गुरुवार, 29 मार्च 2012

क्‍या ज्योतिष आम जन के लिए उपयोगी हो सकता है ??

जीवन को देखने और समझने का सबका नजरिया भिन्‍न भिन्‍न होता है , कुछ लोग उथली मानसिकता के साथ इसे देखते हैं तो कुछ गहरी समझ के साथ। जो गहराई से जीवन के रहस्‍यों को समझने की कोशिश करते हैं , उन्‍हें हम दूरदर्शी और अनुभवी मानते हैं और उनकी सोंच के साथ चलने की कोशिश भी करते हैं। प्रत्‍येक परिवार में एक दो व्‍यक्ति , समाज में कुछ अनुभवी लोग आनेवाली पीढी को रास्‍ता दिखाने में काम करते हैं। कुछ तो इतने अनुभवी और ज्ञानी होते हैं , जिनकी परिवार या समाज की किसी समस्‍या को गहराई से समझते हुए उसके निराकरण का भरपूर उपाय करते है , ताकि आने वाली पीढी को उस समस्‍या का सामना न करना पडे। इस तरह छोटे छोटे स्‍तर पर ऐसे बहुत सारे अनुसंधान होते रहते हैं।

किसी भी विज्ञान को विकसित करने के लिए युगों तक न जाने कितने विद्वानों ने काम किया होता है। वर्षों तक प्रकृति में बिखरे ज्ञान को व्‍यवस्थित करने के बाद एक विज्ञान का जन्‍म होता है , जिसके प्रयोग से मानव जाति लाभान्वित होती है।  लाभ ही न हो तो किसी विज्ञान का कोई महत्‍व नहीं होता। विज्ञान के विकसित होने से पूरे राष्‍ट्र , नए युग के लिए जीने के लिए एक नई सोंच , नया ढंग आता है। सामने आती है , ऐसी जीवन शैली , जो आपको बेहतर जीवन जीने में मदद कर सकती है। पर किसी के अनुभव से या विज्ञान से लाभ प्राप्‍त करने के लिए उसपर विश्‍वास करना आवश्‍यक होता है , उसके द्वारा बनाए गए नियमों को अपने जीवन में लागू करना होता है , बिना विश्‍वास किए उसके कथनानुसार हम नहीं चल पाएंगे।

इतने वर्षों से ज्‍योतिष के नि:स्‍वार्थ अध्‍ययन और ग्रहों के जड और चेतन पर पडने वाले प्रभाव के खुलासे के बाद आज के युग के अनुरूप 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' को विकसित कर लेने के पश्‍चात् कुछ दिनों से ज्‍योतिष को मानवोपयोगी बनाने के बारे में निरंतर चिंतन चल रहा है। ग्रहों के बुरे प्रभाव को पूर्णतया दूर करने में तो हमें सफलता नहीं मिल सकती , पर ग्रहों के अच्‍छे प्रभाव को  बढाया और बुरे प्रभाव को घटाया जा सकता है। इसके अलावे ग्रहों के प्रभाव की जानकारी के बाद जीवन के प्रति मानव जाति की सोंच में एक बडा परिवर्तन आ सकता है । इसके लिए सबसे पहले ज्‍योतिष पर विश्‍वास करना होगा, ऐसी जीवन शैली विकसित करनी होगी , जिसके द्वारा हम ग्रहों के बुरे प्रभाव में आकर भी निश्चिंत रह सकें। समाज किसी सफलता और असफलता का श्रेय मनुष्‍य के साथ साथ उसके भाग्‍य को भी दे दे, तो काफी समस्‍या हल हो सकती है। कोई व्‍यक्ति निश्चिंत होकर अपनी रूचि के काम तो कर सकता है , वह सफलता की उम्‍मीद में किसी प्रकार का समझौता तो नहीं करेगा।

हम बीमारी में किसी भी पैथी की कोई दवा भी लेते हैं , तो हमारे भीतर की भावना असर करती है। हम जितने ही विश्‍वास के साथ डॉक्‍टर के दिए हुए दवा या सुझाव को ग्रहण करते हैं , हमें उतना ही अधिक फायदा नजर आता है। यहां तक कि यदि डॉक्‍टर पर विश्‍वास हो , तो उसका स्‍पर्श ही रोगी को ठीक करने में समर्थ है। चूंकि एलोपैथी पर हमें पूरा विश्‍वास है , किसी खास शारीरिक मानसिक हालातों में यदि डॉक्‍टर की सलाह न हो , तो हम बच्‍चे को गर्भ में भी आने न देंगे। यदि सबकुछ सामान्‍य हो , तब भी किसी बच्‍चे के गर्भ में आते ही हम उस हिसाब से बच्‍चे की देख रेख शुरू कर देते हैं। लोगों की यही भावना ज्‍योतिष के प्रति भी तो होनी चाहिए, शुरूआत से ही ग्रहों के हिसाब से उसकी देख भाल , रूचि के काम करने देने की छूट होनी चाहिए। सफलता में अति उत्‍साह और असफलता में नैराश्‍य को जन्‍म देने से बचना चाहिए। अच्‍छी परिस्थितियों का इंतजार किया जाना चाहिए।

पर ऐसा नहीं है , ज्‍योतिष को हम विज्ञान नहीं मानते , इसलिए हमारे जीवन शैली में इसका कोई स्‍थान नहीं है। जिनका शुरूआती जीवन असफल होता है , वो ग्रहों के प्रभाव को कुछ हद तक मानते भी हैं , पर जिनका जीवन सामान्‍य होता है , जबतक सामान्‍य बना रहता है , इसका कोई महत्‍व नहीं समझते। जिनके जीवन में सफलता आती रहती है , वे इसका श्रेय अपनी मेहनत को देते हैं। जैसे ही असफलता की शुरूआत होती है , ज्‍योतिषी के पास सबसे पहले वही पहुंचते हैं , मानो एक ज्‍योतिषी तुरंत चमत्‍कार ही कर देगा। मैने ग्रहों के बुरे प्रभाव  को कम या दूर करने से संबंधित कई लेख लिखे हैं , सबमें ग्रहों के अनुरूप अपनी जीवन शैली को ढालने के बारे में ही समझाया है, किसी चमत्‍कार की बात नहीं लिखी गयी है। समाज में जबतक ज्‍योतिष को विज्ञान के रूप में समझने की कोशिश नहीं की जाएगी , ज्‍योतिष से कोई लाभ प्राप्‍त करना नामुमकिन है। पर यह विडंबना ही है कि आजतक ज्‍योतिष को चमत्‍कार समझा जाता रहा है।

7 टिप्‍पणियां:

Raghav Abbhi ने कहा…

Well written and explained Sangeeta ji. :)

Raghav Abbhi ने कहा…

well written and explained article, Sangeeta ji.
Thanks. :)

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

ज्योतिष, विज्ञान केवल तब तक है जब तक कि वह आकाशीय पिंडों का अध्ययन करता है। उस का यह नाम ही इस लिए है कि पहले केवल आकाश से हमारी आंखों तक प्रकाश पहुँचाने वाले पिंडो़ं का अध्ययन करने वाली शाखा थी।
उस अध्ययन के आधार पर भविष्यवाणी करना पूरी तरह मिथ्या अवधारणा है।
हाँ, यदि विश्वास पैदा किया जाए तो एक मूर्ति एक शिष्य को श्रेष्ठ धनुर्धर बना डालती है। इस विश्वास का उपयोग काउंसलर्स मनुष्य के भले के लिए करते हैं वैसे ही कथित ज्योतिष के आधार पर भविष्यवाणी करने वाले लोग उन लोगों के लिए कर सकते हैं जो स्वभावतः ज्योतिष में विश्वास करते हैं। पहले के अधिकांश ज्योतिषी यही किया करते थे।
मूर्ति की पूजा करने से कोई कष्ट कम हो जाएगा यह एक अंधविश्वास है। लेकिन जब व्यक्ति का अपने आप पर से विश्वास पूरी तरह समाप्त हो जाए तो इस विश्वास का उपयोग करते हुए उस का आत्मविश्वास वापस लौटाया जा सकता है। ठीक इसी तरह का उपयोग फलित ज्योतिष का भी किया जा सकता है। लोग बड़ी संख्या में ऐसा करते भी रहे हैं। लेकिन इस से वह विज्ञान नहीं हो जाता है।

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

गत्यात्मक ज्योतिषी के और प्रखर होकर उभरने और व्यापक तौर पर स्वीकार्य होने की उम्मीद करता हूँ और शुभकामनाये देता हूँ !

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

विश्वास ही ज्योतिष विद्या को नए आयाम देता है ... अब तो वैज्ञानिक आधार भी समझ आने लगा है ... सार्थक लेख

भावना ने कहा…

aapne kuchh samay pahle mere poorane blog par meri jrthani ji ke bete ki tabiyat ke vishay me kaha tha ki aisa hamesha nahi rahega dedh saal baad sab theek ho jayega ,aur aisa hi hua hai .aapka bahut bahut dhanyavaad .

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

प्रत्येक के लिए हो सकता है.