मंगलवार, 31 जुलाई 2012

भगवान महाकाल के ये रूप आपने नहीं देखे होंगे ... सौजन्‍य दैनिक भास्‍कर

महाकालेश्‍वर के उद्भव के बारे में मान्‍यता है कि भगवान शिव के परम भक्त उज्‍जयिनी के राजा चंद्रसेन को एक बार उनके शिवगणों में प्रमुख मणिभद्र ने तेजोमय 'चिंतामणि' प्रदान की, जिसे गले में धारण देखकर दूसरे राजाओं ने उसे पाने के प्रयास में आक्रमण कर दिया। शिवभक्त चंद्रसेन भगवान महाकाल की शरण में जाकर ध्यानमग्न हो गया। जब चंद्रसेन समाधिस्थ था तब वहाँ कोई गोपी अपने पांच वर्ष के छोटे बालक को साथ लेकर दर्शन हेतु आई। राजा चंद्रसेन को ध्यानमग्न देखकर बालक भी शिव की पूजा हेतु प्रेरित हुआ। कुछ देर पश्चात क्रुद्ध हो माता ने उस बालक को पीटना शुरू कर दिया और समस्त पूजन-सामग्री उठाकर फेंक दी। ध्यान से मुक्त होकर बालक चेतना में आया तो उसे अपनी पूजा को नष्ट देखकर बहुत दुःख हुआ। अचानक उसकी व्यथा की गहराई से चमत्कार हुआ। भगवान शिव की कृपा से वहाँ एक सुंदर मंदिर निर्मित हो गया। मंदिर के मध्य में दिव्य शिवलिंग विराजमान था एवं बालक द्वारा सज्जित पूजा यथावत थी। उसकी माता की तंद्रा भंग हुई तो वह भी आश्चर्यचकित हो गई। राजा चंद्रसेन को जब शिवजी की अनन्य कृपा से घटित इस घटना की जानकारी मिली तो वह भी उस शिवभक्त बालक से मिलने पहुँचा। अन्य राजा जो मणि हेतु युद्ध पर उतारू थे, वे भी पहुँचे। सभी ने राजा चंद्रसेन से अपने अपराध की क्षमा माँगी और सब मिलकर भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन करने लगे। तभी वहाँ रामभक्त श्री हनुमानजी अवतरित हुए और उन्होंने गोप-बालक को गोद में बैठाकर सभी राजाओं और उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित किया। दैनिक भास्‍कर में छपे इन तस्‍वीरों और वर्णन को आपसे शेयर करने से नहीं रोक पायी .........

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार सावन के महीने में भगवान शिव के दर्शन करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। सावन के महीने में 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने का भी विशेष महत्व है। इन सभी ज्योतिर्लिंगों का अपनी एक अलग विशेषता है। इन सभी में एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर की महिमा देखते ही बनती है।

यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी कहे जाने वाले उज्जैन शहर में स्थित है। यहां के लोग भगवान महाकाल को अपना राजा मानते हैं। हर साल भगवान महाकाल सावन व भादौ के महीने में पालकी में सवार होकर जनता का हाल-चाल जानने के लिए निकलते हैं। ऐसी कई अनोखी परंपराएं यहां प्रचलित हैं। भगवान महाकाल के अद्भुत श्रृंगार भक्तों का मन मोह लेते हैं। आप भी देखिए भगवान महाकाल के विभिन्न श्रृंगारों की तस्वीरें-
1- ये है भगवान महाकाल के अद्र्धनारीश्वर रूप का श्रृंगार।






Source: धर्म डेस्क. उज्जैन
 2- ये है भगवान महाकाल के भांग श्रृंगार का अनोखी रूप।







Source: धर्म डेस्क. उज्जैन

 3- इस तस्वीर में बाबा महाकाल घटाटोप श्रृंगार में दिखाई दे रहे हैं।







Source: धर्म डेस्क. उज्जैन


4- भगवान महाकाल का शिव तांडव श्रृंगार भक्तों का मन मोह लेता है।





Source: धर्म डेस्क. उज्जैन

5- केसर-चंदन श्रृंगार में भगवान महाकाल का अद्भुत रूप दिखाई देता है।





Source: धर्म डेस्क. उज्जैन


 6- ये है भगवान महाकाल का रुद्र श्रृंगार।






Source: धर्म डेस्क. उज्जैन

 7- इस फोटो में भगवान महाकाल सेहरा श्रृंगार में दिखाई दे रहे हैं। बाबा महाकाल का ये श्रृंगार साल में सिर्फ एक बार महाशिवरात्रि के दिन किया जाता है।

Source: धर्म डेस्क. उज्जैन


5 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

महाकाल के सारे शृंगार दिखाने के लिए आभार ....

वन्दना ने कहा…

वाह आनन्द आ गया ये अद्भुत श्रंगार घर बैठे ही देखने को मिल गया आपकी आभारी हूँ।

Suresh kumar ने कहा…

Bahut hi khubsurat ...
Jai mahakaal....

मुकेश पाण्डेय चन्दन ने कहा…

मैं काल से नही डरता हूँ , क्योंकि मैं महाकाल की नगरी में रहता हूँ .
- डॉ. शिव मंगल सिंह 'सुमन'
कहा जाता है कि जो कोई अपने जीवन में एक बार भी महाकाल के दर्शन करले , उसे कभी अकाल मौत नही आ सकती है . और उज्जैन के शासक महाकाल माने जाते है , इसलिए उज्जैन में कोई भी शासक (आज भी ) रात नही रुक सकता . वर्तमान के शासक राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री , राज्यपाल और मुख्यमंत्री भी उज्जैन से बाहर बने रेस्ट हॉउस में रुकते है , न की उज्जैन शहर के अन्दर . महाकाल मंदिर के ही उपरी मंजिल में नागचंद्रेश्वर महादेव शिवलिंग विराजमान है , जो वर्ष में केवल एक बार नागपंचमी के दिन ही भक्तों के दर्शन हेतु खोला जाता है . महाकाल सावन के महीने में प्रत्येक सोमवार को शाही सवारी में विराजमान होकर उज्जैन के भ्रमण हेतु निकलते है
महाकाल के विभिन्न स्वरुप के दर्शन करने का आभार !
जय महाकाल !

vinay ने कहा…

अति सुन्दर ।