सोमवार, 14 दिसंबर 2009

कुंडली देखकर किसी व्‍यक्ति के विभिन्‍न पहलुओं की स्थिति या भविष्‍य का अनुमान हम कैसे लगाते हैं ??

गणित ज्‍योतिष में आसमान के पूरब से पश्चिम की ओर जाती गोलाकार 360 डिग्री की पट्टी को बारह भागों में बांट दिया जाता है। इन बारह भागों को हम राशि कहते हैं , इन राशियों में व्‍यक्ति के जन्‍म के समय जो राशि उदित होती है , उसे लग्‍न राशि कहते हैं।

लग्‍नराशि जन्‍मकुंडली का प्रथम भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की शारीरिक स्थिति या उसके आत्‍मविश्‍वास के बारे मे अनुमान किया जाता है।

इसके बाद उदित होनेवाली राशि  जन्‍मकुंडली का द्वितीय भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में
स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की आर्थिक या पारिवारिक स्थिति के बारे में अनुमान किया जाता है।


इसके बाद उदित होनेवाली राशि  जन्‍मकुंडली का तृतीय भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में
स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की भाई बहन की स्थिति या शक्ति के बारे में अनुमान किया जाता है।

इसके बाद उदित होनेवाली राशि  जन्‍मकुंडली का चतुर्थ भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में
स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की माता की स्थिति या हर प्रकार की संपत्ति के बारे मे अनुमान किया जाता है।

इसके बाद उदित होनेवाली राशि  जन्‍मकुंडली का पंचम भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में
स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की बुद्धि की स्थिति या संतान के बारे मे अनुमान किया जाता है।

इसके बाद उदित होनेवाली राशि  जन्‍मकुंडली का षष्‍ठ भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में
स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की रोग प्रतिरोधक या किसी प्रकार के झंझट से जूझने की शक्ति या प्रभाव के बारे मे अनुमान किया जाता है।

इसके बाद उदित होनेवाली राशि  जन्‍मकुंडली का सप्‍तम भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में
स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक के दाम्‍पत्‍य जीवन की स्थिति  के बारे मे अनुमान किया जाता है।

इसके बाद उदित होनेवाली राशि  जन्‍मकुंडली का अष्‍टम भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में
स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की जीवनशैली या उम्र के बारे मे अनुमान किया जाता है।

इसके बाद उदित होनेवाली राशि  जन्‍मकुंडली का नवम् भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में
स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक की भाग्‍य की स्थिति या उसके प्रति दृष्टिकोण के बारे मे अनुमान किया जाता
है।

इसके बाद उदित होनेवाली राशि  जन्‍मकुंडली का दशम् भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में
स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक के पिता और पद प्रतिष्‍ठा की स्थिति या उसके सामाजिक और राजनीतिक स्थिति के बारे मे अनुमान किया जाता है।

इसके बाद उदित होनेवाली राशि  जन्‍मकुंडली का एकादश भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में
स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक के लाभ के प्रति संतोष  या लक्ष्‍य के बारे मे अनुमान किया जाता है।

इसके बाद उदित होनेवाली राशि  जन्‍मकुंडली का द्वादश भाव होता है। इसी भाव के स्‍वामी ग्रह या इस भाव में
स्थित ग्रहों के हिसाब से बालक के खर्च या बाहरी संदर्भों की स्थिति या विदेश यात्रा के बारे मे भी अनुमान किया जाता है।

यूं तो परंपरागत ज्‍योतिष में बालक के विभिन्‍न संदर्भों के बारे में अनुमान करने के लिए ग्रहों की शक्तियों को निकालने के कई सूत्र दिए गए हैं , पर गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष उनकी सहायता नहीं लेता और विभिन्‍न भावों के स्‍वामी ग्रह या उन भावों में स्थित ग्रहों की 'गत्‍यात्‍मक शक्ति' और 'स्‍थैतिक शक्ति' के द्वारा  इसका आकलन करता है ।
एक टिप्पणी भेजें