बुधवार, 30 सितंबर 2009

बृहस्‍पति-चंद्र युति के फलस्‍वरूप 11 नवम्‍बर तक आपपर क्‍या प्रभाव पडेगा ??

कई दिनों की अनुपस्थिति के बाद कल बोकारो वापस आकर मैने ज्‍यों ही ब्‍लागवाणी को खोला , ब्‍लागवाणी के वापस होने की सूचना मिली। कई आलेखों को पढने के बाद महसूस हुआ कि हिन्‍दी ब्‍लाग जगत से जुडे लोगों ने 24 घंटे तक काल्‍पनिक रूप से ब्‍लागवाणी के न होने का दर्द झेला , सौभाग्‍य मेरा कि मेरे वापस लौटने से पहले ब्‍लागवाणी ने अपनी पुनर्वापसी की सूचना दे दी। ब्‍लागवाणी की पूरी टीम को बहुत बहुत धन्‍यवाद। लौटते ही आसमान में बृहस्‍पति और चंद्रमा के युति पर नजर चली गयी। कल दोनो के मध्‍य कुछ फासला था , पर आज शाम वे दोनो एक साथ दिखेंगे। आनेवाले एक महीने में बृहस्‍पति बहुत प्रभावी स्थिति में होंगे , इसकी पाठकों को सूचना देने के लिए इस आलेख को लिखने की आवश्‍यकता पड गयी।


13 मई 2009 को मैने आकाश में बृहस्‍पति और चंद्र के खास योग के बनने और उसके 16 मई से 19 जून तक उसके जड चेतन पर पडनेवाले प्रभाव की चर्चा करते हुए एक आलेखलिखा था। मई के महीने में इस ग्रहयोग को रात्रि में देखा जा सकता था , पर सूर्य की बदली हुई स्थिति से इस योग को अभी शाम को ही देखा जा सकता है। इस एक बार आप सभी पाठकों को पुन: याद दिला दूं कि ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ के अनुसार इस योग के फलस्‍वरूप निम्‍न समयांतराल में जन्‍म लेनेवालों के लिए शुभ प्रभाव की उम्‍मीद की गयी थी ...

सितम्‍बर 1945 से फरवरी 1946, जुलाई 1946 से सितम्‍बर 1946, सितम्‍बर 1957 से फरवरी 1958, जुलाई 1958 , अगस्‍त 1958, अगस्‍त 1969 से फरवरी 1970 , जुलाई 1970 , अगस्‍त 1970, नवम्‍बर 1980 से जनवरी 1981, जुलाई 1981 से नवम्‍बर 1981, नवम्‍बर 1992 से जनवरी 1993, जून 1993 से नवम्‍बर 1993। इसके अलावे इस ग्रहयोग का कन्‍या राशिवाले लोगों पर शुभ प्रभाव पडेगा।

यदि अबतक आपलोगों ने ऐसा कुछ महसूस न‍हीं किया या कोई खुशखबरी आते आते रह गयी हो , और 15 अगस्‍त के आसपास उम्‍मीद बिल्‍कुल समाप्‍त होने के बाद पुन: आशा की किरण दिखाई पड रही है तो अभी से 11 नवम्‍बर के मध्‍य आपके कार्य के सिद्ध होने की संभावना है।

किंतु इसके विपरीत ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ के अनुसार इस योग के फलस्‍वरूप निम्‍न समयांतराल में जन्‍म लेनेवालों के लिए गडबड प्रभाव की उम्‍मीद की गयी थी ...

नवम्‍बर 1931 से मई 1932, दिसम्‍बर 1943 से मई 1944, दिसम्‍बर 1955 से मई 1956, अक्‍तूबर 1966 से दिसम्‍बर 1966, नवम्‍बर 1978 से जनवरी 1979,नवम्‍बर 1990 से अप्रैल 1991,नवम्‍बर 2002 से अप्रैल 2003। इसके अलावे इस ग्रहयोग का कर्क राशिवाले लोगों पर शुभ प्रभाव पडेगा।

हो सकता है , आपलोगों ने भी ऐसा कुछ गडबड महसूस नहीं किया हो , पर किसी मुद्दे को लेकर किंकर्तब्‍यविमूढावस्‍था में तो अवश्‍य होंगे , आनेवाले एक महीने थोडी सावधानी बरतें। 11 नवम्‍बर के पश्‍चात आपकी समस्‍या के समाधान की संभावना है।

 इसके अलावे ज्‍योतिष में सबसे शुभग्रह के रूप में पूजनीय गुरू बृहस्‍पति सामान्‍य लोगों के लिए शुभता ही लाता है। पर मई जून से आरंभ होने और 15 अगस्‍त के आसपास भयावह स्थिति में बने होने को देखते हुए अपने रिसर्च में मैनेस्‍वाइन फ्लूको भी बृहस्‍पति की इसी गति से जोडा है , 13 अक्‍तूबर से 11 नवम्‍बर तक स्‍वाइन फ्लू के खात्‍मे के लिए पुरजोर कोशिश होगी और 11 नवम्‍बर के पश्‍चात इसका लगभग खात्‍मा हो जाना चाहिए।

इसके अलावे जैसा कि आज के युग में धर्म का रूप भी वीभत्‍स हो गया है , इसलिए युग के अनुरूप ही दो चार वर्षों से बृहस्‍पति चंद्र की इस युति के फलस्‍वरूप यत्र तत्र धार्मिक और सांप्रदायिक माहौल को भडकते हुए भी पाया गया है । मेरे इस आलेख को लिखे जाने के बाद 16 मई से 19 जून के मध्‍य पंजाब मेंसंप्रदायिक आगभडक ही गयी थी। वैसे इस महीने की बृहस्‍पति के कारण ऐसी स्थिति आने की संभावना कम रहती है , फिर भी हम 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के साथ गुरू बृहस्‍पति से प्रार्थना करें  कि वे अपने शुभत्‍व को ही बनाए रखें और लोगों के समक्ष कल्‍याणकारी वातावरण ही बनाए रखें।
एक टिप्पणी भेजें