बुधवार, 13 सितंबर 2017

हिंदी दिवस पर विशेष

जब साल 1947 में देश आजाद हुआ तो देश के सामने भाषा का सवाल एक बड़ा सवाल था। भारत जैसे विशाल देश में सैकड़ों भाषाएं और हजारों बोलियां थीं। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी को अंग्रेजी के साथ राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के तौर पर स्वीकार किया था। कहा जाता है कि जब अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा के तौर पर हटने का वक्त आया तो देश के कुछ हिस्सों खासकर दक्षिण भारतीय राज्यों में हिंसक प्रदर्शन हुए।  उसके बाद केंद्र सरकार ने संविधान संशोधन करके अंग्रेजी को हिन्दी के साथ भारत की आधिकारिक भाषा बनाए रखने का प्रस्ताव पारित किया।1953 में जवाहरलाल नेहरू सरकार ने इस ऐतिहासिक दिन के महत्व को देखते हुए 14 सितंबर को हिन्दी दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया। 

पर आज के आधुनिक युग में भी हिंदी 'हिंदी दिवस' का मोहताज नहीं है। देश की बड़ी आबादी हिंदी बोलने और समझनेवाली है, इसलिए हर क्षेत्र में हिंदी का महत्व है।  पढाई में हिंदी का महत्व इलसिए है क्योंकि इसमें जिस शब्‍द को जिस प्रकार से उच्‍चारित किया जाता है, उसे लिपि में लिखा भी उसी प्रकार जाता है।  रोचक बात यह है कि अंग्रेजी की रोमन लिपि में शामिल कुछ वर्णों की संख्‍या 26 है, जबकि हिंदी की देवनागरी लिपि के वर्णों की संख्‍या ठीक इससे दोगुनी यानी 52 है।  हमारे संसद भले ही अंग्रेजी में संसद में बोलेन, पर चुनाव प्रचार हिंदी में ही करना होता है।  हमारे अभिनेता भी भले ही बात-चित अंग्रेजी में करते हैं, पर उनको कमाई हिंदी फिल्मों में काम  मिलती है।

भारत अलावा  फिजी में भी हिंदी का काफी महत्व है। यहां रेडियो पर आने वाले ज्यादातर कार्यक्रम हिंदी में होते हैं। शिक्षा विभाग द्वारा संचालित सभी बाह्य परीक्षाओं में हिंदी एक विषय के रूप में पढ़ाई जाती है। फिजी का भारतीय समुदाय ने हिंदी समिति तथा हिंदी केंद्र बनाए हैं  औपचारिक एवं मानक हिंदी का प्रयोग पाठशाला के अलावा शादी, पूजन, सभा आदि के अवसरों पर होता है। कोई भी व्यक्ति सरकारी कामकाज, अदालत तथा संसद में भी हिंदी भाषा का प्रयोग कर सकता है। चुनाव सभाओं के पोस्टर व प्रचार सामग्री भी हिंदी भाषा के प्रयोग के बिना अधूरी समझी जाती है।

समय के साथ हुए बदलाव ने डिजिटल वर्ल्ड पर अपनी मौजूदगी साबित किया। हिंदी टाइपिंग की मजबूती ने आज हिंदी ब्लॉग्गिंग, हिंदी टयुब चैनल , हिंदी समाचार या हिंदी खोज इंजन को महत्वपूर्ण बनाया है।  आज गूगल किसी भी हिंदी कीवर्ड के हज़ारो परिणाम सामने लाता है।  सौभाग्यशाली हूँ कि शुरुआती कुछ ब्लोग्गेर्स के साथ ही मैंने भी हिंदी ब्लॉग जगत के माध्यम से हिंदी में उपयोगी पोस्ट लिखी और इंटरनेट के इस अथाह समुद्र में कुछ लेख मेरे भी मौजूद हैं। 

ग्रहों के प्रभाव का प्रमाण: गतांक से आगे……

अगर मैं कहूँ कि 2017 में जून से सितम्बर के बीच जितने भी बच्चों का जन्म हुआ है इनमे से लगभग सभी 30 वर्ष की उम्र में निडर, आक्रामक, मस्त, लापरवाह, बहुमुखी, जोशीले, असहिष्णु, सुविधावादी, इनमे से कई दबंग और शोषक भी हो सकते हैं तो अधिकांश बुद्धिजीवी इसे महज़ ज्योतिषीय बकवास ही समझेंगे लेकिन चूँकि मैंने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी विचार गंभीर चिंतन के पश्चात् ही रखा जाना चाहिए, अतः परीक्षण के बाद ही किसी सत्य का उल्लेख करता हूँ। मेरे उपरोक्त कथन की पुष्टि के लिए विद्वान पाठकों को 30 वर्षों का इंतज़ार नहीं करना पड़े इसलिए मैं आप को 30 वर्ष पीछे ले जा कर उल्लिखित सत्य को सिद्ध करने की कोशिश करता हूँ। जिनका जन्म सन 1987 में 15 जून से 15 अक्टूबर के बीच हुआ है वे निश्चित रूप से इस समय 30 वर्ष की अवस्था के नवयुवक या नवयुवती होंगे, के स्वाभाव का निरीक्षण और परीक्षण करें तो इनमे उल्लिखित सारी विशेषताएँ दिखाई पड़ेंगी।
लेकिन इसके ठीक विपरीत जिनका जन्म 11 जून से 12 अगस्त 1986 एवं 29 अगस्त से 28 अक्टूबर सन 1988 में हुआ, ऐसे सभी जातक स्वाभाव से संकोची, नियम से चलनेवाले, उत्तरदायित्व को समझने वाले, अंतर्मुखी, सहिष्णु, गंभीर, शांतिप्रिय, समन्वयवादी, स्वाभाव के होंगे और इस समय जीवन की विपरीत परिस्थियों से गुजर रहे होंगे क्यूँकि ये सभी उस समय पृथ्वी पर आये जब पूर्वी क्षैतिज में सूर्य का उदय हो रहा था और पृथ्वी के सापेक्ष मंगल वक्र गति में पश्चिम क्षैतिज पर अस्त हो रहा था।
ग्रह करोडो मील दूर रहकर किस तरह जड़-चेतन, जल-थल, जीव-जंतु मौसम, बाजार और मानव जीवन को प्रभावित करते हैं यह भले ही कल तक अबूझ पहेली बनी हुई थी लेकिन आज इस पहेली को सुलझाने की दिशा में बहुत हद तक कार्य किया जा चुका है। ग्रह अपनी गतिज ऊर्जा से ही हर जगह अपने प्रभाव का छाप छोड़ते हैं। अगर हम भौतिक विज्ञान के कुछ आधारभूत सिद्धांतों पर गौर करें तो पाएंगे कि अपरिमित गतिज ऊर्जा को ऊर्जा के अन्य स्वरूपों में परिवर्तित कर इलेक्ट्रान को हस्तांतरित करके मीलों दूर स्थित पदार्थों को आवेशित किया जा सकता है। दरअसल, पदार्थ के साथ शक्ति का अटूट सम्बन्ध होता है और किन्ही दो आकाशीय पिंडो के बीच आकर्षण बल उन दोनों के बीच की दूरी के वर्ग (स्क्वायर) का व्युत्क्रमानुपाती होता है। इसका मतलब दूरी का घटना और बढ़ना ऊर्जा के घटने और बढ़ने का कारण बन जाता है। 'गत्यात्मक ज्योतिष' में गतिज ऊर्जा की परिवर्तनशीलता पृथ्वी के सापेक्ष उन ग्रहों की घटती-बढ़ती दूरियों पर ही आधारित है।
अपने ज्योतिषीय अनुसन्धान के क्रम में ग्रहों की दो अलग-अलग स्थितियों पर बहुत चिंतन किया गया। सूर्य के साथ-साथ मंगल ग्रह पूर्वी क्षैतिज पर उदय हो रहा था, वह पहली स्थिति थी। दूसरी स्थिति सूर्य के उदय के समय मंगल180 डिग्री की दूरी पर रहकर पश्चिम क्षैतिज में अस्त हो रहा था। दोनों ही स्थितियों में मंगल और पृथ्वी के बीच की दूरी का अनुपात 4:1 था। सूर्य के साथ मंगल के उदय होनेवाले सभी जातकों का जन्म 2017 और 1987 के उल्लिखित अवधि के दौरान हुआ था जो पहले ग्रुप में रखे गए और दूसरे ग्रुप में 1986 और 1988 के उल्लिखित अवधि में पृथ्वी पर आये। दोनों ग्रुप के व्यक्तियों के स्वाभाव में जमीन आसमान का अंतर महसूस किया जा सकता है। उपरोक्त दोनों अवधियों के बीच जन्म लिए किसी जातक आपके परिवार के सदस्य या आपके कोई परिचित हैं तो इनकी वर्तमान स्थिति पर गौर करें, आपको कहीं भी कोई अपवाद नहीं मिलेगा।
मंगल युवावस्था का प्रतीक ग्रह है और शरीर में इसकी ग्रंथि की सक्रियता 24 से 36 वर्ष की उम्र में होती है। गत्यात्मक शक्ति जितनी अधिक होगी, 30 वर्ष की उम्र में उन युवक-युवतियों में सारी विशेषताएँ उतनी ही अधिक दिखाई पड़ेगी। स्मरण रहे जो ब्रम्हांड में है वही पिंड में है और प्रत्येक ग्रह के प्रतिनिधित्व के लिए मानव शरीर में इससे सम्बंधित ग्रंथि भी जीवन के अलग-अलग भाग में सक्रीय होती है| क्रमश:……
विद्या सागर महथा
निदेशक- गत्यात्मक ज्योतिष अनुसन्धान संसथान
ईमेल आईडी: vidyasagarmahtha@gmail.com; vidyasagarmahtha@yahoo.com;

मंगलवार, 12 सितंबर 2017

अपने जीवन के सकारात्मक या ऋणात्मक होने की जानकारी जीवन-ग्राफ से प्राप्त करें


भारतवासियों के चरित्र को धर्म के द्वारा जितना सकारात्मक स्वरुप दिया गया, उतना किसी और तरीके से संभव ही नहीं था। धर्म और ज्योतिष लोगों के जेनेटिक संरचना में ही हैं, इसलिए थोड़ा बुरा वक्त आते ही इसकी खोज आरम्भ करते हैं।  पर धर्म और ज्योतिष आधुनिक  विज्ञान की चीज नहीं , इसलिए किसी के द्वारा इन दोनों विषयों में प्राप्त किया गया अनुभव विचारणीय नहीं होता।  धर्म और ज्योतिष से सम्बंधित सकारात्मक विचार आपके पास है , तो वह प्रगतिशीलों को नहीं पचता। यदि धर्म और ज्योतिष से सम्बन्धिक ऋणात्मक विचार आपके पास है , तो वह अंधविश्वासियों को नहीं पचता।  इसलिए आप अपने अनुभव समाज में साझा करने की कोशिश ही नहीं करते, ऐसे में फ़ायदा उन्हें मिलता है , जो धर्म और ज्योतिष को अपने हिसाब से तोड़-मरोड़ रहे होते हैं।  नुकसान ऐसे लोगों को होता है , जो धर्म और ज्योतिष के क्षेत्र में ईमानदारी से अपना समय व्यतीत कर रहे हैं।  हमारे पिताजी श्री @ ने अपना पूरा जीवन ज्योतिष की सेवा में लगाया और ज्योतिष की एक नयी शाखा विकसित की।
'गत्यात्मक ज्योतिष' का ऐसा जीवन-ग्राफ , जिसको ५०,००० से ऊपर लोगों ने सही माना है , हमने समाज को ज्योतिष के मामले की ठगी से बचने , ज्योतिष के प्रति जागरूक करने और ज्योतिष को विज्ञान साबित करने के लिए एक व्यवस्था आरम्भ की है , जिसके द्वारा दुनिया भर के अधिक से अधिक लोगों को ये ग्राफ्स पहुंचाए जा सकें। इस महती कार्य में आप सबों का भी योगदान होना चाहिए। आप सभी निःशुल्क ऐसा जीवन-ग्राफ प्राप्त करने और इसपर डिस्कशन के लिए अपने जन्म-तिथि, जन्म-समय और जन्म-स्थान के साथ uniquelifegraph@gmail.com पर संपर्क करे। सबके जीवन-भर की परिस्थिति इस ग्राफ के हिसाब से ही चलती है। आपके जीवन के बड़े समयांतराल के सकारात्मक या ऋणात्मक होने की जानकारी यह ग्राफ देता है .. छोटे समयांतराल की जानकारी, जैसे शादी कब, नौकरी कब, स्वस्थ अच्छा कब, प्रमोशन कब तथा ग्रहों के प्रभाव से बचने के लिए किया जाने वाला उपाय आदि ..... इन सबके लिए सूक्ष्म गणना करनी पड़ती है।
इस ग्राफ से आपका मालूम होगा कि पुरे जीवन में आपका अच्छा और बुरा समयांतराल कब होगा।



इस ग्राफ से आपके अच्छे और बुरे ग्रह तथा उनके कारन जीवन का कौन सा पहलु प्रभावित होगा , इसको समझ पाएंगे।


यदि ग्राफ मिलने के बाद आपकी समझ में बात न आये तो फ़ोन पर समझने की व्यवस्था भी की गयी है।  उम्मीद है अधिक से अधिक लोगों को इस प्रकार के जीवन-ग्राफ की जानकारी देकर आप 'गत्यात्मक ज्योतिष' का प्रचार प्रसार करेंगे, ताकि समाज में अन्धविश्वास को जन्मा देने वालों को झटका लगे और समाज इस वैज्ञानिक प्राकृतिक ज्ञान से लाभ उठा सके। 

सोमवार, 11 सितंबर 2017

ग्रहों के प्रभाव का प्रमाण



अतिथि पोस्ट -- श्री विद्या सागर महथा , गत्यात्मक ज्योतिष के जनक 
अक्सरहा लोग सूर्य-चंद्र के द्वारा पृथ्वी के जड़-चेतन पर पड़नेवाले प्रभाव को स्वीकार करते हैं I सूर्य के कारण ही सारी सृष्टि संभव है I लेकिन बाकी ग्रहों के पड़नेवाले प्रभाव को ज्योतिषीय ज्ञान के अभाव में लोग कबूल नहीं कर पाते हैं I सूर्य के कारण ऋतुओं में परिवर्तन होता है I क्रमशः वसंत, ग्रीष्म, वर्षा शरद, हेमंत और शिशिर का आगमन होता है I सभी ऋतुओं का समय निर्धारित है और सभी की अलग अलग विशेषता है I फसल चाहे जिस प्रकार का हो सबके बीजारोपण और फसल की कटाई का समय सुनिश्चित होता है, इस ऋतु में जो काम होना चाहिए वैसे ही होता है I बड़े वृक्षों में पुराने पत्तों को त्यागना और नए पत्तों से लद जाने का काम वसंत ऋतु में होता है I ग्रीष्म ऋतु में जेठ महीने की दुपहरी की चिलचिलाती धूप में सभी जीव जंतु और मनुष्य इससे बचने के लिए अपने बिल और घर के अंदर दुबके पड़े रहते हैं I बड़े वनस्पति भी मुरझा जाते हैं I वर्षा ऋतु में बड़े उत्साह के साथ किसान अपने खेतों में फसल उगाने के उपक्रम में कार्यरत रहते हैं I पशु पक्षियों का व्यवहार ऋतुओं के अनुसार ही होता है I कछुए और मछलियों के अंडे देने का समय सुनिश्चित होता है I पौष महीने की रात में सभी ठंढ से बचने की अद्भुत चेष्टा करते हैं I
चन्द्रमा के कारण समुद्र में ज्वार भाटा आता रहता है I प्रत्येक पूर्णिमा और अमावस को बड़ी लहरे उठती रहती हैं जबकि लघु ज्वार भाटा की उत्पति दोनों अष्टमी को हुआ करती हैं I
मानव जीवन में सूर्य चंद्र और अवशिष्ट ग्रहों का प्रभाव कब दिखाई पड़ता है इसे भी समझने की चेष्टा करते हैं I आशा है विद्वान पाठक इसे ध्यान से पढ़ेंगे I हर कोई इस बात को महसूस करते हैं कि अमावस के दो तीन दिन पहले और दो तीन दिन बाद के समय में प्रायः लोग चन्द्रमा से सम्बंधित भाव तत्वों से कुछ परेशानी महसूस करते हैं I पूर्णमासी के आसपास कि तिथियों में अधिकांश लोग चन्द्रमा के भाव तत्वों से प्रसन्न दिखाई पड़ते हैं I लेकिन जिसके यहाँ मानसिक असंतुलन वाला व्यक्ति हो वहां अत्यधिक उत्तेजना के कारण कुछ अप्रिय बातें भी होती हैं I अमावस के आसपास जन्म लेनेवाले बच्चों का बाल्यकाल बहुत ठीक नहीं रहता है जबकि पूर्णिमा के आसपास जन्म लेनेवाले बच्चों का लालन-पालन, लाड-प्यार देखा जाता है I
दरअसल जो ब्रम्हांड में है वही पिंड में है I अतः ग्रहों की चाल के समानांतर व्यक्ति की परिस्थितियां और चाल बदलती रहती हैं I जब कोई शुभचिंतक या नजदीकी किसी व्यक्ति से मुलाकात होती है तो पहला प्रश्न होता है आपका हालचाल क्या है, मतलब वर्तमान की ताज़ी चाल कैसी है I
गत्यात्मक ज्योतिष किसी भी व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन के हर छोटे बड़े भाग में उसकी गति या चाल कैसी रहेगी, ये ग्राफ के माध्यम से सम्पूर्ण जीवन को चित्रित कर देता है I
सूर्य-चंद्र समेत सौर मंडल के सभी ग्रहों का प्रतिनिधित्व करनेवाली हमारे शरीर में स्थित विभिन्न प्रकार की ग्रंथियां हैं I सभी के सक्रियता का काल जीवन का भिन्न भिन्न भाग है I नजदीकी ग्रह जीवन के प्रारम्भ में और दूरस्थ ग्रह जीवन के अंतिम भाग में प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावित करते हैं I बाल्य काल की ग्रंथि बाल्य काल में, किशोरावस्था की ग्रंथि किशोरावस्था में, युवावस्था की ग्रंथि युवावस्था में .........और वृद्धावस्था की ग्रंथि वृद्धावस्था में सक्रीय होती है I सभी ग्रह से सम्बंधित ग्रंथियों के गुण-दोष उसकी जन्म कालीन ग्रह की शक्ति के अनुसार होता है I
अब मैं बुध ग्रह के प्रभाव की चर्चा करता हूँ I जो बच्चे विद्यार्थी जीवन में हैं, जिनका जन्म 1999 में 12 मार्च और 2 अप्रैल के मध्य, 15 जुलाई से 6 अगस्त के बीच, 7 नवम्बर से 25 नवम्बर के बीच और सन 2000 में 23 फरवरी से 15 मार्च के मध्य, 26 जून से 18 जुलाई के मध्य, 21 अक्टूबर से 5 नवम्बर के बीच हुआ, ये सभी जातक चाहे पृथ्वी के जिस भू भाग में रह रहे हों ये चाहे जितने भी इंटेलिजेंट हों या साधन संयुक्त हों, इनका जन्म भले ही किसी संभ्रांत परिवार में ही क्यों नहीं हुआ हो, ये अभी विद्यार्थी जीवन में 12 वर्ष से 18 वर्ष की उम्र में इन्हे संघर्ष करना पड़ रहा है, इन्हे अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है I इनका संघर्ष 18 वर्ष की उम्र तक बढ़ते क्रम में और 24 वर्ष की उम्र तक किसी न किसी प्रकार के संघर्ष से जूझना पड़ेगा I करोड़ों विद्यार्थियों में एक भी अपवाद नहीं मिलेगा I इससे बड़ा ग्रहों के प्रभाव का प्रमाण और क्या हो सकता है ? इस वैज्ञानिक सत्य की जानकारी अधिक अधिक लोगों तक पहुँच सकें, मैं चाहूंगा कि अधिक से अधिक लोग इसे शेयर करने की कृपा करें I क्रमशः ..........

रविवार, 10 सितंबर 2017

ज्योतिषियों के उलटे सीधे विज्ञापन


गेस्ट पोस्ट -- लेखिका शालिनी खन्ना 

एक गरम चाय की प्याली और अखबार के साथ प्राय: लोगों के रविवार की शुरुआत होती है .यही तो एक दिन होता है जब हफ्ते भर की बन्धी बन्धाई दिनचर्या से निजात मिलती है .दीमक की तरह पूरे अखबार को चाट जानेवालों की कमी नही ,इसी का फायदा उठाते हुये प्राय: सभी समाचारपत्र इस दिन कुछ विशेष पन्ने भी प्रकाशित करते हैं ,जिसमे तरह –तरह की सामग्री के साथ विज्ञापनो की भी बाढ आयी होती है .विज्ञापन दाता भी इस दिन का भरपूर लाभ उठाते हैं .पहले विज्ञापन पर हमारी नज़र टिक जाती है ,जिसमे पति पत्नी ,प्रेमी प्रेमिका ,शत्रु आदि किसी को भी वश मे करने के दावे एक ज्योतिषी करता है .मेरी समझ मे यह बात नही आती कि अगर सभी को वश मे करने की इतनी बडी शक्ति उनके पास है तो दो-चार महान सख्शियत को वश मे करके वह खुद शहंशाह क्यूं नही बन जाते .ऐसे दर-दर भटकने और अखबारों मे विज्ञापन देने की क्या जरूरत है ?यही बात उनसे पूछूं तो उनका जवाब होगा कि किसी को वश मे करने की बात उनके साथ लागू नही होगी .कारण वह नही बता पायेंगे ,पर हमे पता है .क्या आपने किसी डॉक्टर से ऐसा कहते सुना है कि मरीजों की जिस बीमारी को दूर करने के लिये वह जो इलाज कर रहे हैं ,उनकी उसी बीमारी मे वह इलाज कारगर साबित नही होगी .
दूसरे विज्ञापन पर गौर फरमाइये ,इसमे दो घण्टे मे मनचाहा परिणाम पाने की बात कही गई है .अगर किसी पद के सभी उमीदवार उनके पास पहुंच जायें तो क्या सभी के लिये मनचाहा परिणाम सम्भव है ?ऐसे मे ज्योतिषी अपने दावे पर कैसे खरा उतरेगा ?ऐसे ही एक –से –एक बढकर विज्ञापन देनेवाले यहां नज़र आते हैं ,जो अपने नाम के साथ ज्योतिषी का तमगा लगाकर ज्योतिष विज्ञान के आगे प्रश्न चिंह लगा देते हैं .
कुछ दिनो पहले एक व्यक्ति ने मेरे सामने अपनी कथा बयां की .अखबार मे दिये गये विज्ञापन से प्रभावित होकर इन्होने एक तांत्रिक से सम्पर्क साधा .किसी समस्या के निदान हेतु तांत्रिक ने उनसे कुछ उपाय बताया .उसने उस व्यक्ति से किसी चौराहे पर सन्धि बेला मे चार दिनो तक दिये जलाने को कहा ,जिसे जलते हुये कोई दूसरा व्यक्ति न देखे .अब आप ही बतायें ,जो चार राहों का संगमस्थल हो ,वहां सान्ध्य बेला मे कोई व्यक्ति न रहे ,ऐसा भला सम्भव हो सकता है क्या ?
एक और ठग तांत्रिक की बात सुनिये ,करोडपति बनने के लिये किसी व्यक्ति को उसने पूजा के कलश को एक हाथ से एक बार मे ही मारकर तोडने को कहा .यह क्रम तीन दिनो तक चलना था .दो दिन तो सब कुछ ठीक ठाक रहा ,पर तीसरे दिन एक बार की मार से कलश नही टूट पाया ,हाथ मे चोट आयी सो अलग .खुद मोटी रकम तो ले ही चुका था ,छूटते ही कहा ,अब इसमे मै क्या कर सकता हूं ,तुमसे कलश नही टूट पाया ,अब अमीर बनना सम्भव नही .
दुनिया मे सभी के कमाने और खाने के अलग-अलग तरीके हैं .कोई .व्यक्ति सही राह तो कोई गलत राह अपनाकर अपनी रोजी-रोटी चलाता है .पर दुख इस बात का है कि आज के वैज्ञानिक युग मे और शिक्षित होने के बावजूद इनके बहकावे मे आनेवाले लोगों की भी कमी नही .तभी तो ये अपना उल्लू सीधा कर चलते बनते हैं .