मंगलवार, 25 अगस्त 2009

इस वर्ष इतनी जल्‍दी जल्‍दी क्‍यूं आ रहे हैं सारे त्‍यौहार ??

2009 के पंचांग को देखिए, 13 अगस्‍त को जन्‍माष्‍टमी, 23 अगस्‍त को तीज, 19 सितम्‍बर से नवरात्रारंभ, 28 सितम्‍बर को विजयादशमी, 17 अक्‍तूबर को दीपावली , 24 अक्‍तूबर को छठ और 29 अक्‍तूबर को देवोत्‍थान एकादशी यानि अक्‍तूबर के समाप्‍त होते ही हर त्‍यौहार की समाप्ति। इस बात की जानकारी सारे लोगों को तो अवश्‍य होगी कि अक्‍सर दो तीन वर्षो बाद ऐसा होता है , जब सारे त्‍यौहार इतने जल्‍दी जल्‍दी आते हैं , पर शायद ही उन्‍हें पता हो कि ऐसा क्‍यूं होता है ।

आज घर घर में अंग्रेजी कैलेण्‍डरों के टंगे होने से किस सौर वर्ष के किस महीने की कौन सी तारीख चल रही है ,इसे देख पाना काफी आसान है , जबकि पहले के ग्रामवासियों के लिए सौर वर्ष के किसी दिन का अंदाजा लगा पाना मुश्किल ही नहीं , असंभव ही था , क्‍यूंकि सूर्य की परिक्रमा करती हुई पृथ्‍वी अपनी कक्षा में कहां पर है , इसका अनुमान कोई कैसे कर सकता था ? पर चंद्रमा की हर दिन घटती बढती स्थिति को देखते हुए एक पूर्णिमा से दूसरे पूर्णिमा तक के एक महीने का आकलन कर पाना उनके लिए मुश्किल नहीं था। इसलिए चंद्रमास और चंद्रवर्ष आम जनता के मध्‍य अधिक लोकप्रिय हुए और सारे त्‍यौहार इसी आधार पर मनाए जाने लगे।

वैसे भले ही पृथ्‍वी का चक्‍कर लगाने में चंद्रमा को 28 दिन ही लगते हों , पर एक पूर्णिमा से दूसरे पूर्णिमा तक का सफर वह लगभग साढे 29 दिनों में पूरी करता है। पृथ्‍वी के अपनी कक्षा पर खिसक जाने से चंद्रमा को जो अतिरिक्‍त दूरी तय करनी पडती है , उसकी वजह से ही ऐसा होता है। इस प्रकार साढे उनतीस दिनों के चंद्रमास के आधार पर 12 महीने का एक वर्ष लगभग 354 दिन में ही पूरे हो जाते हैं। जबकि अंग्रेजी कैलेण्‍डर पृथ्‍वी के द्वारा सूर्य की परिक्रमा करने पर आधारित होता है , इसलिए यह 365 दिनों का होता है। यही कारण है कि जब हम चंद्रमास के हिसाब से एक वर्ष पूरा कर लेते हैं , तो अंग्रेजी कैलेण्‍डरों में 10-11 दिन बाकी ही होते हैं। हिन्‍दी पंचांगों के अनुसार दूसरे वर्ष पूरे होने तक यह अंतर बढकर लगभग 20 दिनों का और तीसरे वर्ष यही अंतर 30 दिनों का होने लगता है। इसी अंतर के कारण अंग्रेजी कैलेण्‍डरों के अनुसार देखने पर हमारे त्‍यौहार जल्‍दी जल्‍दी आते दिखाई पडते हैं।

यह अंतर और न बढ जाए , इसके लिए एक समायोजन की आवश्‍यकता पड जाती है। हर तीसरे वर्ष 13 (12+1) महीनें (अधिमास के द्वारा) का वर्ष बनाकर इस अंतर को समायोजित किया जाता है । उसके बाद चंद्रवर्ष पुन: सौरवर्ष के समानांतर चलने लगता है। पिछली बार वर्ष 2007 में 2 महीनें तक 2 कृष्‍ण पक्ष और 2 शुक्‍ल पक्ष वाले ज्‍येष्‍ठ महीने के द्वारा इसी प्रकार का समायोजन किया गया था। 2010 में पुन: ऐसा करने के बाद सभी त्‍यौहार समय पर होने शुरू हो जाएंगे।
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