रविवार, 9 नवंबर 2008

25 दिसम्‍बर तक असामान्‍य मौसम की कोई आशंका नहीं ( Astrology )

भूगोल में हमने पढा है कि पृथ्‍वी के अपने परिभ्रमण पथ पर घूमने के क्रम में सूर्य से नजदीक और दूर होना ही ऋतु परिवर्तन का एक बडा और मुख्‍य कारण है और इसी कारण हमारे देश में मई जून में गर्मी और दिसम्‍बर जनवरी में सर्दी की ऋतु होती है। साल के बाकी महीनें औसत तापमान वाले होते हैं। गर्मी के पहले वसंत और जाडे के पहले हेमंत ऋतु क्रमश: गर्मी और जाडे के आने की सूचना देती है।


पर ज्‍योतिष शास्‍त्र का सबसे बडा आधार यह है कि पृथ्‍वी स्थिर है और पूरब से पश्चिम 360 डिग्री तक फैला पूरा आसमान उसके चारो ओर परिक्रमा करता है तथा उसके साथ ही साथ सारे ग्रह और नक्षत्र भी। हर वर्ष सूर्य की स्थिति 15 नवम्‍बर से वृश्चिक राशि से बढती हुई 15 फरवरी तक मकर राशि में रहती है। वृश्चिक से मकर तक का सूर्य का सफर भारतवर्ष में सामान्‍य तौर पर ठंड लाने वाला होता है। ठंड 15 नवम्‍बर से आरंभ होकर 15 दिसम्‍बर से बढती हुई 15 जनवरी तक अधिकतम हो जाती है फिर पुन: कम होते हुए 15 फरवरी के बाद बिल्‍कुल ही कम होती है।




ऐसा सिर्फ सूर्य के राशि परिवर्तन से होता है। पर इन तीन महीनों में सिर्फ सूर्य ही नहीं , अन्‍य ग्रह भी राशि परिवर्तन करते हैं। सूर्य के सापेक्ष अन्‍य ग्रहों की ही स्थिति का प्रभाव ठंड को अधिक से अधिक बढाने में होता है। मंगल , बुध , शुक्र बृहस्‍पति , शनि और चंद्र की सम्मिलित शक्ति से एक खास समयांतराल में ठंड के मौसम में ही कहीं न कहीं तूफान आता है , बर्फ गिरने की घटनाएं होती हैं , आसमान बादलों से भर जाता है , तेज हवाएं चलने लगती हैं और कडकडाती ठंड से लोगों का जीना मुश्किल हो जाता है।



यदि इस वर्ष के ग्रहों की स्थिति पर गौर किया जाए , तो 25 दिसम्‍बर तक सूर्य के अतिरिक्‍त अन्‍य ग्रहों का प्रभाव न्‍यूनतम दिखाई पड रहा है। इस दृष्टि से क्रिसमस तक ठंड के असामान्‍य तौर पर बढने की संभावना काफी कम है , जिसके कारण इस समय तक लोगों को ठंड के कारण होनेवाली कठिनाइयों का सामना नहीं करना पडेगा। 25 दिसम्‍बर के बाद के मौसम पर बाद में चर्चा की जाएगी।
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