<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss'><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440</id><updated>2009-11-15T19:57:45.977+05:30</updated><title type='text'>गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष</title><subtitle type='html'></subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><link rel='next' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default?start-index=26&amp;max-results=25'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>214</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>25</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-5562938900603790132</id><published>2009-11-15T16:19:00.000+05:30</published><updated>2009-11-15T16:19:53.396+05:30</updated><title type='text'>जल्‍दी से उठकर खीर खाओ .. नहीं खाए तो गदा के मार से पीठ ही फाड दूंगा !!</title><content type='html'>किसी&amp;nbsp;गांव में तीन मित्र साथ साथ रहते थे, खुद ही खाना बनाते और&amp;nbsp;मिलजुलकर खाते थे। बहुत दिनों से रूखा सूखा खाना खाकर वे तीनो उब चुके थे , इसलिए एक बार तीनों को कुछ बढिया खाने की इच्‍छा हुई।&amp;nbsp;उन्‍होने सारी सामग्री इकट्ठा की और मिलकर खीर बनाया। खीर बहुत ही स्‍वादिष्‍ट बनी थी , तीनों ने तो जीभर खाया, पर फिर भी एक कटोरा खीर बच ही गया। इस खीर को कल खाया जाएगा , यह तो तय कर लिया गया , पर कौन खाएगा , इसका फैसला करना काफी कठिन था। बहुत देर माथापच्‍ची के बाद तीनो इस निर्णय पर पहुंचे कि रात में जो सबसे अच्‍छा सपना देखेगा , वही खीर खाएगा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तीनो लेट गए , पर नींद आंख से कोसों दूर थी। सुंदर सपने देखने का कोई सवाल ही नहीं था , इसलिए सभी मन ही मन प्‍लान बना रहे थे कि सुबह उठकर कौन सा सपना सुनाया जाए कि खीर का कटोरा उसे ही खाने को मिले। दो मित्र&amp;nbsp;की कल्‍पना शक्ति काफी तेज थी , दोनो ने सुबह सुनाने के लिए ने सुंदर सुंदर कहानियां बनायी और आराम से खर्राटे भरने लगे। तीसरे का दिमाग ही नहीं चल रहा था , नींद भी नहीं आ रही थी। सोंचते सोंचते उसे फिर से भूख लग गयी , वह आराम से उठा और सारा खीर खाकर कटोरे को पूर्ववत् ढंककर रख दिया।&amp;nbsp;इसके बाद तो उसे आराम से नींद&amp;nbsp;आनी ही थी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सुबह तीनो उठे , अब हाथ मुंह धोकर एक दूसरे को कहानी सुनाने की बारी थी। पहले दोस्‍त ने सुनाना शुरू किया कि वह रात सपने में अयोध्‍या पहुंच गया था , वहां की सुंदरता के क्‍या कहने ! ऐसी वाटिका थी, ऐसे फल फूल थे , ऐसी सडके , ऐसी इमारतें , घूमता घूमता वह राजा के महल में भी पहुंच गया। खूबसूरत महल&amp;nbsp;में राजा दशरथ और उनकी चारो रानियां मौजूद थी । राम , लक्ष्‍मण , भरत और शत्रुध्‍न बाल क्रीडा कर रहे थे। और भी न जाने क्‍या क्‍या , रातभर उसने&amp;nbsp;अयोध्‍या में ही व्‍यतीत किया , वे सब तो इसकी बराबरी कर ही नहीं सकते। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब दूसरे की बारी थी , उसने सुनाना शुरू किया कि भगवान राम की बाल लीला देखकर&amp;nbsp;इतने संतुष्‍ट हो तुम ! कल रात सपने में मै तो&amp;nbsp;गोकुल पहुंच गया था , वहां की सुंदरता के आगे अयोध्‍या की सुंदरता&amp;nbsp;कहां टिकनेवाली ? &amp;nbsp;मैं तो कृष्‍ण का सखा बनकर उसके साथ साथ घूम रहा था , गौएं चरा रहा था और वहां कृष्‍ण जी के साथ रास रचाती सुंदर सुंदर गोपियां , अरे मेरी तो वहां से आने की इच्‍छा ही नहीं हो रही थी। इसलिए मेरा सपना तुमसे भी अच्‍छा माना जाएगा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पहले ने कहा कि हमलोग फैसला बाद में करेंगे , पहले हमारे तीसरे दोस्‍त से सुन तो लिया जाए कि उसने सपने में क्‍या देखा। दोनो के सपने को सुनकर तीसरा दोस्‍त तो घबडा ही गया था , क्‍यूंकि उसे मालूम था कि इतने सुंदर सपनों के बाद किसी भी सपने को सुनाकर वह नहीं जीत सकता था।&amp;nbsp;पर यह समय घबडाने का नहीं , हिम्‍मत से काम लेने का था और हिम्‍मत जुटाने से रास्‍ता तो निकल ही जाता है। उसने कहा , कल रात , यहां मेरे सपने में हनुमान जी आए थे , आते ही उन्‍होने गदा उठाया और कहा , '&amp;nbsp;तुमने खीर को बचाकर क्‍यूं रखा है , जल्‍दी से उठकर सारे खीर खाओ , नहीं खाए तो गदा के मार से तुम्‍हारी पीठ ही फाड दूंगा' इसके बाद मैं क्‍या करता , उनकी गदा की मार के डर से मैने रात में ही उठकर सारी खीर खा ली।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दोनो दोस्‍त चौंके, 'अरे हनुमान जी ने खीर बचाकर नहीं रखने को कहा , तो तुमने अकेले रात में ही सारी खीर खा ली , हमें भी बुला लेते , खीर को हम सब मिलकर समाप्‍त कर देते।'&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;'तुम्‍हें कैसे बुलाते , तुम दोनो तो अयोध्‍या और&amp;nbsp;गोकुल में घूम रहे थे , मजबूरीवश मुझे अकेले ही खाना पडा' तीसरे ने निश्चिंति से जबाब दिया।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-5562938900603790132?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/5562938900603790132/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=5562938900603790132' title='12 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/5562938900603790132'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/5562938900603790132'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/11/blog-post_15.html' title='जल्‍दी से उठकर खीर खाओ .. नहीं खाए तो गदा के मार से पीठ ही फाड दूंगा !!'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>12</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-1414643528406591900</id><published>2009-11-14T17:17:00.004+05:30</published><updated>2009-11-14T17:44:25.852+05:30</updated><title type='text'>मंगल के घर में शनि बैठा है .. क्‍या यह खिल्‍ली उडानेवाली बात है ??</title><content type='html'>ज्‍योतिष की खिल्‍ली उडानेवालों के मुहं से अक्‍सर कुछ न कुछ ऐसी बातें सुनने को मिल जाती है , जो उनके अनुसार बिल्‍कुल अविश्‍वसनीय है....उसी में से एक है किसी ग्रह का घर। उनका मानना है कि सब सभी पिंड अपने परिभ्रमण पथ पर निश्चित रूप से चलते रहते हैं , तो उनमें से किसी का घर कहां माना जाए ? यदि वास्‍तव में उनका कोई घर होता , तो वे थोडी देर वहां न रूकते , आराम न करते ? उनका शक स्‍वाभाविक है , पर मैं आपलोगों&amp;nbsp;को जानकारी देना चाहती हूं कि किसी ग्रह का खुद के घर में या अपने मित्र के घर में या अपने शत्रु के घर में होना 'फलित ज्‍योतिष' के क्षेत्र में नहीं , वरन् 'परंपरागत खगोल शास्‍त्र' के&amp;nbsp;क्षेत्र में आता है और इस कारण यह किसी भी दृष्टि से हास्‍यास्‍पद नहीं। यदि आज तक वैज्ञानिकों ने खगोल शास्‍त्र से संबंधित अपना सूत्र न विकसित किया होता , तो आज&amp;nbsp;वे ग्रहों की गति से संबंधित 'गणित ज्‍योतिष' के सूत्रों पर भी शक की निगाह रख सकते थे। पर इसपर किसी को संदेह नहीं होता है , क्‍यूंकि हजारो वर्ष बाद भी आज तक&amp;nbsp;हमारी परंपरागत गणना में मामूली त्रुटि ही देखी जा सकी है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सतही तौर पर&amp;nbsp;किसी बात पर नजर डालकर उसे गलत समझा जा सकता है , पर गंभीरता से विचार करने पर ही इसके असली तथ्‍य पर पहुंचा जा सकता है। वैज्ञानिको को परंपरागत ज्‍योतिष में लिखे मंगल के लाल ग्रह होने की बात तब सही लगी होगी , जब&amp;nbsp;वे मंगल&amp;nbsp;ग्रह की सतह पर लाल मिट्टी होने का अनुभव कर पाए होंगे। इसी प्रकार चंद्रमा&amp;nbsp;के जलतत्‍व होने की बात की पुष्टि तब हुई हो, जब वैज्ञानिकों को&amp;nbsp;इसी वर्ष किए गए अपने परीक्षण में चंद्रमा पर पानी होने का पता चला हो। पर इन सबसे आगे आसमान के&amp;nbsp;विभिन्‍न राशियों से अलग अलग रंगों का परावर्तन&amp;nbsp;अभी तक वैज्ञानिकों की नजर में नहीं आ रहा , इसलिए इसे स्‍वीकार करना सचमुच आसान नहीं। ज्‍योतिष की पुस्‍तकों में विभिन्‍न राशियों द्वारा अलग अलग रंगों के प्रकाश के परावर्तन के बारे में लिखा गया है , पर उसे देखने के लिए जो भी साधन या दृष्टि चाहिए , उसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं। हो सकता है ऋषि मुनि उन्‍हें लिख न पाए हों या उनकी वह रचना कहीं खो गयी हो। इससे विषय तो विवादास्‍पद रहेगा ही , अगले अनुच्‍छेद में मैं अपनी बात को समझाने की कोशिश करती हूं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जिस तरह धरती में कहीं&amp;nbsp;भी कोई रेखा खींची हुई नहीं है , पर भूगोल का अध्‍ययन करते वक्‍त हम काल्‍पनिक आक्षांस या देशांतर रेखाएं खींचते हैं। इन रेखाओं को खींचने का एक आधार होता है यानि दोनो की 0 डिग्री किसी आधार पर पृथ्‍वी को दो बराबर भागों में बांटती है , और इसी के समानांतर या किसी अन्‍य आधार पर अन्‍य रेखाएं खींची गयी हैं। किसी भी जगह के सूर्योदय , सूर्यास्‍त, मौसम परिवर्तन या अन्‍य कई बातों की गणना में आक्षांस और देशांतर रेखाएं सहयोगी बनती हैं। इस बात से तो आप सभी सहमत होंगे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भूगोल की ही तरह गणित ज्‍योतिष में पृथ्‍वी को स्थिर मानने से पूरब से पश्चिम&amp;nbsp;तक जाता हुआ पूरा गोल 360 डिग्री का जो आसमान में एक वृत्‍त नजर आता है , उसे 30-30 डिग्री के बारह काल्‍पनिक भागों में बांटा गया है। इन्‍ही 30 डिग्री की एक एक राशि मानी गयी है यानि 0 डिग्री से 30 डिग्री तक मेष, 30 डिग्री से 60 डिग्री तक वृष, 60 डिग्री से 90 डिग्री तक मिथुन,&amp;nbsp; 90 डिग्री से 120 डिग्री तक कर्क, 120 डिग्री से 150 डिग्री तक सिंह, 150 डिग्री से 180 डिग्री तक कन्‍या, 180 डिग्री से 210 डिग्री तक तुला, 210 डिग्री से 240 डिग्री तक वृश्चिक, 240 डिग्री से 270 डिग्री तक धनु, 270 डिग्री से 300 डिग्री तक मकर, 300 डिग्री से 330 डिग्री तक&amp;nbsp;कुंभ, 330 डिग्री से 360 डिग्री तक&amp;nbsp;मीन कहलाती है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भूगोल के आक्षांस और देशांतर रेखाओं की तरह ही इन खास खास विंदुओं को भी एक महत्‍वपूर्ण आधार पर लिया गया है यानि आसमान के किसी भी विंदु से 0 डिग्री नहीं शुरू कर दी गयी है और कहीं भी अंत नहीं कर दिया गया है। यदि प्राचीन ऋषि मुनियों और उनके ग्रंथो की मानें , तो आसमान के मेष और वृश्चिक राशि से&amp;nbsp;लाल , वृष और तुला राशि से चमकीले सफेद , मिथुन और कन्‍या राशि से हरे , कर्क राशि से दूधिए , सिंह राशि से तप्‍त लाल , मकर और कुंभ राशि से काले और धनु तथा मीन राशि से पीले रंग को परावर्तित होते देखा गया है। अभी तक विज्ञान इसे ढूंढ नहीं सका है , इसलिए इसमें संदेह रहना स्‍वाभाविक है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पर जब प्राचीन ऋषियों , महर्षियों को इस बात के रहस्‍य का पता हुआ , उन्‍होने उन राशियों का संबंध वैसे ही रंगों को परावर्तित करने वाले ग्रहों के साथ जोड दिया। यही कारण है कि मेष और वृश्चिक राशि का आधिपत्‍य लाल रंग परावर्तित करने वाले मंगल को , वृष और तुला राशि का सफेद चमकीले रंग परावर्तित करनेवाले शुक्र को , मिथुन और कन्‍या राशि का हरा रंग परावर्तित करनेवाले बुध को , कर्क का दूधिया सफेद रंग परावर्तित करनेवाले चंद्रमा को , सिंह राशि का तप्‍त लाल रंग परावर्तित करनेवाले सूर्य को , &amp;nbsp;धनु और मीन राशि का पीली किरण बिखेरनेवाले बृहस्‍पति को तथा मकर और कुभ राशि का काले शनि को दे दिया। अपने पथ पर चलते हुए ही&amp;nbsp;कोई भी ग्रह अपनी राशि से गुजरते हैं तो स्‍वक्षेत्री कहलाते हैं, जबकि कभी कभी इन्‍हें दूसरे ग्रहों की राशि से भी गुजरना होता है, इसलिए यह मजाक उडाने वाली बात तो बिल्‍कुल नहीं । ज्‍योतिष के कई अविश्‍वसनीय मुद्दों पर विश्‍वभर के ज्‍योतिषियों में बहस या अलग अलग विचारधाराएं हैं , पर इस&amp;nbsp;बात को लेकर किसी प्रकार का विवाद नहीं , इसलिए इसकी वैज्ञानिकता की पुष्टि तो हो ही जाती है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;फलित ज्‍योतिष मानता है कि ग्रह स्‍वक्षेत्री हों तो अधिक मजबूत होते हैं , क्‍यूंकि अपने क्षेत्र में कोई भी राजा ही होता है, पर दूसरों के क्षेत्र में ग्रहों के होने से कुछ समझौते की नौबत आ जाती है। ग्रंथो में वर्णित ग्रहों के स्‍वभाव के हिसाब से कुछ ग्रहों में आपस में मित्रता और कुछ की आपस में शत्रुता भी है। इसलिए ज्‍योतिष में यह भी माना जाता है कि यदि कोई ग्रह मित्र क्षेत्र से गुजरता है&amp;nbsp; , तब भी उसका प्रभाव भी अच्‍छा ही दिखता है। लेकिन ग्रह यदि शत्रु के क्षेत्र से गुजरे , तो ग्रह लोगों के सम्‍मुख तरह तरह की बाधा उपस्थित करते हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-1414643528406591900?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/1414643528406591900/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=1414643528406591900' title='9 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/1414643528406591900'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/1414643528406591900'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/11/blog-post_14.html' title='मंगल के घर में शनि बैठा है .. क्‍या यह खिल्‍ली उडानेवाली बात है ??'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>9</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-9033992810437720734</id><published>2009-11-13T17:30:00.000+05:30</published><updated>2009-11-13T17:30:04.214+05:30</updated><title type='text'>इस पूरी सदी में किन लोगों की जन्‍मकुंडलियों में मंगल कमजोर थे ??</title><content type='html'>अभी आसमान में मंगल की एक खास स्थिति के होने के कारण मैं इसकी चर्चा करते हुए पिछले कई दिनों से मैं मंगल से संबंधित &lt;a href="http://sangeetapuri.blogspot.com/search/label/%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%B2%20%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9"&gt;आलेख&lt;/a&gt;ही लिख रही हूं। इनमे मैने बताया है कि जब मंगल कमजोर हो तो उस वक्‍त जन्‍म लेनेवाले बच्‍चों की जन्‍मकुंडलियों में मंगल की स्थिति कमजोर बन जाती है और इसके कारण उनका युवावस्‍था का वातावरण अच्‍छा नहीं बन पाता है। खासकर 24 वर्ष की उम्र से शुरू होनेवाली किसी न किसी पक्ष से संबंधित उनकी समस्‍याएं 30 वर्ष की उम्र तक बढती ही चली जाती हैं।वैसे 30 वर्ष की उम्र के बाद थोडी राहत तो मिलती है पर पूरा सुधार 36 वर्ष की उम्र के बाद ही हो पाता है , जब युवावस्‍था समाप्‍त होने को रहता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज के आलेख में हम देखेंगे कि इस सदी में किन तिथियों के मध्‍य जन्‍म लेनेवाले लोगों का जन्‍मकालीन मंगल कमजोर था , जिसके कारण खास 24 वर्ष से 30 वर्ष की उम्र तक उनके समक्ष किसी खास संदर्भ की समस्‍याएं बढते क्रम में बनी रही। इस समस्‍याओं के कारण इस पूरी अवधि के दौरान ये किंकर्तबय विमूढावस्‍था में रहें।&amp;nbsp;ज्‍योतिष को अतिसूक्ष्‍म गणना मानने वाले इस सहज ज्ञान को&amp;nbsp; भी गोल मोल न समझ लें। इस लिस्‍ट को आप भी साथ रखिए और इन जन्‍मतिथियों के मध्‍य जन्‍मलेनेवालों के बारे में बेखौफ ऐसी बातें कीजिए ........&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;1 फरवरी से 20 मार्च 1901&lt;br /&gt;4 मार्च से 25 अप्रैल 1903&lt;br /&gt;19 अप्रैल से 3 जून 1905&lt;br /&gt;21 जून से 25 जुलाई 1907&lt;br /&gt;8 सितम्‍बर से 9 अक्‍तूबर 1909&lt;br /&gt;4 नवम्‍बर से 15 दिसम्‍बर 1911&lt;br /&gt;12 दिसम्‍बर 1913 से 28 जनवरी 1914&lt;br /&gt;16 जनवरी से 5 मार्च 1916&lt;br /&gt;19 फरवरी से 11 अप्रैल 1918&lt;br /&gt;30 मार्च से 17 जून 1920&lt;br /&gt;23 मई से 6 जून 1922&lt;br /&gt;8 अगस्‍त से 7 सितम्‍बर 1924&lt;br /&gt;14 अक्‍तूबर से 22 नवम्‍बर 1926&lt;br /&gt;27 नवम्‍बर 1928 से 12 जनवरी 1929&lt;br /&gt;4 जनवरी से 24 फरवरी 1931&lt;br /&gt;6 फरवरी से 27 मार्च 1933&lt;br /&gt;12 मार्च से 3 मई 1935&lt;br /&gt;30 अप्रैल से 12 जून 1937&lt;br /&gt;8 जुलाई से 9 अगस्‍त 1939&lt;br /&gt;22 सितम्‍बर से 25 अक्‍तूबर 1941&lt;br /&gt;12 नवम्‍बर से 25 दिसम्‍बर 1943&lt;br /&gt;1 जनवरी से 7 फरवरी 1946&lt;br /&gt;24 जनवरी से 15 मार्च 1948&lt;br /&gt;28 फरवरी से 20 अप्रैल 1950&lt;br /&gt;10 अप्रैल से 26 मई 1952&lt;br /&gt;8 जून से 14 जुलाई 1954&lt;br /&gt;25 अगस्‍त से 24 सितम्‍बर 1956&lt;br /&gt;26 अक्‍तूबर से 6 दिसम्‍बर 1958&lt;br /&gt;6 दिसम्‍बर 1960 से 21 मार्च 1961&lt;br /&gt;11 जनवरी से 28 फरवरी 1963&lt;br /&gt;15 फरवरी से 5 अप्रैल 1965&lt;br /&gt;23 मार्च से 10 मई 1967&lt;br /&gt;12 मई से 23 जून 1969&lt;br /&gt;24 जुलाई से 24 अगस्‍त 1971&lt;br /&gt;15 अक्‍तूबर से 10 नवम्‍बर 1973&lt;br /&gt;20 नवम्‍बर से 31 दिसम्‍बर 1975&lt;br /&gt;1 जनवरी से 18 फरवरी 1978&lt;br /&gt;1फरवरी से 24 मार्च 1980&lt;br /&gt;7 मार्च से 27 अप्रैल 1982&lt;br /&gt;22 अप्रैल से 6 जून 1984&lt;br /&gt;25 जून से 29 जुलाई 1986&lt;br /&gt;12 सितम्‍बर से 14 अक्‍तूबर 1988&lt;br /&gt;6 नवम्‍बर से 18 दिसम्‍बर 1990&lt;br /&gt;15 दिसम्‍बर 1992 से 2 फरवरी 1993 &lt;br /&gt;19 जनवरी से 11 मार्च 1995&lt;br /&gt;22 फरवरी से 15 अप्रैल 1997&lt;br /&gt;4 अप्रैल से 20 मई 1999&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जैसा कि मैं पहले लिख ही चुकी हूं , उपरोक्‍त समयांतराल में जन्‍मलेनेवाले&amp;nbsp;सारे लोगों का मंगल कमजोर होगा ,&amp;nbsp;यहां तक कि इन तिथियों के आसपास जन्‍मलेनेवाले बहुत सारे लोग भी मंगल के बुरे प्रभाव में आएंगे। इसके कारण 24 वर्ष से 36 वर्ष की उम्र तक उनके सम्‍मुख मुश्किले&amp;nbsp;आयी होंगी या आएंगी , 30 वर्ष की उम्र के आसपास ये मुश्किल सर्वाधिक होंगी। पर&amp;nbsp;किनके सम्‍मुख किस प्रकार की मुश्किलें , इसे जानने के लिए आपको अगली कडी का इंतजार करना होगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-9033992810437720734?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/9033992810437720734/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=9033992810437720734' title='6 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/9033992810437720734'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/9033992810437720734'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/11/blog-post_13.html' title='इस पूरी सदी में किन लोगों की जन्‍मकुंडलियों में मंगल कमजोर थे ??'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>6</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-6972254742910249667</id><published>2009-11-11T17:14:00.000+05:30</published><updated>2009-11-11T17:14:59.953+05:30</updated><title type='text'>आज आपलोग मेरी कहानी 'थम गया तूफान' पढिए !!</title><content type='html'>आज साहित्‍य शिल्‍पी में मेरी एक कहानी &lt;a href="http://www.sahityashilpi.com/2009/11/blog-post_11.html"&gt;'थम गया तूफान'&lt;/a&gt; प्रकाशित की गयी है , कृपया उसे पढकर अपनी प्रतिक्रिया देने का कष्‍ट करें !&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-6972254742910249667?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/6972254742910249667/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=6972254742910249667' title='9 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/6972254742910249667'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/6972254742910249667'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/11/blog-post_11.html' title='आज आपलोग मेरी कहानी &apos;थम गया तूफान&apos; पढिए !!'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>9</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-7697354272856977680</id><published>2009-11-10T16:50:00.000+05:30</published><updated>2009-11-10T16:50:43.610+05:30</updated><title type='text'>कीडे मकोडे भी जोडा बनाकर ही रहते हैं ??</title><content type='html'>कीडो मकोडो से मुझे जितना भय है , कीडे मकोडे हमें उतना ही परेशान करते हैं। बोकारो स्‍टील सिटी के सेक्‍टर 4 के जिस क्‍वार्टर में&amp;nbsp;हमें पहली बार ठीक बरसात में रहने की शुरूआत करनी पडी , वहां कीडे मकोडो के नई नई प्रजातियों को देखने का मौका मिला। रसोई घर के सीपेज वाली एक दीवाल में न जाने कितने छेद थे और सबों से अक्‍सर तरह तरह के कीडे मुझे मुंह चिढाते। कीटनाशक के छिडकाव से कोई कीडा मर जाता , तो&amp;nbsp;थोडी देर बाद उसका जोडा अवश्‍य निकलकर कुछ समझने की कोशिश करता था। उबले आलू के चार फांक कर दें , तो जो शेप बनता है , बिल्‍कुल उसी शेप को वहां एक दिन चलते हुए देखा , तो मैं चौंक ही गयी थी। ऐसे भी कीडे होते हैं ? दो तीन महीने बडी मुश्किल से कीटनाशकों के बल पर मैं उस रसोई में खाना बनाने में समर्थ हो सकी थी। फिर अक्‍तूबर में उस दीवाल के नए सिरे से प्‍लास्‍टर हो जाने के बाद ही हमें समस्‍या से निजात मिल सकी थी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बोकारो में पेड पौधो की अधिकता है , इस कारण अलग अलग डिजाइनों वाली तितली या पतंगे या कीडे मकोडे को भी रहने की जगह मिल जाती है। मेरे उसी क्‍वार्टर में एक कमरे में एक ही खिडकी थी, उसी से अक्‍सर ऐसे कीडे मकोडे उस कमरे में आ जाते , पर छोटी खिडकी होने से वे उससे&amp;nbsp;बाहर नहीं निकल पाते थे। मुडे हुए अखबार की सहायता से उसे भगाने की कोशिश करती तो कभी कभी एक दो मर भी जाते। वैसे उसका जोडा कभी आए या नहीं , पर यदि किसी खास तरह का कीडा कमरे में मर जाता , तो दूसरे ही दिन उसी तरह का एक कीडा उसे ढूंढता हुआ पहुंच जाता था। उसे देखकर मैं समझ जाती थी कि उसी का जोडा किसी खास संकेत की सहायता से इसे ढूंढने आया है। ऐसी समझ आने के बाद मैं उन्‍हें भगाने के क्रम में उनकी सुरक्षा का भी ध्‍यान रखने लगी थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="border-bottom: medium none; border-left: medium none; border-right: medium none; border-top: medium none;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_umJcj5hbyeg/SvcFsoSovcI/AAAAAAAAARo/6DQSb1am4kk/s1600-h/Image0012.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; cssfloat: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" sr="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_umJcj5hbyeg/SvcFsoSovcI/AAAAAAAAARo/6DQSb1am4kk/s320/Image0012.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;पिछले छह वर्षों से मैं बोकारो में कॉपरेटिव कालोनी में रह रही हूं। वैसे तो यह काफी साफ सुथरी जगह है , पर अगल बगल कहीं पर एक खास तरह के मकडे का बसेरा है , जिसका चित्र मैं आपको दिखा रही हूं।&amp;nbsp;ये अक्‍सर घर में भी घुस आते हैं , सो तुरंत उनपर कीटनाशक का छिडकाव करने का विचार आ जाता है। पर इनके&amp;nbsp;भागने की स्‍पीड इतनी अधिक होती है कि मैं शायद ही कभी छिडकाव कर पाती होउं। ये देखने में ही इतने भयानक लगते हैं&amp;nbsp;कि हमेशा इनको लेकर भय बना रहता है। पर कुछ दिन पूर्व&amp;nbsp;एक मकडा&amp;nbsp;कई दिनों&amp;nbsp;तक मेरे स्‍टोर के कबर्ड के रैक के छत पर पडा था। आपलोगों के लिए मैने अपने मोबाइल से कई एंगल से इसके फोटो भी लिए , पर यह इधर से उधर भी नहीं हुआ , चुपचाप पडा रहा। इसे ऐसी हालत में देखकर कीटनाशक का छिडकाव करने की मेरी हिम्‍मत ही नहीं हुई , नीचे दिए गए चित्र को देखकर आप मकडे के इस हालत का कारण समझ सकते हैं ,&amp;nbsp;जिसमें दीपावली की सफाई के क्रम में एक डब्‍बे से कुचलकर उसका जोडा मृत पडा हुआ है और उसी के बगल में यह तीन दिनों से भूखा प्‍यासा शोक&amp;nbsp;मना रहा&amp;nbsp;था !!&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="border-bottom: medium none; border-left: medium none; border-right: medium none; border-top: medium none; clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_umJcj5hbyeg/SvcGLFBaH6I/AAAAAAAAARw/gHOHryo2QvE/s1600-h/Image0011.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" sr="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_umJcj5hbyeg/SvcGLFBaH6I/AAAAAAAAARw/gHOHryo2QvE/s320/Image0011.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_umJcj5hbyeg/SvcGXbLWq7I/AAAAAAAAAR4/HueM8bu6eOA/s1600-h/Image0019.jpg" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" sr="true" src="http://1.bp.blogspot.com/_umJcj5hbyeg/SvcGXbLWq7I/AAAAAAAAAR4/HueM8bu6eOA/s320/Image0019.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-7697354272856977680?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/7697354272856977680/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=7697354272856977680' title='13 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/7697354272856977680'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/7697354272856977680'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/11/blog-post_10.html' title='कीडे मकोडे भी जोडा बनाकर ही रहते हैं ??'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_umJcj5hbyeg/SvcFsoSovcI/AAAAAAAAARo/6DQSb1am4kk/s72-c/Image0012.jpg' height='72' width='72'/><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>13</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-8520653669547999141</id><published>2009-11-09T16:46:00.007+05:30</published><updated>2009-11-09T17:16:22.624+05:30</updated><title type='text'>धन, कर्म और प्रयोग से हमें 'विज्ञान' मिल सकता है, 'ज्ञान' प्राप्‍त करने के लिए ग्रहों का साथ होना आवश्‍यक है!!</title><content type='html'>कल प्रवीण शाह जी ने&lt;a href="http://praveenshah.blogspot.com/2009/11/blog-post_08.html"&gt;टाईम ट्रैवल और टाईम मशीन के बहाने ज्योतिष शास्त्र के विज्ञान होने या न होने का विश्लेषण...........&lt;/a&gt;नामक एक आलेख पोस्‍ट किया , जिसमें भूत या भविष्‍य में झांकनेवाली टाइम मशीन और ज्‍योतिष दोनो की ही वैज्ञानिकता पर शक किया गया था। उनके विश्‍लेषण के अनुसार कल्पना के घोड़े जितने भी दौड़ा लिये जायें पर हकीकत में टाईम ट्रेवल करना और टाईम मशीन बनना असंभव है। इसी तरह ज्योतिष हो या टैरो या क्रिस्टल बॉल गेजिंग... भविष्य का पूर्ण निश्चितता के साथ कथन असंभव है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उस लेख में मैने निम्‍न टिप्‍पणी की .... &lt;br /&gt;ऐसी भविष्‍यवाणियां हम करें ही क्‍यूं .. जिसका काट मनुष्‍य के वश में हो .. हम ऐसी भविष्‍यवाणियां क्‍यूं न करें .. जिसका काट मनुष्‍य के पास हो ही नहीं !!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दिनेशराय द्विवेदी जी को मेरी टिप्‍पणी नहीं जंची ,&amp;nbsp;आगे उनकी टिप्‍पणी देखें ... &lt;br /&gt;है कोई जवाब? आप के पास पहली टिप्पणी का।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब प्रवीण शाह जी को मुझे जबाब तो देना ही था , उन्‍होने प्रश्‍न के रूप में ही एक जबाब लिखा . &lt;br /&gt;क्या यह सत्य नहीं है संगीता जी, कि अधिकांश भविष्यवाणियां ऐसी ही होती हैं जिसकी काट मनुष्य के हाथ में हो?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;टिप्‍पणी के रूप में इस छोटे से प्रश्‍न का उत्‍तर बडा होता , जिसे टिप्‍पणी के रूप में देना संभव नहीं था , इसलिए&amp;nbsp;मैने उनके जबाब में एक आलेख लिखने का वादा किया , जो मैं प्रस्‍तुत कर रही हूं... &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मेरा मानना है कि इतने वैज्ञानिक युग में होने के बावजूद धन , कर्म और&amp;nbsp;प्रयोग से&amp;nbsp; 'सबकुछ' हासिल करने के बाद भी उसे हासिल करने के मुख्‍य उद्देश्‍य को पूरा करने का सभी दावा नहीं कर सकते। जैसे आज शरीर की कद, काठी और वजन&amp;nbsp;तक को नियंत्रित करने के साधन उपलब्‍ध है ... पर वे दावे के साथ अच्‍छा स्‍वास्‍थ्‍य नहीं दे सकते , अथाह धन को प्राप्‍त करने&amp;nbsp;के कितने कार्यक्रम बनाए जा सकते हैं .. पर वे धन का संतोष नहीं दे सकते , मनचाहे जीन को एकत्रित करके मनचाहे संतान पा सकते हैं ... पर उन्‍हें सुपात्र नहीं बना सकते , आज अपनी पसंद के अनुसार पात्र चुनकर विवाह करने की आजादी है .. पर&amp;nbsp;सभी सुखी दाम्‍पत्‍य जीवन नहीं पाते , पैसों के बल पर लोग नौकर इकट्ठे कर सकते हैं .. पर सच्‍चा सेवक मिलना सबको मुमकिन&amp;nbsp;नहीं , पलंग पर गद्दों का अंबार लगा सकते हैं .. पर नींद लाना सबके वश की बात नहीं , नाना व्‍यंजन जुटा सकते हैं .. पर भूख नहीं लगे तो कैसे खाएंगे , हर क्षेत्र के विशेषज्ञों की औषधि मिल सकती है .. पर चैन&amp;nbsp;कैसे मिले , विष&amp;nbsp;ढूंढना बहुत ही&amp;nbsp;आसान है .. पर अमृत&amp;nbsp;ढूंढकर दिखाए कोई , मास्‍टर क्‍या पूरा स्‍कूल ही बनवा सकते हैं .. पर किसी को अकल नहीं दे सकते आप,&amp;nbsp;&amp;nbsp;पैसों के बल पर बडे से बडे गुरू आपके सम्‍मुख खडे हो जाएंगे .. पर ज्ञान पाना सबके लिए संभव नहीं , किताबें क्‍या , पूरी लाइब्रेरी मिल सकती हैं .. पर विद्या&amp;nbsp;प्राप्‍त करना इतना आसान नहीं , पिस्‍तौल या अत्‍याधुनिक हथियार मिल सकते हैं&amp;nbsp;आपको .. पर कुछ करने के लिए साहस जुटाना&amp;nbsp;बहुत मुश्किल है , जीवन के विभिन्‍न मोडों पर अनगिनत साथी मिल सकते हैं&amp;nbsp; ..&amp;nbsp; पर सभी असली मित्र नहीं हो सकते , आप हर प्रकार की छोटी बडी संपत्ति प्राप्‍त कर सकते हैं .. पर शांति नहीं पा सकते , सैकडों भाई बंधु प्राप्‍त कर सकते हैं .. पर उनमें से कोई भी सहयोगी नहीं हो सकता , भ्रमण के लिए टिकट खरीद सकते हैं आप .. पर भ्रमण का आनंद ले पाना सबके वश&amp;nbsp;में नहीं , कुर्सी मिल सकती है .. पर प्रतिष्‍ठा नहीं ,&amp;nbsp;और इसी तरह विज्ञान प्राप्‍त कर सकते हैं पर ज्ञान नहीं !!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसका कारण यह है कि स्‍वास्‍थ्‍य, संतोष, दाम्‍पत्‍य जीवन, नींद, सुपुत्र, भूख, चैन, अमृत,अकल, विद्या, साहस, मित्र, शांति, सहयोगी, प्रतिष्‍ठा, भ्रमण का आनंद और ज्ञान प्राप्ति आपके वश में नहीं होती। इनको हासिल करने के लिए आपको अपने जन्‍मकालीन ग्रहों पर निर्भर रहना पडता है। किसी भी व्‍यक्ति के जीवन में ये सभी मुद्दे समय सापेक्ष होते हैं और कभी कमजोर तो कभी मजबूत दिखाई देते रहते हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो अपने मजबूत समय में तरक्‍की करनेवाले दुनिया के एक से एक दिग्‍गज अपने कमजोर समय में लाचार होते क्‍यूं देखे जाते ? और एक से एक कमजोर व्‍यक्ति मजबूत समय में दुनिया के लिए आदर्श&amp;nbsp;कैसे बन जाते हैं ? इसलिए ज्‍योतिष की चर्चा इन्‍हीं संदर्भों में की जानी चाहिए। जन्‍मकुंडली के निर्माण से लेकर भृगुसंहिता तक के भविष्‍य कथन में हमारे पूज्‍य ऋषि , महर्षियों ने इसी तरह सांकेतिक तौर पर ही ज्‍योतिष की विवेचना करने की कोशिश की थी , पर कालांतर में पंडितों ने अधिक ज्ञानी बनने के चक्‍कर में उन बातों की भविष्‍यवाणी करने का दावा&amp;nbsp;किया , जो मनुष्‍य के अपने हाथ में है। इसलिए मैने कहा कि ऐसी भविष्‍यवाणियां हम करें ही क्‍यूं , जिसका काट मनुष्‍य के वश में हो। हम ऐसी भविष्‍यवाणियां क्‍यूं न करें , जिसका काट मनुष्‍य के पास हो ही नहीं !!&lt;br /&gt;अपनी प्रतिक्रिया अवश्‍य दें ......&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-8520653669547999141?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/8520653669547999141/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=8520653669547999141' title='12 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/8520653669547999141'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/8520653669547999141'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/11/blog-post_09.html' title='धन, कर्म और प्रयोग से हमें &apos;विज्ञान&apos; मिल सकता है, &apos;ज्ञान&apos; प्राप्‍त करने के लिए ग्रहों का साथ होना आवश्‍यक है!!'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>12</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-128058492470036780</id><published>2009-11-08T16:45:00.002+05:30</published><updated>2009-11-08T16:54:55.734+05:30</updated><title type='text'>मंगल चंद्र की यह युति धनु राशिवालों के लिए खासी बुरी और कुंभ राशिवालों के लिए खासी अच्‍छी रहेगी !!</title><content type='html'>आज&amp;nbsp;आसमान में मंगल और चंद्र की एक बहुत ही मजबूत स्थिति बन रही है , जिसका रात्रि साढे नौ बजे के आसपास उदय होगा और रातभर मंगल और चंद्र को आप एक साथ आकाश में चमकता देख सकते हैं। इसके कारण आज और कल का दिन युवाओं के लिए खासकर 24 वर्ष की उम्र से 36 वर्ष की उम्र तक के युवकों युवतियों के लिए बहुत ही निर्णायक होगा , इसलिए वे आज कल में किसी महत्‍वपूर्ण घटना से संयुक्‍त हो सकते हैं। वैसे इसका प्रभाव अभी आनेवाले छह महीने तक रहेगा। अधिकांश के लिए यह घटना सुखद हो सकती है , पर कुछ के लिए तो कष्‍टकर होगी ही। मई 2010 तक इस घटना के विशेष प्रभाव से उन्‍हें सुख या दुख की अनुभूति होती रहेगी। जहां सुखद प्रभाव महसूस करनेवाले युवक युवतियों को इसकी बधाई देना चाहूंगी , तो दुखद प्रभाव महसूस करनेवालों के लिए मेरे दिल में संवेदनाएं भी हैं। वे अपने धैर्य की परीक्षा देते रहें , आनेवाला कल उनका भी होगा। वैसे इसके बारे में कल ही हल्‍के फुल्‍के ढंग से बताया था , पर आज विस्‍तार से जानकारी प्राप्‍त करें।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वैसे तो पंचांग में मंगल और चंद्र की यह युति हर महीने आती है , क्‍यूंकि 28 दिन में ही चंद्रमा हर राशि की परिक्रमा करता है और किसी न किसी राशि में&amp;nbsp;मंगल को होना ही है , इसलिए युति तो हर महीने होगी ही। पर हर महीने की युति को हम नहीं देख पाते , क्‍यूंकि सूर्य के साथ रहने के कारण वह पृथ्‍वी के हर भाग में वह दिन में ही उदय और अस्‍त हो जाता है। वैसे दिखाई न देने से हमपर प्रभाव भी न पडे , यह बात तो ग्रहों के संबंध में कहना तो उचित नहीं होगा। वास्‍तव में सूर्य से कोणिक दूरी के बढने के साथ ही साथ पृथ्‍वी से इसकी दूरी अपेक्षाकृत कम होने लगती है। यही कारण है कि इस समय नासा के वैज्ञानिक भी मंगल पर अपने यान भेजने या मंगल पर अन्‍य प्रकार के परीक्षण करने की शुरूआत करते हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मंगल से संबंधित कई &lt;a href="http://sangeetapuri.blogspot.com/search/label/%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%B2%20%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9"&gt;आलेख&lt;/a&gt;मैं पोस्‍ट कर चुकी , जिसमें मैने स्‍पष्‍टत: समझाया है कि पृथ्‍वी से अपेक्षाकृत कम दूरी बनते जाने से ही यह पृथ्‍वी पर अधिक प्रभावी होने लगता है। जैसा कि पिछले आलेखों में कह ही चुकी हूं , मंगल युवाओं को काफी हद तक प्रभावित करता है। इस कारण 7 और 8 नवम्‍बर 2010 को युवा वर्ग के किसी खास घटना से संबंधित होने की संभावना बढ जाती है। यहां ही नहीं आनेवाले कई महीनों में मंगल और चंद्र की इस तरह की युति का प्रभाव वे देख सकेंगे। जहां &lt;strong&gt;कुंभ राशिवालों&lt;/strong&gt;के लिए यह युति खासी अच्‍छी होगी , वहीं &lt;strong&gt;धनु राशिवाले&lt;/strong&gt;इस युति के कारण कुछ परेशान भी रह सकते हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;युवाओं के अतिरिक्‍त अन्‍य लोगों पर भी इसका आंशिक प्रभाव पडेगा , मंगल की इस खास स्थिति के कारण आज के अलावे आनेवाले छह महीनों में सभी लोग मंगल से संबंधित मुद्दों को मजबूत बनाने की कोशिश में लगे रहेंगे। विभिन्‍न लग्‍नवाले भिन्‍न प्रकार के संदर्भों में विशेष ध्‍यान संकेन्‍द्रण करेंगे ....... &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जैसे मेष लग्‍नवाले स्‍वास्‍थ्‍य और जीवनशैली को , वृष लग्‍नवाले घर गृहस्‍थी और खर्च को , मिथुन लग्‍नवाले लाभ और प्रभाव को , कर्क लग्‍नवाले संतान और प्रतिष्‍ठा के वातावरण को , सिंह लग्‍नवाले किसी प्रकार की छोटी या बडी संपत्ति को प्राप्‍त करने को , कन्‍या लग्‍नवाले भाई बंधु से संबंधित वातावरण को , तुला लग्‍न वाले अपनी घर गृहस्‍थी और आर्थिक वातावरण को , वृश्चिक लग्‍नवाले स्‍वास्‍थ्‍य और प्रभाव को , धनु लग्‍नवाले अपनी संतान और बाह्य संदर्भों की स्थिति को , मकर लग्‍नवाले किसी प्रकार की संपत्ति के लाभ को , कुंभ लग्‍नवाले पारिवारिक और पद प्रतिष्‍ठा से संबंधित वातावरण को तथा मीन लग्‍नवाले अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने की कोशिश में जुटे रहेंगे , उनमें से अधिकांश को सफलता मिलेगी , पर कुछ को असफलता भी हाथ आ सकती है। असफलता हाथ आने का कारण उनकी जन्‍मकालीन ग्रह स्थिति होगी , तात्‍कालीन नहीं !!&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-128058492470036780?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/128058492470036780/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=128058492470036780' title='11 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/128058492470036780'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/128058492470036780'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/11/blog-post_08.html' title='मंगल चंद्र की यह युति धनु राशिवालों के लिए खासी बुरी और कुंभ राशिवालों के लिए खासी अच्‍छी रहेगी !!'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>11</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-3707116927948481125</id><published>2009-11-07T17:06:00.000+05:30</published><updated>2009-11-07T17:06:17.157+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='क्रिकेट मैच'/><title type='text'>क्‍या कल के मैच में भारत की जीत की संभावना बनती है ??</title><content type='html'>कल आसमान में मंगल और चंद्र की एक बहुत ही मजबूत स्थिति बन रही है , जिसका कल रात्रि साढे नौ बजे के आसपास उदय होगा और रातभर मंगल और चंद्र&amp;nbsp;को आप एक साथ आकाश में चमकता देख सकते हैं। इसके कारण आज और कल का दिन युवाओं के लिए खासकर 24 वर्ष की उम्र से 36 वर्ष की उम्र तक के युवकों युवतियों के लिए बहुत ही निर्णायक होगा , इसलिए वे आज कल में किसी महत्‍वपूर्ण घटना से संयुक्‍त हो सकते हैं।&amp;nbsp;अधिकांश के लिए यह घटना सुखद हो सकती है , पर कुछ के लिए तो कष्‍टकर होगी ही। जहां सुखद प्रभाव महसूस करनेवाले युवक युवतियों को इसकी बधाई देना चाहूंगी , तो दुखद प्रभाव महसूस करनेवालों के लिए मेरे&amp;nbsp;दिल में संवेदनाएं भी हैं। वे अपने धैर्य की परीक्षा देते रहें , आनेवाला कल उनका भी होगा। &amp;nbsp;इसके बारे में विस्‍तृत जानकारी कल दे पाउंगी , क्‍यूंकि कल होनेवाले क्रिकेट मैच के दौरान के उतार चढाव की चर्चा करना आज अधिक आवश्‍यक है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भारत और आस्‍ट्रेलिया के मध्‍य होनेवाले क्रिकेट मैचों की इस श्रृंखला के पहले ही दिन से मैं मैच के दौरान आनेवाले उतार चढाव की चर्चा कर रही हूं। दो मैच और होने को है , उसमें से कल यानि 8 नवम्‍बर 2009 को नेहरू स्‍टेडियम , गुवाहाटी में होने वाले मैच के लिए शायद आज से ही सभी रोमांचित हो रहे हों। इस कारण इस मैच के बारे में किसी प्रकार की भविष्‍यवाणी करके भविष्‍य के लिए होनेवाले इस रोमांच को समाप्‍त करने का मुझे कोई हक नहीं दिखता।&amp;nbsp;पर मुझे लगता है कि मेरे हल्‍के रूप में संकेत देने से शायद आपका रोमांच कम नहीं होगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जैसा‍ कि मैने अपने पहले मैच में ही लिखा था कि इस बार की ग्रह स्थिति ही भारतीय टीम के बिल्‍कुल मनोनुकूल नहीं ,&amp;nbsp;और हर दिन टॉस आस्‍ट्रेलिया ही जीत रहा है।आज भी हमेशा की तरह ही इस मैच की शुरूआत भारत के पक्ष में नहीं ही होगी , पर इस बार मैच की शुरूआत आस्‍ट्रेलियन टीम के पक्ष में भी नहीं दिखती। इस हिसाब से मैच के प्रारंभिक दो घंटे दोनो टीम के सम्‍मुख चिडचिडाहट की ही स्थिति रहेगी । इसका अर्थ यह माना जा सकता है कि जहां बल्‍लेबाजी करनेवाली टीम अधिक रन न बना पाने के कारण अपनी स्थिति के मजबूत नहीं होने का अहसास करेगी , वहीं शायद गेंदबाजी करनेवाली टीम भी विकेट न ले सकने से परेशान रहे। पर 11 बजे के आस पास से ही मैच की स्थिति में सुधार दिखेगा और मैच के समाप्‍त होने तक शायद भारत का ही पलडा मजबूत दिखे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पर दूसरी पारी&amp;nbsp;में बिल्‍कुल शुरूआत को छोड दिया जाए , तो थोडी ही देर में यानि दो सवा दो बजे के बाद से ही भारतीय टीम पर दबाब की शुरूआत होगी और पूरे मैच के दौरान किसी न किसी रूप में बनीं ही रहेगी। साढे तीन के बाद ही भारतीय टीम पर दबाब कुछ कम दिखाई दे रहा है , पर उसके बाद के इतने कम समय में वह कामयाब हो पाएगी , इसमें थोडा संदेह तो रह ही जाता है। खासकर ऐसी स्थिति में जब सवा&amp;nbsp;चार बजे के बाद फिर मैच आस्‍ट्रेलिया के पक्ष में जाता दिख रहा हो। पर इस पौन घंटे के अंदर ही भारतीय टीम लक्ष्‍य को प्राप्‍त कर लें , तो संभावना बन सकती है , वैसे ईश्‍वर से ऐसी प्रार्थना तो हम सब मिलकर ही सकते हैं !!&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-3707116927948481125?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/3707116927948481125/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=3707116927948481125' title='12 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/3707116927948481125'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/3707116927948481125'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/11/blog-post_07.html' title='क्‍या कल के मैच में भारत की जीत की संभावना बनती है ??'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>12</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-5567309015919647330</id><published>2009-11-06T16:58:00.001+05:30</published><updated>2009-11-06T17:03:17.244+05:30</updated><title type='text'>क्या ज्योतिष को विकासशील नहीं होना चाहिए  ??</title><content type='html'>ज्योतिष विज्ञान है या अंधविश्वास , एक बड़ा प्रश्न , वो भी अनुत्तरित , क्योंकि इसके सही आधार की नासमझी के कारण जहां कुछ लोग इसका तिरस्कार करते हैं , वहीं दूसरी ओर अतिशय भाग्यवादिता से ग्रसित लोग किंकर्तब्यविमूढ़ावस्था को प्राप्त कर इसका अंधानुसरण करते हैं। दोनो ही स्थितियों में फलित ज्योतिष रहस्यमय और विचित्र हो जाता है। पहले वर्ग के लोगों का कहना है कि भला करोड़ों मील दूर स्थित ग्रह हमें किस प्रकार प्रभावित कर सकते हैं , वहीं दूसरे वर्ग के लोगों को आकाशीय पिंड की जानकारी से कोई मतलब ही नहीं , मतलब अपने भाग्य की जानकारी से है। इस तरह मूल तथ्य की परिचर्चा के अभाव में फलित ज्योतिष को जाने अनजाने काफी नुकसान है रहा है। एक भारतीय प्राचीन विद्या को हमारे देश में उचित स्थान नहीं मिल रहा है। ज्योतिष के पक्ष और विपक्ष में बहुत सारी बातें हो चुकी हैं , सबके अपने.अपने तर्क हैं , इसलिए किसी की जीत या हार हो ही नहीं सकती। बेहतर होगा कि बुद्धिजीवी वर्ग हर प्रकार के पूर्वाग्रह से मुक्त होकर ज्योतिषियों की बात सुनें , उनपर विचार करें। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रकृति के नियम के अनुसार प्रत्येक निर्माण--चाहे वह कला का हो , विज्ञान का या फिर धर्म का हो या संस्कृति का---------- अविकसित , विकासशील और विकसीत तीनों ही दौर से गुजरते हैं। न सिर्फ वैयक्तिक और सामाजिक संदर्भों में ही , वरन् प्राकृतिक वस्तुओं का निर्माण भी इन तीनों ही दौर से गुजरकर ही परिपक्वता प्राप्त करता है। इस सामान्य से नियम के तहत् ज्योतिष को भी इन तीनों ही दौर से गुजरना आवश्यक था। यदि वैदिक काल में ज्योतिष के गणित पक्ष की तुलना में फलित पक्ष कुछ कमजोर रह गया था तो क्या आनेवाले दौर में इसे विकसित बनाने की चेष्टा नहीं की जानी चाहिए थी। परंतु किसी भी युग में ऐसा नहीं किया गया। ज्योतिष को अंधविश्वास समझते हुए लगभग हर युग में इसे उपेक्षित किया गया। यह कारण मेरी समझ में आजतक नहीं आया कि क्यों हमेशा से ही भूत पढ़नेवालों को विद्वान और भविष्य पढ़नेवाले को उपहास का पात्र समझा जाता रहा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज भले ही कुछ ज्योतिषी इसे विकसीत बनाने की चेष्टा में जी.जान से लगे हों , सरकारी , अर्द्धसरकारी या गैर सरकारी ---. किसी भी संस्था का कोई सहयोग न प्राप्त कर पाते हुए लाख बाधाओं का सामना करते हुए ज्योतिष को विकासशील बनाए बिना विकसीत विज्ञान की श्रेणी में रख पाना संभव नहीं है। मै मानती हूं कि ज्योतिष विज्ञान के प्रति कुछ लोगों की न सिर्फ आस्था , वरण् भ्रांतियों को देखते हुए इसमें लाभ कमाने के इच्छुक लोगों का बहुतायत में प्रवेश अवश्य हुआ है , जिनका फलित ज्योतिष के विकास से कुछ लेना.देना नहीं है , पर उनके कारण कुछ समर्पित ज्योतिषियों के कार्य में बाधाओं का आना तो अच्छी बात नहीं है , जो कई सामाजिक भ्रांतियों को समाज से दूर करने के इच्छुक हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जब कुछ ज्योतिषी आस्था की बात करते हुए ज्योतिष को विज्ञान के ऊपर मान लेते हैं , यह मान लेते हें कि जहां से विज्ञान का अंत होता है , वहां से ज्योतिष आरंभ होता है , तो यह बात बुद्धिजीवियों के गले से नहीं उतरती।वे कार्य.कारण में स्पष्ट संबंध दिखानेवाले विज्ञान की तरह ही ज्योतिष को देखना चाहते हैं। पर जब उन्हें एक विज्ञान के रूप में ज्योतिषीय तथ्यों से परिचित करवाया जाता है , तॅ वे यहां चमत्कार की उम्मीद लगा बैठते हैं। उन्हें शत्.प्रतिशत् सही भविष्यवाणी चाहिए। क्या एक डाक्टर हर मरीज का इलाज करना सिर्फ इसलिए छोड़ दे , क्योंकि वह कैंसर और एड्स के मरीजों का इलाज नहीं कर सकता ? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जब हम ज्योतिषी स्वयं यह मान रहे हैं कि ग्रह.नक्षत्रों का प्रभाव पृथ्वी के जड़.चेतन के साथ.साथ मानवजीवन पर अवश्य पड़ता है और इस प्रकार मानवजीवन को प्रभावित करने में एक बड़ा अंश विज्ञान के नियम का ही होता है , परंतु साथ ही साथ मानवजीवन को प्रभावित करनें में छोटा अंश तो सामाजिक , आर्थिक , राजनीतिक और देश काल परिस्थिति का भी होता है। फिर ज्योतिष की भाविष्यवाणियों के शत.प्रतिशत सही होने की बात आ ही नहीं सकती। इसी कारण आजतक ज्योतिष को अविकसित विज्ञान की श्रेणी में ही छोड़ दिया जाता रहा है , विकासशील विज्ञान की श्रेणी में भी नहीं आने दिया जाता , फिर भला यह विकसित विज्ञान किस प्रकार बन पाए ? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक अविकसित प्रदेश के विद्यार्थी की योग्यता को जांचने के लिए आप शत्.प्रतिशत् परीक्षा परिणाम की उम्मीद करें , तो यह आपकी भूल होगी। सामान्य परीक्षा परिणाम के बावजूद वह योग्य हो सकता है , क्योंकि उसने उस परिवार और विद्यालय में अपना समय काटा है , जो साधनविहीन है। विकासशील क्षेत्र के अग्रणी विद्यालय या विकासशील परिवार के विद्यार्थी की योग्यता को आंकने के लिए आप शत.प्रतिशत परिणाम की उम्मीद कर सकते हैं , क्योंकि हर साधन की मौजूदगी में उसने विद्याध्ययन किया है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-5567309015919647330?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/5567309015919647330/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=5567309015919647330' title='9 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/5567309015919647330'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/5567309015919647330'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/11/blog-post_06.html' title='क्या ज्योतिष को विकासशील नहीं होना चाहिए  ??'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>9</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-8558250948188099775</id><published>2009-11-05T16:28:00.001+05:30</published><updated>2009-11-06T21:00:43.309+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='भृगुसंहिता'/><title type='text'>पुन: 'गत्‍यात्‍मक भृगुसंहिता' तैयार करने में इतनी देरी होने का कारण ??</title><content type='html'>पिछले कई &lt;a href="http://sangeetapuri.blogspot.com/search/label/%E0%A4%AD%E0%A5%83%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE"&gt;आलेखों&lt;/a&gt;में मैने भृगुसंहिता ग्रंथ के बारे में आपको जानकारी देने का प्रयास किया है , पिछली &lt;a href="http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/10/blog-post_04.html"&gt;कडी&lt;/a&gt;में मैने बताया था कि किस प्रकार मेरे द्वारा तैयार की गयी 'गत्‍यात्‍मक भृगुसंहिता' नष्‍ट हो गयी। पर 144 शीटोंवाले एक्‍सेल प्रोग्राम का बच जाना मेरे लिए काफी राहत भरा था , जिसके द्वारा किसी भी 'गत्‍यात्‍मक समय भृगुसंहिता' तैयार की जा सकती थी। पर&amp;nbsp;पहले की तुलना में कुछ अच्‍छा तैयार करने की सोंच के कारण ही चार पांच वर्ष व्‍यतीत हो जाने पर भी मैं उस दिशा में काम न कर सकी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक्‍सेल में बने प्रोग्राम से मेरे मनोनुकूल काम होते न देख मैने प्रोग्रामिंग सीखने का निश्‍चय किया। सी++ सीखने के लिए मुझे जितना समय देना पडता या जितना ध्‍यान लगाना पडता , शायद मैं नहीं दे सकती थी। उसकी तुलना में विज्‍युअल बेसिक काफी आसान था , इसलिए मैने विज्‍युअल बेसिक सीखने के लिए इंस्‍टीच्‍यूट में एडमिशन ले लिया। इसे सीखते सीखते ही घर पर ज्‍योतिष के 'गत्‍यात्‍मक सिद्धांतों' के आधार पर एक साफ्टवेयर भी तैयार करने लगी , ताकि इसे बनाने में कोई समस्‍या हो , तो कंप्‍यूटर के जानकारों से पूछा जा सके। पर ज्‍योतिष के सिद्धांत इतने आसान भी नहीं कि वे समस्‍याओं को तुरंत हल कर पाते , मुझे ही स्‍वयं दिन रात जगकर इस काम को अंजाम देना पडा और कामभर प्रोग्रामिंग किया हुआ मेरा साफ्टवेयर कुछ ही दिनों में तैयार हो गया , जो अभी भी सिर्फ जन्‍मतिथि , जन्‍मसमय और जन्‍मस्‍थान के आधार पर जातक के जीवनभर के उतार चढाव का ग्राफ के साथ ही साथ कई तरह की भविष्‍यवाणी करने में भी समर्थ है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;विज्‍युअल बेसिक सीखने के बाद मुझे महसूस हुआ कि एम एस वर्ड के मेल मर्ज की तुलना में विज्‍युअल बेसिक द्वारा और अच्‍छे ढंग से 'गत्‍यात्‍मक भृगु संहिता' को तैयार किया जा सकता है। इस कारण मेल मर्ज द्वारा&amp;nbsp;फिर से बनाए जानेवाले भृगुसंहिता के काम में रूकावट आ गयी और नए तरह की भृगुसंहिता को बनाने की दिशा में सोंच बनीं। पर कोई काम अनायास जितनी तेजी से हो जाता है , अधिक तैयारी के क्रम में उतनी ही देर लगती है। पहले से बने हुए उस एक्‍सेल शीट को भी पापाजी के द्वारा&amp;nbsp;संपादित कराने की इच्‍छा थी , पर न तो उनका मेरे यहां लम्‍बी अवधि के लिए आना हो पा रहा है और न ही मैं उनके यहां जा पा रही हूं, जो कि देर होने का मुख्‍य कारण है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पुस्‍तक के रूप में जो 'गत्‍यात्‍मक भृगुसंहिता' तैयार हुई थी ,&amp;nbsp;उसमें व्‍यक्ति के ग्राफ के अनुसार किसी एक ग्रह के&amp;nbsp;हिसाब से उसकी उम्र के आधार पर भविष्‍यवाणी की जाती थी। पर मेरे मनोनुकूल अब जो भृगुसंहिता बनेगी , उसे साफ्टवेयर ही समझा जाए और इसमें अपना जन्‍मविवरण डालने के बाद यह उम्र के साथ नहीं , वरन् ईस्‍वी के साथ भविष्‍यवाणी कर सकेगी। वैसे मेरे अभी बने प्रोग्राम में भी इसकी सुविधा है , पर वह विस्‍तृत में न होकर संक्षेप में है और भाषा थोडी कठिन है। आगे मेरा जो कार्यक्रम है , उसमें भाषा ऐसी सरल रहेगी कि लोगों का अपनी जीवनयात्रा के बारे में , आनेवाली परिस्थितियों के बारे में पहले से ही सबकुछ समझ में आ जाएगा और इस आधार पर अपने समय से तालमेल बिठाते हुए वे अपनी आगे की योजना बना पाएंगे। ईश्‍वर का आशीर्वाद रहा तो 2010 के अंत अंत तक मैं इसे तैयार कर लूंगी !!&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-8558250948188099775?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/8558250948188099775/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=8558250948188099775' title='5 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/8558250948188099775'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/8558250948188099775'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/11/blog-post_05.html' title='पुन: &apos;गत्‍यात्‍मक भृगुसंहिता&apos; तैयार करने में इतनी देरी होने का कारण ??'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-7132609866821966206</id><published>2009-11-04T17:31:00.001+05:30</published><updated>2009-11-04T17:34:47.090+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='क्रिकेट मैच'/><title type='text'>हमारे रणबांकुरे कल क्‍या करेंगे ??</title><content type='html'>देखते ही देखते भारत और ऑस्‍टेलिया&amp;nbsp;के मध्‍य पांचवा मैच भी कल होना है, जिसके लिए भी कुछ तुक्‍का लगा ही दूं। इसे तुक्‍का ही मानें क्‍यूंकि मैं गोलमोल बातें कहा करती हूं और हार और जीत के बारे में साफ साफ नहीं बताती हूं। कौन कितना रन बनाएगा , ये भी नहीं कह पाती। वास्‍तव में 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' ग्रहों के प्रभाव को एक सीमा तक ही मानता है और&amp;nbsp;किसी की मेहनत और क्षमता को भी काफी महत्‍व देता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस कारण जन्‍मकुंडली के ग्रहों के प्रभाव के आधार पर भविष्‍यवाणी करते हुए हम व्‍यक्ति के पूरे जीवन के उतार चढाव का लेखाचित्र खींच देते हैं , पर उतार में व्‍यक्ति&amp;nbsp;कितना नीचे चला जाएगा और चढाव में कितना उपर , इसे बताना संभव नहीं, क्‍यूंकि हम व्‍यक्ति की क्षमता को , उसके जीन को , उसके पारिवारिक वातावरण को , उसके भौगोलिक वातावरण को ग्रहों से नहीं समझ सकते। इसके अलावे भी कुछ अन्‍य बातों को प्रभाव मनुष्‍य के जीवन में पडता है , जबकि हम सिर्फ ग्रहों के प्रभाव को दखते हैं , अन्‍यान्‍य प्रभाव को नही।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसी प्रकार किसी मैच के विश्‍लेषण करने में हम भारत के पक्ष और विपक्ष तथा आस्‍ट्रेलिया के पक्ष और विपक्ष के समय का खाका खींच सकते हैं , पर पक्ष के समय का देश कितना उपयोग करेगा या विपक्ष के समय कितने चुनौतीपूर्ण ढंग से निबटेगा , यह दोनो देश के टीम की तैयारी पर निर्भर करता है। कल दूसरी पारी के पहले दो घंटे खराब होने&amp;nbsp;की बात तो मैने की थी , पर भारत की टीम के सारे विकेट धडाधड गिर जाएंगे , यह निश्चित तौर पर हमारे खिलाडियों का गलत निर्णय है , पहले से ऐसी कल्‍पना कौन कर सकता था ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कल उप्‍पल , हैदराबाद राजीव गांधी इंटरनेशनल स्‍टेडियम में भारत आस्‍ट्रेलिया के मध्‍य होनेवाले पांचवे&amp;nbsp;क्रिकेट मैच में शुरूआत भारत के पक्ष में न होने से&amp;nbsp;कुछ देर तक भारत दबाब महसूस कर सकता है पर थोडी ही देर में सबकुछ सामान्‍य नजर आएगा और बिल्‍कुल अंत अंत में मैच भारत के पक्ष में हो जाएगा, जिसके कारण ब्रेक का समय भारतवासियों को काफी राहत देनेवाला होगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दूसरी पारी में भी मैच की शुरूआत बहुत ही अच्‍छे ढंग से होगी , एक घंटे तक भारत के बहुत मजबूत स्थिति में खेलने के बाद&amp;nbsp;आस्‍ट्रेलियन टीम भी काफी गंभीर हो जाएगी , जिसके कारण भारत पर दबाब बहुत बढता जाएगा। रात साढे नौ बजे के बाद ही ग्रहों के अच्‍छे प्रभाव से भारत को थोडी राहत मिलने की उम्‍मीद बनती है। पर इसका फायदा उठाने के लिए उन्‍हें अपने बुरे समयंतराल को धैर्य से खेलकर पार करना पडेगा। इस देश के वासी होने के नाते ऐसा ही हो , अन्‍य दिनों की तरह ही हम इसकी कामना तो करेंगे ही।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-7132609866821966206?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/7132609866821966206/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=7132609866821966206' title='20 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/7132609866821966206'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/7132609866821966206'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/11/blog-post_04.html' title='हमारे रणबांकुरे कल क्‍या करेंगे ??'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>20</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-1633911807456998806</id><published>2009-11-03T18:04:00.003+05:30</published><updated>2009-11-03T19:22:59.728+05:30</updated><title type='text'>2009 - 2010 में विभिन्‍न लग्‍नवालों के लिए विवाह होने का योग</title><content type='html'>दो चार दिन पूर्व ही देवोत्‍थान एकादशी बीता और इसके बाद से ही मांगलिक कार्यों की शुरूआत हो गयी। मांगलिक कार्यों में सबसे महत्‍वपूर्ण विवाह कार्य को ही माना जा सकता है। पिछले वर्ष यानि 2008- 2009 में &lt;a href="http://sangeetapuri.blogspot.com/2008/11/blog-post_22.html"&gt;इस आलेख&lt;/a&gt;में मैने विभिन्‍न लग्‍नवालों के वैवाहिक योगों की चर्चा करते हुए एक आलेख लिखा था, जिसमें मुख्‍य निष्‍कर्ष के रूप में मैने लिखा था कि पिछले वर्ष विभिन्न लग्नवालों के विवाह की संभावना इन समयों में बनीं थी -------------&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मेष लग्न -- 16 जनवरी से 7 मार्च , 18 अप्रैल से 14 जून 2009,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मिथुन लग्न -- 16 मई से 16 जून 2009,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कर्क लग्न -- 13 दिसम्बर से 30 दिसम्बर 2008, 29 दिसम्बर 2008 से 14 फरवरी 2009 , 16 मई से 16 जून 2009&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सिंह लग्न -- 13 दिसम्बर से 30 दिसम्बर 2008 , 16 जनवरी से 7 मार्च , 18 अप्रैल से 16 जून 2009&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कन्या लग्न -- 16 जनवरी से 7 मार्च , 18 अप्रैल से 16 जून 2009,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वृश्चिक लग्न -- 16 जनवरी से 7 मार्च ,18 अप्रैल से 15 जून 2009,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;धनु लग्न -- 29 दिसम्बर 2008से 14 फरवरी 2009, 25 अप्रैल से 15 जून 2009,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुंभ लग्न -- 13 दिसम्बर से 30 दिसम्बर 2008, 16 मई से 6 जून 2009,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मीन लग्न -- 29 दिसम्बर 2008 से 14 फरवरी , 25 अप्रैल से 15 जून 2009 ,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसका अर्थ यह है कि पिछले वर्ष वृष , तुला और मकर लग्‍न वालों के लिए सामान्‍य तौर पर विवाह के योग नहीं थे, जन्‍मकुंडली के हिसाब से इन लग्‍नवालों में से एक दो के ही विवाह हो सकते थे। इस आलेख में इस वर्ष 2009 - 2010 के विभिन्‍न लग्‍नवालों के विवाह योगों की चर्चा करनी चाहूंगी , जो निम्‍न प्रकार होंगे ...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वृष लग्‍न ... 29 अक्‍तूबर से 22 दिसम्‍बर और 11 मार्च से 15 जुलाई,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मिथुन लग्‍न ... 14 अक्‍तूबर से 24 नवम्‍बर, 18 दिसम्‍बर से 28 जनवरी और 23 जून से 15 जुलाई, &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कर्क लग्‍न ... 14 अक्‍तूबर से 20 दिसम्‍बर, 26 दिसम्‍बर से 15 जनवरी , 2 जून से 22 जून,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सिंह लग्‍न ... 26 दिसम्‍बर से 15 जनवरी , 2 जून से 22 जून,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कन्‍या लग्‍न ... 14 अक्‍तूबर से 24 नवम्‍बर और 23 जून से 15 जुलाई,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तुला लग्‍न ... 29 अक्‍तूबर से 22 दिसम्‍बर , 7 अप्रैल से 27 मई और 11 मार्च से 15 जुलाई, &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;धनु लग्‍न ... 18 दिसम्‍बर से 28 जनवरी और 7 अप्रैल से 27 मई,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मकर लग्‍न ... 29 अक्‍तूबर से 22 दिसम्‍बर और 11 मार्च से 26 मई,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुंभ लग्‍न ... 26 मई से 20 जुलाई,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मीन लग्‍न ... 18 दिसम्‍बर से 28 जनवरी और 7 अप्रैल से 27 मई,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस वर्ष वृष , तुला और मकर लग्‍न वालों विवाह योग्‍य युवक युवतियों के लिए खुशखबरी है , क्‍यूंकि बहुत दिनों बाद उनके लिए विवाह का योग उपस्थित हुआ है , पर इस वर्ष मेष और वृश्चिक लग्‍न वालों विवाह योग्‍य युवक युवतियों के लिए दुख भरी खबर है , क्‍यूंकि इनके लिए सामान्‍य तौर पर विवाह का योग नहीं है , जन्‍मकुंडली में कोई महत्‍वपूर्ण बात हो , तभी इनका विवाह हो सकता है !!&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-1633911807456998806?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/1633911807456998806/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=1633911807456998806' title='5 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/1633911807456998806'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/1633911807456998806'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/11/2009-2010.html' title='2009 - 2010 में विभिन्‍न लग्‍नवालों के लिए विवाह होने का योग'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-380154892746636421</id><published>2009-11-02T17:56:00.005+05:30</published><updated>2009-11-02T19:26:25.071+05:30</updated><title type='text'>ज्‍योतिष हकीकत का नहीं ... सिर्फ संभावनाओं का विज्ञान है !!</title><content type='html'>ग्रहों के क्रिकेट मैच पर पडनेवाले प्रभाव को दिखाने के लिए मैं कई दिनों से मैच के एक दिन पहले ही ग्रहीय आधार पर मैच का विश्‍लेषण करती आ रही हूं। कुछ लोगों के लिए ज्‍योतिष तो मजाक का विषय है ही , मेरे पोस्‍ट पर प्रकाश गोविंद जी की टिप्‍पणी देखिए ...&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;ज्योतिष का एक ही सफल मन्त्र है : &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;भविष्य वाणी इस तरह से गोल-मोल करो कि जो भी परिणाम आये वो ऐसा लगे कि अरे मैंने यही तो कहा था न :)&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रवीण शाह जी वैसे तो अक्‍सर मुझे प्रोत्‍साहित किया करते हैं , पर मेरा कल का आलेख इन्‍हें भी मजाक लगा , तभी इन्‍होने भी ऐसी टिप्‍पणी की ...&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;मेरी भविष्यवाणी है कि पहले आस्ट्रेलिया खेलेगा, दूसरी पारी भारत की होगी, सामान्य मुकाबला होगा और जीत भारत के हाथ नहीं लगती दिखती है...&lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;इस भविष्यवाणी के सच होने की संभावना ५०% है&lt;/strong&gt;...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब मेरे आलेख का यह अंश देखें .....&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;कल मोहाली के पंजाब क्रिकेट एशोसिएशन स्‍टेडियम में भारत और आस्‍ट्रेलिया के मध्‍य होनेवाले चौथे एकदिवसीय मैच में शुरूआत के दो घंटे बिल्‍कुल सामान्‍य रहेंगे , पर लगभग चार बजे के बाद भारतीय टीम बहुत ही अच्‍छा खेलेगी।&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लगभग 20 ओवर तक एक विकेट के नुकसान पर लगभग 5 के औसत रनरेट से आराम से खेलते हुए आस्‍ट्रेलिया 4 बजे के बाद अचानक ही दो और विकेट खो बैठता है और कुछ ही देर में रनरेट गिरकर साढे चार पर पहुंच जाता है। काफी कोशिश कर वे थोडी देर में रनरेट को बढा अवश्‍य ही लें , पर उनपर दबाब पडने की बात से इंकार तो नहीं किया जा सकता। पहले डेढ घंटे में एक&amp;nbsp;विकेट और दूसरे डेढ घंटे में चार&amp;nbsp;विकेट का नुकसान आस्‍ट्रेलिया के लिए सिर्फ संयोग नहीं माना जा सकता। 6 बजे तक भी धडाधड विकेट्स का गिरना जारी रहा और चार बॉल खेले बिना ही आस्‍ट्रेलिया का मैच समाप्‍त हो गया।&lt;br /&gt;अब पहले मैच के दिन प्रकाशित मेरे आलेख का अंश देखें ....&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;वैसे इस दिन बिल्‍कुल शुरूआत का समय यानि 3 बजे के बाद के दो घंटे भारत के पक्ष में दिखते हैं&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;और उस दिन ठीक तीन बजे के बाद धडाधड रन बनाकर भारत अपनी बडी हार से खुद को बचा लेता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उसके दूसरे दिन मेरे आलेख का अंश देखें .... &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;भारत की शुरूआत बहुत ही अच्‍छी रहेगी और लगभग दो घंटे तक भारत काफी अच्‍छा खेलेगा , जिसके कारण अंत अंत तक सामान्‍य खेलते हुए भी पहली पारी में इसकी स्थिति बहुत ही मजबूत बन जाएगी। &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;दूसरी पारी में भी भारत की मजबूत स्थिति के कारण आस्‍ट्रेलिया किसी समय भारत पर दबाब बनाता नहीं दिखेगा । पर बिल्‍कुल आराम से खेलते हुए भी कछुए की चाल की तरह उसकी स्थिति भी मजबूत हो जाएगी और अंतिम एक घंटे में भारत पर दबाब पडने की शुरूआत होगी।&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सचमुच भारत बडा स्‍कोर खडा करता है और आस्‍ट्रेलिया कछुए की चाल में खेलता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तीसरे दिन के मैच में मेरे आलेख का अंश देखें .... &lt;br /&gt;&lt;strong&gt;दूसरी पारी के आरंभ में भी भारतीय टीम की गंभीरता काफी बनी रहेगी और इस कारण आस्‍ट्रेलियन टीम का शुरूआती अनुभव अच्‍छा नहीं रहेगा और दो घंटे उनसे अधिक की उम्‍मीद नहीं की जा सकती! पर उसके बाद के दो घंटे में ग्रहीय बाधा के गुजर जाने से खेल में अवश्‍य सुधार आना चाहिए! उसमें इतनी कामयाब हो जाए कि भारतीय टीम को हरा सके , ऐसा मुझे तो नहीं दिखता।&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;और इस दिन भी आस्‍ट्रेलिया की टीम भारतीय टीम को नहीं हरा पाती। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यदि ये सब गोल मोल बातें हैं , तो&amp;nbsp;साफ सुथरी बातें किसे कहते है , यह मैं प्रकाश गोविन्‍द जी से जानना चाहती हूं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वैसे यह बात सही है कि ज्‍योतिष सिर्फ संभावनाओं की चर्चा करता है , हकीकत का नहीं। हकीकत यह है कि इसी सप्‍ताह शेयर बाजार से संबंधित मेरी भविष्‍यवाणी बिल्‍कुल उलट हुई है , पर इसका दोष मैं ग्रहों को नहीं , &lt;a href="http://www.moltol.in/index.php/200911024863/Khash-Feature/Mangal-will-decide-way-of-Dalal-Street.html"&gt;खुद&lt;/a&gt;को दिया करती हूं। मैं पिछले एक वर्ष से शेयर बाजार से संबंधित साप्‍ताहिक भविष्‍यवाणी कर रही हूं और मात्र दो बार बडे स्‍तर पर चूक हुई है , इस &lt;a href="http://www.moltol.in/index.php?option=com_ijoomla_archive&amp;amp;task=archive&amp;amp;search_archive=1&amp;amp;act=search&amp;amp;author=617&amp;amp;ptitle=संगीता%20पुरी"&gt;लिंक&lt;/a&gt;में इसे आप देख सकते हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-380154892746636421?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/380154892746636421/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=380154892746636421' title='26 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/380154892746636421'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/380154892746636421'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/11/blog-post_02.html' title='ज्‍योतिष हकीकत का नहीं ... सिर्फ संभावनाओं का विज्ञान है !!'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>26</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-4674193285385766716</id><published>2009-11-01T16:47:00.006+05:30</published><updated>2009-11-04T17:33:52.151+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='क्रिकेट मैच'/><title type='text'>कल के मैच में किसकी होगी बल्ले-बल्ले ??</title><content type='html'>कल के मैच में भारत की जीत के लिए आप सभी पाठकों को बहुत बधाई ! मेरे द्वारा तीन दिनों से क्रिकेट मैच के बारे में की जाने वाली संभावनाओं की अच्‍छी खासी &lt;a href="http://sangeetapuri.blogspot.com/search/label/%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%9F%20%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%9A"&gt;सटीकता&lt;/a&gt;को देखकर आपलोग ग्रहों के क्रिकेट मैच पर पडनेवाले प्रभाव के प्रति अवश्‍य आश्‍वस्‍त हो गए होंगे। इस कारण कल के मैच के बारे में भी मेरे द्वारा की जानेवाली विवेचना का आप अवश्‍य इंतजार कर रहे होंगे।&amp;nbsp;क्रिकेट मैच में ग्रहों के प्रभाव को देखते हुए आठ दस वर्षों से ही मैच के एक दिन पहले से ही पंचांग देखकर ग्रहों की स्थिति को जानने और उससे क्रिकेट मैच का तालमेल बनाने से मैं खुद भी अपने को नहीं रोक पाती हूं। पर खुशी की बात है कि अब मैं इसे आपलोगों से भी शेयर कर पा रही हूं ,&amp;nbsp;ये रहा मेरा विश्‍लेषण।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कल मोहाली के पंजाब क्रिकेट एशोसिएशन स्‍टेडियम में भारत और आस्‍ट्रेलिया के मध्‍य होनेवाले चौथे एकदिवसीय मैच&amp;nbsp;में शुरूआत के दो घंटे बिल्‍कुल सामान्‍य रहेंगे , पर लगभग चार बजे के बाद भारतीय टीम बहुत ही अच्‍छा खेलेगी। यदि इस दौरान उसे बल्‍लेबाजी का मौका मिला, तो अंत तक यह बहुत बडा स्‍कोर खडा कर देगी , जबकि गेंदबाजी कर रही हो तो आस्‍ट्रेलियन टीम&amp;nbsp;के सामने जबरदस्‍त दबाब उपस्थित करेगी और कुल मिलाकर पहली पारी के अंत अंत में भारत की स्थिति बहुत मजबूत दिखाई पडेगी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पर पहली पारी में&amp;nbsp;भारत के पक्ष में&amp;nbsp;भाग्‍य जितना साथ देगा , उतना दूसरी पारी में साथ देता नहीं दिखाई पड रहा है , जिससे स्‍पष्‍ट है कि आस्‍ट्रेलियन टीम भी अच्‍छा ही खेलेगी। इस कारण दूसरी पारी के दौरान भारतीय टीम बिल्‍कुल सामान्‍य स्थिति में ही रहेगी , जीत के पूरे आसार स्‍पष्‍ट नहीं दिखाई पडेंगे , पर अंत के एक घंटे पुन: भारतीय टीम के पक्ष में होने से भारतीय टीम के जीत की संभावना बहुत बढ जाएगी। इसलिए इस मैच में भी भारतीय टीम के जीत की ही संभावना लगती है , बशर्ते कि दूसरी पारी के शुरूआत में , जब ग्रह थोडे कमजोर हों , इसकी स्थिति काफी कमजोर न हो जाए। पर इसकी संभावना कम है और ऐसा न ही हो , हम इसकी कामना करते हैं !!&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-4674193285385766716?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/4674193285385766716/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=4674193285385766716' title='12 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/4674193285385766716'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/4674193285385766716'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/11/blog-post.html' title='कल के मैच में किसकी होगी बल्ले-बल्ले ??'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>12</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-871398304736358571</id><published>2009-10-31T18:06:00.003+05:30</published><updated>2009-10-31T18:18:04.594+05:30</updated><title type='text'>क्षमा मांग पाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता !!</title><content type='html'>गल्‍ती करना मानव का स्‍वभाव है कभी न कभी हर किसी से गल्‍ती हो ही जाती है। यदि गल्‍ती का फल स्‍वयं को भुगतना पडे , तो कोई बात नहीं होती , पर आपकी गल्‍ती से किसी और को धन या मान की हानि हो रही हो, तो ऐसे समय नि:संकोच हमें क्षमा मांग लेना चाहिए। कुछ लोगों को अपनी गल्‍ती मानते हुए दूसरों से क्षमा मांग लेने में कोई दिक्‍कत नहीं होती , पर 'अहं' वाले लोग आसानी से ऐसा नहीं कर पाते। यह स्‍वभाव व्‍यक्तिगत होता है और इसके गुण बचपन से ही दिखाई देते हैं। अपनी गल्‍ती को न स्‍वीकारने के कारण कई बार सामनेवालों से उनका संबंध बिगड जाता है , पर बिना क्षमा मांगे ही अपना संबंध सुधारने की भी कोशिश करते हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ऐसी स्थिति आने पर मेरे छोटे भाई ने मात्र छह वर्ष की उम्र में कितना दिमाग लगाया था, इसे इस कहानी को पढकर समझा जा सकता है। उसने दादी जी को&amp;nbsp;एक ऐसा जबाब दे दिया था , जो अक्‍सर दादा जी से सुना करता था और उसका मतलब तक नहीं जानता था। इसलिए हम सभी लोगों को उसकी बात पर हंसी आ रही थी , पर घर के बडे लोगों ने उसकी हिम्‍मत न बढते देने के लिए उसे दादी जी से माफी मांगने को कहा। काफी देर तक उसने टाल मटोल की , पर बात खाना नहीं मिलने तक आ गयी तो उसे बडी दिक्‍कत हो गयी , क्‍यूंकि वह जानता था कि इतने बडे बडे लोगों के बीच उसकी तो नहीं ही चलेगी , मम्‍मी , चाची&amp;nbsp;, दीदी या भैया की भी नहीं चलनेवाली , जो लोग उसे किसी मुसीबत से बचाते आ रहे हैं। &amp;nbsp;हंसकर या रोकर जैसे भी हो माफी मांगने में ही उसकी भलाई है , फिर उसने अपना दिमाग लगाते हुए एक कहानी सुनाने लगा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक गांव में एक छोटा सा बच्‍चा रहा करता था। एक दिन उससे गल्‍ती हो गयी , उसने अपनी दादी जी को भला बुरा कह दिया। फिर क्‍या था , सभी ने उससे अपनी दादी जी से माफी मांगने को कहा। वह दादी जी से कुछ दूरी पर बैठा था , जमीन&amp;nbsp;को बित्‍ते(हाथ के अंगूठे से छोटी अंगुली तक को फैलाने से बनीं दूरी) से नापते हुए दादी जी की ओर आगे बढता जा रहा था । मुश्किल से दो तीन बित्‍ते बचे रह गए होंगे कि दादी जी ने उसे अपनी ओर खींच लिया और गले लगाते हुए कहा कि बेटे तुझे माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं , बच्‍चे तो गल्‍ती करते ही हैं। इसके साथ ही वह खुद भी जमीन को अपने बित्‍ते से नापते हुए आगे बढने लगा । इस तरह वह माफी मांगने से बच गया , इस कहानी को सुनने के बाद दो तीन बित्‍ते दूरी&amp;nbsp;से ही भला मेरी दादी जी उसे गले से कैसे न लगाती ?&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-871398304736358571?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/871398304736358571/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=871398304736358571' title='21 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/871398304736358571'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/871398304736358571'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/10/blog-post_31.html' title='क्षमा मांग पाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता !!'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>21</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-7312169538053969345</id><published>2009-10-30T16:55:00.001+05:30</published><updated>2009-11-01T19:45:17.661+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='क्रिकेट मैच'/><title type='text'>हम तो अपनी भारतीय टीम के जीत और आस्‍ट्रेलिया के हार की ही कामना करेंगे !!</title><content type='html'>यह समयचक्र ही है, जिसने न जाने कितने सामर्थ्‍यवान को सामर्थ्‍यहीन और सामर्थ्‍यहीन को सामर्थ्‍यवान बना डाला। परंतु कुछ लोग अपनी लगन, मेहनत और अध्यवसाय के बल पर अपनी स्थिति को इतना मजबूत बना लेते हैं कि वे समय के&amp;nbsp;कमजोर प्रभाव में आ ही नहीं सकते। विश्व के लगभग सभी देशों में राष्‍ट्रीय स्‍तर पर खेल रहे क्रिकेटरों की स्थिति आज इतनी मजबूत है कि समय उनसे पैसा या प्रतिष्ठा छीनकर भी उन्हें सामर्थ्‍यहीन नहीं बना सकता। लेकिन उनके लिए भी तो समय-चक्र प्रभावहीन नहीं हो सकता। भले ही क्रिकेटर अपने ही समकक्ष शक्तिवाले खिलाडियों के साथ मैच खेल रहें हों, शुभ समय में अनुकूल वातावरण प्रदान कर सफलताओं का नया इतिहास रचाता है, वहीं दूसरी ओर गड़बड़ समय में प्रतिकूल वातावरण प्रदान कर असफलताओं से शारीरिक और मानसिक कष्ट प्रदान करने की कोशिश में लगा होता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पिछले दोनो मैचों के लिए ज्‍योतिषीय आधार पर किया गया मेरा &lt;a href="http://sangeetapuri.blogspot.com/search/label/%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%9F%20%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%9A"&gt;विश्‍लेषण&lt;/a&gt;तो आपने पढा ही होगा। पहले दिन के मैच में मैने बडी हार की भविष्‍यवाणी की थी , समय के परिवर्तन होने से भारतीय टीम उस बडी हार से बच गया , पर चार रन से ही सही ग्रह ने अपना प्रभाव दिखा ही दिया। दूसरे दिन पहली पारी में भारतीय टीम की मजबूत स्थिति और आस्‍ट्रेलिया के कछुए की चाल से अपने मजबूत होने के अहसास के बाद मुझे भारतीय टीम की ओर से कुछ लापरवाही के बन जाने का भय&amp;nbsp;मुझे हुआ , पर ईश्‍वर की कृपा रही और भारतीय टीम ने मैच जीत ही ली और मात्र 'रोमांचक'&amp;nbsp; शब्‍द को छोडकर मेरी&amp;nbsp;एक एक स्‍टेप भविष्‍यवाणी सही रही।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;31&amp;nbsp;अक्‍तूबर 2009 को दिल्‍ली के फिरोज शाह कोटला में भारत आस्‍ट्रेलिया के मध्‍य होनेवाले तीसरे एक‍ दिवसीय मैच में भी भारतीय टीम के द्वारा मैच की धमाकेदार शुरूआत की जाएगी और ऐसा लगभग दो घंटे तक चलेगा। लेकिन उसके बाद क्रमश: आस्‍ट्रेलियन टीम गंभीर होती चली जाएगी और भारत की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर, जिसके कारण पहली पारी के अंत में भारतीय टीम की स्थिति काफी मजबूत नहीं रह पाएगी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दूसरी पारी&amp;nbsp;के आरंभ में भी भारतीय टीम की गंभीरता काफी बनी रहेगी और इस कारण आस्‍ट्रेलियन टीम का शुरूआती अनुभव अच्‍छा नहीं रहेगा और दो घंटे उनसे&amp;nbsp;अधिक की उम्‍मीद नहीं की जा सकती! पर उसके बाद के दो घंटे में ग्रहीय बाधा के गुजर जाने से खेल में अवश्‍य सुधार आना चाहिए! उसमें इतनी कामयाब हो जाए कि भारतीय टीम को हरा सके , ऐसा मुझे तो नहीं दिखता। पर मेहनत , हिम्‍मत और लगन से वे इसमें कामयाब भी हो सकते है , क्‍यूंकि भारतीय टीम भी बहुत मजबूत हालत में नहीं होगा। पर एक भारतीय होने के नाते हम तो भई , अपनी भारतीय टीम के जीत और आस्‍ट्रेलिया के हार की ही कामना करेंगे !!&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-7312169538053969345?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/7312169538053969345/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=7312169538053969345' title='22 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/7312169538053969345'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/7312169538053969345'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/10/blog-post_30.html' title='हम तो अपनी भारतीय टीम के जीत और आस्‍ट्रेलिया के हार की ही कामना करेंगे !!'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>22</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-6990474574369788231</id><published>2009-10-29T17:09:00.003+05:30</published><updated>2009-10-29T17:29:30.070+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मंगल ग्रह'/><title type='text'>आनेवाले दो महीने महत्‍वाकांक्षी युवाओं के लिए बडे खास रहने चाहिए !!</title><content type='html'>हाल में ही मंगल ग्रह के पृथ्‍वी के जड चेतन पर पडने वाले प्रभाव को लेकर मैं &lt;a href="http://sangeetapuri.blogspot.com/search/label/%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%B2%20%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9"&gt;कई आलेख&lt;/a&gt;पोस्‍ट कर चुकी हूं । ज्‍योतिष के अनुसार यह लाल ग्रह शक्ति साहस का प्रतीक माना जाता है और 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के अनुसार रक्‍त की अधिकता की वजह से या किसी अन्‍य कारण से , पर युवा वर्ग पर यह सर्वाधिक प्रभाव डालता है। पिछले आलेख में मैने &lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_umJcj5hbyeg/StRlVlzhS3I/AAAAAAAAAQQ/hf7w9fzAzIg/s1600/MARSNEW.JPG"&gt;इस चित्र&lt;/a&gt;के माध्‍यम से समझाया था कि किस प्रकार मंगल अपने ही पथ पर घूमता हुआ पृथ्‍वी के नजदीक और दूर होता रहता है। 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' पृथ्‍वी पर उसकी शक्ति के&amp;nbsp;घटने बढने&amp;nbsp;की&amp;nbsp;यही मुख्‍य वजह मानता है , जिसके कारण अलग अलग युवाओं पर इसका अलग प्रकार का प्रभाव पडते देखा जाता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आज 29 अक्‍तूबर 2009 को मंगल ग्रह सूर्य से 90 डिग्री की कोणिक दूरी पर है यानि दिखाए गए चित्र के अनुसार इसकी स्थिति 'V' विन्‍दु पर है। इस स्थिति में ग्रह बिल्‍कुल सामान्‍य होते हैं , पर यहीं से वे 'W' विंदु पर आने की दिशा में प्रवृत्‍त होते हैं। इस स्थिति में उसकी गत्‍यात्‍मक शक्ति कम होने लगता है और युवा वर्ग किसी न किसी प्रकार की अतिरिक्‍त सुख सुविधा , अतिरिक्‍त दायित्‍व या अतिरिक्‍त तनाव के बोझ में पडने लगते हैं। इस वर्ष 21 दिसम्‍बर तक मंगल की गत्‍यात्‍मक शक्ति लगातार कमजोर होती जाएगी , जिसके कारण युवा वर्ग पर किसी न किसी प्रकार के कार्यक्रम का दबाब बढता चला जाएगा। 2 , 3 , 8 , 9 , 10 , 17 , 18 , 19 , 29 , 30 नवम्‍बर तथा 1 , 6 , 7&amp;nbsp;दिसम्‍बर को यानि इन खास तिथियों को मंगल ग्रह अधिक प्रभावी रहेगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मंगल की इस स्थिति का प्रभाव युवा वर्ग पर उनके जन्‍मकालीन मंगल के अनुसार पडेगा। जिनका जन्‍मकालीन मंगल अच्‍छा होगा , वे 24 वर्ष की उम्र के बाद से अपने कैरियर में बहुत सफल दिखाई पड रहे होंगे , इस समय एक और बडी सफलता प्राप्‍त करेंगे। जिनका जन्‍मकालीन मंगल सामान्‍य होगा , वे 24 वर्ष की उम्र के बाद अपने कैरियर में बडी जबाबदेही पा रहे होंगे , वे इस समय एक और बडी जबाबदेही निभाने को बाध्‍य होंगे। जबकि जिनका जन्‍मकालीन मंगल कमजोर होगा , वे 24 वर्ष की उम्र के बाद कुछ न कुछ कठिनाइयां प्राप्‍त कर रहे हैं , वे इस समय एक और दिक्‍कत झेलने को बाध्‍य होंगे। खासकर &lt;a href="http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/10/blog-post_20.html"&gt;इस आलेख&lt;/a&gt;में दिए गए जन्‍मतिथियों में जन्‍म लेनेवाले लोग आज से आनेवाले दो तीन महीनों में किसी खास प्रकार की दिक्‍कत प्राप्‍त करेंगे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;युवा वर्ग के अतिरिक्‍त अन्‍य लोग भी मंगल से हल्‍के रूप में प्रभावित होंगे,&amp;nbsp;इस ग्रह के कारण आनेवाले दो महीने मेष लग्‍नवालों के लिए स्‍वास्‍थ्‍य&amp;nbsp;और जीवनशैली , वृष लग्‍नवालों के लिए घर गृहस्‍थी और खर्च , मिथुन लग्‍नवालों के लिए लाभ और प्रभाव , कर्क लग्‍नवालों के लिए अपनी या संतान पक्ष की पढाई लिखाई या जॉब , सिंह लग्‍नवालों के लिए भाग्‍य या किसी प्रकार की छोटी बडी संपत्ति , कन्‍या लग्‍नवालों के लिए भाई बहन या जीवनशैली , तुला लग्‍नवालों के लिए धन कोष और घर गृहस्‍थी , वृश्चिक लग्‍नवालों के लिए स्‍वास्‍थ्‍य या प्रभाव , धनु लग्‍नवालों के लिए अपने या संतान की पढाई लिखाई या खर्च , मकर लग्‍नवालों के लिए किसी प्रकार की संपत्ति और लाभ , कुंभ लग्‍नवालों के लिए भाई, पिता , कैरियर या राजनीति तथा मीन लग्‍नवालों के लिए भाग्‍य और धन की स्थिति को मजबूत बनाने के कार्यक्रम में ध्‍यान संकेन्‍द्रण और व्‍यस्‍तता बनीं रहेगी !!&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-6990474574369788231?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/6990474574369788231/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=6990474574369788231' title='12 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/6990474574369788231'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/6990474574369788231'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/10/blog-post_29.html' title='आनेवाले दो महीने महत्‍वाकांक्षी युवाओं के लिए बडे खास रहने चाहिए !!'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>12</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-6281626324229831311</id><published>2009-10-28T16:54:00.001+05:30</published><updated>2009-10-28T19:07:48.289+05:30</updated><title type='text'>कुछ दूर से लौटकर दरवाजे का लॉक क्‍या आप भी चेक करते हैं ??</title><content type='html'>जब आप अपने घर का ताला लगाकर कहीं बाहर जाते हैं , थोडी ही देर में आपको इस बात का संशय होता है कि आपने दरवाजे का ताला अच्‍छी तरह बंद नहीं किया है। थोडी दूर जाने के बाद भी आप इस बात के प्रति आश्‍वस्‍त होने&amp;nbsp;के लिए घर लौटते हैं और जब चेक करते हैं , तो पता चलता है कि यह बेवजह का संशय था। कभी भी आपसे गलती नहीं हुई होती है , फिर भी आप कभी निश्चिंत नहीं रह पाते हैं ,&amp;nbsp;बार बार इसी तरह का मौका आता रहता है। मनोचिकित्‍सक बताते हैं कि यहीं से आपका मानसिक तौर पर अस्‍वस्‍थ होने की शुरूआत हो जाती है। पर क्‍या यह सच है ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;वैसे तो हमारे शरीर के सारे अंग मस्तिष्‍क के निर्देशानुसार काम करते हैं , पर मैने अपने अनुभव में पाया है कि यदि शरीर का कोई अंग लगातार एक काम के बाद दूसरा काम करते जाए तो उसका अंग वैसा करने को अभ्‍यस्‍त हो जाता है। ऐसी हालत में कुछ दिनों में बिना दिमाग की सहायता के स्‍वयमेव वह एक काम के बाद दूसरा काम करने लगता है , जब मस्तिष्‍क की जरूरत हो तभी उसे पुकारता है , जिस प्रकार एक नौकर मेहनत का हर काम क्रम से कर सकता है , पर जहां दिमाग लगाने की बारी आती है , तो मालिक को पुकार&amp;nbsp;लिया करता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस बात को मैं एक उदाहरण की सहायता से स्‍पष्‍ट कर रही हूं। मैं अक्‍सर रसोई घर में काम करते करते अपने चिंतन में खो जाया करती हूं। पर इसके कारण आजतक कभी दिक्‍कत आते मैने नहीं महसूस किया जैसे&amp;nbsp;कि चाय में नमक हल्‍दी पड गयी या सब्‍जी में चीनी पत्‍ती। सब्‍जी , दाल या&amp;nbsp;चाय बनाने के&amp;nbsp;वक्‍त मैं कहीं भी खोयी रहूं , हाथ में अपने आप तद्नुसार नमक , हल्‍दी , चीनी या चायपत्‍ती का डब्‍बा आ जाता है , पर इन्‍हें डालने के वक्‍त मेरा मस्तिष्‍क वापस आता है , क्‍यूंकि&amp;nbsp;सबकुछ अंदाज से डालना आवश्‍यक है। यहां तक कि जिस बर्तन में मैं अक्‍सर चाय बनाती हूं , उसमें यदि किसी दूसरे उद्देश्‍य के लिए पानी गरम करने का विचार आ जाए तो उसे गैस पर रखने के बाद चाय बनाने के क्रम में पानी मापने के लिए रखा एक गिलास स्‍वयं हाथ में आ जाता है। तब ध्‍यान जाता है&amp;nbsp;कि आज पानी मापना थोडे ही है , अंदाज से डालना है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मैने एक&amp;nbsp;अविकसित मस्तिष्‍क की लडकी को भी देखा है ,&amp;nbsp;जो घर का सारा काम कर लेती है। चूंकि वह स्‍कूल नहीं जाती थी , उसकी मम्‍मी उससे एक के बाद दूसरा काम करवाती रहीं और वह बिना दिमाग के भी उन कामों को करने की अभ्‍यस्‍त हो गयी है। झाडू लगाने , पोछा करने , बरतन धोने और कपडे धोने में उसे कोई दिक्‍कत नहीं , लेकिन जब किसी चीज का अंदाज करना हो तो वह नहीं कर पाती और उसके लिए अपनी मम्‍मी पर आश्रित रहती है।&amp;nbsp;मुझे उसके काम को देखकर अक्‍सर ताज्‍जुब होता रहता है । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जब हमलोग बाहर निकलते हैं , तो हमारा मुख्‍य ध्‍यान हमारे बाहर के कार्यक्रम पर होता है । कमरे का ताला बंद करते करते हमारा हाथ उसका अभ्‍यस्‍त हो चुका है , इसलिए बिना मस्तिष्‍क की सहायता से वह ताला बंद कर लेता है और हम आगे बढ जाते हैं। थोडी दूर जाने के बाद जब हम अपने चिंतन से बाहर निकलते हैं&amp;nbsp;तो हम घर के दरवाजे पर ताले के बंद होने के प्रति आश्‍वस्‍त नहीं&amp;nbsp;रह पाते , क्‍यूंकि हमारे मस्तिष्‍क को यह बात बिल्‍कुल याद नहीं। हम पुन: लौटकर आश्‍वस्‍त होना चाहते हैं कि ताला अच्‍छी तरह बंद है या नहीं ? इसलिए मेरे ख्‍याल से&amp;nbsp;एक बार ऐसा करना एक मानसिक बीमारी नहीं , बिल्‍कुल सामान्‍य बात है। अब बार बार भी लोग ऐसा करते हों तो इसके बारे में मनोवैज्ञानिकों का कहना माना जा सकता है ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-6281626324229831311?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/6281626324229831311/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=6281626324229831311' title='25 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/6281626324229831311'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/6281626324229831311'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/10/blog-post_28.html' title='कुछ दूर से लौटकर दरवाजे का लॉक क्‍या आप भी चेक करते हैं ??'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>25</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-5873805031445140216</id><published>2009-10-27T22:55:00.009+05:30</published><updated>2009-10-30T12:07:18.096+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='क्रिकेट मैच'/><title type='text'>ग्रहीय प्रभाव से बहुत रोमांचक होगा कल का मैच !!</title><content type='html'>कहते हैं , समय बड़ा बलवान होता है। किसी खास समयांतराल में हमारी खास चिंतन-शैली होती है। खास समय में हम सफलताओं से संतुष्ट और खास समय में ही असफलताओं से &lt;span style="color: #20124d;"&gt;दुखी&lt;/span&gt; होते हैं।इसी समय को प्रभावित करनेवाले कारकों को जानने के क्रम में ही हमारे ऋषि-मुनियों को यह दृष्टिगोचर हुआ था कि आकाश के विभिन्न ग्रहों की खास कोणों में स्थिति से ही पृथ्वीवासी अलग-अलग तरीके से प्रभावित होते हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;25 अक्‍तूबर 2009 को भारत आस्‍ट्रेलिया के मध्‍य हुए एकदिवसीय क्रिकेट मैच के लिए किया गया &lt;a href="http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/10/blog-post_24.html"&gt;मेरा ग्रहीय विश्‍लेषण&lt;/a&gt;बिल्‍कुल सटीक रहा। हालांकि पहले से उद्घोषित किए गए समय में परिवर्तन होने से मैच&amp;nbsp;बहुत हद तक भारत के पक्ष में&amp;nbsp;हो गया और भारत बडी हार से अवश्‍य बच गया। जैसा कि पूरे मैच में मैने 3 बजे के बाद के दो घंटे भारतीय टीम के लिए सर्वाधिक अच्‍छे बताए थे , उस दिन ठीक उसी समय अंत होने से भारत ने ताबडतोड रन बनाकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कल जमथा नागपुर के विदर्भ क्रिकेट एशोसिएशन स्‍टेडियम में भारत और आस्‍ट्रेलिया के मध्‍य होने वाले दूसरे क्रिकेट मैच में ग्रह की स्थिति बिल्‍कुल सामान्‍य होने से दोनो टीमों की स्थिति मजबूत होनी चाहिए। भारत की शुरूआत बहुत ही अच्‍छी रहेगी&amp;nbsp;और लगभग दो घंटे तक भारत काफी अच्‍छा खेलेगा , जिसके कारण अंत अंत तक सामान्‍य खेलते हुए भी पहली पारी में इसकी स्थिति बहुत ही मजबूत बन जाएगी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दूसरी पारी में भी भारत की मजबूत स्थिति के कारण आस्‍ट्रेलिया किसी समय भारत पर दबाब बनाता नहीं दिखेगा । पर बिल्‍कुल आराम से खेलते हुए भी कछुए की चाल की तरह उसकी स्थिति भी मजबूत हो जाएगी और अंतिम एक घंटे में भारत पर दबाब पडने की शुरूआत होगी। इस बढते दबाब को भारतीय टीम जल्‍द समझ ले , तो जीत की थोडी संभावना बनेगी, अन्‍यथा थोडी भी लापरवाही हार का कारण बन सकती है , जिसकी मुझे अधिक संभावना दिखती है। आइए, ईश्‍वर से प्रार्थना करें कि भारतीय टीम जितनी एकाग्रता से मैच की शुरूआत करे , अंतिम क्षणों तक उतनी ही एकाग्र रह सके !!&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-5873805031445140216?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/5873805031445140216/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=5873805031445140216' title='8 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/5873805031445140216'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/5873805031445140216'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/10/blog-post_27.html' title='ग्रहीय प्रभाव से बहुत रोमांचक होगा कल का मैच !!'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>8</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-573209065409739721</id><published>2009-10-26T17:49:00.011+05:30</published><updated>2009-10-26T19:57:11.416+05:30</updated><title type='text'>क्‍या रेमिंगटन कीबोर्ड पर टाइपिंग करने में आपको परेशानी होती है ??</title><content type='html'>अपने कंप्‍यूटर में &lt;a href="http://www.baraha.com/download.htm"&gt;Baraha IME&lt;/a&gt;या &lt;a href="http://www.bhashaindia.com/Patrons/Tutorials/HindiIME.aspx"&gt;Hindi Indic IME.&lt;/a&gt;को लोड करने और &lt;a href="http://nukkadh.blogspot.com/2009/09/blog-post_22.html"&gt;हिन्‍दी सक्रिय&lt;/a&gt;करने के बाद मुख्‍य समस्‍या &lt;a href="http://sites.google.com/site/saurabhtyagi13/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%AA%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82"&gt;हिन्‍दी में टाइप&lt;/a&gt;करने की आती है। इस समस्‍या का कोई समाधान न दिखने से अधिकांश लोगों को फोनेटिक कीबोर्ड का सहारा लेना पडता है , जिसके द्वारा रोमण में ही लिखने से उसे हिन्‍दी में कन्‍वर्ट किया जा सकता है। लेकिन आप यदि डायरेक्‍ट हिन्‍दी में ही लिखना चाहते हों , तो आपको रेमिंगटन कीबोर्ड पर टाइपिंग कर सकते हैं। अंग्रेजी कैरेक्‍टरों को देखकर हिन्‍दी में टाइपिंग करना बहुत ही आसान है।&amp;nbsp;चाहे जो भी कारण हो ,&amp;nbsp;एक महीने के अंदर मैं जितनी आसानी से हिन्‍दी टाइपिंग करने लगी , शायद अंग्रेजी में संभव नहीं थी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;pre&gt;कीबोर्ड की पहली पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं ......&lt;br /&gt;`&amp;nbsp; 1&amp;nbsp; 2 &amp;nbsp;3  4  5&amp;nbsp; 6&amp;nbsp; 7  8 &amp;nbsp;9 &amp;nbsp;0  -&amp;nbsp; =&amp;nbsp;  &amp;nbsp;(NORMAL)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यदि कीबोर्ड की इस पहली पंक्ति की हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं&lt;br /&gt;़  1&amp;nbsp; 2&amp;nbsp; 3&amp;nbsp; 4&amp;nbsp; 5  6&amp;nbsp; 7  8&amp;nbsp; 9&amp;nbsp; 0&amp;nbsp; ;  ृ&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;(NORMAL)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;शिफ्ट के साथ कीबोर्ड की पहली पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं ......&lt;br /&gt;~&amp;nbsp; ! &amp;nbsp;@&amp;nbsp; #&amp;nbsp; $&amp;nbsp; %&amp;nbsp; ^&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;amp;&amp;nbsp; *&amp;nbsp; (  )&amp;nbsp; _&amp;nbsp; +&amp;nbsp;(WITH SHIFT)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यदि शिफ्ट के साथ कीबोर्ड की इस पहली पंक्ति की हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....&lt;br /&gt;द्य&amp;nbsp; ।&amp;nbsp; /  :&amp;nbsp; * &amp;nbsp;&amp;nbsp;-&amp;nbsp;&amp;nbsp;‘&amp;nbsp; ‘  द्ध&amp;nbsp; त्र&amp;nbsp; ऋ&amp;nbsp; .&amp;nbsp; ्&amp;nbsp;(WITH SHIFT)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उसके नीचे यानि दूसरी पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप&amp;nbsp; किए जाते हैं ......&lt;br /&gt;q&amp;nbsp;&amp;nbsp;w&amp;nbsp; e&amp;nbsp; r &amp;nbsp;t&amp;nbsp; y&amp;nbsp; u  I&amp;nbsp; o  p&amp;nbsp; [  ]&amp;nbsp; \   (NORMAL)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जबकि&amp;nbsp;दूसरी पंक्ति में हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....&lt;br /&gt;ु&amp;nbsp; ू   म&amp;nbsp; त &amp;nbsp;ज&amp;nbsp; ल&amp;nbsp; न&amp;nbsp;&amp;nbsp;प&amp;nbsp;&amp;nbsp;व&amp;nbsp;&amp;nbsp;च&amp;nbsp;&amp;nbsp;ख्‍&amp;nbsp;&amp;nbsp;,&amp;nbsp; (NORMAL)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पर यदि&amp;nbsp; उसी दूसरी लाइन की शिफ्ट के साथ&amp;nbsp;टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं ....&lt;br /&gt;Q&amp;nbsp; W&amp;nbsp; E&amp;nbsp;&amp;nbsp;R&amp;nbsp;&amp;nbsp;T&amp;nbsp; Y&amp;nbsp; U&amp;nbsp; I&amp;nbsp;&amp;nbsp;O&amp;nbsp;&amp;nbsp;P&amp;nbsp;&amp;nbsp;{&amp;nbsp;&amp;nbsp;}&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;(WITH SHIFT) &lt;/pre&gt;&lt;br /&gt;पर उसी दूसरी लाइन की शिफ्ट के साथ हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं ..... &lt;br /&gt;फ&amp;nbsp;&amp;nbsp; ॅ&amp;nbsp;&amp;nbsp; म्‍&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;त्‍&amp;nbsp;&amp;nbsp; ज्‍&amp;nbsp; &amp;nbsp;ल्‍ &amp;nbsp;&amp;nbsp;न्‍&amp;nbsp;&amp;nbsp; प्‍&amp;nbsp; &amp;nbsp;व्‍&amp;nbsp;&amp;nbsp; च्‍&amp;nbsp;&amp;nbsp; क्ष्‍&amp;nbsp;&amp;nbsp; द्व&amp;nbsp;&amp;nbsp; )&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;(WITH SHIFT) &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तीसरी पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं ......&lt;br /&gt;a&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; s&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;d&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;f&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;g&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;h&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;j&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; k&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;l&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;‘&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; (NORMAL)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जबकि उस तीसरी पंक्ति में हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....&lt;br /&gt;ं&amp;nbsp;&amp;nbsp; े&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; क&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; ि‍&amp;nbsp;&amp;nbsp; ह&amp;nbsp;&amp;nbsp; ी&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; र ा&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; स&amp;nbsp;&amp;nbsp; य&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; श्‍&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; (NORMAL) &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब यदि इसी तीसरी पंक्ति को शिफ्ट के साथ टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....&lt;br /&gt;&amp;nbsp;A&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;S&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; D&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; F&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; G&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;H&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; J&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;K&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;L&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;:&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; “&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; (WITH SHIFT) &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पर उसी&amp;nbsp;तीसरी पंक्ति&amp;nbsp;को शिफ्ट के साथ हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....&lt;br /&gt;&amp;nbsp;ा &amp;nbsp;ै&amp;nbsp; क्‍&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;थ्‍&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; ळ&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; भ्‍&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; श्र&amp;nbsp;&amp;nbsp; ज्ञ&amp;nbsp;&amp;nbsp; स्‍&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; रू&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; ष्‍&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;(WITH SHIFT) &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अंतिम&amp;nbsp;पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं ..... &lt;br /&gt;z&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp; x&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;c&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;v&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;b&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;n&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;m&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp; ,&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; .&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;/&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;(NORMAL)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यदि कीबोर्ड की इस&amp;nbsp;अंतिम पंक्ति की हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं ..... &lt;br /&gt;्र&amp;nbsp; ग&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; ब&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; अ&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; इ&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; द&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; उ&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;ए&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;ण्‍&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;ध्‍&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;(NORMAL) &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;शिफ्ट के साथ कीबोर्ड की पहली पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं ......&lt;br /&gt;&amp;nbsp;Z&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;X&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; C&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; V&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; B&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; N&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; M&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;lt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;?&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;(WITH SHIFT)&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पर उसी तीसरी पंक्ति को शिफ्ट के साथ हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....&lt;br /&gt;&amp;nbsp;र्&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; ग्‍&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; ब्‍&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; ट&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; ठ&amp;nbsp;&amp;nbsp; छ&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; ड&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; ढ&amp;nbsp; &amp;nbsp;झ&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; घ्‍&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;(WITH SHIFT) &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हिन्‍दी में मुख्‍य शब्‍दों की टाइपिंग के लिए मैने ये कई शब्‍दों को याद रखा ....&lt;br /&gt;मई , तर , जट , लवाई , न्‍यू , पाई , वओ ,चप , फक्‍यू , कडी , हजी ,रजे ,सएल , गक्‍स ,बसी , अटवी , इठबी ,दछन , डउम &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इन शब्‍दों को याद कर लेने से शुरूआती दौर में बार बार कागज देखने से बचा जा सकता है। आधा या पूरा जो भी 'म' टाइप करना हो, मई&amp;nbsp;मतलब 'E' बटन, इसी तरह पूरा या आधा 'त' के लिए 'R' बटन पूरा या आधा 'ज' के लिए 'T' बटन। इसी तरह 'अ' या 'ट' टाइप करना हो , तो 'V' तथा 'इ' और 'ठ' टाइप करना हो , तो 'B' बटन का सहारा लिया जा सकता है। ऐसा करने से बहुत आसानी हो जाती है। ा का बटन , ु और ू&amp;nbsp;, ि‍ और ी&amp;nbsp; तथा े और ै के बटन की स्थिति इतनी अच्‍छी जगह पर है कि&amp;nbsp;इन्‍हें याद रख लेना तो बहुत आसान है ही। अब इतने बटनों&amp;nbsp;को जानने के बाद टाइपिंग के दौरान कभी कभार ही नए शब्‍द आएंगे , जिसके लिए आप उपरोक्‍त कागज की एक प्रिंट बनाकर रखें रहें। दो चार दिनों के प्रैक्टिस से सारे बटन का आइडिया होना ही है। देखा रेमिंगटन में टाइपिंग कितनी आसान&amp;nbsp;हो गयी ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-573209065409739721?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/573209065409739721/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=573209065409739721' title='17 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/573209065409739721'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/573209065409739721'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/10/blog-post_26.html' title='क्‍या रेमिंगटन कीबोर्ड पर टाइपिंग करने में आपको परेशानी होती है ??'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>17</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-6628694127417516679</id><published>2009-10-24T11:39:00.002+05:30</published><updated>2009-10-30T12:06:53.198+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='क्रिकेट मैच'/><title type='text'>कल के क्रिकेट मैच में भारतीय टीम से कितनी उम्‍मीद रखी जाए ??</title><content type='html'>क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है।&amp;nbsp;इस क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा टीम की तैयारी और क्रिकेट के पीच को ध्यान में रखते हुए भी समय-समय पर क्रिकेट मैच के बारे में भविष्यवाणियॉ की जाती हैं , परंतु संभावना और सत्यता में तालमेल का प्रतिशत बहुत कम ही देखा गया है। संभावनावाद की दृष्टि से बिना किसी आधार के भी किसी एक घटना में हार और जीत में से एक परिणाम को चुनने की भविष्यवाणी में सही और गलत की संभावना 50-50 प्रतिशत होती है। लेकिन जब घटनाओं की संख्‍या बढायी जाती है , तो&amp;nbsp;कोई आधार न होने की सूरत में संभावनाओं की सत्‍यता का प्रतिशत घटता चला जाता है। किन्तु किसी आधार को लेकर घटनाओं की संख्‍या&amp;nbsp;के बढने के बाद भी भविष्यवाणी की सत्यता को 50 प्रतिशत से बढ़ाते हुए 60-70-80-90 प्रतिशत तक भी ले जाया जा सके , तो&amp;nbsp;उस आधार&amp;nbsp;को प्रमाण मिलने में बाधा नहीं आनी चाहिए। 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के द्वारा भी ग्रहों की स्थिति के आधार पर क्रिकेट मैच की जीत और हार के बारे में भविष्‍यवाणियों की सटीकता को बनाए रखने का प्रयत्‍न किया जाता रहा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आस्‍ट्रेलिया की टीम सात&amp;nbsp;एकदिवसीय मैचों की&amp;nbsp;शृंखला को खेलने भारत पहुंच गयी है। 25 अक्‍तूबर से ही खेल शुरू हो जाएंगे। ग्रहीय आधार पर किसी भी मैच के बारे में भविष्यवाणी कर पाने में कुछ समस्याएं तो अवश्य आती हैं , क्योंकि जहॉ एक ओर दोनो टीम के सभी सदस्यों का जन्म-विवरण हमारे पास मौजूद नहीं होता , वहीं दूसरी ओर जिस शहर में मैच हो रहा है , वहॉ के आक्षांस और देशांतर रेखाओं से ग्रहों के तालमेल में भी कठिनाई आतीं हैं। फिर भी कुछ वर्षों से हमारे द्वारा क्रिकेट मैच से संबंधित जो शोध किए गए है , उसके आधार पर&amp;nbsp;क्रिकेट मैच के दिन की ग्रहीय स्थिति का उस दिन के क्रिकेट पर पड़नेवाले प्रभाव का विश्लेषण किया जाएगा। इस बार की ग्रहस्थिति भारतीय टीम के बिल्‍कुल भी अनुकूल नहीं है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;25 अक्‍तूबर को बडोदरा के रिलायंस स्‍टेडियम में होने वाले शृंखला के पहले मैच के दिन ही ग्रहों की स्थिति भारतीय क्रिकेट टीम के पक्ष में नहीं दिख रही है। इसलिए 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के हिसाब से जो बडी संभावना बन रही है , उसके अनुसार शुरूआती दिन ही भारत को झटका देनेवाला होगा। वैसे इस दिन बिल्‍कुल शुरूआत का समय यानि 3 बजे के बाद के दो घंटे भारत के पक्ष में दिखते हैं ,&amp;nbsp;इसे इस नजर से ही देखा जा सकता है&amp;nbsp;कि इस दो घंटे मे&amp;nbsp;टीम को अच्‍छे खेलने का भ्रम बना रहेगा। क्‍यूंकि इसके बाद फिर अनुकूल ग्रहीय स्थिति पूरे मैच के दौरान नहीं बनेगी और 8 बजे के बाद ही ऐसी प्रतिकूल ग्रहस्थिति बन जाएगी कि मैच समाप्‍त होने की समय सीमा के&amp;nbsp;दो घंटे पहले से ही हार निश्चित दिखाई पडने लगेगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चूंकि हम भारतीय हैं , इसलिए यदि अपने इस&amp;nbsp;प्रतिकूल ग्रहस्थिति को भी सकारात्‍मक रूप से देखें, तो बिल्‍कुल शुरूआत का समय यानि 3 बजे के बाद के जो दो घंटे भारत के पक्ष में दिखते हैं , उस समय बल्‍लेबाजी या गेंदबाजी , जिसका भी मौका मिले , यदि भारत बहुत अच्‍छा खेल ले और अपनी स्थिति को काफी मजबूत बना ले , तो जीत की संभावना बन सकती है , लेकिन इसके लिए 8 बजे से 10 बजे रात्रि तक की प्रतिकूल ग्रहीय स्थिति में बिल्‍कुल रक्षात्‍मक खेलते हुए आगे बढना होगा और 10 बजे के बाद अपनी जीत पक्‍की करने की दिशा में कदम बढाने पडेंगे। वैसे इसकी संभावना बहुत ही कम दिखाई पडती है, पर इसके लिए भी हम सब प्रार्थना करें , तो इसमें हर्ज ही क्‍या है ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अपडेट ...&amp;nbsp;मुझे &lt;a href="http://www.vcricket.com/schedule.aspx"&gt;इस लिंक&lt;/a&gt;में 14:30 IST से मैच के शुरू होने की गलत सूचना मिली थी ,&amp;nbsp;क्‍यूंकि मैच 09:00AM&amp;nbsp;से ही शुरू हो चुका है ,&amp;nbsp;इसलिए इस आलेख में लिखी गयी बातों को सटीक न माना जाए । समय में परिवर्तन होने के कारण इस मैच की हार जीत को एक अलग कोण से देखना पडेगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-6628694127417516679?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/6628694127417516679/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=6628694127417516679' title='16 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/6628694127417516679'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/6628694127417516679'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/10/blog-post_24.html' title='कल के क्रिकेट मैच में भारतीय टीम से कितनी उम्‍मीद रखी जाए ??'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>16</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-6582640184439320274</id><published>2009-10-22T16:59:00.002+05:30</published><updated>2009-10-22T17:06:03.967+05:30</updated><title type='text'>हिन्‍दी ब्‍लाग जगत में मेरी पहली पोस्‍ट के चार वर्ष पूरे हुए .. ये रही वो पहली पोस्‍ट !!</title><content type='html'>चार वर्ष पहले जब हिन्‍दी ब्‍लाग जगत में गिने चुने लोग ही थे , उस समय यहां मैं कैसे हो सकती&amp;nbsp;थी। सचमुच आप सभी पाठकों&amp;nbsp;को यह जानकर ताज्‍जुब होगा , पर यह बिल्‍कुल सत्‍य है कि हिन्‍दी ब्‍लाग जगत में मैने ब्‍लाग स्‍पाट पर अपनी पहली &lt;a href="http://www.blogger.com/profile/09788929562927311374"&gt;प्रोफाइल&lt;/a&gt;2005 के अक्‍तूबर में बनायी थी और उसी वक्‍त अपना ब्‍लाग बनाकर अपनी &lt;a href="http://gatyatmakjyotish.blogspot.com/2005/10/xrkred-tksfrk_112983357769634248.html"&gt;पहली पोस्‍ट&lt;/a&gt;कृतिदेव10 फाण्‍ट में लिखकर ही 20 अक्‍तूबर 2005 को पोस्‍ट कर दिया था। फिर काफी दिनों तक मैं न तो यूनिकोड में लिखने के बारे में नहीं समझ सकी थी , और न ही चिट्ठा संकलकों के बारे में जानकारी थी , इसलिए पोस्‍ट करना बंद कर दिया था। यहां तक कि उस प्रोफाइल का पासवर्ड भी भूल गयी। दो वर्ष बाद ही सितम्‍बर 2007&amp;nbsp;में मैने वर्डप्रेस पर अपना ब्‍लाग बनाया था और नियमित तौर पर लिखने लगी थी । फिर एक वर्ष बाद अगस्‍त 2008 से मैने ब्‍लागस्‍पाट पर लिखना शुरू किया। ये रहा मेरे सबसे पुराने 20 अक्‍तूबर 2005 को पोस्‍ट किए गए&amp;nbsp;पोस्‍ट का स्‍नैप शाट. ,&amp;nbsp;जो संयोग से मुझे ठीक 4 वर्ष बाद 21 अक्‍तूबर 2009 को गूगल सर्च के दौरान मिला ......&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_umJcj5hbyeg/St8v6bVRCVI/AAAAAAAAAQY/RQEGCbjL3hU/s1600-h/my+first+post.bmp" imageanchor="1" style="margin-left: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://4.bp.blogspot.com/_umJcj5hbyeg/St8v6bVRCVI/AAAAAAAAAQY/RQEGCbjL3hU/s320/my+first+post.bmp" vr="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;इस पोस्‍ट को रजनीश मांगला जी के &lt;a href="http://www.rajneesh-mangla.de/unicode.php"&gt;फाण्‍‍ट कन्‍वर्टर&lt;/a&gt;के द्वारा यूनिकोड में बदलकर यहां पोस्‍ट कर रही हूं , आप भी एक नजर डालें , मैने अपनी पहली पोस्‍ट में क्‍या लिखा था ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="text-align: center;"&gt;गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष : एक परिचय&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;भारत के बहुत सारे लोगों को शायद इस बात का ज्ञान भी न हो कि विगत कुछ&amp;nbsp;वर्षों में उनके अपने देश में ज्योतिष की एक नई शाखा का विकास हुआ है, जिसके द्वारा वैज्ञानिक ढंग से की जानेवाली सटीक तिथियुक्त भविष्यवाणी जिज्ञासु बुfद्धजीवी वर्ग के मध्य चर्चा का विषय बनीं हुई है। इस 'गत्यात्मक ज्योतिष' के विकास की चर्चा के आरंभ में ही इसका प्रतिपादन करनेवाले वैज्ञानिक ज्योतिषी श्री विद्यासागर महथा का परिचय आवश्यक होगा ,जिनका वैज्ञानिक दृष्टिकोण ही गत्यात्मक ज्योतिष के जन्म का कारण बना।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;महथाजी का जन्म 15 जुलाई 1939 को झारखंड के बोकारो जिले में स्थित पेटरवार ग्राम में हुआ। एक प्रतिभावान विद्यार्थी कें रुप में मशहूर महथाजी रॉची कॉलेज ,रॉची में बी एससी करते हुए अपने एस्‍ट्रानामी पेपर के ग्रह नक्षत्रों में इतने रम गए कि ग्रह-नक्षत्रों की चाल और उनका पृथ्वी के जड़-चेतन पर पड़नेवाले प्रभाव को जानने की उत्सुकता ही उनके जीवन का अंतिम लक्ष्य बन गयी। उनके मन को न कोई नौकरी ही भाई और न ही कोई व्यवसाय। इन्‍होने प्रकृति की गोद में बसे अपने पैतृक गॉव में रहकर ही प्रकृति के रहस्यों को&amp;nbsp;ही समझने का निश्‍चय किया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ग्रह नक्षत्रों की ओर गई उनकी उत्सुकता ने उन्हें ज्योतिष शास्त्र के अध्ययन को प्रेरित किया। गणित विषय की कुशाग्रता और साहित्य पर मजबूत पकड़ के कारण तात्कालीन ज्योतिषीय पत्रिकाओं में इनके लेखों ने धूम मचायी। 1975 में उन्हीं लेखों के आधार पर `ज्योतिष-मार्तण्ड´ द्वारा अखिल भारतीय ज्योतिष लेख प्रतियोगिता में इन्हें प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया। उसके बाद तो ज्योतिष-वाचस्पति ,ज्योतिष-रतन,ज्योतिष-मनीषी जैसी उपाधियों से अलंकृत किए जाने का सिलसिला ही चल पड़ा।1997 में भी नाभा में आयोजित सम्मेलन में देश-विदेश के ज्योतिषियों के मध्य इन्हें स्वर्ण-पदक से अलंकृत किया गया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;विभिन्न ज्योतिषियों की भविष्‍यवाणी में एकरुपता के अभाव के कारणों को ढूंढते हुए इन्‍हें ज्‍योतिष की दो कमजोरियों का अहसास हुआ...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;ज्‍योतिष की पहली कमजोरी ग्रहों की शक्ति&lt;/strong&gt;यानि ग्रह कमजोर हैं या मजबूत , को समझने की थी , क्‍यूंकि इसमें सूत्रों की अधिकता भ्रमोत्‍पादक थी।अपने अध्ययन में इन्‍हें ग्रहों की विभिन्‍न प्रकार की शक्तियों का ज्ञान हुआ जो इस प्रकार हैं .... अतिशीघ्री , 2.शीघ्री , 3. सामान्य , 4. मंद , 5.वक्र , 6.अतिवक्र।&lt;br /&gt;इन्होनें पाया कि किसी व्यक्ति के जन्म के समय अतिशीघ्री या शीघ्री ग्रह अपने अपने भावों से संबंधित अनायास सफलता जातक को जीवन में प्रदान करते हैं। जन्म के समय के सामान्य और मंद ग्रह अपने-अपने भावों से संबंधित स्तर जातक को देते हैं। इसके विपरीत वक्री या अतिवक्री ग्रह अपने अपने भावों से संबंधित निराशाजनक वातावरण जातक को प्रदान करते हैं। 1981 में सूर्य और पृथ्वी से किसी ग्रह की कोणिक दूरी से उस ग्रह की गत्यात्मक शक्ति को प्रतिशत में निकाल पाने के सूत्र मिल जाने के बाद उन्होने परंपरागत ज्योतिष को एक कमजोरी से छुटकारा दिलाया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;फलित ज्योतिष की दूसरी कमजोरी&lt;/strong&gt;दशाकाल-निर्धारण यानि घटना कब घटेगी , से संबंधित थी। दशाकाल-निर्धारण की पारंपरिक पद्धतियॉ त्रुटिपूर्ण थी। अपने अध्ययनक्रम में उन्होने पाया कि ज्योतिष के प्राचीन ग्रंथों में विर्णत ग्रहों की अवस्था के अनुसार ही मानव-जीवन पर उसका प्रभाव 12-12 वर्षों तक पड़ता है। जन्म से 12 वर्ष की उम्र तक चंद्रमा ,12 से 24 वर्ष की उम्र तक बुध ,24 से 36 वर्ष क उम्र तक मंगल ,36 से 48 वर्ष की उम्र तक शुक्र ,48 से 60 वर्ष की उम्र तक सूर्य ,60 से 72 वर्ष की उम्र तक बृहस्पति , 72 से 84 वर्ष की उम्र तक शनि,84 से 96 वर्ष की उम्र क यूरेनस ,96 से 108 वर्ष क उम्र तक नेपच्यून तथा 108 से 120 वर्ष की उम्र तक प्लूटो का प्रभाव मनुष्‍य पड़ता है। विभिन्न ग्रहों की एक खास अवधि में निश्चित भूमिका को देखते हुए ही `गत्यात्‍मक दशा पद्धति' की नींव रखी गयी। अपने दशाकाल में सभी ग्रह अपने गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति के अनुसार ही फल दिया करते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उपरोक्त दोनो वैज्ञानिक आधार प्राप्त&amp;nbsp;हो जाने के बाद भविष्‍यवाणी करना काफी सरल होता चला गया। `गत्यात्मक दशा पद्धति´ में नए-नए अनुभव जुडत़े चले गए और शीघ्र ही ऐसा समय आया ,जब किसी व्यक्ति की मात्र जन्मतिथि और जन्मसमय की जानकारी से उसके पूरे जीवन के सुख-दुख और स्तर के उतार-चढ़ाव का लेखाचित्र खींच पाना संभव हो गया। धनात्मक और ऋणात्मक समय की जानकारी के लिए ग्रहों की सापेक्षिक शक्ति का आकलण सहयोगी सिद्ध हुआ। भविष्‍यवाणियॉ सटीक होती चली गयी और जातक में समाहित विभिन्न संदर्भों की उर्जा और उसके प्रतिफलन काल का अंदाजा लगाना संभव दिखाई पड़ने लगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गत्यात्मक दशा पद्धति के अनुसार जन्मकुंडली में किसी भाव में किसी ग्रह की उपस्थिति महत्वपूर्ण नहीं होती , महत्वपूर्ण होती है उसकी गत्यात्मक शक्ति , जिसकी जानकारी के बिना भविष्‍यवाणी करने में संदेह बना रहता है। गोचर फल की गणना में भी ग्रहो की गत्यात्मक और स्थैतिक शक्ति की जानकारी आवश्यक है। इस जानकारी पश्चात् तिथियुक्त भविश्यवाणियॉ काफी आत्मविश्वास के साथ कर पाने के लिए `गत्यात्मक गोचर प्रणाली´ का विकास किया गया । &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गत्यात्मक दशा पद्धति' एवं 'गत्यात्मक गोचर प्रणाली' के विकास के साथ ही ज्योतिष एक वस्तुपरक विज्ञान बन गया है , जिसके आधार पर सारे प्रश्नों के उत्तर 'हॉ' या 'नहीं' में दिए जा सकते हैं। गत्यात्मक ज्योतिश की जानकारी के पश्चात् समाज में फैली धार्मिक एवं ज्योतिषीय भ्रांतियॉ दूर की जा सकती है ,साथ ही लोगों को अपने ग्रहों और समय से ताल-मेल बिठाते हुए उचित निर्णय लेने में सहायता मिल सकती है। आनेवाले गत्यात्मक युग में निश्चय ही गत्यात्मक ज्योतिष ज्योतिष के महत्व को सिद्ध करने में कारगर होगा ,ऐसा मेरा विश्वास है और कामना भी। लेकिन सरकारी,अर्द्धसरकारी और गैरसरकारी संगठनों के ज्योतिष के प्रति उपेक्षित रवैये तथा उनसे प्राप्त हो सकनेवाली सहयोग की कमी के कारण इस लक्ष्य को प्राप्त करने में कुछ समय लगेगा , इसमें संदेह नहीं है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-6582640184439320274?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/6582640184439320274/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=6582640184439320274' title='40 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/6582640184439320274'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/6582640184439320274'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/10/blog-post_22.html' title='हिन्‍दी ब्‍लाग जगत में मेरी पहली पोस्‍ट के चार वर्ष पूरे हुए .. ये रही वो पहली पोस्‍ट !!'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_umJcj5hbyeg/St8v6bVRCVI/AAAAAAAAAQY/RQEGCbjL3hU/s72-c/my+first+post.bmp' height='72' width='72'/><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>40</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-9139719894667493508</id><published>2009-10-20T17:40:00.001+05:30</published><updated>2009-10-29T17:17:53.643+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मंगल ग्रह'/><title type='text'>बहुत महत्‍वपूर्ण आलेख है ये ... क्‍या आपने या आपके किसी अपने ने इन समयांतरालों में जन्‍म लिया है ??</title><content type='html'>मंगल से संबंधित अपने &lt;a href="http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/10/blog-post_13.html"&gt;पिछले आलेख&lt;/a&gt;में &lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_umJcj5hbyeg/StRlVlzhS3I/AAAAAAAAAQQ/hf7w9fzAzIg/s1600-h/MARSNEW.JPG"&gt;इस चित्र&lt;/a&gt;के माध्‍यम से हमने समझाया था कि आकाश में मंगल अपने ही पथ पर घूमते घूमते कभी पृथ्‍वी से बिल्‍कुल निकट , तो कभी काफी दूर चला जाता है। जब यह दूर चला जाता है , तो 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के हिसाब से सर्वाधिक गत्‍यात्‍मक शक्ति संपन्‍न होता है , जब सामान्‍य दूरी पर स्थिति होता है , तो यह सामान्‍य गत्‍यात्‍मक शक्ति संपन्‍न होता है , जबकि यह पृथ्‍वी से बहुत निकट आ जाता है , तो इसकी गत्‍यात्‍मक शक्ति काफी कम हो जाती है। इस आधार पर एक खगोलशास्‍त्री आसमान में मंगल की इस स्थिति के बारे में&amp;nbsp;गत्‍यात्‍मक रूप से कमजोर और मजबूत होने की समझ रख सकते हैं , &lt;a href="http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/10/blog-post_15.html"&gt;पिछली कडी&lt;/a&gt;में मैने जन्‍मकुंडली के माध्‍यम से भी एक ज्‍योतिषी को गत्‍यात्‍मक तौर पर मंगल के कमजोर या मजबूत होने के बारे में जानकारी दी थी , पर आमजनों के लिए मंगल के बारे में इस कडी में ही लिख पा रही हूं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अधिकांश लोगों पर मंगल ग्रह का अच्‍छा प्रभाव ही दिखाई पडता है , इसी कारण युवावस्‍था में शक्ति साहस की प्रचुरता होती है और बहुत कम लोग समस्‍याओं से जूझते हैं। यह बात अवश्‍य है कि अपने अपने स्‍तर के अनुरूप अपने और परिवार की रोजी रोटी की व्‍यवस्‍था करने में कोई बहुत आसानी से सफल हो जाता है , तो किसी को थोडी मशक्‍कत भी करनी पडती है। पर इस कडी में मुख्‍य रूप से 24 से 36 वर्ष की उम्रवाले उन लोगों की चर्चा कर रही हूं ,&amp;nbsp;जिनके जन्‍म के समय मंगल ग्रह पृथ्‍वी के बिल्‍कुल निकट था और इस कारण मंगल ग्रह के बुरे प्रभाव से हर ओर से असफल अपने शरीरिक ,&amp;nbsp;बौद्धिक और आर्थिक स्‍तर के अनुरूप जीवनयापन कर पाने में असमर्थ ये लोग पराधीनता के वातावरण में रहकर अपनी शक्ति और साहस का उपयोग नहीं कर पाते तथा तनावग्रस्‍त जीवन जीने को मजबूर&amp;nbsp; हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इन दुर्भाग्‍यशाली युवाओं में सबसे वरिष्‍ठ 12 अक्‍तूबर से 12 नवम्‍बर 1973 के मध्‍य या इसके आसपास जन्‍म लेनेवाले माने जाएंगे ,&amp;nbsp;ये कमजोर मंगल की वजह से 1991 के बाद से ही हल्‍के रूप में अपने कार्यक्रमों में बाधा पाते रहे हैं। 1997 के बाद इनकी कठिनाइयां बढते क्रम में 2003 तक बनी रही , 2003 से बढते क्रम में थोडी राहत अवश्‍य महसूस कर रहे हैं , पर पूरा सुधार होने में अभी और एक वर्ष की देर हो सकती है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसके बाद के नंबर में 20 नवम्‍बर 1975 से 5 जनवरी 1976 तक या इसके आसपास जन्‍म लेनेवाले आएंगे , जिन्‍होने 1994 से ही छोटे और 2000 के बाद बडे रूप में समस्‍याओं से जूझते हुए 2006 तक काफी कठिनाई भरा समय गुजारने के बाद अभी थोडी राहत में दिख रहे हैं। मंगल के बुरे प्रभाव के समाप्‍त होने में इन्‍हें और तीन वर्षों का इंतजार करना पड सकता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसके बाद 1 जनवरी से 15 फरवरी 1978 तक या इसके आसपास जन्‍मलेनेवाले आएंगे। इन्‍होने 1996 से हल्‍के रूप से और 2002 से गंभीर रूप से आनेवाली समस्‍याओं से जूझते हुए 2007 तक भयानक तनाव झेलते हुए अभी एक डेढ वर्षों से चैन की सांस ले पा रहे हैं , थोडी राहत के बावजूद उनकी कुछ समस्‍याएं 2013 तक चलती रहेंगी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अभी सबसे कठिनाई वाली स्थिति से गुजर रहे युवाओं में वे आएंगे , जिन्‍होने 1 फरवरी से 20 मार्च&amp;nbsp;1980 तक या इसके आसपास जन्‍म लिया है। 1998 के बाद हल्‍के रूप में आरंभ हुई और 2004 के बाद गंभीर हुई परिस्थितियों से जूझते हुए किंकर्तब्‍यविमूढावस्‍था में ये अपने को बिल्‍कुल लाचार पा रहे हैं।&amp;nbsp;आनेवाला एक वर्ष उनके जीवन का सर्वाधिक बुरा वर्ष माना जा सकता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसके बाद नंबर आता है 7 मार्च से 30 अप्रैल 1982 के मध्‍य या इसके आसपास जन्‍म लेनेवालों का ,&amp;nbsp;जो अपनी&amp;nbsp;परिस्थितियों को 2000 के बाद थोडी और 2006 के बाद अधिक गंभीर तो महसूस कर रहे हैं , पर संघर्ष का दौर जारी है। आनेवाले तीन वर्ष इनके लिए भी कठिनाई भरे रहेंगे। इसलिए इस समय जीवनशैली में किसी प्रकार का परिवर्तन करना उचित नहीं है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मंगल के प्रभाव को महसूस करनेवाले युवकों में सबसे नए 22 अप्रैल से 5 जून 1984&amp;nbsp;तक या इसके आसपास जन्‍म लेनेवाले युवक होंगे। पिछले एक वर्ष से&amp;nbsp;इनके सम्‍मुख प्रतिकूल परिस्थितियां तो दिखायी दे रही हैं , पर अक्‍तूबर से इतनी गंभीर हो जाएंगी , ऐसा तो इन्‍होने कभी सोंचा भी नहीं होगा। आनेवाले पांच वर्ष इनके लिए गंभीर रहेंगे , जिनसे जूझने के लिए हर प्रकार से सावधानी की आवश्‍यकता होगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भविष्‍यवाणियों का यूं सामान्‍यीकरण बहुत सारे ज्‍योतिष प्रेमियों को गलत लगता रहा है , पर 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष'&amp;nbsp;की मान्‍यता है कि प्रकृति के नियम बिल्‍कुल सामान्‍य ढंग से काम करते हैं , इन्‍हें समझने के लिए बेवजह जटिल बनाना उचित नहीं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-9139719894667493508?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/9139719894667493508/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=9139719894667493508' title='22 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/9139719894667493508'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/9139719894667493508'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/10/blog-post_20.html' title='बहुत महत्‍वपूर्ण आलेख है ये ... क्‍या आपने या आपके किसी अपने ने इन समयांतरालों में जन्‍म लिया है ??'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>22</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-63607646414986411</id><published>2009-10-18T18:52:00.003+05:30</published><updated>2009-10-18T19:04:13.051+05:30</updated><title type='text'>भूतों के भय से ही जुडा एक किस्‍सा और भी सुनिए !!</title><content type='html'>संभवत: यह घटना 1981 के आस पास की है। कलकत्‍ते में रहनेवाले हमारे एक दूर के रिश्‍तेदार पहली बार हमारे गांव के अपने&amp;nbsp;एक नजदीकी रिश्‍तेदार के घर पर आए। पर वहां उनका मन नहीं लगता था , रिश्‍तेदार अपने व्‍यवसाय में व्‍यस्‍त रहते और उनकी पत्‍नी अपने छोटे छोटे बच्‍चों में।&amp;nbsp;&amp;nbsp;वे वहां किससे और कितनी देर बातें करतें , उनके यहां जाने में जानबूझकर देर करते थे और हमारे यहां बैठकर बातें करते रहते थे । बडे गप्‍पी थे वो , अक्‍सर वे हमारे घर पहुंच जाते थे और घंटे दो घंटे गपशप करने के बाद खाना खाकर ही लौटते थे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक दिन शाम को पहुंचे , तो इधर उधर की बात होते होते भूत प्रेत पर जाकर रूक गयी , भूत प्रेत का नाम सुनते ही उन्‍होने अपनी शौर्यगाथाएं सुनानी शुरू की। फलाने जगह में भूत के भय से जाने से लोग डरते हैं , मैं वहां रातभर रहा , फलाने जगह पर ये किया , वो किया और हम सभी उनके हिम्‍मत के आगे नतमस्‍तक थे। मेरी मम्‍मी ने एक दो बार रात्रि के समय इस तरह की बातें न करने की याद भी दिलायी , पर वो नहीं माने ‘नहीं , चाचीजी , भूत प्रेत कुछ होता ही नहीं है , वैसे ही मन का वहम् है ये’ और न जाने कहां कहां के ऐसे वैसे किस्‍से सुनाते ही रहे। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उस दिन खाते पीते कुछ अधिक ही देर हो गयी थी , रात के ग्‍यारह बज गए थे , गांव में काफी सन्‍नाटा हो जाता है। उस घर के छत से आवाज दे देकर बच्‍चे बार बार बुला रहे थे । सामने के रास्‍ते से जाने से कई मोड पड जाने से उनका घर हमारे घर से कुछ दूर पड जाता था , पर खेत से होकर एक शार्टकट रास्‍ता था । हमलोग अक्‍सर उसी रास्‍ते से जाते आते थे , उन्‍होने भी उस दिन उसी रास्‍ते से जाने का निश्‍चय किया। पीछे के दरवाजे से उन्‍हें भेजकर हमलोग दरवाजा बंद करके अंदर अपने अपने कामों में लग गए। अचानक मेरी छोटी बहन के दिमाग में क्‍या आया , छत पर जाकर देखने लगी कि वे उनके घर पहुंचे या नहीं ? अंधेरा काफी था , मेरी बहन को कुछ भी दिखाई नहीं दिया , वह छत से लौटने वाली ही थी कि&amp;nbsp;उसे महसूस हुआ कि कोई दौडकर हमारे बगान में आया और सामने&amp;nbsp;नीम के पेड के नीचे छुप गया। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मेरी बहन ने पूछा ‘कौन है ?‘&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उनकी आवाज आयी ‘मैं हूं’ &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;‘आप चाचाजी के यहां गए नहीं ?’ &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;‘खेत में कुएं के पास कोई बैठा हुआ है’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गांव में रात के अंधेरे में चोरों का ही आतंक रहता है , उनकी इस बात को सुनकर हमलोगों को चोर के होने का ही अंदेशा हुआ , जल्‍दी जल्‍दी पिछवाडे का दरवाजा खोला गया। पूछने पर उन्‍होने हमारे अंदेशे को गलत बताते हुए कहा कि वह आदमी नहीं , भूत प्रेत जैसा कुछ है , क्‍यूंकि कुएं के पास उसकी दो लाल लाल आंखे चमक रही हैं। तब जाकर हमलोगों को ध्‍यान आया कि कुएं के पास खेत में पानी पटानेवाला डीजल पंप रखा है और उसमें ही दो लाल बत्तियां जलती हैं। जब उन्‍हें यह बात बताया गया तो उन्‍होने एकदम से झेंपकर कहा ‘ओह ! हम तो उससे डर खा गए’ । बेचारे कर भी क्‍या सकते थे , इस डर खाने की कहानी ने तुरंत बखानी गई उनकी निडरता की कहानियों के पोल को खोल दिया था। फिर थोडी ही देर बाद वे चले गए , और हमारे घर के माहौल की तो पूछिए मत , हमलोगों को तो बस हंसने का एक बहाना मिल गया था।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-63607646414986411?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/63607646414986411/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=63607646414986411' title='24 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/63607646414986411'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/63607646414986411'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/10/blog-post_18.html' title='भूतों के भय से ही जुडा एक किस्‍सा और भी सुनिए !!'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>24</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-3107403587472938440.post-4839515541512115262</id><published>2009-10-16T18:50:00.002+05:30</published><updated>2009-10-16T18:53:10.323+05:30</updated><title type='text'>दीपावली की रात घर में पकवान और मिष्‍टान्‍न न रखें .... घर में दरिद्दर वास करता है ??</title><content type='html'>प्राचीन काल से ही अपने धन-संपत्ति , गुण-ज्ञान और बुद्धि-विवेक के बेहतर उपयोग के कारण कुछ चुने हुए लोगों के पास ही संसाधनों की उपस्थिति को स्‍वीकार करना हमारी विवशता रही है। लेकिन सामाजिक तौर पर बेहतर व्‍यवस्‍था उसे कही जा सकती है , जो कई प्रकार के बहानों से इन साधन संपन्‍न लोगों के पास से साधनों को साधनहीनों के पास पहुंचा दे। इससे जहां एक ओर निर्बलों को सहारा मिलता है , तो दूसरी ओर मानसिक श्रम करनेवाले या कला के लिए समर्पित लोगों को भी रोजी रोटी की समस्‍या से निजात मिलती है , जो भविष्‍य में उनके विकास के लिए आवश्‍यक है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;समाज में विभिन्‍न प्रकार के रीति रिवाज या कर्मकांड इसी प्रकार का प्रयास माना जा सकता है। विभिन्‍न प्रकार के त्‍यौहारों को मनाने के क्रम में हमें समाज के हर स्‍तर और हर प्रकार के काम करनेवाले लोगों के सहयोग की जरूरत पड जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी उनका ऐसा महत्‍व है कि उनके बिना हमारा कोई यज्ञ संपन्‍न हो ही नहीं सकता। प्राचीन काल में बडे बडे गृहस्‍थों के घरों में जमा अनाज का समाज के हर वर्ग के लोगों का हिस्‍सा होता था , जो बिना किसी हिसाब किताब के उनके द्वारा किए गए सलाना मेहनत के एवज में उन्‍हें दिए जाने निश्चित थे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दीपावली तो लक्ष्‍मी जी जैसी समृद्ध देवी के पूजन का त्‍यौहार है। भला उनकी पूजा में कैसी कंजूसी ? हमारे समाज में दीपावली के दिन नाना प्रकार के पकवान बनाने , फलों मिठाइयों के भोग लगाने , खाने पीने और खुशियां मनाने की परंपरा रही है। समृद्धों के लिए यह जितनी ही खुशी लानेवाला त्‍यौहार है , असमर्थों के लिए उतना ही कष्‍टकर। दीए तो किसी प्रकार जला ही लें , अपने सामर्थ्‍यानुसार सामग्री जुटाकर पूजा पाठ कर वह प्रसाद भले ही ग्रहण कर लें , पर नाना भोग जुटा पाना उनके लिए संभव नहीं। दूसरी ओर समर्थों के घर इतना पकवान बचा है कि बासी होने के बाद उसे बंटवाना पडेगा। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बासी होने के बाद क्‍यूं , दीपावली के त्‍यौहार के दिन ही इस अंतर को पाटने के लिए हम आप शायद कुछ व्‍यवस्‍था नहीं कर सकते हैं , पर हमारे दार्शनिक चिंतक पूर्वजों ने व्‍यवस्‍था कर ली थी। हमारे क्षेत्र में यह मिथक है कि दीपावली की रात्रि 12 बजे के बाद दरिद्दर घूमा करता है और जिसके यहां&amp;nbsp;पकवान बचे हों , उसके यहां वास कर जाता है। इस डर से लोग जल्‍दी जल्‍दी खुद रात्रि का भोजन निपटाकर बचा सारा खाना और मिष्‍टान्‍न गरीबों के महल्‍ले में भेज देते हैं। भले ही यह मिथक एक अंधविश्‍वास है , पर इसके सकारात्‍मक प्रभाव को देखकर इसे गलत तो नहीं माना जा सकता। हमारे अधकचरे ज्ञान से , जो सामाजिक व्‍यवस्‍था और पर्यावरण का नुकसान कर रहा है , ऐसा अंधविश्‍वास लाखगुणा अच्‍छा है। सभी पाठकों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं !!&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/3107403587472938440-4839515541512115262?l=sangeetapuri.blogspot.com'/&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/feeds/4839515541512115262/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='https://www.blogger.com/comment.g?blogID=3107403587472938440&amp;postID=4839515541512115262' title='26 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/4839515541512115262'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/3107403587472938440/posts/default/4839515541512115262'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://sangeetapuri.blogspot.com/2009/10/blog-post_16.html' title='दीपावली की रात घर में पकवान और मिष्‍टान्‍न न रखें .... घर में दरिद्दर वास करता है ??'/><author><name>संगीता पुरी</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04508740964075984362</uri><email>gatyatmakjyotish@gmail.com</email><gd:extendedProperty xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' name='OpenSocialUserId' value='01751671563456810705'/></author><thr:total xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'>26</thr:total></entry></feed>