मंगलवार, 20 अक्तूबर 2009

बहुत महत्‍वपूर्ण आलेख है ये ... क्‍या आपने या आपके किसी अपने ने इन समयांतरालों में जन्‍म लिया है ??

मंगल से संबंधित अपने पिछले आलेखमें इस चित्रके माध्‍यम से हमने समझाया था कि आकाश में मंगल अपने ही पथ पर घूमते घूमते कभी पृथ्‍वी से बिल्‍कुल निकट , तो कभी काफी दूर चला जाता है। जब यह दूर चला जाता है , तो 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के हिसाब से सर्वाधिक गत्‍यात्‍मक शक्ति संपन्‍न होता है , जब सामान्‍य दूरी पर स्थिति होता है , तो यह सामान्‍य गत्‍यात्‍मक शक्ति संपन्‍न होता है , जबकि यह पृथ्‍वी से बहुत निकट आ जाता है , तो इसकी गत्‍यात्‍मक शक्ति काफी कम हो जाती है। इस आधार पर एक खगोलशास्‍त्री आसमान में मंगल की इस स्थिति के बारे में गत्‍यात्‍मक रूप से कमजोर और मजबूत होने की समझ रख सकते हैं , पिछली कडीमें मैने जन्‍मकुंडली के माध्‍यम से भी एक ज्‍योतिषी को गत्‍यात्‍मक तौर पर मंगल के कमजोर या मजबूत होने के बारे में जानकारी दी थी , पर आमजनों के लिए मंगल के बारे में इस कडी में ही लिख पा रही हूं।

अधिकांश लोगों पर मंगल ग्रह का अच्‍छा प्रभाव ही दिखाई पडता है , इसी कारण युवावस्‍था में शक्ति साहस की प्रचुरता होती है और बहुत कम लोग समस्‍याओं से जूझते हैं। यह बात अवश्‍य है कि अपने अपने स्‍तर के अनुरूप अपने और परिवार की रोजी रोटी की व्‍यवस्‍था करने में कोई बहुत आसानी से सफल हो जाता है , तो किसी को थोडी मशक्‍कत भी करनी पडती है। पर इस कडी में मुख्‍य रूप से 24 से 36 वर्ष की उम्रवाले उन लोगों की चर्चा कर रही हूं , जिनके जन्‍म के समय मंगल ग्रह पृथ्‍वी के बिल्‍कुल निकट था और इस कारण मंगल ग्रह के बुरे प्रभाव से हर ओर से असफल अपने शरीरिक , बौद्धिक और आर्थिक स्‍तर के अनुरूप जीवनयापन कर पाने में असमर्थ ये लोग पराधीनता के वातावरण में रहकर अपनी शक्ति और साहस का उपयोग नहीं कर पाते तथा तनावग्रस्‍त जीवन जीने को मजबूर  हैं।

इन दुर्भाग्‍यशाली युवाओं में सबसे वरिष्‍ठ 12 अक्‍तूबर से 12 नवम्‍बर 1973 के मध्‍य या इसके आसपास जन्‍म लेनेवाले माने जाएंगे , ये कमजोर मंगल की वजह से 1991 के बाद से ही हल्‍के रूप में अपने कार्यक्रमों में बाधा पाते रहे हैं। 1997 के बाद इनकी कठिनाइयां बढते क्रम में 2003 तक बनी रही , 2003 से बढते क्रम में थोडी राहत अवश्‍य महसूस कर रहे हैं , पर पूरा सुधार होने में अभी और एक वर्ष की देर हो सकती है।

इसके बाद के नंबर में 20 नवम्‍बर 1975 से 5 जनवरी 1976 तक या इसके आसपास जन्‍म लेनेवाले आएंगे , जिन्‍होने 1994 से ही छोटे और 2000 के बाद बडे रूप में समस्‍याओं से जूझते हुए 2006 तक काफी कठिनाई भरा समय गुजारने के बाद अभी थोडी राहत में दिख रहे हैं। मंगल के बुरे प्रभाव के समाप्‍त होने में इन्‍हें और तीन वर्षों का इंतजार करना पड सकता है।

इसके बाद 1 जनवरी से 15 फरवरी 1978 तक या इसके आसपास जन्‍मलेनेवाले आएंगे। इन्‍होने 1996 से हल्‍के रूप से और 2002 से गंभीर रूप से आनेवाली समस्‍याओं से जूझते हुए 2007 तक भयानक तनाव झेलते हुए अभी एक डेढ वर्षों से चैन की सांस ले पा रहे हैं , थोडी राहत के बावजूद उनकी कुछ समस्‍याएं 2013 तक चलती रहेंगी।

अभी सबसे कठिनाई वाली स्थिति से गुजर रहे युवाओं में वे आएंगे , जिन्‍होने 1 फरवरी से 20 मार्च 1980 तक या इसके आसपास जन्‍म लिया है। 1998 के बाद हल्‍के रूप में आरंभ हुई और 2004 के बाद गंभीर हुई परिस्थितियों से जूझते हुए किंकर्तब्‍यविमूढावस्‍था में ये अपने को बिल्‍कुल लाचार पा रहे हैं। आनेवाला एक वर्ष उनके जीवन का सर्वाधिक बुरा वर्ष माना जा सकता है।

इसके बाद नंबर आता है 7 मार्च से 30 अप्रैल 1982 के मध्‍य या इसके आसपास जन्‍म लेनेवालों का , जो अपनी परिस्थितियों को 2000 के बाद थोडी और 2006 के बाद अधिक गंभीर तो महसूस कर रहे हैं , पर संघर्ष का दौर जारी है। आनेवाले तीन वर्ष इनके लिए भी कठिनाई भरे रहेंगे। इसलिए इस समय जीवनशैली में किसी प्रकार का परिवर्तन करना उचित नहीं है।

मंगल के प्रभाव को महसूस करनेवाले युवकों में सबसे नए 22 अप्रैल से 5 जून 1984 तक या इसके आसपास जन्‍म लेनेवाले युवक होंगे। पिछले एक वर्ष से इनके सम्‍मुख प्रतिकूल परिस्थितियां तो दिखायी दे रही हैं , पर अक्‍तूबर से इतनी गंभीर हो जाएंगी , ऐसा तो इन्‍होने कभी सोंचा भी नहीं होगा। आनेवाले पांच वर्ष इनके लिए गंभीर रहेंगे , जिनसे जूझने के लिए हर प्रकार से सावधानी की आवश्‍यकता होगी।

भविष्‍यवाणियों का यूं सामान्‍यीकरण बहुत सारे ज्‍योतिष प्रेमियों को गलत लगता रहा है , पर 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' की मान्‍यता है कि प्रकृति के नियम बिल्‍कुल सामान्‍य ढंग से काम करते हैं , इन्‍हें समझने के लिए बेवजह जटिल बनाना उचित नहीं।
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