शनिवार, 31 अक्तूबर 2009

क्षमा मांग पाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता !!

गल्‍ती करना मानव का स्‍वभाव है कभी न कभी हर किसी से गल्‍ती हो ही जाती है। यदि गल्‍ती का फल स्‍वयं को भुगतना पडे , तो कोई बात नहीं होती , पर आपकी गल्‍ती से किसी और को धन या मान की हानि हो रही हो, तो ऐसे समय नि:संकोच हमें क्षमा मांग लेना चाहिए। कुछ लोगों को अपनी गल्‍ती मानते हुए दूसरों से क्षमा मांग लेने में कोई दिक्‍कत नहीं होती , पर 'अहं' वाले लोग आसानी से ऐसा नहीं कर पाते। यह स्‍वभाव व्‍यक्तिगत होता है और इसके गुण बचपन से ही दिखाई देते हैं। अपनी गल्‍ती को न स्‍वीकारने के कारण कई बार सामनेवालों से उनका संबंध बिगड जाता है , पर बिना क्षमा मांगे ही अपना संबंध सुधारने की भी कोशिश करते हैं।

ऐसी स्थिति आने पर मेरे छोटे भाई ने मात्र छह वर्ष की उम्र में कितना दिमाग लगाया था, इसे इस कहानी को पढकर समझा जा सकता है। उसने दादी जी को एक ऐसा जबाब दे दिया था , जो अक्‍सर दादा जी से सुना करता था और उसका मतलब तक नहीं जानता था। इसलिए हम सभी लोगों को उसकी बात पर हंसी आ रही थी , पर घर के बडे लोगों ने उसकी हिम्‍मत न बढते देने के लिए उसे दादी जी से माफी मांगने को कहा। काफी देर तक उसने टाल मटोल की , पर बात खाना नहीं मिलने तक आ गयी तो उसे बडी दिक्‍कत हो गयी , क्‍यूंकि वह जानता था कि इतने बडे बडे लोगों के बीच उसकी तो नहीं ही चलेगी , मम्‍मी , चाची , दीदी या भैया की भी नहीं चलनेवाली , जो लोग उसे किसी मुसीबत से बचाते आ रहे हैं।  हंसकर या रोकर जैसे भी हो माफी मांगने में ही उसकी भलाई है , फिर उसने अपना दिमाग लगाते हुए एक कहानी सुनाने लगा।

एक गांव में एक छोटा सा बच्‍चा रहा करता था। एक दिन उससे गल्‍ती हो गयी , उसने अपनी दादी जी को भला बुरा कह दिया। फिर क्‍या था , सभी ने उससे अपनी दादी जी से माफी मांगने को कहा। वह दादी जी से कुछ दूरी पर बैठा था , जमीन को बित्‍ते(हाथ के अंगूठे से छोटी अंगुली तक को फैलाने से बनीं दूरी) से नापते हुए दादी जी की ओर आगे बढता जा रहा था । मुश्किल से दो तीन बित्‍ते बचे रह गए होंगे कि दादी जी ने उसे अपनी ओर खींच लिया और गले लगाते हुए कहा कि बेटे तुझे माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं , बच्‍चे तो गल्‍ती करते ही हैं। इसके साथ ही वह खुद भी जमीन को अपने बित्‍ते से नापते हुए आगे बढने लगा । इस तरह वह माफी मांगने से बच गया , इस कहानी को सुनने के बाद दो तीन बित्‍ते दूरी से ही भला मेरी दादी जी उसे गले से कैसे न लगाती ?

क्षमा मांग पाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता !!

गल्‍ती करना मानव का स्‍वभाव है कभी न कभी हर किसी से गल्‍ती हो ही जाती है। यदि गल्‍ती का फल स्‍वयं को भुगतना पडे , तो कोई बात नहीं होती , पर आपकी गल्‍ती से किसी और को धन या मान की हानि हो रही हो, तो ऐसे समय नि:संकोच हमें क्षमा मांग लेना चाहिए। कुछ लोगों को अपनी गल्‍ती मानते हुए दूसरों से क्षमा मांग लेने में कोई दिक्‍कत नहीं होती , पर 'अहं' वाले लोग आसानी से ऐसा नहीं कर पाते। यह स्‍वभाव व्‍यक्तिगत होता है और इसके गुण बचपन से ही दिखाई देते हैं। अपनी गल्‍ती को न स्‍वीकारने के कारण कई बार सामनेवालों से उनका संबंध बिगड जाता है , पर बिना क्षमा मांगे ही अपना संबंध सुधारने की भी कोशिश करते हैं।

ऐसी स्थिति आने पर मेरे छोटे भाई ने मात्र छह वर्ष की उम्र में कितना दिमाग लगाया था, इसे इस कहानी को पढकर समझा जा सकता है। उसने दादी जी को एक ऐसा जबाब दे दिया था , जो अक्‍सर दादा जी से सुना करता था और उसका मतलब तक नहीं जानता था। इसलिए हम सभी लोगों को उसकी बात पर हंसी आ रही थी , पर घर के बडे लोगों ने उसकी हिम्‍मत न बढते देने के लिए उसे दादी जी से माफी मांगने को कहा। काफी देर तक उसने टाल मटोल की , पर बात खाना नहीं मिलने तक आ गयी तो उसे बडी दिक्‍कत हो गयी , क्‍यूंकि वह जानता था कि इतने बडे बडे लोगों के बीच उसकी तो नहीं ही चलेगी , मम्‍मी , चाची , दीदी या भैया की भी नहीं चलनेवाली , जो लोग उसे किसी मुसीबत से बचाते आ रहे हैं।  हंसकर या रोकर जैसे भी हो माफी मांगने में ही उसकी भलाई है , फिर उसने अपना दिमाग लगाते हुए एक कहानी सुनाने लगा।

एक गांव में एक छोटा सा बच्‍चा रहा करता था। एक दिन उससे गल्‍ती हो गयी , उसने अपनी दादी जी को भला बुरा कह दिया। फिर क्‍या था , सभी ने उससे अपनी दादी जी से माफी मांगने को कहा। वह दादी जी से कुछ दूरी पर बैठा था , जमीन को बित्‍ते(हाथ के अंगूठे से छोटी अंगुली तक को फैलाने से बनीं दूरी) से नापते हुए दादी जी की ओर आगे बढता जा रहा था । मुश्किल से दो तीन बित्‍ते बचे रह गए होंगे कि दादी जी ने उसे अपनी ओर खींच लिया और गले लगाते हुए कहा कि बेटे तुझे माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं , बच्‍चे तो गल्‍ती करते ही हैं। इसके साथ ही वह खुद भी जमीन को अपने बित्‍ते से नापते हुए आगे बढने लगा । इस तरह वह माफी मांगने से बच गया , इस कहानी को सुनने के बाद दो तीन बित्‍ते दूरी से ही भला मेरी दादी जी उसे गले से कैसे न लगाती ?

बुधवार, 28 अक्तूबर 2009

कुछ दूर से लौटकर दरवाजे का लॉक क्‍या आप भी चेक करते हैं ??

जब आप अपने घर का ताला लगाकर कहीं बाहर जाते हैं , थोडी ही देर में आपको इस बात का संशय होता है कि आपने दरवाजे का ताला अच्‍छी तरह बंद नहीं किया है। थोडी दूर जाने के बाद भी आप इस बात के प्रति आश्‍वस्‍त होने के लिए घर लौटते हैं और जब चेक करते हैं , तो पता चलता है कि यह बेवजह का संशय था। कभी भी आपसे गलती नहीं हुई होती है , फिर भी आप कभी निश्चिंत नहीं रह पाते हैं , बार बार इसी तरह का मौका आता रहता है। मनोचिकित्‍सक बताते हैं कि यहीं से आपका मानसिक तौर पर अस्‍वस्‍थ होने की शुरूआत हो जाती है। पर क्‍या यह सच है ?

 वैसे तो हमारे शरीर के सारे अंग मस्तिष्‍क के निर्देशानुसार काम करते हैं , पर मैने अपने अनुभव में पाया है कि यदि शरीर का कोई अंग लगातार एक काम के बाद दूसरा काम करते जाए तो उसका अंग वैसा करने को अभ्‍यस्‍त हो जाता है। ऐसी हालत में कुछ दिनों में बिना दिमाग की सहायता के स्‍वयमेव वह एक काम के बाद दूसरा काम करने लगता है , जब मस्तिष्‍क की जरूरत हो तभी उसे पुकारता है , जिस प्रकार एक नौकर मेहनत का हर काम क्रम से कर सकता है , पर जहां दिमाग लगाने की बारी आती है , तो मालिक को पुकार लिया करता है।

इस बात को मैं एक उदाहरण की सहायता से स्‍पष्‍ट कर रही हूं। मैं अक्‍सर रसोई घर में काम करते करते अपने चिंतन में खो जाया करती हूं। पर इसके कारण आजतक कभी दिक्‍कत आते मैने नहीं महसूस किया जैसे कि चाय में नमक हल्‍दी पड गयी या सब्‍जी में चीनी पत्‍ती। सब्‍जी , दाल या चाय बनाने के वक्‍त मैं कहीं भी खोयी रहूं , हाथ में अपने आप तद्नुसार नमक , हल्‍दी , चीनी या चायपत्‍ती का डब्‍बा आ जाता है , पर इन्‍हें डालने के वक्‍त मेरा मस्तिष्‍क वापस आता है , क्‍यूंकि सबकुछ अंदाज से डालना आवश्‍यक है। यहां तक कि जिस बर्तन में मैं अक्‍सर चाय बनाती हूं , उसमें यदि किसी दूसरे उद्देश्‍य के लिए पानी गरम करने का विचार आ जाए तो उसे गैस पर रखने के बाद चाय बनाने के क्रम में पानी मापने के लिए रखा एक गिलास स्‍वयं हाथ में आ जाता है। तब ध्‍यान जाता है कि आज पानी मापना थोडे ही है , अंदाज से डालना है।

मैने एक अविकसित मस्तिष्‍क की लडकी को भी देखा है , जो घर का सारा काम कर लेती है। चूंकि वह स्‍कूल नहीं जाती थी , उसकी मम्‍मी उससे एक के बाद दूसरा काम करवाती रहीं और वह बिना दिमाग के भी उन कामों को करने की अभ्‍यस्‍त हो गयी है। झाडू लगाने , पोछा करने , बरतन धोने और कपडे धोने में उसे कोई दिक्‍कत नहीं , लेकिन जब किसी चीज का अंदाज करना हो तो वह नहीं कर पाती और उसके लिए अपनी मम्‍मी पर आश्रित रहती है। मुझे उसके काम को देखकर अक्‍सर ताज्‍जुब होता रहता है ।

जब हमलोग बाहर निकलते हैं , तो हमारा मुख्‍य ध्‍यान हमारे बाहर के कार्यक्रम पर होता है । कमरे का ताला बंद करते करते हमारा हाथ उसका अभ्‍यस्‍त हो चुका है , इसलिए बिना मस्तिष्‍क की सहायता से वह ताला बंद कर लेता है और हम आगे बढ जाते हैं। थोडी दूर जाने के बाद जब हम अपने चिंतन से बाहर निकलते हैं तो हम घर के दरवाजे पर ताले के बंद होने के प्रति आश्‍वस्‍त नहीं रह पाते , क्‍यूंकि हमारे मस्तिष्‍क को यह बात बिल्‍कुल याद नहीं। हम पुन: लौटकर आश्‍वस्‍त होना चाहते हैं कि ताला अच्‍छी तरह बंद है या नहीं ? इसलिए मेरे ख्‍याल से एक बार ऐसा करना एक मानसिक बीमारी नहीं , बिल्‍कुल सामान्‍य बात है। अब बार बार भी लोग ऐसा करते हों तो इसके बारे में मनोवैज्ञानिकों का कहना माना जा सकता है ।


कुछ दूर से लौटकर दरवाजे का लॉक क्‍या आप भी चेक करते हैं ??

जब आप अपने घर का ताला लगाकर कहीं बाहर जाते हैं , थोडी ही देर में आपको इस बात का संशय होता है कि आपने दरवाजे का ताला अच्‍छी तरह बंद नहीं किया है। थोडी दूर जाने के बाद भी आप इस बात के प्रति आश्‍वस्‍त होने के लिए घर लौटते हैं और जब चेक करते हैं , तो पता चलता है कि यह बेवजह का संशय था। कभी भी आपसे गलती नहीं हुई होती है , फिर भी आप कभी निश्चिंत नहीं रह पाते हैं , बार बार इसी तरह का मौका आता रहता है। मनोचिकित्‍सक बताते हैं कि यहीं से आपका मानसिक तौर पर अस्‍वस्‍थ होने की शुरूआत हो जाती है। पर क्‍या यह सच है ?

 वैसे तो हमारे शरीर के सारे अंग मस्तिष्‍क के निर्देशानुसार काम करते हैं , पर मैने अपने अनुभव में पाया है कि यदि शरीर का कोई अंग लगातार एक काम के बाद दूसरा काम करते जाए तो उसका अंग वैसा करने को अभ्‍यस्‍त हो जाता है। ऐसी हालत में कुछ दिनों में बिना दिमाग की सहायता के स्‍वयमेव वह एक काम के बाद दूसरा काम करने लगता है , जब मस्तिष्‍क की जरूरत हो तभी उसे पुकारता है , जिस प्रकार एक नौकर मेहनत का हर काम क्रम से कर सकता है , पर जहां दिमाग लगाने की बारी आती है , तो मालिक को पुकार लिया करता है।

इस बात को मैं एक उदाहरण की सहायता से स्‍पष्‍ट कर रही हूं। मैं अक्‍सर रसोई घर में काम करते करते अपने चिंतन में खो जाया करती हूं। पर इसके कारण आजतक कभी दिक्‍कत आते मैने नहीं महसूस किया जैसे कि चाय में नमक हल्‍दी पड गयी या सब्‍जी में चीनी पत्‍ती। सब्‍जी , दाल या चाय बनाने के वक्‍त मैं कहीं भी खोयी रहूं , हाथ में अपने आप तद्नुसार नमक , हल्‍दी , चीनी या चायपत्‍ती का डब्‍बा आ जाता है , पर इन्‍हें डालने के वक्‍त मेरा मस्तिष्‍क वापस आता है , क्‍यूंकि सबकुछ अंदाज से डालना आवश्‍यक है। यहां तक कि जिस बर्तन में मैं अक्‍सर चाय बनाती हूं , उसमें यदि किसी दूसरे उद्देश्‍य के लिए पानी गरम करने का विचार आ जाए तो उसे गैस पर रखने के बाद चाय बनाने के क्रम में पानी मापने के लिए रखा एक गिलास स्‍वयं हाथ में आ जाता है। तब ध्‍यान जाता है कि आज पानी मापना थोडे ही है , अंदाज से डालना है।

मैने एक अविकसित मस्तिष्‍क की लडकी को भी देखा है , जो घर का सारा काम कर लेती है। चूंकि वह स्‍कूल नहीं जाती थी , उसकी मम्‍मी उससे एक के बाद दूसरा काम करवाती रहीं और वह बिना दिमाग के भी उन कामों को करने की अभ्‍यस्‍त हो गयी है। झाडू लगाने , पोछा करने , बरतन धोने और कपडे धोने में उसे कोई दिक्‍कत नहीं , लेकिन जब किसी चीज का अंदाज करना हो तो वह नहीं कर पाती और उसके लिए अपनी मम्‍मी पर आश्रित रहती है। मुझे उसके काम को देखकर अक्‍सर ताज्‍जुब होता रहता है ।

जब हमलोग बाहर निकलते हैं , तो हमारा मुख्‍य ध्‍यान हमारे बाहर के कार्यक्रम पर होता है । कमरे का ताला बंद करते करते हमारा हाथ उसका अभ्‍यस्‍त हो चुका है , इसलिए बिना मस्तिष्‍क की सहायता से वह ताला बंद कर लेता है और हम आगे बढ जाते हैं। थोडी दूर जाने के बाद जब हम अपने चिंतन से बाहर निकलते हैं तो हम घर के दरवाजे पर ताले के बंद होने के प्रति आश्‍वस्‍त नहीं रह पाते , क्‍यूंकि हमारे मस्तिष्‍क को यह बात बिल्‍कुल याद नहीं। हम पुन: लौटकर आश्‍वस्‍त होना चाहते हैं कि ताला अच्‍छी तरह बंद है या नहीं ? इसलिए मेरे ख्‍याल से एक बार ऐसा करना एक मानसिक बीमारी नहीं , बिल्‍कुल सामान्‍य बात है। अब बार बार भी लोग ऐसा करते हों तो इसके बारे में मनोवैज्ञानिकों का कहना माना जा सकता है ।

सोमवार, 26 अक्तूबर 2009

क्‍या रेमिंगटन कीबोर्ड पर टाइपिंग करने में आपको परेशानी होती है ??

अपने कंप्‍यूटर में Baraha IMEया Hindi Indic IME.को लोड करने और हिन्‍दी सक्रियकरने के बाद मुख्‍य समस्‍या हिन्‍दी में टाइपकरने की आती है। इस समस्‍या का कोई समाधान न दिखने से अधिकांश लोगों को फोनेटिक कीबोर्ड का सहारा लेना पडता है , जिसके द्वारा रोमण में ही लिखने से उसे हिन्‍दी में कन्‍वर्ट किया जा सकता है। लेकिन आप यदि डायरेक्‍ट हिन्‍दी में ही लिखना चाहते हों , तो आपको रेमिंगटन कीबोर्ड पर टाइपिंग कर सकते हैं। अंग्रेजी कैरेक्‍टरों को देखकर हिन्‍दी में टाइपिंग करना बहुत ही आसान है। चाहे जो भी कारण हो , एक महीने के अंदर मैं जितनी आसानी से हिन्‍दी टाइपिंग करने लगी , शायद अंग्रेजी में संभव नहीं थी।

कीबोर्ड की पहली पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं ......
`  1  2  3 4 5  6  7 8  9  0 -  =   (NORMAL)
यदि कीबोर्ड की इस पहली पंक्ति की हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं
़ 1  2  3  4  5 6  7 8  9  0  ; ृ   (NORMAL)  शिफ्ट के साथ कीबोर्ड की पहली पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं ......
यदि शिफ्ट के साथ कीबोर्ड की इस पहली पंक्ति की हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
~  !  @  #  $  %  ^  &  *  ( )  _  + (WITH SHIFT) द्य  ।  / :  *   -  ‘  ‘ द्ध  त्र  ऋ  .  ् (WITH SHIFT)
जबकि दूसरी पंक्ति में हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
उसके नीचे यानि दूसरी पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप  किए जाते हैं ...... q  w  e  r  t  y  u I  o p  [ ]  \ (NORMAL) ु  ू म  त  ज  ल  न  प  व  च  ख्‍  ,  (NORMAL)
Q  W  E  R  T  Y  U  I  O  P  {  }   (WITH SHIFT)
पर यदि  उसी दूसरी लाइन की शिफ्ट के साथ टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं ....

पर उसी दूसरी लाइन की शिफ्ट के साथ हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
फ   ॅ   म्‍    त्‍   ज्‍   ल्‍   न्‍   प्‍   व्‍   च्‍   क्ष्‍   द्व   )     (WITH SHIFT)

तीसरी पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं ......
a    s    d    f    g    h    j    k    l    ;     ‘           (NORMAL)

जबकि उस तीसरी पंक्ति में हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
ं   े    क    ि‍   ह   ी     र ा     स   य    श्‍                (NORMAL)

अब यदि इसी तीसरी पंक्ति को शिफ्ट के साथ टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
 A    S    D    F    G    H    J    K    L    :    “      (WITH SHIFT)

पर उसी तीसरी पंक्ति को शिफ्ट के साथ हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
 ा  ै  क्‍    थ्‍    ळ    भ्‍    श्र   ज्ञ   स्‍    रू     ष्‍              (WITH SHIFT)

अंतिम पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं .....
z      x     c     v     b     n     m     ,     .     /    (NORMAL)

यदि कीबोर्ड की इस अंतिम पंक्ति की हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
्र  ग    ब    अ     इ    द      उ    ए    ण्‍    ध्‍          (NORMAL)

शिफ्ट के साथ कीबोर्ड की पहली पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं ......
 Z    X    C    V    B    N    M    <    >    ?     (WITH SHIFT)

पर उसी तीसरी पंक्ति को शिफ्ट के साथ हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
 र्    ग्‍     ब्‍     ट     ठ   छ     ड     ढ   झ    घ्‍         (WITH SHIFT)

हिन्‍दी में मुख्‍य शब्‍दों की टाइपिंग के लिए मैने ये कई शब्‍दों को याद रखा ....
मई , तर , जट , लवाई , न्‍यू , पाई , वओ ,चप , फक्‍यू , कडी , हजी ,रजे ,सएल , गक्‍स ,बसी , अटवी , इठबी ,दछन , डउम

इन शब्‍दों को याद कर लेने से शुरूआती दौर में बार बार कागज देखने से बचा जा सकता है। आधा या पूरा जो भी 'म' टाइप करना हो, मई मतलब 'E' बटन, इसी तरह पूरा या आधा 'त' के लिए 'R' बटन पूरा या आधा 'ज' के लिए 'T' बटन। इसी तरह 'अ' या 'ट' टाइप करना हो , तो 'V' तथा 'इ' और 'ठ' टाइप करना हो , तो 'B' बटन का सहारा लिया जा सकता है। ऐसा करने से बहुत आसानी हो जाती है। ा का बटन , ु और ू , ि‍ और ी  तथा े और ै के बटन की स्थिति इतनी अच्‍छी जगह पर है कि इन्‍हें याद रख लेना तो बहुत आसान है ही। अब इतने बटनों को जानने के बाद टाइपिंग के दौरान कभी कभार ही नए शब्‍द आएंगे , जिसके लिए आप उपरोक्‍त कागज की एक प्रिंट बनाकर रखें रहें। दो चार दिनों के प्रैक्टिस से सारे बटन का आइडिया होना ही है। देखा रेमिंगटन में टाइपिंग कितनी आसान हो गयी ।




क्‍या रेमिंगटन कीबोर्ड पर टाइपिंग करने में आपको परेशानी होती है ??

अपने कंप्‍यूटर में Baraha IMEया Hindi Indic IME.को लोड करने और हिन्‍दी सक्रियकरने के बाद मुख्‍य समस्‍या हिन्‍दी में टाइपकरने की आती है। इस समस्‍या का कोई समाधान न दिखने से अधिकांश लोगों को फोनेटिक कीबोर्ड का सहारा लेना पडता है , जिसके द्वारा रोमण में ही लिखने से उसे हिन्‍दी में कन्‍वर्ट किया जा सकता है। लेकिन आप यदि डायरेक्‍ट हिन्‍दी में ही लिखना चाहते हों , तो आपको रेमिंगटन कीबोर्ड पर टाइपिंग कर सकते हैं। अंग्रेजी कैरेक्‍टरों को देखकर हिन्‍दी में टाइपिंग करना बहुत ही आसान है। चाहे जो भी कारण हो , एक महीने के अंदर मैं जितनी आसानी से हिन्‍दी टाइपिंग करने लगी , शायद अंग्रेजी में संभव नहीं थी।

कीबोर्ड की पहली पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं ......
`  1  2  3  4  5  6  7  8  9  0  -  =    (NORMAL)

यदि कीबोर्ड की इस पहली पंक्ति की हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं
़  1  2  3  4  5  6  7  8  9  0  ;  ृ   (NORMAL)

 शिफ्ट के साथ कीबोर्ड की पहली पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं ......
~  !  @  #  $  %  ^  &  *  (  )  _  + (WITH SHIFT)

यदि शिफ्ट के साथ कीबोर्ड की इस पहली पंक्ति की हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
द्य  ।  /  :  *   -  ‘  ‘  द्ध  त्र  ऋ  .  ् (WITH SHIFT)

उसके नीचे यानि दूसरी पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप  किए जाते हैं ......
q  w  e  r  t  y  u  I  o  p  [  ]  \   (NORMAL)

जबकि दूसरी पंक्ति में हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
ु  ू   म  त  ज  ल  न  प  व  च  ख्‍  ,  (NORMAL)

पर यदि  उसी दूसरी लाइन की शिफ्ट के साथ टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं ....
Q  W  E  R  T  Y  U  I  O  P  {  }   (WITH SHIFT) 

पर उसी दूसरी लाइन की शिफ्ट के साथ हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
फ   ॅ   म्‍    त्‍   ज्‍   ल्‍   न्‍   प्‍   व्‍   च्‍   क्ष्‍   द्व   )     (WITH SHIFT)

तीसरी पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं ......
a    s    d    f    g    h    j    k    l    ;     ‘           (NORMAL)

जबकि उस तीसरी पंक्ति में हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
ं   े    क    ि‍   ह   ी     र ा     स   य    श्‍                (NORMAL)

अब यदि इसी तीसरी पंक्ति को शिफ्ट के साथ टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
 A    S    D    F    G    H    J    K    L    :    “      (WITH SHIFT)

पर उसी तीसरी पंक्ति को शिफ्ट के साथ हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
 ा  ै  क्‍    थ्‍    ळ    भ्‍    श्र   ज्ञ   स्‍    रू     ष्‍              (WITH SHIFT)

अंतिम पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं .....
z      x     c     v     b     n     m     ,     .     /    (NORMAL)

यदि कीबोर्ड की इस अंतिम पंक्ति की हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
्र  ग    ब    अ     इ    द      उ    ए    ण्‍    ध्‍          (NORMAL)

शिफ्ट के साथ कीबोर्ड की पहली पंक्ति में सामान्‍य तौर पर ये सारे टाइप होते हैं ......
 Z    X    C    V    B    N    M    <    >    ?     (WITH SHIFT)

पर उसी तीसरी पंक्ति को शिफ्ट के साथ हिन्‍दी में टाइपिंग की जाए तो ये सारे टाइप होते हैं .....
 र्    ग्‍     ब्‍     ट     ठ   छ     ड     ढ   झ    घ्‍         (WITH SHIFT)

हिन्‍दी में मुख्‍य शब्‍दों की टाइपिंग के लिए मैने ये कई शब्‍दों को याद रखा ....
मई , तर , जट , लवाई , न्‍यू , पाई , वओ ,चप , फक्‍यू , कडी , हजी ,रजे ,सएल , गक्‍स ,बसी , अटवी , इठबी ,दछन , डउम

इन शब्‍दों को याद कर लेने से शुरूआती दौर में बार बार कागज देखने से बचा जा सकता है। आधा या पूरा जो भी 'म' टाइप करना हो, मई मतलब 'E' बटन, इसी तरह पूरा या आधा 'त' के लिए 'R' बटन पूरा या आधा 'ज' के लिए 'T' बटन। इसी तरह 'अ' या 'ट' टाइप करना हो , तो 'V' तथा 'इ' और 'ठ' टाइप करना हो , तो 'B' बटन का सहारा लिया जा सकता है। ऐसा करने से बहुत आसानी हो जाती है। ा का बटन , ु और ू , ि‍ और ी  तथा े और ै के बटन की स्थिति इतनी अच्‍छी जगह पर है कि इन्‍हें याद रख लेना तो बहुत आसान है ही। अब इतने बटनों को जानने के बाद टाइपिंग के दौरान कभी कभार ही नए शब्‍द आएंगे , जिसके लिए आप उपरोक्‍त कागज की एक प्रिंट बनाकर रखें रहें। दो चार दिनों के प्रैक्टिस से सारे बटन का आइडिया होना ही है। देखा रेमिंगटन में टाइपिंग कितनी आसान हो गयी ।