शनिवार, 23 मई 2009

क्‍या पाठक ज्‍योतिष की वैज्ञानिकता को सिद्ध करने में मेरी मदद करेंगे ?????

मैने फलित ज्‍योतिष को विज्ञान कहना क्‍या शुरू किया , ब्‍लाग जगत में हडकंप ही मच गया है। चाहे ज्‍योतिषी हों या फिर वैज्ञानिक , कोई भी इसे विज्ञान मानने को तैयार नहीं । इतनी मतविभिन्‍नता शायद ही किसी विषय के लिए हो। जहां वैज्ञानिक वर्ग इसे अंधविश्‍वास के सिवा कुछ भी मानने को तैयार नहीं , वहीं ज्‍योतिषी वर्ग इसे विज्ञान से भी उपर पराविज्ञान मानते हैं। वैज्ञानिकों की बात तो एक हद तक जायज भी मान लें क्‍योंकि यह सही है कि फलित ज्योतिष विज्ञान पद्धति के अनुकूल नहीं है -संकल्पना ,प्रेक्षण ,प्रयोग , परीक्षण और निष्पत्ति के मानदंड पर इसे कसने का गंभीर प्रयास न के बराबर हुआ है । फिर उन्‍होने ज्‍योतिष को पढा नहीं है , उन्‍हें ज्‍योतिष का अनुभव भी नहीं है , एक ही मुद्दे पर देशभर के ज्‍योतिषियों की भविष्‍यवाणियां की विभिन्‍नता ज्‍योतिष जैसे विषय को विवादास्‍पद बनाने के लिए काफी है। पर वैज्ञानिकों को भी यह बात समझनी चाहिए कि ज्‍योतिष के क्षेत्र में सिर्फ प्रोफेशनल ही नहीं जुडे हैं , जिसे वे अपना उल्‍लू सीधा करने के लिए ही इस क्षेत्र में आया मानते हैं , वरन् इस क्षेत्र में शौकिया तौर पर भी बहुत लोग अध्‍ययन कर रहे हैं । यही नहीं , शौकिया तौर पर जुडनेवाले लोग प्रोफेशनल तौर पर जुडे लोगों से अधिक प्रतिभासंपन्‍न और विशिष्‍ट हैं । ज्‍योतिष में कुछ सूत्र तो ऐसे अवश्‍य हैं , जिनकी सटीकता के कारण कभी कभी इससे बरबस लगाव हो जाता है , पर अधिक अध्‍ययन होते ही सूत्रों की अधिकता उलझन पैदा करने लगती है । वास्‍तव में सटीक भविष्‍यवाणी कर पाने की दिशा में इस शास्‍त्र में जितने अधिक सूत्र बनाए गए , ज्‍योतिष का अध्‍ययन उतना ही जटिल होता चला गया। पर कुछ विवादास्‍पद सूत्रों के कारण भविष्‍यवाणी करने में भले ही उलझन हो , पर इससे फलित ज्‍योतिष को अंधविश्‍वास कह देना उचित नहीं जंचता।

अब वैज्ञानिकों को तो कुछ प्रमाण देकर समझाया भी जा सकता है , पर ज्‍योतिष के जानकारों द्वारा ज्‍योतिष को विज्ञान से भी उपर ले जाकर पराविज्ञान कहा जाना अधिक भ्रम पैदा करता है। वास्‍तव में, पराविज्ञान उसे कहते हैं , जिसके नियमों को अभी तक समझा नहीं जा सका , यानि जो बिल्‍कुल छिपा हुआ यानि रहस्‍य बना हुआ है । जहां तक ग्रहों के जड चेतन पर पडनेवाले प्रभाव की बात है , ऋषि मुनियों ने इतना अध्‍ययन किया है , हमें इतने सूत्र दिए हैं , यदि इसके बाद भी यदि यह पराविज्ञान है तो फिर हम ग्रहों के मनुष्‍य पर पडनेवाले प्रभाव के बारे में पढने लिखने में समय क्‍यों जाया कर रहे हैं ? इस पराविज्ञान की जानकारी के लिए तपस्‍या ही की जानी चाहिए , ज्‍योतिष की इतनी सारी पुस्‍तकों और सूत्रों का क्‍या महत्‍व ? साथ ही ज्‍योतिष को विज्ञान कह देने से थोडे बहुत गल्‍ती की हमें छूट मिल जाती है , इसके विकास पर ध्‍यान दिया जा सकता है , पर यदि ज्‍योतिष पराविज्ञान है तो इसके विकास में कुछ करने की जगह ही नहीं बच जाती। साथ ही ज्‍योतिष को पराविज्ञान बना देने से तो इसके जानकार भगवान हो जाते हैं, अब भला आप ही बताएं भगवान से गल्‍ती की उम्‍मीद कैसे की जा सकती है ? ज्‍योतिष को पराविज्ञान बताकर ज्‍योतिषी इसे विज्ञान भी नहीं रहने दे रहे हैं । शायद हम ज्‍योतिषियो की इसी भूल के कारण हमारी एक भी भूल वैज्ञानिकों के गले नहीं उतरती , चाहे वे खुद लाख भूल कर लें।

वास्‍तव में 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के द्वारा किए गए सूत्रों की खोज के बाद ज्‍योतिष को विज्ञान साबित करना बहुत आसान है। साइंस ब्‍लागर्स एशोसिएशन के द्वारा लिखे गए इस आलेख में वैसे मैंने ज्‍योतिष को विज्ञान साबित करने के लिए जो खास टिप्‍पणी की है वह यह है ..
‘’यूं तो 40 वर्ष के आसपास की उम्र संघर्ष की नहीं होती.. लोग कहीं न कहीं अपना स्‍थायित्‍व बना चुके होते हैं .. यह उम्र संतान पक्ष की भी बडी जवाबदेही का समय नहीं होता है .. इसके बावजूद 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' का दावा है कि 25 अगस्‍त से 5 सितंबर 1967 तक या उसके आसपास जन्‍म लेनेवाले सभी स्‍त्री पुरूष 2003 के बाद से ही बहुत परेशान खुद को समस्‍याओं से घिरा हुआ पा रहे होंगे .. उसी समय से परिस्थितियों पर अपना नियंत्रण खोते जा रहे होंगे .. और खासकर इस वर्ष जनवरी से उनकी स्थिति बहुत ही बिगडी हुई हैं .. परेशानी किसी भी संदर्भ की हो सकती है .. जिसके कारण अभी भी वे लोग काफी तनाव में जी रहे हैं .. वैसे ये किसी भी बडे या छोटे पद पर .. किसी भी बडे या छोटे व्‍यवसाय से जुडे हो सकते हैं और कितनी भी बडी या छोटी संपत्ति के मालिक हो सकते हैं .. पर परेशानी वाली कोई बात सबमें मौजूद होगी .. अंधश्रद्धा निर्मूलन समि‍ति या प्रो नार्लीकर हमेशा ज्‍योतिष की परीक्षा लेने के लिए कुछ न कुछ प्रयोग करते रहते हैं .. क्‍या वे मेरे दावे की पुष्टि के लिए प्रयास करना चाहेगे ? .. या फिर 10,000 हिन्‍दी ब्‍लागर अपने परिवार में, अपने अडोस पडोस में और परिचितों, रिश्‍तेदारों में ही सर्वे कर इस बात की पुष्टि कर दें.. तो ज्‍योतिष के विज्ञान के पक्ष और विपक्ष में उठनेवाला सारा विवाद ही समाप्‍त हो जाएगा।‘’

क्‍या मेरे सभी पाठक मेरे इस दावे की पुष्टि करने के लिए अपने अपने ब्‍लोगों के माध्‍यम से तथा अन्‍य प्रकार से प्रचारित कर या कुछ समय निकालकर अडोस पडोस में और परिचितों, रिश्‍तेदारों में ही सर्वे कर ज्‍योतिष की वैज्ञानिकता को सिद्ध करने में मेरी मदद करेंगे ?
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