बुधवार, 31 अक्तूबर 2012

वृष राशि में बृहस्‍पति .. आपपर कैसा प्रभाव डालेगा ?

फलित ज्‍योतिष के ग्रंथों के अनुसार बृहस्पति नवग्रहों में सबसे शुभ है। यही कारण है कि गोचर में अधिकांश समय बृहस्पति की स्थिति जनसामान्‍य के लिए सुखद ही बनी होती है। ’गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ के अनुसार भी बृहस्‍पति तबतक जातकों को परेशान नहीं करता , जबतक वह गत्‍यात्‍मक शक्ति संपन्‍न होता है। गत्‍यात्‍मक शक्ति बहुत कम हो जाने पर भले ही जातक को बृहस्‍पति के कारण कुछ परेशानी मिल जाती है। 

18 मई 2012 को देवगुरु बृहस्पति ने वृष राशि में प्रवेश किया है। यहां से लेकर मई 2013 तक एक वर्ष  इसकी स्थिति वृष राशि में होगी। राशिचक्र की यह दूसरी राशि है , जिसका विस्तार भचक्र में 30 डिग्री से लेकर 60 डिग्री तक मानी गयी है।यूं तो वृष राशि में बृहस्‍पति की स्थिति अभी से ही लोगों के सुख और दुख दोनो का कारण बनेगी , पर 8 सितंबर 2012 के बाद 5 अक्‍तूबर 2012 तक दिन  दिन इसकी स्थैतिक शक्ति में हो रही वृद्धि कुछ लोगों की मन:स्थिति को सुखद बनाएगी तो कुछ तनाव झेलने को भी विवश होंगे। इस तरह इस एक महीनें में लोग बृहस्पति के कारण उत्पन्न होनेवाले कार्य में उलझे रहेंगे। चूंकि बृहस्पति धनु और मीन राशि का स्वामी है और इसकी स्थिति अभी वृष राशि में है , इसलिए धनु मीन और वृष राशि से संबंधित कार्यों में ही सुख या दुख की अधिक संभावना रहेगी।


बृहस्‍पति की इस स्थिति के कारण 1936 , 1948 , 1961 , 1973 , 1985 ,1996 में जन् लेनेवाले उत्साहित होकर कार्य में जुटे रहेंगे। एक महीनें तक कार्य अच्छी तरह होने के पश्चात अक्‍तूबर के आरंभ में किसी  किसी प्रकार के व्यवधान के उपस्थित होने से कार्य की गति कुछ धीमी पड़ जाएगी। सितंबर 2012 के पहले सप्‍ताह तक काम लगभग रुका हुआ सा महसूस होगा। उसके बाद ही काम के शुरू किए जाने के लिए आशा की कोई किरण दिखाई दे सकती है। जनवरी 2013 के अंतिम सप्‍ताह में ही स्थगित कार्य पुनउसी रुप में या बदले हुए रुप में उपस्थित होकर गतिमान होगा और फरवरी 2013 के अंत तक अपने निर्णयात्मक मोड़ पर पहुंच जाएगा। बृहस्पति के कारण होनेवाले इस निर्णय से भी इन लोगों को खुशी होगी। किसी खास संदर्भ में सफलता से इनका उत्साह बढा रहेगा। गोचर के बृहस्‍पति के मिथुन राशि में जाने के बाद पुन: ऐसा माहौल नहीं रह पाएगा।
किन्तु वृष राशि में बृहस्पति की इस विशेष स्थिति से 1934 , 1946 , 1958, 1970 , 1982 ,1994 और 2006 में जन् लेनेवाले लोगों  को कष् या तकलीफ भी होगी। वे निराशाजनक वातावरण में कार्य करने को बाध्य होंगे। 8 सितंबर से 5 अक्‍तूबर 2011 तक किए गए मेहनत के बाद कार्य के असफल होने से उन्हें तनाव का सामना करना पड सकता है। दिसंबर 2012 तक उनके समक्ष किकर्तब्य विमूढावस्था की स्थिति बनी रहेगी। पर उसके बाद स्थगित कार्य पुनउसी रुप में या बदले हुए रुप में उपस्थित होकर गतिमान होगा और फरवरी 2013 के अंत तक अपने निर्णयात्मक मोड़ पर पहुंच जाएगा। बृहस्पति के कारण होनेवाले इस निर्णय से भी इन लोगों को कष् पहुंचेगा। किसी खास मुद्दे को लेकर 30 मई तक इनकी परेशानी बनी रह सकती है। पर उसके बाद गोचर के  बृहस्‍पति के मिथुन राशि में जाते ही उनकी परेशानी का अंत होगा।
इसके अलावे गोचर के वृश राशि के बृहस्पति के कारण धनु राशि वाले शुभ प्रभाव तथा तुला राशि वाले बुरा प्रभाव महसूस करेंगे। काफी हद तक वृष राशि वाले पर भी बृहस्‍पति के इस चाल का अच्‍छा प्रभाव पडेगा। कुछ हद तक दिसंबर माह में जन् लेनेवालों के लिए बृहस्पति की यह स्थिति शुभ प्रभाव देने वाली होगी जबकि अक्‍तूबर माह में जन् लेनेवाले इसके बुरे प्रभाव से युक् हो सकते हैं। यदि ऊपर मौजूद तिथियों या राशि कोई जातक एक साथ बृहस्‍पति के अच्‍छे और बुरे दोनो प्रभाव में आते हों , तो उनपर बृहसपति का मिश्रित प्रभाव पडेगा , यानि कोई कठिनाई आएगी तो उसके समाधान के रास्‍ते भी दिखेंगे।
बृहस्‍पति के इस खास चाल के कारण ऊपर मौजूद तिथियों या राशि में जन्‍म लेनेवाले विभिन्‍न लग्‍नवाले भिन्‍न भिनन प्रकार के सुख या दुख से खुद को संयुक्‍त पाएंगे। मेष लग्नवाले भाग् , धर्म खर्च या बाहरी संदर्भों से संबंधितवृष लग्नवाले हर प्रकार के लाभ के मामले , रूटीन और जीवनशैली से संबंधित मिथुनलग्नवाले घर  गृहस्थी , पिता पक्ष , सामाजिक पक्ष , कैरियर से संबंधित ,  कर्क लग्नवाले धर्म , भाग् ,प्रभाव से संबंधित सिंह  लग्नवाले अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई , रूटीन या जीवनशैली से संबंधित कन्या लग्नवाले माता पक्ष  , छोटी या बडी संपत्ति , घर गृहस्थी से संबंधित तुला  लग्नवाले भाई , बहन या अन् बंधु , खर्च और बाहरी संदर्भ से संबंधित वृश्चिक  लग्नवाले धन , कोष , अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई से संबंधित धनु  लग्नवाले स्वास्थ् , माता पक्ष , किसी प्रकार की छोटी या बडी संपत्ति से संबंधित मकर  लग्नवाले भाई , बहन या अन् बंधु खर्च और बाहरी संदर्भ से संबंधित कुंभ  लग्नवाले धन कोष लाभ या लक्ष् से संबंधित ,  मीन  लग्नवाले स्वास्थ् , पिता पक्ष , सामाजिक पक्ष , कैरियर प्रकार की छोटी या बडी संपत्ति से संबंधित मामलों की मजबूती या कमजोरी को महसूस करेंगे। 

2 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

जानकारी से परिपूर्ण उपयोगी आलेख!

Virendra Kumar Sharma ने कहा…

ज्योतिष शास्त्र खगोल विज्ञान का एक भविष्य कथन सम्बन्धी हिस्सा है .PREDICTIONAL PART है .जबकी खगोल विज्ञान भी एक प्रेक्षण आधारित विज्ञान है जहाँ इन्फेरेंसिज़ निकाले जाते हैं .सूर्य चन्द्र ,नक्षत्र

,नीहारिकाओं ,अन्तरिक्ष की काल कोठारियों (ब्लेक होल्स ),न्युट्ररान सितारों ,स्पंदन शील पिंडों का अध्ययन किया जाता है प्रेक्षण आधारित .

भविष्य कथन कहने की एक सर्व मान्य प्रणाली का विकास होना चाहिए .कोई नव ग्रहों पर आधारित ,कोई राहू केतु बिन्दुओं समेत 11 अन्तरिक्ष पिंडों कोई सूर्य चन्द्र समेत 13 पिंडों से प्रागुक्ति कर रहा है .इसी

वजह से एक ही व्यक्ति का एक ही दिन का राशि फल विषमता लिए रहता है .इस दिशा में एक UNIFORM METHODOLOGY विकसित करने के प्रयास किए जाने चाहिए .अब देखो प्लूटो (यम )से तो ग्रह होने

का स्टेटस छीना जा चुका है आप आज आठवीं के बच्चे से पूछ देखो ग्रहों की संख्या आठ बतलायेगा ,नौ नहीं .क्योंकि यम का आकार तो चन्द्रमा से भी छोटा है जो पृथ्वी का उपग्रह है .वह अब प्लेनेतोइड है प्लेनेट

नहीं माना जाता है .

फिर ग्रहों के अपने उपग्रह परिवार हैं कुल मिलाके तकरीबन सौ उपग्रह आदिनांक खगोल विज्ञानी आंज चुकें हैं प्रेक्षणों में अपने ले सके हैं .प्रागुक्ति करते वक्त इन उपग्रहों को मद्दे नजर क्यों नहीं रखा जाता है गुरुत्व

प्रभाव और चुम्बकीय क्षेत्र तो पूरे ग्रह कुनबे का पड़ता है .परस्पर शेष सभी पर .