शनिवार, 18 अप्रैल 2009

आसमान में बृहस्‍पति और चंद्र के संयोग से एक अनोखा दृश्‍य बनेगा

अभी अभी अपना ईमेल खोलने पर आशीष महर्षि जी का एक मेल मिला, कि उनके द्वारा दैनिक भास्‍कर के ब्‍लागर्स पार्क में इस बार 'ब्‍लाग की तीन देवियां' नाम से चर्चा की गयी है , सौभाग्‍य मेरा कि उसमें  जी और मीनाक्षी जी के साथ मेरा नाम भी शामिल है। इसमें मेरे चिट्ठे की वैज्ञानिकता की भी चर्चा है। आप भी नजर डाले , ये रहा लिंक। अनिता कुमार जी और मीनाक्षी जी को बधाई तथा आशीष महर्षि जी को धन्‍यवाद। अब बढते हैं ज्‍योतिषीय चर्चा की ओर।

20 अप्रैल 2009 को सूर्योदय के लगभग चार घंटे पहले चंद्रोदय होगा और उसी के साथ होगा हमारे सौरमंडल के विशालकाय ग्रह बृहस्‍पति का भी उदय। इस खास दृश्‍य का आनंद आप 4-5 बजे रात्रि में ले सकते हैं। उस दिन सुबह सुबह पूर्वी दिशा में पूर्वी क्षितिज पर 30 डिग्री उपर आधे से कुछ छोटा चांद और उसके साथ पीली आभा बिखेरते बृहस्‍पति को देखा जा सकता है। बृहस्‍पति अभी पृथ्‍वी से नजदीक आने की दिशा में प्रवृत्‍त है , इस कारण इसका प्रभाव आनेवाले दिनों में पृथ्‍वी के जड चेतन पर अधिक पडनेवाला है।


’गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ के अनुसार पृथ्‍वी से निकटतर होती बृहस्‍पति की इस स्थिति में प्रतिदिन उसकी गत्‍यात्‍मक शक्ति की कमी और स्‍थैतिक शक्ति की बढोत्‍तरी होती जा रही है। इस कारण अच्‍छे या बुरे किसी भी रूप में पृथ्‍वी के जड चेतनों पर इसका प्रभाव बढता चला जाता है और इसकी शुरूआत आज से ही होनी चाहिए। वैसी समस्‍याएं या कार्यक्रम, जो कुछ दिनों हल्‍के फुल्‍के नजर आ रहे थे, वे आज ही गंभीर हो जाएंगे।


वैसे तो दुनिया भर के 20 प्रतिशत से अधिक लोग बृहस्‍पति के कारण 18 और 19 अप्रैल को विशेष प्रकार के कार्यक्रम से अपने को संयुक्‍त पाएंगे , भले ही किसी के लिए यह अच्‍छी हो और किसी के लिए बुरी। यह कार्यक्रम दिन ब दिन गंभीर होता हुआ कुछ लोगों को खुशी और कुछ को कष्‍ट देता हुआ 16 मई के आसपास अपने निर्णायक मोड पर पहुंच जाएगा। वैसे इन संदर्भों की उलझन और इसमें शारीरिक , आर्थिक या मानसिक तौर पर व्‍यस्‍तता किसी न किसी प्रकार 16 जून तक बनीं रहेगी।


बृहस्‍पति की इस खास स्थिति से जो लोग अच्‍छे रूप में प्रभावित होंगे , वे निम्‍न समयांतराल में जन्‍म लेनेवाले लोग होंगे .... सितम्‍बर 1945 से फरवरी 1946, जुलाई 1946 से सितम्‍बर 1946, सितम्‍बर 1957 से फरवरी 1958, जुलाई 1958 , अगस्‍त 1958, अगस्‍त 1969 से फरवरी 1970 , जुलाई 1970 , अगस्‍त 1970, नवम्‍बर 1980 से जनवरी 1981, जुलाई 1981 से नवम्‍बर 1981, नवम्‍बर 1992 से जनवरी 1993, जून 1993 से नवम्‍बर 1993 ,
उपरोक्‍त समयांतराल में जन्‍म लेनेवाले लोगों के अलावा कन्‍या राशिवालों पर भी इसका प्रभाव अच्‍छा देखा जा सकता है।


बृहस्‍पति की इस खास स्थिति से जो लोग बुरे रूप में प्रभावित होंगे , वे निम्‍न समयांतराल में जन्‍म लेनेवाले लोग होंगे .... नवम्‍बर 1931 से मई 1932, दिसम्‍बर 1943 से मई 1944, दिसम्‍बर 1955 से मई 1956, अक्‍तूबर 1966 से दिसम्‍बर 1966, नवम्‍बर 1978 से जनवरी 1979,नवम्‍बर 1990 से अप्रैल 1991,नवम्‍बर 2002 से अप्रैल 2003,
उपरोक्‍त समयांतराल में जन्‍म लेनेवाले लोगों के अलावा कर्क राशिवालों पर भी इसका प्रभाव बुरा देखा जा सकता है।
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