मंगलवार, 13 अक्तूबर 2009

आकाश में मंगल की विभिन्‍न स्थिति का पृथ्‍वी पर अच्‍छा और बुरा प्रभाव ??

पिछले दिनों मंगल से संबंधित मेरे आलेखों को पढने के बाद कई पाठकों के मन में जन्‍मकुंडली में मंगल के कमजोर और मजबूत होने के बारे में जानने की जिज्ञासा जगी। 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' जन्‍मकुंडली के हिसाब से नहीं , आसमान में‍ स्थिति के हिसाब से किसी ग्रह के कमजोर और मजबूत होने का आकलन करता है। इसलिए किसी भी जन्‍मतिथि से ही यह निश्चित किया जा सकता है कि संबंधित व्‍यक्ति का कोई ग्रह कमजोर है या मजबूत। उसके बाद जन्‍मसमय के आधार पर बनी जन्‍मकुंडली देखकर तो सिर्फ संदर्भ बताए जा सकते हैं कि उक्‍त ग्रह किन किन संदर्भों के सुख का लाभ या नुकसान करने वाला है।

यदि मंगल के लिए देखा जाए तो मैने डेढ वर्ष पहले ही आसमान में मंगल की स्थिति को समझाते हुए उसकी शक्ति से संबंधित उन सूत्रों की चर्चाकी थी , जो शोध-पत्र मेरे पिता विद्यासागर महथाजी के द्वारा नई दिल्ली में पूसा गेट के समीप राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला सभागार में 19 से 21 फरवरी 2004 को आयोजित किए गए तृतीय अखिल भारतीय विज्ञान सम्मेलन में भेजा गया था, इस सामग्री को संक्षिप्त रूप में सेमिनार के जर्नल में भी प्रकाशित भी किया गया था। इसे समझने में आप सब पाठकगणों को कुछ असुविधा अवश्य होगी, पर मेरा अनुरोध है कि आप इसे समझने की कोशिश अवश्य करें।


 
इस चित्र में आप देख रहे होंगे कि मंगल अपने ही पथ पर घूमते घूमते कभी पृथ्‍वी से बिल्‍कुल निकट , तो कभी काफी दूर चला जाता है। जब यह दूर चला जाता है , तो 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के हिसाब से सर्वाधिक गत्‍यात्‍मक शक्ति संपन्‍न होता है , जब सामान्‍य दूरी पर स्थिति होता है , तो यह सामान्‍य गत्‍यात्‍मक शक्ति संपन्‍न होता है , जबकि यह पृथ्‍वी से बहुत निकट आ जाता है , तो इसकी गत्‍यात्‍मक शक्ति काफी कम हो जाती है।

मंगल जब अधिक गत्‍यात्‍मक शक्ति संपन्‍न हो , तो उस समय जन्‍म लेनेवाले व्‍यक्ति युवावस्‍था में सहज सुखद वातावरण प्राप्‍त करते हैं , मनमौजी ढंग से जीवनयापन कर पाने में परिस्थितियां मददगार होती हैं। मंगल सामान्‍य गत्‍यात्‍मक शक्ति संपन्‍न हो , तो उस समय जन्‍म लेनेवाले व्‍यक्ति युवावस्‍था में बहुत महत्‍वाकांक्षी होने से नाम यश प्राप्‍त करने के लिए काफी मेहनत भी करते हैं । पर इसके विपरीत, मंगल में गत्‍यात्‍मक शक्ति बहुत कम हो या न हो , तो उस समय जन्‍म लेनेवाले जातक युवावस्‍था में बहुत ही कष्‍टप्रद वातावरण प्राप्‍त करते हैं , जिसके कारण पराधीन और लाचार रहते हैं। 24 वर्ष से 30 वर्ष की उम्र तक मंगल का अच्‍छा या बुरा प्रभाव बढते क्रम में होता है।

अगली कडी में ज्‍योतिषी भाइयों के लिए मंगल की शक्ति को देखने का तरीका तो बताया जाएगा ही , साथ ही जनसामान्‍य को भी मंगल की शक्ति से जुडे अच्‍छे बुरे समयांतराल से परिचित करवाया जाएगा।





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