बुधवार, 9 दिसंबर 2009

3 और 4 फरवरी 2010 के भी असामान्‍य मौसम के लिए अभी से तैयार रहें !!

'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के सूत्रों के आधार पर पिछले दो वर्षों से मैं मौसम से संबंधित संभावनाओं का आलेख प्रेषित करती आ रही हूं। इसी सिलसिले में मैने कल भी मौसम से संबंधित एक आलेख  पोस्‍ट किया। इसे पढकर दिनेश राय द्विवेदी जी ने बहुत ही सटीक टिप्‍पणी की कि मौसम विभाग द्वारा इस प्रकार की संभावना पहले से ही व्‍यक्‍त की जा चुकी है। ऐसी हालत में मेरे द्वारा संभावना व्‍यक्‍त किया जाना ज्‍योतिषीय भविष्‍यवाणी नहीं मानी जा सकती । मुझे दो तीन महीने बाद की तिथि इस प्रकार के मौसम से संबंधित बातों के लिए देनी चाहिए।

वास्‍तव में किसी भी घटना के दो चार दिन पूर्व तब कोई भविष्‍यवाणी की जाय , जिसके संकेत आज किसी और माध्‍यम से दिख रहे हों , तो उसे महत्‍व नहीं दिया जा सकता। मैं इस मामले में कभी कभी लापरवाही कर बैठती हूं , पर इस बार संयोग से 14 और 15 दिसम्‍बर के मौसम के बारे में मैने प्रवीण जाखड जी को जबाब दिए गए आलेख में चर्चा कर दी थी , इसलिए तुरंत उन्‍हें लिंक भेज दिया। पर तत्‍काल मेरे ध्‍यान में आया कि मैं अगली बार की मौसम से संबंधित ऐसी तिथि की संभावना व्‍यक्‍त कर ही दूं। इसलिए आज ही इस आलेख को लिखने की जरूरत आ गयी है।

वैसे तो भारतवर्ष में 15 जनवरी तक ही ठंड रहती है और उसके बाद क्रमश: वसंत ऋतु का शुभागमन होने लगता है। पर ग्‍लोबल वार्मिंग के इस दौर में आजकल फरवरी आते आते वातावरण में थोडी गर्मी का भी अहसास होने लगता है। पर इस वर्ष ऐसी बात नहीं होगी , 3 और 4 फरवरी 2010 के ग्रहीय योग के ज्‍योतिषीय प्रभाव के फलस्‍वरूप भारतवर्ष में असामान्‍य मौसम की संभावना बनेगी , जिसमें कहीं बारिश , तो कहीं कोहरा और कहीं तेज ठंडी हवा चलने के कारण ठंड एक बार फिर से बढेगा। आप सभी इसके लिए तो तैयार रहें ही , ग्रहों के ज्‍योतिषीय प्रभाव को समझने के लिए तथा 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' के इस सिद्धांत को परखने के लिए इस बात को अपनी डायरी में भी नोट कर लें।
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