सोमवार, 21 सितंबर 2009

19 सितम्‍बर के विशेष ग्रहयोग से हिन्‍दी चिट्ठा जगत अछूता नहीं रह सका !!

कई दिन पहले मैने 19 सितम्‍बर को 5 बजे से 9 बजे सुबह तक आसमान में एक खास ग्रह स्थिति के होने और उसके फलस्‍वरूप कुल आबादी के कम से कम 40 प्रतिशत लोगों के प्रभावित होने की भविष्‍यवाणी करते हुए सबको सावधान रहने के लिएएक आलेखलिखा था। इसकी वजह से विश्‍व , देश और राज्‍य में राजनीतिक और अन्‍य स्‍तर पर थोडी हलचल तो दिखाई पडी , पर एक मुख्‍य घटना इण्डोनेशिया के बाली द्वीप में भूकम्‍प का आना रहा। 19 सितम्‍बर को सुबह 6.04 बजे भूकम्प के तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर 6.4 की तीव्रता वाले इस भूकम्प में बहुत नुकसान तो नहीं हुआ , पर इस घटना केतिथि और समयपर ध्‍यान दिया जाए, तो ग्रहों के उस योग के प्रभाव की पुष्टि हो जाती है। वैसे जानते हुए भी ग्रहों के प्रभाव को पहले से अच्‍छी तरह स्‍पष्‍ट न कर पाने से अक्‍सर हमलोगों को खीझ हो जाती है ,पर विश्‍वास है कि अध्‍ययन यूं ही चलता रहा तो निकट भविष्‍य में ही हम अपनी बात और अधिक स्‍पष्‍टत: कह पाएंगे।

बाली द्वीप में हुए इस भूकम्‍प के अलावे इस ग्रह स्थिति का एक बडा प्रभाव हिन्‍दी चिट्ठा जगत पर भी देखने को मिला। ठीक एक महीने पूर्व 10 अगस्‍त को बुझे दिल से समीर लाल जी के द्वारा लिखे गए ‘हारा हुआ योद्धा’ और 17 अगस्‍त को मेरे द्वारा टेंशन में लिखे गएआलेखपर समूचा चिट्ठा जगत जिस तरह एक होकर सामने आया , वह काबिले तारीफ है। फिर एक महीने में ऐसी कोई बात भी नहीं हुई , जिसके कारण दो दिनों में इतना तनावपूर्ण वातावरण तैयार हो जाए। वैसे तो किसी विवाद में पूरी जानकारी के बिना मैं पक्ष और विपक्ष में एक शब्‍द भी बोलना पसंद नहीं करती , पर संयोगवश कुछ दिनों से चिट्ठाजगत में अधिक समय व्‍यतीत करने के कारण लगभग सभी बातों की जानकारी मुझे है। नीचे लिखी बातों के अतिरिक्‍त और कोई मुद्दा हो , तो अवश्‍य बताने का कष्‍ट करेंगे।

जहां तकनीकी जानकारी देनेवाले आशीष खंडेलवाल जी काअपने पोस्‍टमें सामूहिक ईमेल भेजने वाले को सचेत करनेवाला लेख आपत्तिजनक नहीं माना जा सकता , वहीं लोकेन्‍द्र जी केप्रतिरोध को भी हम बिल्‍कुल सामान्‍य ही कह सकते हैं। जहां इस आलेख में सुमन जी के बारे में विवेक जी काप्रश्‍नबिल्‍कुल स्‍वाभाविक है , वहीं रचना जी की उत्‍तराधिकारी सुमन जी का भी उनके अधिकार पर प्रश्‍न करनानाजायजनहीं। यहां तक कि न तो शुक्‍ला जी के पहलेवाले चिट्ठा चर्चा में कोईगडबड झालाहै , न ही बबली जी की गलती को दिखाने के लिए किए गएस्टिंग आपरेशनमें और न सबों के द्वारा किए जानेवाले टिप्‍पणियों में । मै तो सारे आलेखों और टिप्‍पणियों को पढती आ रही हूं , यदि साफ दिल से पढा जाए तो उसमें आपत्तिजनक कुछ भी नहीं दिखाई पडा था। यह संसार ही विविधता से भरा है और अपनी अपनी विशेषताओं के अनुरूप हमारी कार्यशैली होती है पर ‘जहां काम आवै सुई क्‍या करै तलवारि’ की तर्ज पर दुनिया में सबका अपना अपना महत्‍व है। एक परिवार में विभिन्‍न दृष्टिकोणों के लोग हंसी खुशी गुजर करते हैं।

मैं तो 19 सितम्‍बर की ग्रह स्थिति का ही दोष मानती हूं ,  जिसके कारण न तो अनूप शुक्‍ला जी चिट्ठा चर्चा में की गयी समीर लालजी की टिप्‍पणी को सामान्‍य तौर पर ले सके और न हीं अनूप शुक्‍लाजी कीपोस्‍टको समीर लाल जी भी हमेशा की तरह मजाक में । फिर समीर लाल जी का क्षमा मांगने वाला स्‍टाइल अनूप शुक्‍ला जी को कैसे जंच सकता था ? यह छोटी सी बात उन दोनो के बीच की होती , तो शायद संभल भी जाती , पर अन्‍य पाठकों की टिप्‍पणी प्रतिटिप्‍पणियों ने 18 सितम्‍बर का दिन भर का माहौल तनावपूर्ण बना ही दिया।

वैसे ग्रहों का असली लक्ष्‍य तो 19 सितम्‍बर को तनाव को और बढाना था , इसलिए मेरी पोस्‍ट पर टिप्‍पणी दर्ज कर आए खुशदीप सहगल जी अपने कहे अनुरूप चद्दर तानकर न सो सके और इतने संवेदनशील समय में बबली जी कावकीलबनकर सामने आ गए , जबकि बबली जी चार दिनों से दूसरे ब्‍लोगों पर टिप्‍पणियां दर्ज कर रही है , पर अपनी चर्चावाले ब्‍लोगों पर कोई सफाई नहीं दे रही। आशीष खंडेलवाल प्रशंसा के पात्र हो सकते हैं , उनकी कोई रचना पढने से रह न जाए , इसके कारण मैं इसे ईमेल में मंगाया करती हूं , पर उनकी प्रशंसा करने का प्रवीण जाखड जी के लिए यह मौकाउचित नहीं था। आशीष खंडेलवाल जी ने तो धोखाधडी करने और लोगों को बदनाम करने का एकअलग गुरही सिखा दिया , ताकि आनेवाले समय में गलत ढंग से किसी को भी शिकार बनाया जा सके। डा अरविंद मिश्राजी ने भले ही स्‍वस्‍थ मानसिकता से ही यहआलेखलिखा हो , पर वह भी स्‍वस्‍थ टिप्‍पणियों और प्रतिटिप्‍पणियों से सजा न रह सका और सबने मिलकर आग में घी डाल डाल डाल डालकर पूरे चिट्ठा जगत की गरिमा को धूमिल करने में बडी भूमिका निभायी।पर यह विवाद आज के बाद और निराशा पैदा नहीं करेगा , इसका मुझे विश्‍वास है, क्‍यूंकि मैं रहीम के इस दोहे से सहमत नहीं ...
रहीमन धागा प्रेम का , मत तोरो चटकाय ।
टूटे पर भी ना जुडे जुडे गांठ लगी जाए ।।
मैं मानती हूं कि संबंधों के कमजोर हो रहे धागे को तोडकर गांठ लगा ही देनी चाहिए , ताकि संबंध और मजबूत बना रह सके। मुझे विश्‍वास है कि खुलकर बहस होने के बाद दोनो पक्ष एक दूसरे की समस्‍याओं को समझ पाते हैं और इससे  संबंधों में और मजबूती आती है। उम्‍मीद रखती हूं , ब्‍लाग जगत के सभी सदस्‍य पुरानी बातों को भूल जाएंगे।

इन दोनो दिनों में जहां सभी ब्‍लागर भाई टिप्‍पणियों और प्रतिटिप्‍पणियों पढने लिखने में व्‍यस्‍त थे , वही मेरा ध्‍यान इस ग्रहों की इस खास स्थिति पर था , जिसे 1988 में पडोसियों और गांव के अधिकांश घरो मुहल्‍लों में छोटे मोटे विवाद के उभरने और तनावयुक्‍त सफर को देखते हुए ही ढूंढा जा सका था। तब से अब तक इस ग्रह स्थिति के फलस्‍वरूप तनावपूर्ण वातावरण का आना हमने निश्चित मान लिया था , हालांकि कुछ लोग इसके प्रभाव से अवश्‍य अछूते भी हो जाते हैं।मेरी उक्‍त पोस्‍ट पर टिप्‍पणी लिखते हुए नारायण प्रसाद जी ने भूतकाल की घटनाओं या दुर्घटनाओं का कुछ उल्लेख करते हुए इसे समझने की इच्‍छा व्‍यक्‍त की है , पर मैं ऐसे उदाहरण नहीं दे सकती , बस इतना ही जानती हूं कि अधिकांश लोग इससे परेशान रहते हैं। इसी पोस्‍ट पर प्रवीण जी ने कहा है “सभी टिप्पणी कारों से ये जरूर आग्रह करूंगा कि २१ को बतायें कि १९-२० कैसे गुजरे”।

वैसे तो हिन्‍दी के चिट्ठाकारों का हिन्‍दी चिट्ठा जगत से इतना जुडाव है कि उन्‍हें तनाव देने के लिए यह विवाद भी कम नहीं , इसकी अपवाद मैं भी नहीं , पर इसके अलावे पूछा जाए तो 24 घंटे बिजली सप्‍लाई रहनेवाले हमारे शहर में 18 तारीख को ही 5 बजे से 9 बजे तक सुबह हमारे यहां बिजली की कटौती हुई और उसके बाद के 48 घंटों में 12 घंटे भी बिजली रही हो तो यह मैं अधिक बोल रही। मेरे बेटे के अर्द्धवार्षिक परीक्षा के प्रश्‍न पत्र भी दोनो ही दिन जरूरत से अधिक लंबे रहे। इन दोनो दिनों में छोटी बहन को सर्दी खांसी बुखार रहा। पोते को मारते हुए मेरी कामवाली के पति का चांटा उसके कानों पर पड गया , जिससे दो दिनों से कान में तेज दर्द रहा। इसके अतिरिक्‍त मेरे पास जितने भी लोगों के फोन आए , दो दिनों में किसी न किसी प्रकार के तनाव या चिडचिडाहट होने की बहुतों ने पुष्टि की , खासकर तीनो ही दिन 4 बजे से 7 बजे शाम तक यह अधिक प्रभावी रहा।

वैसे ये सब बिल्‍कुल सामान्‍य घटनाएं हैं , पर एक ही दिन सभी घरों में तो एक साथ संयोग नहीं हो सकता न। अब प्रवीण शाह जी के कहे अनुसार आप सब भी यह स्‍पष्‍ट करने का कष्‍ट करें कि पिछले दो दिनों में आप बिल्‍कुल सामान्‍य रह पाए या छोटी मोटी ही सही , कोई वैसी समस्‍या आयी , जो भले ही अक्‍सर आती हो , पर प्रतिदिन नहीं आती और इसलिए इसे सामान्‍य नहीं माना जा सकता। ग्रहों के प्रभाव की परीक्षा हो ही जाए , ताकि आगे भी ऐसी तिथियां रहे,  तो आपको खबर की जा सके।
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