभकामनायें...

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

वह सुबह कभी तो आएगी……… जब …………

BS Pabla ने कहा…

सहमत

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!
नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएँ!

Vaneet Nagpal ने कहा…

आपके विचारों से सहमत | यदि हो सके तो ज्योतिष विद्या को आगे बढाने के बारे में कुछ उपाय भी सुझाएँ |

टिप्स हिंदी में

पंडित ललित मोहन कगडीयाल ने कहा…

खरबों रुपैये खर्च करने के बाद भी जब वैज्ञानिकों का कोई मिशन ख़राब हो जाता है या मनमाफिक रिजल्ट नहीं देता तो उनकी पीठ थपथपाई जाती है की आपने अच्छी कोशिश की.कोई बात नहीं ,और पैसे लगाओ,पुरानी भूलों से सबक लेते हुए दोबारा प्रयास करो.किन्तु ज्योतिषी की एक भविष्यवाणी गलत हो जाय तो उसका कैरियर ही खतरे में आ जाता है.पूरे ज्योतिष जगत को ही झूठा करार दिया जाता है.बिना ये जाने की गलती करने वाला ज्योतिषी किस स्तर का है,या वास्तव में उसे कितना ज्ञान है.और यदि वो गलत भी है तो वह स्वयं आगे के लिए सबक लेकर उस पॉइंट पर क्लियर हो चुका होता है,जो की ज्योतिष पर उसकी पकड़ की मजबूती का संकेत होता है.अस्पतालों में हजारों डाक्टरों,व करोड़ों की मशीनों के होते हुए भी मरीज मर जाता है,तो डाक्टर कहते हैं "वी ट्राईड अवर बेस्ट ".कोई भी उस मरीज के मरने पर पूरे मेडिकल साइंस पर अंगुली नहीं उठाता.किसी एक या पचासों डाक्टरों के गलत हो जाने से भी मेडिकल साइंस तो गलत नहीं मान लिया जाता. लेकिन किसी की एक गलत भविष्यवाणी पूरे शाश्त्र को ही फर्जी मान लेने के लिए काफी हो जाती है.मैं स्वयं एक ज्योतिषी होने के नाते और हज़ारों कुंडलियों का अध्ययन करने के पश्चात एक बात दावे से कह सकता हूँ की एक ज्योतिषी गलत हो सकता ,हजारों ज्योतिषी गलत हो सकते हैं किन्तु ज्योतिष शास्त्र कभी गलत नहीं हो सकता.
आपकी सोच से प्रभावित हुआ हूँ.आप जैसे गुरुओं की इस क्षेत्र में बहुत आवश्यकता है.कृपया इसी प्रकार ज्योतिष का झंडा बुलंद रखें क्योंकि आप की कोशिशों व सफलता पर मेरे जैसे कई लोगों का भविष्य निर्भर है.........प्रणाम .