गुरुवार, 11 अप्रैल 2013

एक जिम्‍मेदार व्‍यक्ति को ही भविष्‍य की चिंता होती है ..... ( Astrology )


ज्‍योतिष सही है या गलत ? विज्ञान है या अंधविश्‍वास ? यह सिर्फ तर्कों से सि‍द्ध नहीं की जा सकती। हर मुददे में पक्ष और विपक्ष दोनो के पास बडे बडे तर्क होते हैं। ज्‍योतिष को विज्ञान सिद्ध कर पाने में भी अभी तक पक्ष के लोगों को सफलता नहीं मिल पायी है , इसलिए इनकी बात भी लोग नहीं सुनते। ज्‍योतिष को विज्ञान न सिद्ध कर पाने में भी अभी तक विपक्ष के लोगों को कोई सफलता नहीं मिल पायी है। लोग उनकी बातें भला क्‍यों सुनेंगे ?

लोगों का मानना है कि ज्‍योतिष जैसे विषय पर या ग्रह नक्षत्रों पर विश्‍वास करनेवाले आलसी , निकम्‍मे और निठल्‍ले हुआ करते हैं। पर मैं नहीं मानती , मैं मानती हूं कि एक जिम्‍मेदार व्‍यक्ति को ही भविष्‍य की चिंता होती है। हमारी कामवाली का युवा बेटा अपनी मां से जिद करके मोबाइल खरीदवाता है , अपने पिता के द्वारा खरीदे गए सेकंड हैंड मोटरसाइकिल पर बैठकर घूमता फिरता है। उसे भविष्‍य की कोई चिंता नहीं , क्‍यूंकि न सिर्फ तीन वक्‍त का खाना ही , वरन् भविष्‍य की छोटी मोटी हर जरूरत को वह दस बारह घरों में चौका बरतन करनेवाली अपनी मां या बीबी को दो तमाचे जडकर पूरा कर सकता है। इसलिए उसे भविष्‍य को लेकर कोई उत्‍सुकता नहीं , वह ज्‍योतिष या ज्‍योतिषियों की शरण में क्‍यूं जाए ?

कुछ समय पहले तक लोगों का जीवन इतना अनिश्चितता भरा नहीं हुआ करता था, संयुक्त परिवार होते थे, इस कारण यदि परिवार के एक दो व्यक्ति जीवन में आर्थिक क्षेत्र में सफल नहीं हुए, तो भी घर के छोटे मोटे कामों को संभालते हुए उनका जीवन यापन आराम से हो जाता था, क्यूंकि उन्हें संभालने वाले दूसरे भाई या परिवार के अन्य सदस्य होते थे। पर आज व्यक्तिगत तौर पर अधिक से अधिक सफलता पाने की इच्छा ने, व्यक्तिगत परिवारों की बहुलता ने हर व्यक्ति के जीवन को अनिश्चितता भरा बना दिया है। एक लड़के की कमाई के बिना उसका शादी विवाह या सामाजिक महत्व नहीं बन पाता है। 

इसके अलावा वैज्ञानिक सुख सुविधाओं ने व्यक्ति को आराम तलब बना दिया है। जो अच्छी जगह पर हैं, वो अपने आनेवाली पीढी के मामलों में काफी महत्वाकांक्षी हो गए हैं। दो लोगों, दो परिवारों की जीवनशैली में बडा फासला बनता जा रहा है, ऐसे में भविष्य की ओर लोगों का ध्यान स्वाभाविक है। इसी कारण भविष्य को जाननेवाली विधा यानि ज्योतिष पर लोगों का विश्वास बढता जा रहा है।

सफलता के लिहाज से इस दुनिया के लोगों को कई भागों में विभक्‍त किया जा सकता है। कुछ वैसे हैं , जिन्‍हें अपने जीवन में माहौल भी अच्‍छा नहीं मिला , वे काम भी नहीं करते या करना चाहते। किसी प्रकार उनके दिन कट ही जाते हैं , इस‍लिए उन्‍हें भविष्‍य की कोई चिंता नहीं होती , वे अपने इर्द गिर्द के माहौल के अनुसार अपने और अपने परिवार के भविष्‍य को एक सीमा के अंदर ही देख पाने से निश्चिंत रहते हैं। दूसरे वैसे , जिन्‍हे अपने जीवन में माहौल भी मिला , काम भी कर पा रहे हैं और उसके अनुसार सफलता के पथ पर अग्रसर भी हैं , जीवन में भाग्‍य की किसी भूमिका को वे भी स्‍वीकार नहीं कर पाते , उन्‍हें अपना और अपने परिवार का भविष्‍य बहुत ही उज्‍जवल नजर आता है।

पर तीसरे वैसे लोग हैं , जो महत्‍वाकांक्षी बने होने और अपने साधन और मेहनत का भरपूर उपयोग करने के बावजूद भी कई कई वर्षों से असफल हैं ,चाहे समस्‍या कोई एक ही क्‍यूं न हो , उसके समाधान का कोई रास्‍ता उन्‍हें नजर नहीं आता । वैसी स्थिति में किसी अज्ञात शक्ति की ओर उनका रूझान स्‍वाभाविक है और ऐसे लोगों को ज्‍योतिष की आवश्‍यकता पडती है। प्रकृति के किसी नियम को बदल पाना तो किसी के लिए संभव नहीं , पर ज्‍योतिष के सही ज्ञान से लोगों को कुछ सलाह तो दी ही जा सकती है , जो उन्‍हे बेहतर जीवन जीने में मदद करें ।

4 टिप्‍पणियां:

महेश कुमार वर्मा : Mahesh Kumar Verma ने कहा…

बहुत अच्छा

महेश कुमार वर्मा : Mahesh Kumar Verma ने कहा…

बहुत अच्छा

शोभना चौरे ने कहा…

जैसे बीमार होने पर ही डाक्टर के पास जाया जाता है वैसे ही जीवन में जब कोई समस्या आती है तो ज्योतिष के पास जाते है
किन्तु कितने ही लोग ऐसे भी है जो अपने जीवन में आने वाली परेशानियों से झूझने के लिए भी गाइडline लेते है ज्योतिषियों से

महेश कुमार वर्मा : Mahesh Kumar Verma ने कहा…

Shobhna jee ke baat se main sahmat hun.