बुधवार, 13 सितंबर 2017

ग्रहों के प्रभाव का प्रमाण: गतांक से आगे……

अगर मैं कहूँ कि 2017 में जून से सितम्बर के बीच जितने भी बच्चों का जन्म हुआ है इनमे से लगभग सभी 30 वर्ष की उम्र में निडर, आक्रामक, मस्त, लापरवाह, बहुमुखी, जोशीले, असहिष्णु, सुविधावादी, इनमे से कई दबंग और शोषक भी हो सकते हैं तो अधिकांश बुद्धिजीवी इसे महज़ ज्योतिषीय बकवास ही समझेंगे लेकिन चूँकि मैंने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी विचार गंभीर चिंतन के पश्चात् ही रखा जाना चाहिए, अतः परीक्षण के बाद ही किसी सत्य का उल्लेख करता हूँ। मेरे उपरोक्त कथन की पुष्टि के लिए विद्वान पाठकों को 30 वर्षों का इंतज़ार नहीं करना पड़े इसलिए मैं आप को 30 वर्ष पीछे ले जा कर उल्लिखित सत्य को सिद्ध करने की कोशिश करता हूँ। जिनका जन्म सन 1987 में 15 जून से 15 अक्टूबर के बीच हुआ है वे निश्चित रूप से इस समय 30 वर्ष की अवस्था के नवयुवक या नवयुवती होंगे, के स्वाभाव का निरीक्षण और परीक्षण करें तो इनमे उल्लिखित सारी विशेषताएँ दिखाई पड़ेंगी।
लेकिन इसके ठीक विपरीत जिनका जन्म 11 जून से 12 अगस्त 1986 एवं 29 अगस्त से 28 अक्टूबर सन 1988 में हुआ, ऐसे सभी जातक स्वाभाव से संकोची, नियम से चलनेवाले, उत्तरदायित्व को समझने वाले, अंतर्मुखी, सहिष्णु, गंभीर, शांतिप्रिय, समन्वयवादी, स्वाभाव के होंगे और इस समय जीवन की विपरीत परिस्थियों से गुजर रहे होंगे क्यूँकि ये सभी उस समय पृथ्वी पर आये जब पूर्वी क्षैतिज में सूर्य का उदय हो रहा था और पृथ्वी के सापेक्ष मंगल वक्र गति में पश्चिम क्षैतिज पर अस्त हो रहा था।
ग्रह करोडो मील दूर रहकर किस तरह जड़-चेतन, जल-थल, जीव-जंतु मौसम, बाजार और मानव जीवन को प्रभावित करते हैं यह भले ही कल तक अबूझ पहेली बनी हुई थी लेकिन आज इस पहेली को सुलझाने की दिशा में बहुत हद तक कार्य किया जा चुका है। ग्रह अपनी गतिज ऊर्जा से ही हर जगह अपने प्रभाव का छाप छोड़ते हैं। अगर हम भौतिक विज्ञान के कुछ आधारभूत सिद्धांतों पर गौर करें तो पाएंगे कि अपरिमित गतिज ऊर्जा को ऊर्जा के अन्य स्वरूपों में परिवर्तित कर इलेक्ट्रान को हस्तांतरित करके मीलों दूर स्थित पदार्थों को आवेशित किया जा सकता है। दरअसल, पदार्थ के साथ शक्ति का अटूट सम्बन्ध होता है और किन्ही दो आकाशीय पिंडो के बीच आकर्षण बल उन दोनों के बीच की दूरी के वर्ग (स्क्वायर) का व्युत्क्रमानुपाती होता है। इसका मतलब दूरी का घटना और बढ़ना ऊर्जा के घटने और बढ़ने का कारण बन जाता है। 'गत्यात्मक ज्योतिष' में गतिज ऊर्जा की परिवर्तनशीलता पृथ्वी के सापेक्ष उन ग्रहों की घटती-बढ़ती दूरियों पर ही आधारित है।
अपने ज्योतिषीय अनुसन्धान के क्रम में ग्रहों की दो अलग-अलग स्थितियों पर बहुत चिंतन किया गया। सूर्य के साथ-साथ मंगल ग्रह पूर्वी क्षैतिज पर उदय हो रहा था, वह पहली स्थिति थी। दूसरी स्थिति सूर्य के उदय के समय मंगल180 डिग्री की दूरी पर रहकर पश्चिम क्षैतिज में अस्त हो रहा था। दोनों ही स्थितियों में मंगल और पृथ्वी के बीच की दूरी का अनुपात 4:1 था। सूर्य के साथ मंगल के उदय होनेवाले सभी जातकों का जन्म 2017 और 1987 के उल्लिखित अवधि के दौरान हुआ था जो पहले ग्रुप में रखे गए और दूसरे ग्रुप में 1986 और 1988 के उल्लिखित अवधि में पृथ्वी पर आये। दोनों ग्रुप के व्यक्तियों के स्वाभाव में जमीन आसमान का अंतर महसूस किया जा सकता है। उपरोक्त दोनों अवधियों के बीच जन्म लिए किसी जातक आपके परिवार के सदस्य या आपके कोई परिचित हैं तो इनकी वर्तमान स्थिति पर गौर करें, आपको कहीं भी कोई अपवाद नहीं मिलेगा।
मंगल युवावस्था का प्रतीक ग्रह है और शरीर में इसकी ग्रंथि की सक्रियता 24 से 36 वर्ष की उम्र में होती है। गत्यात्मक शक्ति जितनी अधिक होगी, 30 वर्ष की उम्र में उन युवक-युवतियों में सारी विशेषताएँ उतनी ही अधिक दिखाई पड़ेगी। स्मरण रहे जो ब्रम्हांड में है वही पिंड में है और प्रत्येक ग्रह के प्रतिनिधित्व के लिए मानव शरीर में इससे सम्बंधित ग्रंथि भी जीवन के अलग-अलग भाग में सक्रीय होती है| क्रमश:……
विद्या सागर महथा
निदेशक- गत्यात्मक ज्योतिष अनुसन्धान संसथान
ईमेल आईडी: vidyasagarmahtha@gmail.com; vidyasagarmahtha@yahoo.com;

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