गुरुवार, 2 मई 2013

गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष की नजर में शेयर बाजार


प्राचीन काल से ही अज्ञानता जैसे शब्‍द से मानव जाति को सख्‍त नफरत रही है। शायद इसी कारण प्रकृति के उलझे हुए रहस्‍यों को न जान पाना उसके लिए एक भयंकर चुनौती बनी रही और उसने प्रकृति के सारी रहस्‍यों को सुलझाने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी । इसका परिणाम हम सब अपने सामने देख रहे हैं। प्रकृति के एक एक रहस्‍यों को सुलझाती , उससे निबटने में सफलता प्राप्‍त करते हुए कंदराओं और गुफाओं में रहने वाली जनजाति आज एक अतिविकसित प्राणी के तौर पर संसार में अपनी उपस्थति दर्शा रही है।

किन्‍तु भूत और वर्तमान को सुलझा पाने में इसे जितनी ही अधिक सफलता मिलती जा रही है , भविष्‍य उतने ही घने अंधेरे के रूप में इसके सामने मुंह चिढाता खडा हो रहा है। कल क्‍या होगा ? किसी को पता नहीं। इस दिशा में भी गुत्त्थियों को सुलझा पाने की शुरूआत हमारे ऋषि , महर्षियों और योगियों ने की थी , ताकि जिस तरह हम एक रोशनी लेकर अनजान पथ पर भी आगे बढ जाते हैं , एक सहारा लेकर इस जीवन पथ पर भी चलें और भविष्‍य को जान पाने के लिए ज्‍योतिष शास्‍त्र के रूप में एक विज्ञान को विकसित किया गया। पर कालांतर में जब सभी शास्‍त्रों का नवीनीकरण किया गया , इस शास्‍त्र को अंधविश्‍वास समझते हुए इसे उपेक्षित छोड दिया गया जिसके कारण हम आजतक अंधकार में ही भटक रहे हैं।

वैसे तो हर क्षेत्र में ही देखा जाए , तो भविष्‍य बिल्‍कुल अनिश्चित है , क्‍योकि आज के अनिश्चितता के दौर में जब आम आदमी का जीवन ही निश्चित नहीं , तो किस पैसे , किस संपत्ति , किस डिग्री , किस जान परिचय और किस सगे संबंधी पर आप भरोसा कर सकते हैं ? पर आज की तिथि में जो सर्वाधिक अनिश्चित दिखाई पड रहा है , वह है पूरे विश्‍व का शेयर बाजार , जिसके बारे में बिना किसी आधार के एक दो घंटे बाद की भविष्‍यवाणी कर पाना भी काफी मुश्किल हो गया है। इसका मुख्‍य कारण यह है कि आज के बाजार में शेयरों की खरीद बिक्री की कोई मुख्‍य वजह नहीं रह गयी है। लोगों की मन:स्थिति में होनेवाले परिवर्तन के बल बूते पर बाजार में खरीद और बिक्री का दौर जारी है और चूंकि लोगों की मन:स्थिति को प्रभावित करने में ग्रहों की भूमिका होती है , इसलिए अप्रत्‍यक्ष तौर पर ही सही , अभी सिर्फ और सिर्फ ग्रहों का ही प्रभाव शेयर बाजार पर देखने को मिल रहा है।

ग्रहों के पृथ्‍वी के जड चेतन पर पडनेवाले प्रभाव को जानने की एकमात्र विधा ज्‍योतिष ही है और इसे सही ढंग से विकसित कर पाने की दिशा में 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिषीय अनुसंधान केन्‍द्र ' बोकारो द्वारा 20वीं सदी के अंतिम 40 वर्षों में बहुत बडा रिसर्च हुआ। ग्रहो की वास्‍तविक शक्तियों की खोज कर ज्‍योतिष को विज्ञान बना पाने सफलता मिलने से भविष्‍य को देख पाने के लिए एक तरह की रोशनी मिली , जो काफी हद तक स्‍पष्‍ट तो नहीं कही जा सकती , पर हमारे सामने भविष्‍य का एक धुंधला सा चित्र अवश्‍य खींच देती है। इसी के आधार पर 2008 के जनवरी से ही मै अपने ब्‍लाग पर शेयर से संबंधित भविष्‍यवाणी करती आ रही हूं। स्‍टॉक मार्केट पर हिंदी की पहली वेबसाइट 'मोल तोल डॉट इन' में मैं शेयर बाजार के बारे में भविष्‍यवाणी करते हुए साप्‍ताहिक कॉलम लिखा करती थी , पर पिछले दो वर्षों से इस क्षेत्र का रिसर्च बंद हो जाने से लेखन रूक गया था। इस सप्‍ताहांत से पुन: इसे शुरू करने जा रही हूं , शेयर बाजार में रूचि रखने वालों के लिए थोडा भी लाभदायक हुआ तो मेरी मेहनत साकार महसूस होगी। 

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