सोमवार, 23 फ़रवरी 2009

मेरी नजर में पूर्वी भारत का ब्‍लागर मीट कार्यक्रम

फरवरी का मध्‍य मेरे लिए काफी व्‍यस्‍तता भरा रहा। 12 को एक विवाह , 15 को एक रिशेप्‍सन , 17 को फिर से एक विवाह और 20 को एक पारिवारिक कार्यक्रम और इनमें से कोई भी बोकारो के अंदर नहीं। सभी कार्यक्रमों के लिए आते जाते कम से कम 100 किमी से लेकर 300 किमी तक की दूरी तय करना आवश्‍यक , जाहिर है कोई और मौका होता , तो मैं 20 फरवरी तक थककर चूर हो गई होती। पर 22 फरवरी को पूर्वी भारत के ब्‍लागर मीट के कार्यक्रम में जाने के उत्‍साह के कारण मैं बिल्‍कुल तरोताजा महसूस कर रही थी। बाकी सारे कार्यक्रमों के बारे में तो सब कुछ निश्चित सा था , किसमें कौन कौन से लोग मिलेंगे , क्‍या क्‍या होगा , पर इस कार्यक्रम के बारे में सिर्फ और सिर्फ उत्‍सुकता ही थी। चूकि मैं , पारूल जी और मीत जी एक साथ ही रांची जा रहे थे , इसलिए माना जाए कि रांची जाने के हमारे सफर में ही ब्‍लागर मीट आरंभ हो चुका था । एक ही शहर में होने के बावजूद मै पारूल जी से पहली बार मिल रही थी तो फिर मीत जी से पहले न मिल पाने का क्‍या मलाल होता ? वैसे मैं उनलोगों के लिए अधिक अपरिचित थी , क्‍योकि उन्‍होने सिर्फ मेरा लेखन पढा था , जबकि मै तो उनके लेखन के साथ ही साथ आवाज से भी परिचित थी। रास्‍ते के तीन घंटों में ही हमलोग एक दूसरे से काफी परिचित हो चुके थे। वैसे मीत जी की तबियत कुछ खराब थी , इसके बावजूद रांची ब्‍लागर मीट में उनका उपस्थित होना ब्‍लाग जगत के प्रति उनकी निष्‍ठा को दर्शाता है।


रांची के कश्‍यप मेमोरियल हास्पिटल के उस हाल में शायद बाहरी लोगों में सबसे पहले मैं ही पहुंची। झारखंड के अतिरिक्‍त बनारस से अभिषेक मिश्रा और दिल्‍ली से शैलेश जी भी पहुंचे। शैलेश जी के प्रस्‍ताव , घन्‍नू झारखंडी जी की मेहनत और कश्‍यप मेमोरियल हास्पिटल की डाक्‍टर भारती कश्‍यप जी के द्वारा वहां हमारे लिए जरूरी हर प्रकार की व्‍यवस्‍था की गयी थी। वहां घन्‍नू झारखंडी हमलोगों का इंतजार ही कर रहे थे। रांची हल्‍ला के सारे सदस्‍य , मनीष जी और प्रभात गोपाल जी को भी स्‍थानीय होने के नाते वहां मौजूद होना ही था। धीरे धीरे अन्‍य ब्‍लागर्स भी पहुंचते गए । इस कार्यक्रम को बहुत ही सफल माना जा सकता है , सब एक दूसरे से मिले , सबने अपने अपने अनुभव बांटे , पूरे कार्यक्रम का विवरण देनेवाली राजीव जी कीरपटके साथ ही साथ प्रभात रंजन जी कीरपटतो आपलोगों को मिल ही चुकी है। धन्‍नू झारखंडी ने कार्यक्रम का संचालन किया । हम ब्‍लागरों के साथ ही साथ पत्रकार जगत के लोगों ने भी ब्‍लागिंग के बारे में वक्‍तब्‍य दिया। साथ ही पारूल जी , श्‍यामल सुमन जी और मीत जी के द्वारा गाने और गजल का भी दौर चला। चित्रों के लिए आप यहांजाएं। खाने के वक्‍त हमलोगों को एक दूसरे से बातचीत करने का मौका मिला। सभी ब्‍लागरों के आलेखों को पढकर और उनके पिक्‍चर को देखकर मैने उनके बारे में जितनी कल्‍पना कर रखी थी , उससे कहीं बढकर सामनेवालों को पाया। धनबाद से आयी लवली जी तो कार्यक्रम समाप्‍त होने के तुरंत बाद ही निकल चुकी थी। खाने के बाद भी कार्यक्रम एक घंटे चला।


कार्यक्रम के बाद रांची के सारे ब्‍लागर भाइयों से विदाई लेकर ( रांची के मनीष जी हमारे साथ रहे) बोकारो से आयी मैं और पारूलजी , कलकत्‍ता से आए मीत जी और मिश्राजी , जमशेदपुर से आयी रंजना जी , श्‍यामल सुमन जी और दिल्‍ली से आए शैलेश जी ......इतने लोगों ने बचे दो घंटे साथ व्‍यतीत करने का निर्णय लिया । इसके लिए हमलोग कावेरी रेस्‍टोरेंट में चाय पीने चले गए ,इस मध्‍य हमारी सारी बातें ब्‍लागिंग से ही जुडी रहीं। देखते ही देखते दो घंटे व्‍यतीत हुए और फिर भारी मन से विदा लेकर अपने अपने रास्‍ते चल पडने का वक्‍त आ ही गया। आते वक्‍त पारूल जी की रिकार्ड की गयी मीठी आवाज को सुनते हुए हमलोग बोकारो पहुंचे। यह दिन शायद हम सबों के लिए यादगार रहेगा।


किन्‍तु सिर्फ हमारी कोशिश से हिन्‍दी ब्‍लागिंग का कितना भला हो पाएगा , यह सोंचनेवाली बात हो जाती है , जबतक सामान्‍य जनता , सरकार , मीडिया और अन्‍य लोग इसे गंभीरतापूर्वक न लें। इतनी अच्‍छी व्‍यवस्‍था और हमारे द्वारा इस कार्यक्रम का इतना प्रचार प्रसार किए जाने के बाद भी कुछ नियमित ब्‍लागर ही वहां तक पहुंचे थे , जबकि शुरूआती दौर के और अनियमित बहुत सारे हिन्‍दी ब्‍लागर इस क्षेत्र में रहते हैं। कार्यक्रम के तुरंत बाद रास्‍ते में ही मुझे एक फोन मिला कि हिन्‍दी के साइट खोलने पर उनके कम्‍प्‍यूटर में हिन्‍दी नहीं दिखाई पड रही है , आखिर हिन्‍दुस्‍तान में बेचे जानेवाले सभी कम्‍प्‍यूटरों में डिफाल्‍ट में ही हिन्‍दी की सेटिंग क्‍यो नहीं बनी होती ? जब वे हिन्‍दी में पढ नहीं पा रहे तो हिन्‍दी में लिख किस तरह पाएंगे , यह सोंचनेवाली बात है। अभी तो शायद ‘ब्‍लागर’शब्‍द को जानने में ही अभी भारतवर्ष के लोगों को काफी समय लग जाएगा , जैसा कि कावेरी रेस्‍टोरेंट में ब्‍लागिंग से जुडी बातें करते वक्‍त किसी ने परिहास किया कि बगल के टेबल पर बैठे लोग हमें इस दुनिया की अलग प्रजाति समझ रहे हैं या फिर बार बार सबबके मुंह से उडनतश्‍तरी सुनकर दूसरे ग्रह से आई प्रजाति ?
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