गुरुवार, 25 जून 2009

मानसून के लिए और कितना इंतजार करना पडेगा हमें ????

उफ , ये गर्मी .. पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है अभी । पानी की किल्‍लत शुरू हो चुकी है , इंद्र देवता को प्रसन्‍न करने के लिए जगह जगह पूजा पाठ, भजन और कीर्तन तथा न जाने कितने टोने टोटके किए जा रहे हैं , पर कोई फायदा नहीं दिखाई पड रहा। मौसम वैज्ञानिक मानसून के आने की तिथियां आगे बढाते जा रहे हैं और जनसामान्‍य अनिश्चितता की स्थि‍ति में ही जी रहे हैं। मेरे पिछले पोस्‍ट को पढकर आप जान ही चुके हैं कि 14 - 15 जून को आंधी , पानी , तूफान का एक बडा योग था । इसलिए जब मौसम विभाग ने 8-10 जून तक मानसून के आने की भविष्‍यवाणी की तो मेरा दिमाग 14-15 जून पर ही टिका। पर इस दिन जगह जगह चक्रवात तो बने , बारिश भी आयी , अंधड भी चलें , पर मानसून नहीं आया। मौसम की इतनी महत्‍वपूर्ण तिथि हो और आशा के विपरीत मानसून न पहुच पाए , तो मानसून के आने को लेकर मेरा शक बना रहना स्‍वाभाविक था ,भले ही मौसम वैज्ञानिक मानसून के आने के बारे में 18-20-22 जून करते हुए तिथियां बढाते गए । लोग अभी तक मानसून का इंतजार कर रहे हैं , पर मानसून की तो बात छोड दें , भीषण गर्मी से लोगों का हाल बेहाल है।


ऐसी स्थिति में कुछ खास कार्यों में व्‍यस्‍तता और ध्‍यान बने होने के बावजूद भी आज मैने मानसून के आने की संभावना को तलाशते हुए अपनी विद्या का उपयोग करना आवश्‍यक समझा। यूं तो प्रकृति के नियमो को बदल पाना किसी के वश में नहीं , पर किसी बात की जानकारी भी हो जाए तो कम राहत नहीं महसूस होती है। गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के अनुसार एक सूर्य का चक्र ही मौसम परिवर्तन का मुख्‍य जनक है ,यानि सूर्य के विभिन्‍न राशियों में परिवर्तन मात्र से ही , जो कि हर वर्ष नियमित तौर पर होता है , मौसम में नियमित तौर पर परिवर्तन देखा जाता है। पर मौसम कष्‍टकारक तब होता है , जब अन्‍य ग्रहों का साथ सूर्य को नहीं मिल रहा होता है। इसके विपरीत मौसम सुखदायक तब होता है , जब अन्‍य ग्रहों का साथ सूर्य को मिल रहा होता है। इस वर्ष मानसून आने में नियत समय से 15 दिनों की देरी हो गयी है , इसका अर्थ यह है कि अन्‍य ग्रहों का साथ सूर्य को नहीं मिल पा रहा है।


पंचांग में विभिन्‍न ग्रहों की स्थिति को गौर करने पर यूं तो अन्‍य वर्षों की तुलना में कुछ कम बारिश की संभावना दिखाई पडी , पर इसके बावजूद बहुत निकट ही मानसून की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। 29 जून से ही सूर्य के सापेक्ष सभी ग्रहों की तालमेल वाली स्थिति से मौसम सुहावना हो जाना चाहिए । इसके पहले ही मानसून आ जाए तो और अच्‍छी बात है , पर 29 जून के बाद देश के अधिकांश हिस्‍सों में किसानों के लिए सुखदायक स्थिति बन जानी चाहिए। बारिश का क्रम बढता हुआ 3-4 जुलाई तक काफी जोरदार रूप ले लेगा । और यदि ऐसा हुआ तो फिर जुलाई के तीसरे सप्‍ताह तक लगभग निरंतर बारिश होती रहेगी। और यदि मेरी यह भविष्‍यवाणी गलत हुई , जिसकी संभावना भी कुछ हद तक है , तो इस वर्ष स्थिति के भयंकर होने से इंकार नहीं किया जा सकता। इसलिए सब मिलकर ईश्‍वर से प्रार्थना करें कि 29 जून से 4 जुलाई तक जोर शोर की बारिश हो।
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