सोमवार, 9 मार्च 2009

होली के अनुकूल ग्रह स्थिति नहीं ( Astrology )

हिन्‍दी पंचांग के अनुसार वर्ष के अंतिम दिन यानि फाल्‍गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन के रूप में नकारात्‍मक भावों को जलाने तथा वर्ष के पहले दिन होली के रूप में ईर्ष्या-द्वेष की भावना भुलाकर प्रेमपूर्वक गले मिलने और रंग लगाने के इस त्‍यौहार को मनाए जाने की परंपरा बनीं। होली के त्यौहार की तरह मस्ती , उल्लास और मौज मजे का पर्व कोई नहीं। वैसे तो मस्‍ती के इस त्‍यौहार को मनाने के लिए मानव मन का प्रतीक ग्रह एकमात्र चंद्रमा ही काफी है , जो इन दोनो ही दिनों में अपनी पूरी गोलाई लिए आसमान में रात दिन चमकता रहता है , यही कारण है कि प्राचीन काल में यह विवाहित महिलाओं द्वारा परिवार की सुख समृद्धि के लिए मनाया जाता था और पूर्ण चंद्र की पूजा करने की परंपरा थी। पर यदि अन्‍य सभी ग्रह भी इस दिन साथ में सकारात्‍मक प्रभाव दें , तो वह होली किसी न किसी रूप में ‘यादगार’ बन जाती है। इसके उलट अन्‍य सभी ग्रह भी इस दिन साथ में नकारात्‍मक प्रभाव दें , तो वह होली किसी न किसी रूप में मस्‍ती और उल्‍लास को कम करनेवाली सिद्ध होती है।

इस बार की होली यानि 10 और 11 मार्च के ग्रह स्थिति को देखा जाए , तो इस पूर्ण चंद्रमा के साथ अन्‍य ग्रहों का तालमेल न बन पाने से ग्रहों का ऋणात्‍मक प्रभाव अधिक देखने को मिलेगा। किसी प्रकार के दुर्योग के कारण शारीरिक , मानसिक , आर्थिक या पारिवारिक किसी भी प्रकार की समस्‍या उपस्थित हो सकती है। हर परिवार में अलग अलग प्रकार के मुद्दों के उठ खडे होने से यह होली खास नहीं बन पाएगी , खासकर वे मुद्दे प्रभावी हो जाएंगे , जो आपके परिवार के लिए संवेदनशील हैं और जनवरी 2009 से ही आपको परेशान कर रहे हैं। भोर के तीन चार घंटे और शाम के दो घंटे इस दृष्टि से अधिक बुरे रहेंगे। मेरी सलाह है कि ग्रहों के कारण यदि कोई खास परेशानी आ जाए तो संयम बरतें और यदि कोई परेशानी नहीं उपस्थित हो तो अपने परिवार के किसी संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा न कर पूरे मजे लेकर होली अच्‍छी तरह मनाएं , और यदि जनवरी 2009 से ही आप किसी संवेदनशील मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं हैं तो फिर आपको चिंता करने की कोई आवश्‍यकता ही नहीं है। आपका कुछ भी बुरा नहीं होगा। हिन्‍दी चिट्ठा जगत के सभी लेखकों और पाठकों को होली की ढेरो शुभकामनाएं।

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