बुधवार, 29 जुलाई 2009

उडनतश्‍तरी जी .. ईश्‍वर करे , आप जीनियसों के भी जीनियस बनें , पर ....

समीर लालजी का ब्‍लाग खोलिए और बगलपट्टी में लगे सम्‍मानों को देखते जाइए। बेस्‍ट इंडीब्‍लाग सम्‍मान , तरकश स्‍वर्णकलम सम्‍मान और विश्‍व के प्रथम ब्‍लागिया सम्‍मेलन का प्रशस्ति पत्र तो मौजूद है ही , ताउ शनीचरी पहेली के साथ ही साथ ताउजी द्वारा प्रथम मेगा सम्‍मान भी इन्‍हें दिया गया है। इसके अलावे ताउजी द्वारा इन्‍हें मि जीनियस भी घोषित किया जा चुका है। फिर भी इनकी महत्‍वाकांक्षा तो देखिए , कोई पहेली ब्‍लागवाणी में पहुंचने में देर कर सकती है , समीरलाल जी द्वारा जवाब पाने में उसे देर नहीं होती। जबतक दूसरे लोग उस पोस्‍ट को खोलेंगे , पहेली का जवाब सोचेंगे , पहेली पूछनेवालों को उनका जवाब मिल जाता है।


मुझे लगता है , इस दुनिया में ही ये हमें नहीं पछाड रहे , यह क्रम तो बहुत पहले से ही बना हुआ है। इस दुनिया में आने से पहले ही ईश्‍वर जब स्‍वास्‍थ्‍य, गुण , ज्ञान , दाम्‍पत्‍य , पुत्र , माता , पिता , यार , दोस्‍त , वाहन .. जिस वस्‍तु का भी बंटवारा कर रहे होंगे , इन्‍होने सबसे पहले पहुंचकर सर्वोत्‍कृष्‍ट चुन लिया होगा । पर यह भी बडे ताज्‍जुब की बात है, क्‍यूंकि इतनी तेजी से ये हर जगह पर मौजूद कैसे रहे होंगे। जहां तक मै अनुमान लगा पा रही हूं , सबसे पहले जहां अन्‍य लोग साइकिल , बैलगाडी , स्‍कूटर , मोटरगाडी , हेलीकाप्‍टर तक ले रहे होंगे , इन्‍होने अपने वाहन के रूप में उडनतश्‍तरी ही मांग ली होगी । फिर हर जगह के लिए इनकी यात्रा आसान हो गयी होगी। जहां ईश्‍वर कुछ बांटना शुरू करते , ये सबसे पहले पहुंच जाते। तभी तो भाग्‍य में ही हर प्रकार का सुख लेकर इस दुनिया में आ गए।


इस दुनिया में आने के बाद भी इनकी महत्‍वाकांक्षा देखिए। ये उडनतश्‍तरी जैसे वाहन का ही कमाल है कि ये तन , मन और बुद्धि से इतनी फुर्ती दिखाकर अपनी महत्‍वाकांक्षा को पूरी भी कर पाते हैं । इसी से इन्‍होने हर जगह अपनी बुद्धि का लोहा मनवाया , अच्‍छे रिजल्‍ट किए , मनपसंद नौकरी पायी , विदेश जाकर बसे। घर गृहस्‍थी की जिम्‍मेदारियों को बखूबी संभाला । फिर अपने लेखन से हिन्‍दी ब्‍लाग जगत में भी छा गए , इतनी सफलताएं इसकी गवाह है। यहां टिप्‍पणी-सम्राट से नवाजे जाने के बाद अब इन्‍हें पहेली-सम्राट भी घोषित किया जाने लगा है।


बहुत दिनो से मैने विभिन्‍न ब्‍लागरों द्वारा पहेलियां पूछते हुए देखा , पर इसे बूझने और उसके क्रम में आए टिप्‍पणियों को पढना इतना मजेदार होगा , यह मुझे काफी देर से समझ में आया। पहेली बूझने में पूरी ताकत झोंक देने की शुरूआत मैने राज भाटिया जी के ब्‍लाग की पहेलियों से की और उसके बाद पहेली बूझने में मेरा ध्‍यान अभी भी बना रहता है। लेकिन अधिकांश पहेलियां तो मैं बूझ ही नहीं पाती और जो बूझ पाती हूं , उसका जवाब देने के बाद भी पीछे रह जाती हूं। मैं समझती हूं , शायद सबका यही हाल होगा। औरों से तो प्रतियोगिता में जीत संभव भी है , पर उडन तश्‍तरी जी से जीत पाना संभव नहीं हो पाता। इनकी उडनतश्‍तरी हमेशा तैयार रहती है , जैसे ही ब्‍लागवाणी में पहेली आयी नहीं कि वहां पहुंचकर तुरंत एक टिप्‍पणी छोड देती है। अब हमारे पास न तो उडनतश्‍तरी जैसा वाहन है और न ही उन की तरह जीनियस दिमाग । तो हम जैसे अल्‍पज्ञानियों का हारना निश्चित ही समझिए ।


ब्‍लागवाणी में आए पोस्‍टों के माध्‍यम से पता चला कि आज समीरलालजी का जन्‍मदिन है। मेरी ओर से उन्‍हें जन्‍मदिन की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं । इस जन्‍मदिन तक तो वे मि जीनियस घोषित किए ही जा चुके हैं । ईश्‍वर करे , अगले जन्‍मदिन तक वे जीनियसों के जीनियस घोषित कर दिए जाएं। पर इसके लिए एक काम तो उन्‍हें करना ही होगा , वह यह कि अन्‍य ब्‍लागर बंधुओं को भी जीनियस बनने का मौका दें । क्‍यूंकि वे मौका नहीं देंगे , तो उनकी फुर्ती के आगे शायद ही कोई जीनियस बन पाए। वैसे आज ही चिट्ठा चर्चा में यह भी पढने को मिला कि कुछ लोगों ने इस पर मांग की है कि हर प्रतियोगिता में दो पहले इनाम रखे जाने चाहिये। एक समीरलाल जी के लिये और दूसरा किसी (और)जेनुइन कंडीडेट के लिये। यह भी हो जाए तो अच्‍छी बात होगी , अगले वर्ष तक कुछ जीनियस बन जाएंगे , तो उनकी जीनियसों के भी जीनियस बनने की पूरी संभावना बन जाएगी। एक बार फिर से उनको जन्‍मदिन की हार्दिक बधाई !!
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