गुरुवार, 8 मार्च 2012

हिंदी ब्‍लॉग जगत से जुडे लेखकों और पाठकों को होली की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं !!!!!



ललित शर्मा जी को भ्रमित करने में समीर लाल जी कामयाब हो ही गए !!!!


हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी महीने भर से ही हिंदी ब्‍लोगरों को होली का इंतजार था , अबतक साथ साथ मनाते और आनंद लेते जो आ रहे थे। इस साल की होली में धूम कैसे मचायी जाए , कार्यक्रम की रूप रेखा बनाने के लिए कुछ दिन पूर्व ही सभी हिंदी ब्‍लॉगर इकट्ठे हुए थे । जाति , धर्म , विचार , नारी पुरूष के मामले , जो कि अक्‍सर हमारे संबंधों में दरार डालते हैं , को दरकिनार करते हुए उल्‍लासपूर्ण वातावरण में होली मनाने के लिए आभासी दुनिया को वास्‍तविक दुनिया से दूर होना आवश्‍यक था। इसलिए सबसे पहला काम कार्यक्रम के लिए ऐसे स्‍थल का चुनाव करना था , जहां दुनियादारी का कोई मुद्दा रोडा न बने। इसी कारण होली के अवसर पर हिंदी ब्‍लॉग जगत के सभी सदस्‍यों का सर्वसम्‍मति पृथ्‍वी से बाहर जाने का कार्यक्रम बना।

ललित शर्मा जी चांद पर होली मनाने का कार्यक्रम बना रहे थे , चांद तो हर वर्ष पृथ्‍वी से लगभग बराबर दूरी पर होता है ,वहां बी एस पाबला जी के प्‍लॉट होने के कारण उनके मेजबानी में होली कभी भी मनायी जा सकती है। पर मंगल ग्रह तो प्रत्‍येक 25 महीने बाद पृथ्‍वी के इतने निकट आता है , इस बार होली के वक्‍त ही ऐसा मौका आया है। मंगल ग्रह पर किए जा रहे अपने अध्‍ययन को जारी रखने के लिए नासा के द्वारा वहां हमेशा रॉकेट भेजा जाता रहा है। इस बार ऐसी कोई बात अभी तक सुनने में नहीं आयी थी , इसलिए मंगल पर ब्‍लोगरों का एकछत्र राज हो सकता था, जो चाहे मनमानी की जा सकती है। मंगल ग्रह जब भी पृथ्‍वी के नजदीक आता है , पृथ्‍वीवासियों को किसी न किसी प्रकार की समस्‍या देता है , इस समस्‍या से बचने के लिए भी मंगल ग्रह पर होली मनाना सबसे उपयुक्‍त था। फिर चंद्रमा से लौटने की भी जल्‍दबाजी करनी होती , क्‍यूंकि वहां प्रतिदिन रोशनी कम होती जाती , पंद्रह दिनों बाद घ्‍ुप्‍प अंधेरा हो सकता था। मंगल तो अभी दो महीने पृथ्‍वी के निकट ही रहेगा , सूर्य की रोशनी भी उसे मिलती रहेगी , कुछ दिनों तक आराम से रहा जा सकता है। सभी ब्‍लोगरों को यह प्रस्‍ताव भाया , पर चंद्रमा पर जाने और वहां होली मनाने की अपनी जिद पर ललित जी डटे रहे।

समीर जी ने चुपके से मुझे कहा कि एक ललित जी के लिए कार्यक्रम में फेरबदल ठीक नहीं , ललित जी को भ्रमित करना बहुत आसान है , मैं तो उडनतश्‍तरी को कभी भी किधर भी घुमा सकता हूं , उन्‍हें क्‍या मालूम चलेगा ? सुबह सात बजे सारे ब्‍लोगरों के लिए यात्रा का समय तय किया गया, कुछ ज्‍योतिषियों के हिसाब से यह समय राहू काल का था , उत्‍सव में रंग में भंग न हो जाए , इसलिए उन्‍होने समय को बढाकर नौ बजे करने को कहा। पर ब्‍लॉग जगत में मौजूद वैज्ञानिक वर्ग ज्‍योतिषियों की सलाह को कहां मानने वाला था ? देर करने से रास्‍ते में ही होली हो जाती , उनके बीच बहस होने लगी। मैने समझौता कराया कि मुहूर्त्‍त के चक्‍कर में किसी कार्यक्रम को जान बूझकर बिगाडना सही नहीं है ,तब सुबह सात बजे के समय पर सर्वसम्‍मति बन पायी। तय समय पर सभी ब्‍लोगर इकट्ठा हुए और उडन तश्‍तरी मंगल की ओर रवाना हुई।

समीर जी ने अपनी उडन तश्‍तरी से बिना टिकट यात्रा कराने को सभी को आमंत्रित किया , पर कुछ ब्‍लोगर अपनी साइकिल से तो कुछ अपनी बैलगाडी से ही आनंद लेना चाहते थे। अंतरिक्ष का रास्‍ता तो समीर लाल जी का ही देखा हुआ था , वे चंद्रमा की ओर न जाकर मंगल की ओर उडन तश्‍तरी बढाते रहें , दूसरी सवारियों में मौजूद लोग उनके पीछे पीछे चलें। ललित जी को छोडकर बाकी सभी ब्‍लोगरों को मालूम था कि हम चंद्रमा नहीं, मंगल पर जा रहे हैं। मुझे भय बना रहा कि वास्‍तविकता का पता होने पर ललित जी हंगामा न खडा कर दें, पर उन्‍हें इसका अहसास भी न हो पाया। वहां पृथ्‍वी वासी हजारो हिंदी ब्‍लोगरों ने खूब धूम मचायी ,हमने कैसे होली मनायी, इसकी विस्‍तार में रिपोर्ट तो आप ललित जी की पोस्‍ट में पढ ही चुके हैं। दरअसल उन्‍होने पूरी ईमानदारी से इस कार्यक्रम की रिपोर्ट तैयार की है। पर सारे ब्‍लोगर मंगल ग्रह पर थे , न कि चांद पर। मुझसे किए गए वादे के अनुसार ललित शर्मा जी को भ्रमित करने में उडनतश्‍तरी कामयाब हो ही गए ।

बुरा न मानो होली है !!!!

हिंदी ब्‍लॉग जगत के सभी लेखकों और पाठकों को होली की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं !!!!