गुरुवार, 15 अक्तूबर 2009

मंगल ग्रह के बारे में जानकारी की यह चौथी कडी

पिछले चार कडियों एक,दोऔर तीनमें मैने आपलोगों को मंगल के बारे में ज्‍योतिष से संबंधित गत्‍यात्‍मक जानकारी देने की कोशिश की है। जैसा कि पिछली कडी में मैने वादा किया था , इस कडी में यह बताना चाहूंगी कि एक ज्‍योतिषी किसी की कुंडली देखकर किस प्रकार जानकारी प्राप्‍त करे कि संबंधित व्‍यक्ति का मंगल कमजोर है या मजबूत ?
इसके लिए एक ज्‍योतिषी को कुंडली में सूर्य की स्थिति पर गौर करना चाहिए , यदि मंगल सूर्य के साथ हो , या ठीक अगल बगल के राशि में हो तो इसका अर्थ यह है कि सूर्य और मंगल की कोणात्‍मक दूरी 60 डिग्री से अधिक की नहीं है। इस स्थिति में मंगल गत्‍यात्‍मक दृष्टि से मजबूत पर स्‍थैतिक दृष्टि से कमजोर होता है और इस कारण जातक युवावस्‍था में खासकर 24 से 30 वर्ष की उम्र में बढते क्रम में मंगल से संबंधित भावों कोई खास स्‍तर नहीं , पर इन संदर्भों में सुख सफलता प्राप्‍त करता है।

यदि मंगल सूर्य से त्रिकोण में स्थित हो तो इसका अर्थ यह है कि मंगल की दूरी सूर्य से 90 डिग्री या 270 डिग्री से बढकर 120 डिग्री या 300 डिग्री के आसपास की है , इस स्थिति में मंगल की गत्‍यात्‍मक शक्ति तो कम होगी , पर यह स्‍थैतिक उर्जा से युक्‍त होगा। इस कारण जातक युवावस्‍था में खासकर 24 से 30 वर्ष की उम्र में बढते क्रम में बडी जबाबदेही से युक्‍त होता है , मंगल से संबंधित भावों का स्‍तर और मान सम्‍मान प्राप्‍त करेगा।

यदि मंगल सूर्य से ठीक सामने की या उसके अगल बगल की राशि में स्थित हो तो इसका अर्थ यह है कि मंगल की दूरी सूर्य से 150 डिग्री से 180 डिग्री या 330 डिग्री से 360 डिग्री के आसपास की है , इस स्थिति में मंगल न तो गत्‍यात्‍मक और न ही स्‍थैतिक उर्जा संपन्‍न होता है। इस कारण जातक युवावस्‍था में खासकर 24 से 30 वर्ष की उम्र में बढते क्रम में निराशायुक्‍त वातावरण प्राप्‍त करता है , मंगल से संबंधित भावों की कठिनाइयों के कारण उसका जीवन कष्‍टकर हो जाता है।

अगली कडी में इस बात की चर्चा की जाएगी कि जो पाठक ज्‍योतिषी नहीं हैं , वे अपने जन्‍मकाल के मंगल की शक्ति और युवावस्‍था में खासकर 24 से 30 वर्ष की उम्र में अपनी स्थिति के बारे में किस तरह जानकारी प्राप्‍त कर सकते हैं ?





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