शनिवार, 24 जनवरी 2009

क्‍या मेरी भविष्‍यवाणियों का सही होते जाना महज संयोग है ? ( Astrology )

मेरे इस शीर्षक को देखकर आप यह न समझ बैठे कि यह hagiography – प्रशंसात्मक बायोग्राफी से भरा एक आलेख है , जिसके बारे में आज ही ज्ञानदत्‍त पांडेय जी के आलेख में पढने को मिला। मेरे आलेख का मुख्‍य उददेश्‍य अपनी प्रशंसा न कर ज्‍योतिष जैसे वैदिक कालीन विषय को विज्ञान के रूप में पदस्‍थापित करना है। ज्‍योतिष को विज्ञान साबित करने के लिए एक एक व्‍यक्ति को पकडकर और उनके लिए सटीक भविष्‍यवाणी की गणना कर पूरे विश्‍व के लोगों तक ज्‍योतिष की वैज्ञानिकता का प्रमाण देने में तो हमें कई जन्‍म लेने होंगे , यही सोंच हमें व्‍यक्तिगत भविष्‍यवाणी के इतर कुछ अन्‍य बातों के अध्‍ययन में भी ले आयी। क्रिकेट मैच , मौसम , राजनीति और शेयर के कुछ दिनों के अध्‍ययन के बाद हमने इससे संबंधित भविष्‍यवाणियां करनी आरंभ की , जिसके सही होने पर मुझे विश्‍वास हो गया कि अब लोग अवश्‍य ज्‍योतिष के पक्ष में आते जा रहे हैं ।
सबसे पहले 8 नवम्‍बर को प्रकाशित मौसम की भविष्‍यवाणी इस आलेख में देखें , जिसमें मैने भविष्‍यवाणी कर रखी थी कि इस वर्ष शुभ ग्रहों का प्रभाव अधिक होने से 25 दिसम्‍बर तक ठंड कम पडेगी और वही हुआ।
मौसम से संबंधित दूसरी भविष्‍यवाणी 16 दिसम्‍बर को इस आलेख में की गयी थी , जिसमें अशुभ ग्रहों की वजह से 2 और 3 जनवरी 2009 को मौसम के प्रतिकूल होने की बात कही गयी थी , शायद उस दिन का कुहरा पाठक नहीं भूले हों , जिसकी वजह से एक सप्‍ताह तक न जाने कितनी उडाने और ट्रेने रदद कर दी गयी थी और कितनी दस दस घंटो तक लेट चल रही थी।
इसी प्रकार 3 नवम्‍बर को जब शेयर बाजार से जुडे सारे लोग हैरान परेशान थे सेंसेक्‍स और निफटी अपने न्‍यूनतम स्‍तर पर था , मेरा यह आलेख पढें , जिसमें स्‍पष्‍ट कहा गया था कि गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के अनुसार छोटे उतार और बडे़ चढा़व को दिखाते हुए सेंसेक्‍स और निफटी की स्थिति 20 दिसंबर तक बढ़त का ही क्रम बनाए दिखाई दे रहे हैं। इसलिए निवेशकों को अभी धैर्य बनाए रखने की आवश्‍यकता है। 20 दिसम्‍बर के पूर्व के सप्‍ताह में ही सेंसेक्‍स ने कई बार 10 हजार को पार किया ही, 18 और 19 को ही अपने सर्वाधिक स्‍तर पर भी पहुंचा।
20 दिसम्‍बर के तुरंत बाद के सप्‍ताह में ही शेयर बाजार की गिरावट आरंभ हो गयी। 3 जनवरी को सरकार और रिजर्व बैंक के मंदी दूर करने के कार्यक्रमों के बावजूद 5 जनवरी को प्रकाशित मेरे आलेख में स्‍पष्‍ट है कि सेंसेक्‍स में गिरावट आएगी और वही हुआ। उसी सप्‍ताह सत्‍यम घोटाले से बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ।
अभी पिछले सप्‍ताह अर्थव्‍यवस्‍था के जानकार तक अमेरिका के राष्‍ट्रपति ओबामा के शपथ ग्रहण के बाद शेयर बाजार में बढोत्‍तरी की उम्‍मीद कर रहे थे , पर 18 जनवरी को प्रकाशित मेरे आलेख में स्‍प्‍ष्‍ट है कि 19 जनवरी को बाजार सामान्‍य भी रह सकता है , पर 20 और 21 जनवरी को बाजार में जो गिरावट आएगी , उसके प्रभाव से 22 और 23 जनवरी को भी बाजार कमजोर ही बना रहेगा। एक एक दिन की सटीक गणना बिना किसी आधार के कह पाना किसी के लिए संभव है क्‍या ?
अब आपको राजनीति में लिए चलती हूं। जुलाई के मध्‍य में जब केन्‍द्र में मनमोहन जी की सरकार ने बहुमत हासिल कर लिया , रांची से प्रकाशित होनेवाले अखबार ‘प्रभात खबर’ के कुछ पत्रकार मुझसे मिले और शिबू सोरेन के भविष्‍य के बारे में जानना चाहा। मैने उन्‍हें न सिर्फ यह बताया कि वे मुख्‍यमंत्री बनेंगे , बल्कि यह भी कि जनवरी 2009 से ही उनके सामने संकट आएगा। इस बात को उन्‍होने अखबार में दो दो बार प्रकाशित किया , जिसकी कतरन आप नीचे देख सकते हैं।

अब आपको 2004 में लिए चलती हूं , जब अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्‍व को पूरे भारतवर्ष में खासी प्रतिष्‍ठा मिल रही थी , तीन तीन राज्‍यों में विधान परिषद में मिलनेवाली सफलता और ‘शाइन इंडिया’ और ‘फील गुड’ के प्रचार प्रसार के बाद उनकी हार के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था। वातावरण को देखते हुए ही मौके का फायदा उठाने के लिए ही इन्‍होने लोकसभा भी भंग कर दी थी। पर इस समय गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष की गणना के आधार पर मेरे पिताजी ने अदिति फीचर्स को यह आलेख भेजा था , जो उसके माध्‍यम से दिल्‍ली के दस अखबारों में प्रकाशित हुआ। इस समय राजग का हार जाना ग्रहों के प्रभाव की ही पुष्टि करता है।

एक बात और, जो मै बतलाना आवश्‍यक समझती हूं , वह यह कि हमारे आलेखों में आप परंपरागत ज्‍योतिषियों की तरह की बातें , जैसे इस ग्रह की राशि में वे ग्रह है या इसकी दशा चल रही है , यह सब नहीं पाएंगे ,पाएंगे कि आकाश में यह ग्रह उस ग्रह से इतनी दूरी पर स्थित है या इस प्रकार का कोण बना रहा है, क्‍योकि गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष खगोल शास्‍त्र पर पूर्ण तौर पर अधारित है और खगोलीय स्थिति का पृथ्‍वी पर पडनेवाले प्रभाव की विवेचना करता है। यदि खगोल वैज्ञानिको की टीम हमसे संपर्क करे , तो ज्‍योतिष के मानव जड चेतन पर पडनेवाले प्रभाव को प्रमाणित किया जा सकता है।
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