सोमवार, 11 सितंबर 2017

ग्रहों के प्रभाव का प्रमाण



अतिथि पोस्ट -- श्री विद्या सागर महथा , गत्यात्मक ज्योतिष के जनक 
अक्सरहा लोग सूर्य-चंद्र के द्वारा पृथ्वी के जड़-चेतन पर पड़नेवाले प्रभाव को स्वीकार करते हैं I सूर्य के कारण ही सारी सृष्टि संभव है I लेकिन बाकी ग्रहों के पड़नेवाले प्रभाव को ज्योतिषीय ज्ञान के अभाव में लोग कबूल नहीं कर पाते हैं I सूर्य के कारण ऋतुओं में परिवर्तन होता है I क्रमशः वसंत, ग्रीष्म, वर्षा शरद, हेमंत और शिशिर का आगमन होता है I सभी ऋतुओं का समय निर्धारित है और सभी की अलग अलग विशेषता है I फसल चाहे जिस प्रकार का हो सबके बीजारोपण और फसल की कटाई का समय सुनिश्चित होता है, इस ऋतु में जो काम होना चाहिए वैसे ही होता है I बड़े वृक्षों में पुराने पत्तों को त्यागना और नए पत्तों से लद जाने का काम वसंत ऋतु में होता है I ग्रीष्म ऋतु में जेठ महीने की दुपहरी की चिलचिलाती धूप में सभी जीव जंतु और मनुष्य इससे बचने के लिए अपने बिल और घर के अंदर दुबके पड़े रहते हैं I बड़े वनस्पति भी मुरझा जाते हैं I वर्षा ऋतु में बड़े उत्साह के साथ किसान अपने खेतों में फसल उगाने के उपक्रम में कार्यरत रहते हैं I पशु पक्षियों का व्यवहार ऋतुओं के अनुसार ही होता है I कछुए और मछलियों के अंडे देने का समय सुनिश्चित होता है I पौष महीने की रात में सभी ठंढ से बचने की अद्भुत चेष्टा करते हैं I
चन्द्रमा के कारण समुद्र में ज्वार भाटा आता रहता है I प्रत्येक पूर्णिमा और अमावस को बड़ी लहरे उठती रहती हैं जबकि लघु ज्वार भाटा की उत्पति दोनों अष्टमी को हुआ करती हैं I
मानव जीवन में सूर्य चंद्र और अवशिष्ट ग्रहों का प्रभाव कब दिखाई पड़ता है इसे भी समझने की चेष्टा करते हैं I आशा है विद्वान पाठक इसे ध्यान से पढ़ेंगे I हर कोई इस बात को महसूस करते हैं कि अमावस के दो तीन दिन पहले और दो तीन दिन बाद के समय में प्रायः लोग चन्द्रमा से सम्बंधित भाव तत्वों से कुछ परेशानी महसूस करते हैं I पूर्णमासी के आसपास कि तिथियों में अधिकांश लोग चन्द्रमा के भाव तत्वों से प्रसन्न दिखाई पड़ते हैं I लेकिन जिसके यहाँ मानसिक असंतुलन वाला व्यक्ति हो वहां अत्यधिक उत्तेजना के कारण कुछ अप्रिय बातें भी होती हैं I अमावस के आसपास जन्म लेनेवाले बच्चों का बाल्यकाल बहुत ठीक नहीं रहता है जबकि पूर्णिमा के आसपास जन्म लेनेवाले बच्चों का लालन-पालन, लाड-प्यार देखा जाता है I
दरअसल जो ब्रम्हांड में है वही पिंड में है I अतः ग्रहों की चाल के समानांतर व्यक्ति की परिस्थितियां और चाल बदलती रहती हैं I जब कोई शुभचिंतक या नजदीकी किसी व्यक्ति से मुलाकात होती है तो पहला प्रश्न होता है आपका हालचाल क्या है, मतलब वर्तमान की ताज़ी चाल कैसी है I
गत्यात्मक ज्योतिष किसी भी व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन के हर छोटे बड़े भाग में उसकी गति या चाल कैसी रहेगी, ये ग्राफ के माध्यम से सम्पूर्ण जीवन को चित्रित कर देता है I
सूर्य-चंद्र समेत सौर मंडल के सभी ग्रहों का प्रतिनिधित्व करनेवाली हमारे शरीर में स्थित विभिन्न प्रकार की ग्रंथियां हैं I सभी के सक्रियता का काल जीवन का भिन्न भिन्न भाग है I नजदीकी ग्रह जीवन के प्रारम्भ में और दूरस्थ ग्रह जीवन के अंतिम भाग में प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावित करते हैं I बाल्य काल की ग्रंथि बाल्य काल में, किशोरावस्था की ग्रंथि किशोरावस्था में, युवावस्था की ग्रंथि युवावस्था में .........और वृद्धावस्था की ग्रंथि वृद्धावस्था में सक्रीय होती है I सभी ग्रह से सम्बंधित ग्रंथियों के गुण-दोष उसकी जन्म कालीन ग्रह की शक्ति के अनुसार होता है I
अब मैं बुध ग्रह के प्रभाव की चर्चा करता हूँ I जो बच्चे विद्यार्थी जीवन में हैं, जिनका जन्म 1999 में 12 मार्च और 2 अप्रैल के मध्य, 15 जुलाई से 6 अगस्त के बीच, 7 नवम्बर से 25 नवम्बर के बीच और सन 2000 में 23 फरवरी से 15 मार्च के मध्य, 26 जून से 18 जुलाई के मध्य, 21 अक्टूबर से 5 नवम्बर के बीच हुआ, ये सभी जातक चाहे पृथ्वी के जिस भू भाग में रह रहे हों ये चाहे जितने भी इंटेलिजेंट हों या साधन संयुक्त हों, इनका जन्म भले ही किसी संभ्रांत परिवार में ही क्यों नहीं हुआ हो, ये अभी विद्यार्थी जीवन में 12 वर्ष से 18 वर्ष की उम्र में इन्हे संघर्ष करना पड़ रहा है, इन्हे अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है I इनका संघर्ष 18 वर्ष की उम्र तक बढ़ते क्रम में और 24 वर्ष की उम्र तक किसी न किसी प्रकार के संघर्ष से जूझना पड़ेगा I करोड़ों विद्यार्थियों में एक भी अपवाद नहीं मिलेगा I इससे बड़ा ग्रहों के प्रभाव का प्रमाण और क्या हो सकता है ? इस वैज्ञानिक सत्य की जानकारी अधिक अधिक लोगों तक पहुँच सकें, मैं चाहूंगा कि अधिक से अधिक लोग इसे शेयर करने की कृपा करें I क्रमशः ..........

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