बुधवार, 12 अगस्त 2015

अपने बचने के लिए कुछ भी करो .. पर धर्म और ज्‍योतिष को यूं बदनाम न करो बाबा !!

दुनिया भर के खासकर भारत में गली गली , मुहल्‍ले मुहल्‍ले विचरण करने वाले बाबाओं , तुम अपने शहर में न जाने कितने अपराध करते हो , पर काफी दिनों तक पुलिस की लापरवाही या उनसे मिलीभगत से तुम पकडे नहीं जाते , इस उत्‍साह से बडी बडी गलतियां करने लगते हो , फिर जब तुमपर शिकंजे कसे जाने लगते हैं , तो शहर से भागना और पुलिस से बचना ही तुम्‍हारा एक लक्ष्‍य हो जाता है , बचने का सबसे बडा रास्‍ता तुम्‍हें बाबाजी बनने में दिखाई देता है , बडी मूंछ और दाढी के कारण लोगों के लिए तुम्‍हारे चेहरे को पहचानना काफी मुश्किल हो जाता है , बाबा का रूप धारण कर लेने से जनता की आस्‍था का भी तुम नाजायज फायदा उठा लेते हो , यदि किसी की आस्‍था तुमपर नहीं बन रही होती , तो डराना और धमकाना तो तुम्‍हारा स्‍वभाव है, इसलिए इस राह में चलकर आराम से अपनी महत्‍वाकांक्षा के अनुरूप पैसे का इंतजाम तो तुम कर लेते हो !

बाबा बनने के बाद तो तुम्‍हारा जीवन और रंगीन बन जाता है , श्‍मशान सिद्ध कर चुके हो तुम , यह कहकर भक्‍तों के सम्‍मुख भी शराब पीने से तुम कोई परहेज नहीं करते , कमाख्‍या मंदिर में सिद्धि प्राप्‍त कर चुके हो , इसलिए मांस से भी कोई परहेज की आवश्‍यकता नहीं , महिलाओं को मां मानते हो , इसलिए उनसे घिरे होने में भी तुम्‍हें दिक्‍कत नहीं ,  कन्‍याओं से सेवा करवाकर तुम उनकी मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद दे देते हो , हत्‍या और लूटपाट के पाप के साथ तुम लोगों के कल्‍याण का दावा कर लेते हो , महात्‍मा होने के बावजूद भविष्‍यवाणी करने का रिस्‍क नहीं लेते , उपाय की पूरी व्‍यवस्‍था कर देते हो , एक शहर में तुम्‍हें रहना नहीं , इसलिए साख बनाए रखने की कोई चिंता नहीं , लोगों से पैसों की बरसात करवा लेते हो तुम , इस तरह अपराधी के नाम से भी जो सुख सुविधा नहीं मिलती , वो बाबा बनकर तुम्‍हें मिल जाती है !

तुमसे नाम पूछा जाता है तो अपने को हिंदुस्‍तानी बताते हो , गांव , जिला या प्रदेश पूछा जाता है तो हिंदुस्‍तान कहते हो , मानो हम सब देशद्रोही हैं और तुम सच्‍चे देशभक्‍त , महान आत्‍माओं के जन्‍म से लेकर मृत्‍यु तक की हर घटना इतिहास में दर्ज होती है , अपना नाम , अपना गांव , अपना प्रदेश क्‍यूं छिपाते हो , वहीं से तो स्‍पष्‍ट हो जाता है कि तुम अपने जीवन का कोई भाग छुपा रहे हो , तुम इतिहास की किताबों में अपना नाम क्‍यूं नहीं दर्ज करवाना चाहते ,  अपने भयानक सच को सामने न लाकर अपने बाबा के स्‍वरूप को सामने रखकर तुम जनता के आस्‍था के साथ खिलवाड करते हो , उनके मनोवैज्ञानिक कमजोरी का नाजायज फायदा उठाते हो , अपने स्‍वार्थ में अंधे होकर कुछ भी करो तुम , पर धर्म और ज्‍योतिष को यूं बदनाम न करो बाबा , मेरी प्रार्थना है तुमसे !

3 टिप्‍पणियां:

kuldeep thakur ने कहा…

आज कल समस्या ऐसी हो गयी है कि किस पर विश्वास करें और किस पर नहीं। जिसे भी देखो उसके पास अपने पक्ष में तर्क है...मैं अपने बारे में बताऊं तो मैंने अनेकों ज्योतशियों से अपने भविष्य और अतीत के बारे में पूछने का प्रयास किया पर सत्य मुझे कुछ भी नहीं लगा। जो मेरे बारे में जानते हैं उन्होंने तो कुछ ठीक ठीक बोला, पर जो काफी दूर के थे वे तो केवल वोही घिसी-पिटी बातें बोलते हैं।पर इतना होने पर भी मुझे ज्योतिष पर अटूटच विश्वास है, पर क्यों? मैं खुद भी नहीं जानता।

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन बंधक बनी संसद को निहारता बेबस देश में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

Madan Saxena ने कहा…

सुंदर भावनायें और शब्द भी ...बेह्तरीन अभिव्यक्ति