शुक्रवार, 10 अप्रैल 2009

कम से कम 12 अप्रैल तक मौसम खुशनुमा बना रहेगा

दो चार दिनों से यत्र तत्र आंधी ,पानी की खबरें तो पढ रही थी , पर मुझे होश कल आया , जब कल रात यहां बोकारो में भी बारिश हो ही गयी। हमने ग्रहों का मौसम के साथ तालमेल करते हुए कुछ ज्‍योतिषीय सिद्धांतों को भी विकसित किया है। मैने एक पुराने आलेखमें भी कहा था कि ग्रहों के आधार पर मौसम की भविष्‍यवाणी की एक विधा के रूप में ज्‍योतिष के सिद्धांतों को बडे स्‍तर पर ले जाने की बडी संभावना है। पर इस सप्‍ताह आसमान में ऐसी कोई स्थिति नहीं बन रही थी , जो मौसम को प्रभावित करती हो। मैने बडे रूप से मौसम को प्रभावित करनेवाले सारे नियमों पर एक बार फिर से निगाह डाला , वह योग 1 से 4 मई 2009 को ही बन रहा है। छोटे छोटे योग भी बरसात के दिनों में ही काम करते हैं। और अभी कोई छोटा योग भी नहीं। बार बार ग्रहों की दो चार दिनों की स्थिति पर ध्‍यान डालने से एक बात स्‍पष्‍ट हो ही गयी।

इस सप्‍ताह ग्रहों की जो स्थिति बन रही है , खासकर आनेवाले तीन दिनों में , वह सम परिस्थितियां लाती हैं । इसका अर्थ यह है कि आप जिस भी माहौल में हों , कुछ बेहतर महसूस करना आरंभ कर देते हैं। मतलब कि 90 प्रतिशत लोगों के लिए यह ग्रहयोग लाभदायक होता है और वे शारीरिक , मानसिक , आर्थिक या फिर अन्‍य कारणों से कोई तनाव झेल रहे हो , तो उन्‍हें अवश्‍य राहत मिल जाती है। पर जब इस दृष्टि से चिंतन किया तो वस्‍तुस्थिति साफ हो गयी। इस बेमौसम हल्‍की फुल्‍की बरसात की खास वजह लोगों के समक्ष आरामदायक माहौल उपस्थित करना ही था। अप्रैल के आरंभ में ही इतनी भीषण गर्मी जनसामान्‍य के संकट को बढा रही थी , पर जब राहत देनेवाले ग्रहों की बारी आयी तो उसने बादल इकट्ठा कर ,तापमान को कम कर मौसम को खुशनुमा बना दिया है । जो भी किसान या अन्‍य लोग इस बेमौसम के बरसात से चिंतित हों , उन्‍हें फसल के नुकसान की या अन्‍य तरह की क्षति की जो आश्‍ंका दिखाई पड रही है , वह नहीं होनेवाली , वैसे पांच प्रतिशत मामलों में कुछ गडबडी हो जाए तो बात अलग है , पर वह भी 12 अप्रैल के बाद ही होगा । 12 अप्रैल तक मौसम के खुशनुमा बने रहने की पूरी संभावना है।
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