गुरुवार, 22 जनवरी 2009

आइए, हम सब मिलकर ईश्‍वर से प्रार्थना करें ( Astrology )

ज्‍योतिष में रूचि रखनेवाले पाठकों के लिए ‘ढैया’ शब्‍द कोई नया नहीं है। समस्‍याओं से जूझ रहे व्‍यक्ति के लिए ज्‍योतिषी अक्‍सर ढैया और साढेसाती शब्‍द कर उपयोग करते हें। परम्‍परागत ज्‍योतिष का मानना है कि जब जन्‍मकुंडली और दशापद्धति के अनुसार फल नहीं घटित हो रहा हो , तो गोचर यानि आसमान में चल रहे ग्रहों को देखते हुए भविष्‍यवाणी की जाए। यूं तो ज्‍योतिष की पुस्‍तकों में शनि के कारण उपस्थित होनेवाली बडे ढैया की ही चर्चा हुई है , जिसके कारण ढाई वर्षों तक लोगों को बडी बडी मुसीबतों का सामना करना पडता है , पर गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष की माने , जिसकी छोटी सी प्रयोगशाला में 40 वर्षों से आसमान में चल रहे ग्रह और उनका पृथ्‍वी पर स्थित जडचेतन पर पडनेवाले प्रभाव के आपसी संबंध का निरंतर अध्‍ययन चल रहा है , तो समय समय पर एक छोटे ढैया का प्रभाव भी जनसामान्‍य पर पडता है। इसके कारण ढाई दिनों तक लोगों को एक जैसी परिस्थितियों , चाहे वह अच्‍छी हो या बुरी , से जूझना पडता है। बडे और छोटे ढैया के बारे में अधिक जानकारी आप इस आलेख में प्राप्‍त कर सकते हैं।

गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के अनुसार पिछले वर्ष 27 नवम्‍बर 2008 से लेकर 29 नवम्‍बर 2008 तक 4 ग्रहों की एक ही राशि में स्थिति एक छोटे ढैया का फल प्रदान करनेवाली थी। 27 से 29 नवम्‍बर के ग्रहों की इस विशेष स्थिति को देखकर मुझे कुछ खटका तो हुआ था , पर ऐसा योग हर समय बुरा परिणाम ही नहीं देता , किसी न किसी प्रकार की छोटी मोटी समस्‍याओं में भी लोगों को उलझाकर रखता है , यही सोंचते हुए मैने इस तिथि के बारे में थोडे तनाव से भरा यह पोस्‍ट लिखा था , पर उस दिन कोई छोटी मोटी घटना न घटकर मुंबई के ताज होटल में आतंकवादी हमले के रूप में पूरे विश्‍व तक का ध्‍यानाकृष्‍ट करानेवाली भयावह घटना घट गयी । वैसे तो उस वक्‍त इतनी बुरी घटना के बारे में कल्‍पना भी कर पाना हमारे लिए मुश्किल था , पर ढाई दिनों तक आतंकवादियों को खदेडने के लिए सेना द्वारा आपरेशन का चलते रहना इसी ग्रह योग की भयावहता की पुष्टि कर देता है। पूरे ढाई दिन तक सारे भारतवर्ष में लोग टी वी खोलकर बडी बेचैनी से इस आपरेशन को देखने में ही उलझे रहें। इस दिन इतनी बडी घटना घटने के पीछे एक कारण यह भी हो सकता है कि 29 नवम्‍बर को ये चारो ग्रह आसमान में मात्र 4 डिग्री की दूरी पर ही थे , जबकि बाकी समय जब भी यह योग बनता है , तो ये एक राशि में दूर तक यानि 30 डिग्री तक फैले होते हैं , एक महीने बाद दिसम्‍बर के अंत में भी जब यह योग बना , तो ये चारो ग्रह 26 डिग्री तक फैले हुए थे , इसलिए इस दिन कोई बुरी घटना नहीं घटी। ग्रहों की इस स्थिति को सिर्फ हमारी ज्‍योतिष की पुस्‍तकों में ही नहीं देखा जा सकता , इस बात की गणना खगोलशास्‍त्र से जुडे भी कोई वैज्ञानिक कर सकते हैं।


2009 में भी 25 जनवरी से 27 जनवरी तक छोटे ढैया का एक ऐसा ही योग बन रहा है, पर यहां मंगल न होकर दूसरे चार ग्रह सूर्य , चंद्र , बुध और बृहस्‍पति होंगे। वैसे मंगल भी अधिक दूरी पर स्थित न होकर उससे सटी राशि की सीमा पर ही स्थित होगा। इस तरह मात्र 13.14 डिग्री के फैलाव में पांच ग्रहों का आ जाना भी भारत के साथ ही साथ संपूर्ण विश्‍व के लिए बहुत शुभ संकेत तो नहीं है। पूरे विश्‍व में दोनो तीनो ही दिन सुबह के 5 बजे से 8 बजे तक तथा दोपहर के 1 बजे से 5 बजे दिन तक इन ग्रहों के विशेष प्रभाव को महसूस किया जा सकता है। आइए , हम सब मिलकर ईश्‍वर से प्रार्थना करें कि आनेवाली इस छोटे ढैया में कोई बुरी घटना न हो और जनसामान्‍य निम्‍न प्रकार की छोटी मोटी समस्‍या में ही उलझे रहें , जैसे.........



काम में बेवजह देरी होने से झुंझलाहट।
किसी वाहन का अचानक खराब हो जाना।
किसी वाहन के लिए लम्बा इंतजार करना।
महत्वपूर्ण कार्य के समय बिजली का चले जाना।
किसी कार्य में अनिश्चितता की स्थिति बन जाना।
किसी काम के लिए लंबे क्यू में लगने की बाध्यता।
अचानक कार्य की भीड़ से अस्तव्यस्तता महसूस करना।
बच्चों की छोटी गल्ती में भी बात का बतंगड़ बन जाना।
बाजार करने या किसी प्रकार के निर्णय लेने के बाद पश्चाताप।
सामनेवाले से विचार के तालमेल के अभाव से निष्कर्ष पर न पहुंच पाना।
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