सोमवार, 11 मई 2009

ग्रह सापेक्ष इस राजनीतिक विश्‍लेषण को भविष्‍यवाणी नहीं , संभावना समझे

जब से मैने ब्‍लाग लिखना शुरू किया है , चुनाव का यह पहला मौका है। यत्र तत्र कुछ आलेखों को पढने के बाद केन्‍द्रीय राजनीति के भविष्‍य को जानने की मेरी जिज्ञासा बनी । जब हर प्रकार का माहौल ग्रहों से संचालित होता है तो भला राजनीति क्‍यों नही ? वैसे तो हमलोग ग्रह सापेक्ष राजनीतिक हालातों का हमेशा ही विश्‍लेषण करते हैं और इस कारण राजनीति में तिथियों के महत्‍व को दिखाते हुए इस सरकार के गठन के बारेएक आलेखपोस्‍ट किया ही जा चुका है कि इस बार सरकार के गठन में बहुत देर होगी। पर चुनाव परिणाम के बाद की राजनीति किस करवट बैठेगी , इस दिशा में अनुमान लगाने के लिए मैने सभी राजनीतिक दलों के 28 नेताओं की कुंडली का सूक्ष्‍म अध्‍ययन मनन किया।

इस तरह की भविष्‍यवाणी में यूं बहुत कठिनाई आती है , किसी राजनीतिक पार्टी की कुंडली पर ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ को विश्‍वास नहीं , क्‍योंकि ग्रह का प्रभाव पडने के लिए जिस चेतना की आवश्‍यकता होती है , वह राजनीतिक पार्टियों में नहीं हो सकती। इसलिए उनके नेताओं की कुंडली में हम देश का राजनीतिक भविष्‍य तलाश करते हैं। नेताओं की लग्‍नकुंडली के आधार पर कुछ सटीक भविष्‍यवाणी तो की जा सकती है , पर वो उपलब्‍ध नहीं होने से उनकी जन्‍मतिथि के आधार पर हम चंद्रकुंडली ही बना पाते हैं । लग्‍नकुंडली की तुलना में चंद्रकुंडली बहुत स्‍थूल होता है , इस कारण भविष्‍यवाणी करने में खासी दिक्‍कतें आती हैं , उपर से यदि जन्‍मतिथि गलत हो , तो उससे की जा रही भविष्‍यवाणी के किसी भी दिशा में जाने की पूरी संभावना होती है। इसलिए उस जन्‍मतिथि के सापेक्ष जातक की पूर्व की घटनाओं से मिलान करना पडता है , ताकि भविष्‍यवाणी में सटीकता आ सके और इन सब में अच्‍छा खासा समय जाया होता है।

सबसे पहले मैने भाजपा और उसके सहयोगी दलों के छोटे बडे बहुत सारे नेताओं की जन्‍मकुंडली का अध्‍ययन किया। एक नीतिश कुमार के मजबूत ग्रहों के कारण भाजपा बिहार से कुछ अधिक उम्‍मीद रख सकता है , पर नरेन्‍द्र मोदी सहित भाजपा के अन्‍य वरिष्‍ठ नेताओं जैसे लालकृष्‍ण अडवानी , राजनाथ सिंह , अरूण जेटली , मुरली मनोहर जोशी , जसवंत सिंह ... किसी की कुंडली में मुझे बडी संभावनाएं नहीं दिखीं। इन नेताओं के ग्रहों के अनुकूल न होने से किसी पार्टी के साथ मिल जुल कर सरकार बनाने में इन्‍हें काफी समझौता करना पडेगा , जिसे स्‍वीकारना काफी मुश्किल दिखता है , इस कारण ये लोग विपक्ष में रहना अधिक पसंद करेंगे , बहुत हुआ तो ये किसी पार्टी को सरकार बनाने के लिए अपना समर्थन दे सकते हैं।

गैर बीजेपी और गैर कांग्रेसी नेताओं की बात की जाए, तो जयललिता , चंद्रबाबू नायडू , प्रकाश करात और नवीन पटनायक की राजनीतिक स्थिति में इजाफा होने से सरकार बनाने में इनका महत्‍व बढा हुआ दिखाई पडता है , चाहे वो सरकार में शामिल हों या बाहर से समर्थन दें। पर शरद पव्‍वार और मायावती को अच्‍छे खासे सीटों के हिसाब से अपनी बढी हुई महत्‍वाकांक्षा के अनुरूप सफलता मिलती नहीं दिखाई पड रही है। इस लोकसभा चुनाव में एच डी दैवगोडा , मुलायम सिंह यादव , लालू यादव की स्थिति पहले की तुलना में काफी कमजोर दिखाई पडेगी। इनमें से एक मुलायम सिंह यादव ही अपनी कमजोर स्थिति के बावजूद राजनीतिक रूप से अधिकतम फायदा उठाने में कामयाब हो सकते हैं । उम्‍मीद बहुत कम है , पर संगति के लाभ से शायद लालू यादव को भी थोडा फायदा मिल जाए । एच डी दैवगौडा की स्थिति कमजोर बनी रहेगी। राजनीतिक स्थिति में थोडे सुधार के बावजूद भी रामविलास पासवान की महत्‍वाकांक्षा पूरी न हो सकेगी। ऐसी स्थिति को देखते हुए उपरोक्‍त में से कुछ के सरकार में शामिल होने और कुछ के बाहर से समर्थन देने और कुछ के विपक्ष में बने रहने की बात जंचती है , पर ग्रहीय योग से इनमें से कोई प्रधानमंत्री पद के अनुरूप दिखाई नहीं दे रहा , इसलिए इनके द्वारा सरकार बनाए जाने की उम्‍मीद नहीं दिखती।

काफी दवाब के बावजूद कांग्रेसी नेताओं की जन्‍मकुंडली में अपने सहयोगी दलों के साथ तालमेल करने और सरकार बना पाने की कुछ अधिक संभावनाएं दिखाई पड रही हैं। काफी मशक्‍कत के बाद अंत अंत में सोनिया गांधी थोडी राहत में दिख रही हैं , इससे कुछ उम्‍मीद तो लग रही है। मनमोहन सिंह की अगस्‍त 2008 से शनि की ढैय्या चल रही है, जिसके कारण उसी महीने लेफ्ट ने इससे समर्थन वापस ले लिया था , पर दो तीन ग्रहों के पक्ष में होने से मुलायम सिंह यादव ने साथ दिया और अभी तक कुछ नुकसान तो नहीं हो पाया , इसके बावजूद अब भी मनमोहन सिंह सवर्सम्‍मति से नेता चुने जाएंगे , इसमें शक की कुछ गुंजाइश तो रह ही जाती है । यदि इनकी जगह प्रणव मुखर्जी , शिवराज पाटिल या सुशील कुमार शिंडे का नाम लाया जाता है तो इनलोगों की भी संभावना कम ही दिखाई पड रही है , क्‍योंकि शनि की ढैय्या के साथ साथ इनके अन्‍य ग्रह भी कमजोर दिख रहे हैं। युवराज राहूल गांधी की कुंडली में भी तत्‍काल प्रधानमंत्री बनने की कोई उम्‍मीद नहीं दिखती। सोनिया गांधी के ग्रहीय संभावना होने के बावजूद वे प्रधानमंत्री का पद स्‍वीकार नहीं करेंगी , तो ऐसी स्थिति में वरिष्‍ठ कांग्रेसी नेताओं, जितने की कुंडली का अध्‍ययन मैने किया है , में जो नाम सामने बचा रह जाता है , वह है ए के अंटोनी या पी चिदम्‍बरम। उनके सारे ग्रह अनुकूल हैं और उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावना मुझे अधिक दिखती है। इससे एक बात और तय होती है , कि यदि काग्रेस अपने सहयोगी दलों के साथ सरकार बनाती है और ए के अंटोनी या पी चिदम्‍बरम प्रधानमंत्री बनते हैं तो सरकार के स्‍थायित्‍व की भी संभावना अधिक रहेगी।
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