बुधवार, 20 जनवरी 2010

आपका जन्‍म 1954 या 1955 में फरवरी से अगस्‍त के मध्‍य तो नहीं हुआ था ??

अपने पिछले आलेख कहीं आपका जन्‍म जनवरी - फरवरी 1981 में तो नहीं हुआ था ??'
में मैने लिखा है कि  किस तरह मई 1998 से मई 2000 के मध्‍य मेरे पास आनेवाले परेशान किशोरों की भीड ने मुझे उस बात की पुन: याद दिला दी, जो दस वर्ष पूर्व अपने अध्‍ययन के दौरान मेरे मन में आयी। उन परेशान नवयुवकों को अभी कोई दिशा भी नहीं मिल पायी थी कि 1954 और कुछ ही दिनों बाद 1955 में जन्‍म लेनेवाले बुजुर्गों की परेशानी का भी सिलसिला शुरू हो गया। इस बात की थोडी संभावना तो हमें थी , पर भिन्‍न उम्र अंतराल के मध्‍य दो वर्षों के अंदर इतने विकट रूप में आई ये समस्‍याएं हमारे अध्‍ययन और चिंतन के पश्‍चात एक नए सूत्र के प्रतिपादन के लिए काफी थी। इन दोनो स्थिति को मिलाकर समझने का प्रयास किया , तो फिर से कई सूत्र मिल गए। और इन सूत्रो के आधार पर आगे बहुत सारी संभावना का सही ढंग से अनुमान लगाने में मदद मिली।

आपको यह जानकर ताज्‍जुब होगा कि ठीक किशोरों की तर्ज पर ही इन प्रौढों में से 1954 में जन्‍म लेनेवाले प्रौढ भी जून 2000 से जून 2002 तक और 1955 में जन्‍म लेने वाले जून 2001 से जून 2003 तक ग्रहों के प्रभाव से बहुत अधिक परेशान रहें। सारी परिस्थितियां मनोनुकूल होते हुए भी किसी खास मुद्दे को लेकर इतना बडा संकट उपस्थित हो गया था कि वे दो वर्षो तक भयानक तनाव में रहे। खासकर जिनका जन्‍म इन वर्षों में फरवरी से अगस्‍त के मध्‍य हुआ था , वे अधिक बडे संकट से गुजर रहे थे। इसके बाद फिर उनके समक्ष उतने बडे रूप में परेशानी नहीं दिखी और जीवन काफी ठीक हो गया । कुछ लोगों की परिस्थितियां अवश्‍य वहीं से बिगडनी आरंभ हुई और वे अभी तक समझौता भी कर रहे हैं , पर इसके बावजूद आज की तुलना में वो दिन बहुत भयावह था , इससे इंकार नहीं कर सकते।

वास्‍तव में जिस पृथ्‍वी पर हम निवास कर रहे हैं , उसके सापेक्ष आसमान में सारे ग्रहों की भिन्‍न भिन्‍न स्थिति बन रही है। उसी में से कोई स्थिति किसी व्‍यक्ति के लिए शुभ प्रभाव डालने वाली और कोई स्थिति किसी व्‍यक्ति के लिए अशुभ प्रभाव डालने वाली होती है। जैसे ही आसमान के ग्रहों का आपके जीवन पर शुभ प्रभाव शुरू हो जाता है , आपके सामने मनोनुकूल घटनाएं घटने लगती है , इसके विपरीत जैसे ही आसमान में ग्रहों का आपके जीवन पर विपरीत प्रभाव आरंभ होता है , विपरीत परिस्थितियों से जूझने को आप मजबूर होते हैं। कभी कभी यह प्रभाव बिल्‍कुल मामूली अंतर वाला होता है , इसलिए इसे हम नहीं समझ पाते , पर कभी कभी आसमान में खास ग्रहों की स्थिति किसी खास समयांतराल में जन्‍म लेनेवालों के लिए बडा संकट ले आती है , और ताज्‍जुब की बात तो यह है कि इसे पहचानने के लिए आपको जन्‍मकुंडली देखने तक की आवश्‍यकता नहीं पडती। हमारे लिए तो ऐसा अनुमान लगाना और भी आसान होता है।





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