गुरुवार, 19 फ़रवरी 2009

पूर्वी भारत के ब्‍लागरों के सम्‍मेलन में मात्र दो दिन बाकी

झारखंड (रांची) और पश्चिम बंगाल (कोलकाता) के ब्लॉगरों का एक स‌म्मेलन 22 फरवरी (रविवार) को रांची में आयोजित होने जा रहा है। आपस में मिलने जुलने और नई नई बातें सीखने के लिए हम ब्‍लागरों के लिए अब मात्र दो दिनों का समय ही बाकी रह गया है, डॉ॰ भारती कश्यप ने इस कार्यक्रम के आयोजन का जिम्मा लिया है। कार्यक्रम का औसत खाका और इससे जुड़ी २-४ बातें शैलेश जी ने यहाँ प्रकाशित कर रखा हैं- http://baithak.hindyugm.com/2009/02/bloggers-meet-ranchi-jharkhand-22-feb.html आशा है , पूर्वी भारत में रहनेवाले सभी ब्‍लागर भाई बहन इसमें भाग लेकर इस आयोजन को सफल बनाएंगे।

शैलेश भारतवासी जी के द्वारा इस कार्यक्रम संबंधित यह पत्र सबों को 15 फरवरी को ही भेजा गया था......

साथियो,
यह बहुत हर्ष की बात है कि २२ फरवरी को आयोजित होने वाले राँची ब्लॉगर सम्मेलन को आप सभी ने बहुत गंभीरता और उत्साह से लिया है। हम चाहते हैं कि कार्यक्रम से सभी आगंतुक ब्लॉगरों का सीधा जुड़ाव हो और इसकी विविधता बनी रहे, इसलिए यह ज़रूरी है कि ऐसे ब्लॉगर जो ब्लॉगिंग में नियमित हैं, कम से कम वे सभी अधिकतम ५ मिनट में ब्लॉगिंग से जुड़ने का कारण और अब तक का अनुभव उपस्थित दर्शकों/श्रोताओं से बाँटें। हम समझते हैं कि ब्लॉगिंग से जुड़ने का कारण सभी के लिए अलग होगा।
साथ मैं यह भी अपील करना चाहूँगा कि आप अपने साथ ऐसे साथी को भी लायें जो अभि ब्लॉगिंग में नहीं हैं, लेकिन ब्लॉगिंग के बारे में आपसे/मीडिया से सुनते रहते हैं ताकि कार्यक्रम की रोचकता से प्रभावित होकर वे भी ब्लॉगर बन जायें।
आप सभी से अमिताभ मीत (कोलकाता के वरिष्ठ ब्लॉगरों में से एक) नियमित संपर्क में रहेंगे।
जिन्होंने अभी तक इस कार्यक्रम की सूचना अपने निजी ब्लॉगों पर नहीं दी है, उनसे निवेदन है कि कृपया कुछ न कुछ ज़रूर लिखें ताकि कार्यक्रम की गंभीरता को दुनिया के हर कोने में बैठा ब्लॉगर समझ सके।
स्थान- कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल, पुरुलिया रोड, राँची
दिन और समय- रविवार, २२ फरवरी २००९, सुबह ११ बजे से दोपहर २ बजे तक
सम्भावित मुख्य-अतिथि- हरिवंश जी या हरिनारायण सिंह जी।
धन्यवाद।
निवेदक-
शैलेश भारतवासी
नियंत्रक-संपादक
हिन्द-युग्म- www.hindyugm.com

9454950705, 9873734046

बुधवार, 18 फ़रवरी 2009

शायद पूर्वाग्रह से ग्रसित होने से मेरे मन में आयी दुर्भावना

अभी कुछ दिनों पहले ही हिन्‍दी ब्‍लागिंग के बारे में हंस के संपादक राजेंद्र यादव जी के द्वारा की गयी टिप्‍पणी चर्चा का विषय बनीं हुई थी। सभी ब्‍लागर भाई इस विषय पर अपने अपने ढंग से कुछ न कुछ वक्‍तब्‍य दे रहे थे। उस समय मसीजीवी जी ने बडे कडे शीर्षक के साथअपनी प्रतिक्रिया यूं व्‍यक्‍त की थी ...“पहले बिंदु पर जिसे असहमति हो वे अर्काइव छानें, ब्‍लॉगजगत पहले ही सहमत है कि यहॉं कूड़ा अधिक है। 80 फीसदी तो कम से कम है ही। दूसरे बिंदु पर किसी को आपत्ति का अधिकार है ही नहीं, अब रहा तीसरा बिंदु तो आधुनिकता केवल टपर टपर कीबोर्ड चलाने से आएगी नहीं, यूँ आप आनलाइन हैं लेकिन उवाचेंगे गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष, जाहिर है ये नहीं चलेगा।“ इसे पढकर मुझे कुछ तकलीफ तो हुई थी , पर उस वक्‍त मैं दिल्‍ली में थी। कम्‍प्‍यूटर पर हिन्‍दी लिखने की कोई सुविधा न होने से मै उस वक्‍त चुपचाप रह गयी थी , पर दिमाग में एक बात बैठ ही गया था कि मसीजीवी जी मेरे विचारों से सहमत नहीं हैं।

परसों जैसे ही उनका कमेंट आया मै बिना पढे ही समझ गयी कि इन्‍होने विरोध में कुछ लिखा होगा। पूर्वाग्रह ने मन में दुर्भावना को जन्‍म दिया और इसलिए शायद मेरी नजर टिप्‍पणी के बाद दिए गएस्‍माइलीपर नहीं पडी। टिप्‍पणी के बाद स्‍माइली देने का मतलब ही है कि यह परिहास ही किया जा रहा है। मेरे साथ ही साथ अन्‍य किसी पाठक या टिप्‍पणीकार की नजर भी इसपर नहीं पडी। वो तो भला हो विष्‍णु वैरागी जी का , जिन्‍होने इस बात पर मेरा ध्‍यान दिलाया....’मसिजीवी की टिप्‍पणी मैं ने भी पढी है। अपनी अन्तिम पंक्ति में उन्‍होंने 'स्‍माइली' लगाई है। आपको यह अधिकार है कि उनके 'परिहास' को 'उपहास' अथवा 'कटाक्ष' मानें।‘ पर उन्‍होने यह भी लिखा कि ‘भावना के अतिरेक में आप अपनी 'अपेक्षा' को 'आग्रह' से बढकर 'दुराग्रह' तक ले जाती नजर आ रही हैं।‘ , इस बात से मैं असहमत हूं , क्‍योकि मैने अपने आलेख में ऐसा कुछ नहीं लिखा था। और उस दिन सुजाता जी को भेजे गए मेल के जवाब में भी लिखा था कि मैं मसीजीवी जी की इज्‍जत करती हूं। यह बिल्‍कुल सामान्‍य बात हैं कि हम दोनों के विचारों में मतभेद है। यह तो कहीं भी किसी भी रिश्‍ते में हो सकता है।

पूर्वाग्रह के बारे में बहुत कुछ पढा था , उसमें यह भी कि मन में किसी प्रकार का पूर्वाग्रह आपके सोंचने समझने की शक्ति को खत्‍म कर देता है , दिमाग काम नहीं कर पाता और इसके कारण आप किसी भी घटना को उसी कोण से देखते हैं , जो आपके दिमाग में पहले से ही बैठाया गया है। अपने जीवन के अनुभवों में भी मैने अनेक जगहों पर ऐसा महसूस किया था, पर आज तक हर चीज को दोनो नजरिए से देखती आ रही मैं खुद ऐसी भूल करूंगी ,यह नहीं सोंचा था । अपने परिचय में सकारात्‍मक सोंच और सकारात्‍मक कर्म के बारे में जो भी लिखा था , उसकी धज्जियां मैने खुद ही उडा दी है, इस बात का मुझे बहुत अफसोस है। आशा है, मसीजीवी जी के साथ ही साथ आप सभी सुधीजन मुझे माफ करेंगे ,क्‍योकि सुबह का भूला शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते।

सोमवार, 16 फ़रवरी 2009

यह पोस्‍ट मसीजीवी जी की टिप्‍पणी का जवाब है (vidya sagar padhdhati, petarbar, bokaro)

इंटरनेट में ब्‍लाग लेखन के रूप में सामान्‍य जनों को भी एक बहुत ही बडा प्‍लेटफार्म मिल गया है , जहां सबों को अपने विचारों और भावों के प्रस्‍तुतीकरण करने का अधिकार प्राप्‍त है। इसके साथ ही एक सुविधा और भी कि सभी ब्‍लोगों को पढकर टिप्‍पणियों के रूप में हम अपनी प्रतिक्रिया भी लेखक और अन्‍य पाठकों तक पहुंचा सकते हैं। पर एक पोस्‍ट के साथ ही साथ एक प्रतिक्रिया को लिखने के अधिकार का प्रयोग करते समय हमें यह तो देखना ही पडेगा कि इससे किसी को तकलीफ न होने पाए। किसी आलेख को पढकर टिप्‍पणी देने का तीन उददेश्‍य होना चाहिए , पहला आप यह बतला सकते हैं कि आप लेखक से सहमत हैं या असहमत , दूसरा लेखक से आप उस विषय से जुडा कोई और सवाल कर सकते हैं ,तीसरा आप उस विषय से संबंधित कोई सुझाव दे सकते हैं , पर इन सबसे उलट किसी लेखक पर इलजाम लगाना बहुत ही गलत है।


आज ही पोस्‍ट किए गए मेरे आलेख नजर क्‍यों लगती है ?, में की गयी टिप्‍पणी से यह स्‍पष्‍ट है कि इससे मसीजीवी जी सहमत नहीं हैं , यह मेरे लिए कोई बडी बात नहीं , मैने जैसा विषय चुना है , इसके लिए आलोचनाएं झेलने की मुझे आदत पडी है , पर उनका यह इलजाम लगाना ,कि मेरे आलेख को देखकर यह कहा जा सकता है कि हिन्‍दी चिटठा जगत पर नकारात्‍मक ग्रहों का बुरा प्रभाव आ गया है , मेरे ख्‍याल से बहुत गलत है। आज समाज में जिस ढंग से धार्मिक और अन्‍य भ्रांतियां फैली हुई हैं , उसे दूर करने में एक वैज्ञानिक कामयाब नहीं हो सकता। जहर को काटने के लिए जहर की ही आवश्‍यकता होती है , यही सोंचकर गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण युक्‍त समाज की कल्‍पना से पहले ग्रहों के प्रभाव का बारीकी से अध्‍ययन किया है। फिर भी यदि मसीजीवी जी को लग रहा है कि हिन्‍दी ब्‍लाग जगत पर नकारात्‍मक ग्रहों का प्रभाव चल रहा है , तभी मेरे आलेखों को उसे झेलना पड रहा है , तब भी उन्‍हें घबराने की आवश्‍यकता नहीं , क्‍योंकि हमेशा से ही असत्‍य पर सत्‍य की जीत होती आयी है और पुन: ऐसा ही होगा। जैसे ही हिन्‍दी ब्‍लाग जगत पर सकारात्‍मक ग्रहों का प्रभाव आरंभ होगा , गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष खुद ब खुद कहीं छुपा पडा रहेगा।

यह तो हुई उनको समझानेवाली बात , पर थोडी मेरी भी सुन लें । मुझे ऐसा लग रहा है कि हिन्‍दी ब्‍लाग जगत पर सकारात्‍मक ग्रहों का ही प्रभाव चल रहा है और मेरे वैज्ञानिक दृष्टिकोण युक्‍त आलेखों से इसकी छवि धूमिल नहीं पडने जा रही है। मेरे पास ज्‍योतिष का एक ऐसा वैज्ञानिक आधार है कि दो वर्षों के बाद के जन जन तक गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के ज्ञान के प्रसार के कार्यक्रम और कुछ वर्षों के इस ब्‍लाग लेखन के बाद एक विज्ञान के रूप में ज्‍योतिष का ऐसा प्रचार प्रसार होगा कि लोगों को एक गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष विशेषज्ञ से छुपकर मिलने की आवश्‍यकता नहीं रहेगी।

नजर कब लगती है ? ( Astrology )

`मुझे किसी की नजर लग गयी है ´ , मेरे पीछे किसी रहस्यमय शक्ति का हाथ है ´ , `मेरे लिए टोने-टोटके किए जा रहें हैं ´ , इन सब व्‍यर्थ की भ्रांतियों से निकलकर सामान्य जीवन जी पाना किसी भी मनोवैज्ञानिक रुप से कमजोर व्यक्ति के लिए काफी कठिन है , यहॉ तक कि ये बातें किसी व्यक्ति को पागल बना देने के लिए काफी है , मैने अपने अनुभवों में पाया है कि विपदा , निराशा या परेशानी में घिरे लोगों में ऐसी सोंच का जन्‍म लेना बिल्‍कुल स्‍वाभाविक होता है। खासकर महिलाओं की संख्या काफी है जो इन आपदाओं से बचने के लिए तांत्रिकों का सहारा लेने जाती हैं और उनके चक्‍कर में बुरी तरह फंस जाती हैं। इससे उन्हें शारीरिक , मानसिक और आर्थिक हर प्रकार का शोषण होता है।

चूंकि मुझे तंत्र-मंत्र या टोने-टोटके जैसी अन्य सिद्धियों के बारे में अधिक जानकारी नहीं है , इसलिए मैं यह तो नहीं कह सकती कि इन सबका महत्व है या नहीं ? बुरी नजर होती ही नहीं है या नहीं ? किन्तु इतना तो दावे के साथ कह सकती हूं कि आपके जीवन में 'अच्‍छा समय' और 'बुरा समय' चलता रहता है। आपके अच्छे समय में इन बुरे असामाजिक तत्वों का प्रवेश आपके जीवन में हो ही नहीं सकता। चोर-डाकू-लुटेरे-गॉवों शहरों और गलियों में घूमते हैं , किन्तु वे आपके सामानों की चोरी तबतक नहीं करते , जबतक आप पर सकारात्मक ग्रहों का प्रभाव है , जानलेवा हमला करने के बावजूद आप बचकर निकल सकते हैं। हॉ , यदि आप ऋणात्मक ग्रहों के प्रभाव में हैं , तो निश्चित तौर पर किसी न किसी विपत्ति में फंस सकते हैं , जिस तरह किसी असामाजिक तत्वों के हत्थे चढ़ सकते हैं। अब इसे आप किसी भी शक्ति का हाथ समझ सकते हैं। जैसे ही आपके जीवन में धनात्मक ग्रहों का प्रभाव आरंभ होगा , आप जिस भी समस्या से प्रभावित हो रहे हों , अवश्य जीत पाएंगे। इसलिए चिंता न करें , निराशा से बचें और दृष्टिकोण सकारात्मक बनाए रखें। इससे आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और आप समस्या को अपने ढंग से हल कर पाएंगे और इसलिए आपको तांत्रिकों का सहारा लेने की कोई आवश्यकता नहीं है।