शुक्रवार, 20 नवंबर 2009

15 घंटे के अंदर किसी सपने का हकीकत में बदलना मात्र संयोग नहीं हो सकता !!

ग्रहों के जनसामान्‍य पर पडनेवाले प्रभाव की जानकारी के लिए ज्‍योतिषियों को पंचांग की आवश्‍यकता पडती है। पंचांग में आसमान के ग्रहों नक्षत्रों और अन्‍य योगों के अलावा और बहुत प्रकार की जानकारी दी होती है, उनमें शरीर के भिन्‍न भिन्‍न अंगों में गिरगिट चढने से लेकर विभिन्‍न प्रकार के स्‍वप्‍न को भी किसी न किसी प्रकार की घटना से जोडने की कोशिश की जाती है। पिताजी के द्वारा ज्‍योतिष के अध्‍ययन किए जाने के कारण बचपन से ही हमारे घर पर पंचांग हुआ करता था , बचपन से ही मुझमें पढने की बुरी आदत भी अधिक ही है , घर पर पंचांग पलटकर देखा करती , स्‍वप्‍न फल को पढने और उसके प्रभाव को गांववालों के समक्ष रोचक ढंग से प्रस्‍तुत करने में आनंद आता।


वैज्ञानिक दृष्टिकोणयुक्‍त पिताजी से गांव में अंधविश्‍वास फैलाने के लिए मुझे हमेशा फटकार लगती थी और वे विभिन्‍न प्रकार के सपनों का अवचेतन मन में बैठी धारणा या परिस्थिति से संबंध बतलाया करते। इस कारण बाद में मैने सपने की सत्‍यता को अंधविश्‍वास से या अवचेतन मन से ही जोड लिया था। पर चूंकि एक ज्‍योतिषी को लोग हर चीज का विशेषज्ञ मान लेते हैं और विज्ञान से परे की किसी भी बात की चर्चा करने से परहेज नहीं करते , इस कारण कभी कभी ऐसी एक दो ऐसी घटनाएं सुनने को अवश्‍य मिली , जिससे सपने के सच होने की पुष्टि मिलती थी। पर जबतक व्‍यक्ति स्‍वयं किसी बात को महसूस नहीं करता , दूसरों पर सहज विश्‍वास मुश्किल होता है और इसकी अपवाद मैं भी नहीं। पर पिछले सप्‍ताह मेरे साथ घटी एक घटना ने अब मुझे विश्‍वास दिला दिया कि सपने भी सच होते हैं।

पिछले शनिवार की रात मैने स्‍वप्‍न में देखा कि मेरे सामने धुलनेवाले कपडों का ढेर रखा है, जिन्‍हें धोती धोती मैं बिल्‍कुल थक गयी हूं। पर धोने को और कपडे बचे ही हैं , इसलिए फ्रेश होने के लिए चाय बनवा रही हूं। इसके बाद मेरी नींद टूट गयी। वैसे मैं हमेशा चिंतित रहती हूं कि वाशिंग मशीन वगैरह के कारण हमारी आदत खराब हो गयी है और कहीं हाथ से कपडे धोने पडे , तो अब दिक्‍कत आ जाएगी , अवचेतन मन में बैठा यही भय स्‍वप्‍न में दिख गया। यही सोंचकर थोडी ही देर में इस बात को मैं भूल गयी। रविवार के दिन ऐसे ही काम अधिक होता है। बेटे का यूनिफार्म धोना था , सफेद कपडे को धोने के लिए उसमें सर्फ बहुत अधिक ही डालनी पडती है । उसे धोने के बाद वाशिंग मशीन के उस सर्फ के पानी का सदुपयोग करने के लिए घरभर से परदे , चादर या अन्‍य गंदे कपडे वगैरह ढूंढ ढूंढकर धोया करती हूं।

इस तरह जब तीन चार ट्रिप यानि 15 किलो से उपर कपडे धोने के बाद वाशटब से पानी को निकालने की कोशिश की तो ड्रेन में कुछ खराबी निकली , पानी ड्रेन ही नहीं हुआ। चूंकि श्रीमान जी घर पर ही थे , उन्‍होने तुरंत पीछे का भाग खोलकर पानी को ड्रेन कर दिया, पर उन्‍हें सिस्‍टम में कुछ गडबडी नजर आयी , जिसे हमेशा की तरह ठीक करने की कोशिश की। अब मशीन में दुबारा पानी भरकर चारो ट्रिप कपडे को खंगालना और सुखाना बाकी था , जिसे मशीन को सुधारे बिना भी किया जा सकता था , पर मशीनरी और इलेक्ट्रिक सामानों को बनाने में खास दिलचस्‍पी रखनेवाले ये भला वाशिंग मशीन के कंट्रोल पैनल को खोलकर ठीक करने की कोशिश कैसे न करते ? वैसे तो हमेशा ही ये इस तरह के कामों में कामयाब ही होते हैं , पर इसमें ये असफल रहें। साथ ही इस चक्‍कर में कौन सा तार इधर उधर हुआ कि मशीन में करेंट पहुंचना ही बंद , तुरंत मिस्‍त्री को बुला पाना भी संभव न था। अब निर्जीव वाशिंग मशीन हमारे सामने पडा था और मैं उतने गीले कपडों को देखकर परेशान थी। कामवाली भी चली गयी थी कि मैं उससे मदद ले सकूं।

इतने गीले कपडों को झुककर हाथ से खंगालना जितना कठिन था , उतना ही निचोडकर फैलाना भी। उनमें से आधे कपडों को अच्‍छी तरह निचोड न सकने के बावजूद मैं काफी थक गयी थी। इतने दिनों से कपडे निचोडने की आदत जो छूट गयी थी ,कपडों के ठीक से न निचोडे जाने के कारण बरामदा कपडों से निकले पानी से भरा पडा था। थकावट को दूर करने के लिए चाय बनाते हुए अचानक मुझे अपने सपने की याद आ गयी, 15 घंटे के अंदर सपने को हकीकत में बदलते देख मैं आश्‍चर्यित थी। इतने सारे देखे गए सपनों में से अचानक कौन से सपने सच हो जाते हैं , यह जानने की जिज्ञासा बन गयी है। वैसे तुरंत किसी सपने के हूबहू सच होने का जीवन यह मेरा पहला अनुभव है, पर मुझे यह संयोग नहीं लगता। वैसे तो कोई विशेषज्ञ इस बात की जानकारी दे पाएं तो उनकी मुझपर बडी कृपा होगी , पर इसके बावजूद मैं खुद भी इससे संबंधित अध्‍ययन करना चाहती हूं। यदि आपके पास भी ऐसे कुछ अनुभव हों तो इसी ब्‍लाग पर टिप्‍पणी के रूप में मुझसे अवश्‍य शेयर करें , ताकि मुझे इस बात का रिसर्च करने में मदद मिले।





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