शनिवार, 5 मई 2012

15 जुलाई से 15 सितंबर तक के अशुभ ग्रहों की स्थिति भारतीय मौसम के अनुकूल नहीं ....

भारत एक कृषि प्रधान देश है , अप्रैल आते ही भारतीय मौसम विभाग द्वारा की जाने वाली मौसम की भविष्‍यवाणी का हर किसी की इंतजार रहता है। हमारे देश में मानसून न सिर्फ कृषि , बल्कि वर्षभर पूरी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होता है। मानसून का प्रदर्शन खराब होना आर्थिक सुधारों को प्रभावित करता है। मॉनसून की स्थिति ठीक न होने से कंपनियों पर भी असर पड़ सकता है। न सिर्फ कृषि और अर्थव्‍यवस्‍था के लिए के लिए बल्कि कॉरपोरेट और उर्वरक कंपनियों के लिए भी बारिश महत्वपूर्ण है। ग्रामीण इलाकों में ट्रैक्टर की बिक्री तथा 1 लाख करोड़ रुपये वाला भारतीय उर्वरक उद्योग भी सालाना बिक्री के लिए दक्षिण पश्चिम मॉनसून पर आश्रित होता है।

मौसम विभाग के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर से दिसंबर के बीच देश में करीब 40 फीसदी कम बारिश हुई, जिसका व्यावहारिक तौर पर मतलब यह है कि देश की ज्यादातर कृषि भूमि में इस समय काफी कम नमी बची होगी। देश के करीब 80 जलाशयों में 4 अप्रैल को 48.19 अरब घनसेंटीमीटर पानी था, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 83 फीसदी है और जलाशय के पूर्ण स्तर का 31 फीसदी। लेकिन गर्मी को देखते हुए यह स्तर काफी नीचे जा सकता है। देशी और विदेशी मौसम विभाग के मध्‍य मानसून की भविष्‍यवाणी पर एक राय न होते हुए भी दोनो का मानना है कि लगातार दो साल तक मॉनसून के सामान्य रहने के बाद औसत का नियम बताता है कि साल 2012 में असमान बारिश हो सकती है।


काफी दिनों तक मौसम से संबंधित शोध करने के बाद 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' की मान्‍यता है कि जहां आसमान में शुभ ग्रहों का योग पृथ्‍वी के मौसम को सुखद बनाने में मदद करता है , वहीं अशुभ ग्रहों का योग कष्‍टकर मौसम बनाने की प्रवृत्ति रखता है। इस दृष्टि से यदि आनेवाले कुछ दिनों की ग्रहीय स्थिति पर ध्‍यान दिया जाए , तो आनेवाले समय में मौसम की स्थिति सामान्‍य दिखाई देती है। गर्मी के मौसम के अनुरूप गर्मी तो अवश्‍य पडेगी , पर दो चार दिनों में बारिश के कारण मौसम सामान्‍य हो जाया करेगा। खासकर जून में समय समय पर बारिश के होते रहने से लगभग देशभर में तापमान सामान्‍य बना रहेगा। शुभ ग्रहों की यह स्थिति 15 अगस्‍त तक बनी हुई है।

पर 15 जुलाई से 15 सितंबर तक के अशुभ ग्रहों की स्थिति भी भारतीय मौसम को बाधित करना आरंभ करेगी , जिसके कारण बादल घनीभूत नहीं हो पाएंगे , छितराए बादलों के मध्‍य निकलती सूरज की गरमी बहुत ही प्रचंड रूप धारण करेगी और जनसामान्‍य की मुश्किलें बढेंगी। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि खास बारिश के मौसम में ही इस वर्ष कम बारिश की संभावना बनती है , कृषि प्रधान देशों के लिए ऐसी ग्रहस्थिति ठीक नहीं होती , इसलिए यह चिंता का विषय तो है ही।

5 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
लिंक आपका है यहीं, मगर आपको खोजना पड़ेगा!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

सूचनार्थ: ब्लॉग4वार्ता के पाठकों के लिए खुशखबरी है कि वार्ता का प्रकाशन नित्य प्रिंट मीडिया में भी किया जा रहा है, जिससे चिट्ठाकारों को अधिक पाठक उपलब्ध हो सकें। 

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

ज्ञानवर्द्धक और रोचक.

MANOJ SHARMA ने कहा…

नमस्कार जी ,पिछले साल आप ने अपनी एक पोस्ट में कहा था की सर्दी जितनी भी होनी होगी दिसंबर तक हो जायेगी जनवरी से मौसम नरम होता जायेगा I मगर हुआ क्या जग जाहिर है ......?,क्या कोई सटीक तरीका नहीं विज्ञान और ज्योतिष को मिलाकर सही भविष्यवाणी की जा सके ,

संगीता पुरी ने कहा…

मनोज शर्मा जी .. आप शायद इस वर्ष जल्‍द ही पडने लगेगी ठंड नामक पोस्‍ट की बात कर रहे हैं .. मैने पूरे पोस्‍ट में दो बार भारतवर्ष में ठंड बढाने वाले कारकों की चर्चा की है .. यानि गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष पहाडी क्षेत्रों में बर्फ , मैदानी भागों में बारिश , ओले तथा तटीय प्रदेशों में तूफान के योग आदि का अध्‍ययन कर मौसम की रिपोर्ट तैयार करता है .. 10 जनवरी के बाद ऐसा कोई योग दिखाई नहीं देने के कारण हमने इस समय ठंड की समाप्ति का माना .. निष्‍कर्ष भी यही निकाला था कि इस वर्ष पिकनिक मनाने के भरपूर अवसर मिलेंगे .. पर इन कारकों से अलग ठंड बढाने वाला कोई अंतर्राष्‍ट्रीय कारक मार्च के महीने तक काम करता रहा .. जिससे ठंड कम नहीं हो पायी .. पर इस दौरान आसमान में प्रचुर धूप थी, बादल भी लगातार नहीं बने , बारिश भी कभी कभार हुई .. कश्‍मीर के बिल्‍कुल उत्‍तरी भाग में बर्फ गिरने की घटना हुई .. इस दौरान पूरे विश्‍व का मौसम बिल्‍कुल अलग ढंग का रहा .. जो मेरे अध्‍ययन से अलग था .. इसलिए इसे अपवाद के तौर पर रखा जा सकता है .. आगे ऐसी घटनाएं हों तो कुछ अध्‍ययन की जा सकती है .. विज्ञान साथ दे तो ज्‍योतिष नित नई ऊंचाइयों को छू सकता है .. पर क्‍या यह संभव है ??